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लोकेशन सतना शहर आवारा सांडों के तांडव से मची अफरा तफरी, कई गाड़ियां टूटी, दुकानों के गिरे शटर सतना शहर के बिहारी चौक प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक सांड ने दूसरे को उठाकर पास की दुकान के फुटपाथ पर पटक दिया। इस मंजर को देखकर आसपास के दुकानदारों ने तुरंत अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए। सांडों की लड़ाई में कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम की लापरवाही के कारण शहर के व्यस्त चौराहों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है, जिससे आए दिन ऐसी दुर्घटनाएं होती रहती है।
रोहित कुमार पाठक
लोकेशन सतना शहर आवारा सांडों के तांडव से मची अफरा तफरी, कई गाड़ियां टूटी, दुकानों के गिरे शटर सतना शहर के बिहारी चौक प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक सांड ने दूसरे को उठाकर पास की दुकान के फुटपाथ पर पटक दिया। इस मंजर को देखकर आसपास के दुकानदारों ने तुरंत अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए। सांडों की लड़ाई में कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम की लापरवाही के कारण शहर के व्यस्त चौराहों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है, जिससे आए दिन ऐसी दुर्घटनाएं होती रहती है।
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- श्री गैवीनाथ धाम: प्राचीन विरासत और वर्तमान संकट सतना (बिरसिंहपुर) स्थित भगवान गैवीनाथ का मंदिर न केवल त्रेतायुगीन है, बल्कि इसका प्रमाण पद्म पुराण और राजपथ रामायण जैसे ग्रंथों में भी मिलता है। उज्जैन महाकाल के उपालिंग के रूप में पूज्य यह स्वयंभू शिवलिंग सदियों से सोहावल रियासत और गोस्वामी समाज के संरक्षण में रहा है। 1969 तक इसका संचालन 'देवपुर समिति' द्वारा सर्ववर्ग सहभागिता से कुशलतापूर्वक किया गया। विवाद का मुख्य कारण: 1962 के पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत 1969 में 'श्री गैवीनाथ सार्वजनिक न्यास' का गठन हुआ। आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर इस सार्वजनिक मंदिर की व्यवस्था एक विशेष वर्ग/समुदाय तक सीमित कर दी गई। इसमें न तो प्रशासन की भागीदारी है, न गोस्वामी समाज की और न ही आम जनता की। आज 06 फरवरी को मंदिर पुजारी द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण के बाद क्षेत्रीय जनता और श्रद्धालुओं की पुरजोर मांग है कि प्रशासन इस ऐतिहासिक धरोहर को अपने नियंत्रण में ले। एक निष्पक्ष सरकारी प्रबंधन से ही मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा, साधु-संतों की उचित व्यवस्था और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ मिल सकेंगी।1