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सरकार कुंभकरण की नींद में सोती है हम सभी सर्वेयर साथी की जान से सरकार को कोई भी फर्क नहीं पड़ता , देखो कितनी बड़ी चेतावनी होते हुए भी हम सभी सर्वेयर साथी कितनी मुश्किल में भी 100% सर्वे पूरा करते हैं ।
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सरकार कुंभकरण की नींद में सोती है हम सभी सर्वेयर साथी की जान से सरकार को कोई भी फर्क नहीं पड़ता , देखो कितनी बड़ी चेतावनी होते हुए भी हम सभी सर्वेयर साथी कितनी मुश्किल में भी 100% सर्वे पूरा करते हैं ।
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- सरकार कुंभकरण की नींद में सोती है हम सभी सर्वेयर साथी की जान से सरकार को कोई भी फर्क नहीं पड़ता , देखो कितनी बड़ी चेतावनी होते हुए भी हम सभी सर्वेयर साथी कितनी मुश्किल में भी 100% सर्वे पूरा करते हैं ।1
- आवारा सांडों के तांडव से मची अफरा तफरी, कई गाड़ियां टूटी, दुकानों के गिरे शटर सतना शहर के बिहारी चौक प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक सांड ने दूसरे को उठाकर पास की दुकान के फुटपाथ पर पटक दिया। इस मंजर को देखकर आसपास के दुकानदारों ने तुरंत अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए। सांडों की लड़ाई में कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम की लापरवाही के कारण शहर के व्यस्त चौराहों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है, जिससे आए दिन ऐसी दुर्घटनाएं होती रहती है।1
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- NH-30 जाम कर ग्रामीणों का प्रदर्शन, भीम आर्मी ने दी आंदोलन की चेतावनी मैहर। ग्राम पंचायत जरियारी के सैकड़ों ग्रामीणों ने आवागमन का आम रास्ता खुलवाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (NH-30) पर जाम लगाकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तत्काल रास्ता खोलने की मांग की। मौके पर मौजूद भीम आर्मी जिलाध्यक्ष एडवोकेट विक्रम सूर्यवंशी ने कहा कि यदि 21 फरवरी तक ग्रामीणों का आम रास्ता नहीं खोला गया, तो भीम आर्मी व्यापक पैमाने पर आंदोलन करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके बाद उत्पन्न होने वाली स्थिति की समस्त जवाबदारी मैहर प्रशासन की होगी।2
- श्री गैवीनाथ धाम: प्राचीन विरासत और वर्तमान संकट सतना (बिरसिंहपुर) स्थित भगवान गैवीनाथ का मंदिर न केवल त्रेतायुगीन है, बल्कि इसका प्रमाण पद्म पुराण और राजपथ रामायण जैसे ग्रंथों में भी मिलता है। उज्जैन महाकाल के उपालिंग के रूप में पूज्य यह स्वयंभू शिवलिंग सदियों से सोहावल रियासत और गोस्वामी समाज के संरक्षण में रहा है। 1969 तक इसका संचालन 'देवपुर समिति' द्वारा सर्ववर्ग सहभागिता से कुशलतापूर्वक किया गया। विवाद का मुख्य कारण: 1962 के पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत 1969 में 'श्री गैवीनाथ सार्वजनिक न्यास' का गठन हुआ। आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर इस सार्वजनिक मंदिर की व्यवस्था एक विशेष वर्ग/समुदाय तक सीमित कर दी गई। इसमें न तो प्रशासन की भागीदारी है, न गोस्वामी समाज की और न ही आम जनता की। आज 06 फरवरी को मंदिर पुजारी द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण के बाद क्षेत्रीय जनता और श्रद्धालुओं की पुरजोर मांग है कि प्रशासन इस ऐतिहासिक धरोहर को अपने नियंत्रण में ले। एक निष्पक्ष सरकारी प्रबंधन से ही मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा, साधु-संतों की उचित व्यवस्था और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ मिल सकेंगी।1