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चंबा: सनुह पंचायत विभाजन पर ग्रामीणों की नाराज़गी, डीसी चंबा से मिले फेरबदल प्रस्ताव को किया अस्वीकार। चंबा: सनुह पंचायत विभाजन पर ग्रामीणों की नाराज़गी, डीसी चंबा से मिले फेरबदल प्रस्ताव को किया अस्वीकार। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश जिला चंबा के उपमंडल सलूणी की ग्राम पंचायत सनुह के प्रस्तावित विभाजन को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। पंचायत विभाजन में किए गए फेरबदल से ग्रामीण संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन द्वारा सुझाए गए बदलाव उनकी भौगोलिक परिस्थितियों और सुविधाओं के अनुरूप नहीं हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि पंचायत का विभाजन प्राकृतिक सीमाओं और क्षेत्रीय जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को पंचायत सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान प्रस्ताव में कई गांवों को असुविधाजनक तरीके से जोड़ा जा रहा है, जिससे भविष्य में प्रशासनिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। ग्रामीणों ने डीसी चंबा से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज करवाईं और मांग की कि पंचायत विभाजन का निर्णय स्थानीय जनभावनाओं और भौगोलिक स्थिति के आधार पर ही लिया जाए। फिलहाल पंचायत विभाजन को लेकर ग्रामीणों में रोष बना हुआ है और लोग जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। बाइट स्थानीय निवासी ।

7 hrs ago
user_Mohd Ashiq
Mohd Ashiq
Journalist Chamba, Himachal Pradesh•
7 hrs ago

चंबा: सनुह पंचायत विभाजन पर ग्रामीणों की नाराज़गी, डीसी चंबा से मिले फेरबदल प्रस्ताव को किया अस्वीकार। चंबा: सनुह पंचायत विभाजन पर ग्रामीणों की नाराज़गी, डीसी चंबा से मिले फेरबदल प्रस्ताव को किया अस्वीकार। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश जिला चंबा के उपमंडल सलूणी की ग्राम पंचायत सनुह के प्रस्तावित विभाजन को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। पंचायत विभाजन में किए गए फेरबदल से ग्रामीण संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन द्वारा सुझाए गए बदलाव उनकी भौगोलिक परिस्थितियों और सुविधाओं के अनुरूप नहीं हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि पंचायत का विभाजन

प्राकृतिक सीमाओं और क्षेत्रीय जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को पंचायत सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान प्रस्ताव में कई गांवों को असुविधाजनक तरीके से जोड़ा जा रहा है, जिससे भविष्य में प्रशासनिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। ग्रामीणों ने डीसी चंबा से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज करवाईं और मांग की कि पंचायत विभाजन का निर्णय स्थानीय जनभावनाओं और भौगोलिक स्थिति के आधार पर ही लिया जाए। फिलहाल पंचायत विभाजन को लेकर ग्रामीणों में रोष बना हुआ है और लोग जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। बाइट स्थानीय निवासी ।

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  • राजा बली की पूजा से हुआ शुभारंभ, जनजातीय क्षेत्र में एक ही तिथि पर सामूहिक आयोजन; बेटियों के सम्मान और सांस्कृतिक एकता का अनूठा पर्व जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में पंगवाल समुदाय का पारंपरिक जुकारू उत्सव हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ आरंभ हो गया है। 15 दिनों तक चलने वाला यह लोकपर्व माघ मास की पूर्णिमा के बाद आने वाली अमावस्या से शुरू होता है और आपसी मिलन, भाईचारे व सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष विशेष बात यह है कि पूरे पांगी में पर्व एक ही तिथि पर सामूहिक रूप से मनाया जा रहा है। गत वर्ष देवलुओं के तालमेल के अभाव में अलग-अलग तिथियों पर आयोजन हुआ था। राजा बली की पूजा से शुरुआत फाल्गुन अमावस्या की रात ‘सिल्ल’ के नाम से जानी जाती है। इस दिन पूरे पांगी में राजा बली की विधिवत पूजा कर पहला भोग अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने वामन अवतार में राजा बली को वरदान दिया था कि वे माघ और फाल्गुन मास की अमावस्या को पृथ्वी पर आकर अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसी आस्था के साथ पांगी, लाहुल और कुल्लू क्षेत्रों में यह पर्व श्रद्धा से मनाया जाता है। बारह दिनों का विशेष महत्व जुकारू उत्सव लगभग एक माह तक विभिन्न रूपों में मनाया जाता है, किंतु प्रारंभिक 12 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। माघ पूर्णिमा – ‘खाहुल/चजगी’ अमावस्या – ‘सिल्ल’ (राजा बली को अर्पण) शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि – ‘पड़िद’ (पितरों को समर्पित) द्वितीय, तृतीय व पंचमी – धरती माता की पूजा षष्ठी से द्वादशी – देवी-देवताओं की पूजा व मेलों का आयोजन मान्यता है कि धरती माता की पूजा से खेतों में उत्तम फसल होती है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में एकता की मिसाल करीब 1601 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली पांगी घाटी के सुदूर गांव — संसारी नाला से हिलूटवान, चस्क भटोरी से सुराल भटोरी तक — एक साथ इस पर्व को मनाते हैं। समुद्र तल से लगभग 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित चस्क भटोरी गांव में भी लोग पूरे उत्साह से भाग लेते हैं। जनश्रुतियों के अनुसार, सदियों पूर्व जब संचार साधन और पंचांग उपलब्ध नहीं थे, तब बुजुर्गों की सूझबूझ से पूरे क्षेत्र के लिए एक तिथि निर्धारित की गई थी, ताकि आपसी द्वेष समाप्त कर मेल-मिलाप को बढ़ावा दिया जा सके। बेटियों को विशेष सम्मान पंगवाल संस्कृति में बेटियों को विशेष स्थान प्राप्त है। जुकारू के अवसर पर विवाहित बेटियां मायके आती हैं और उनका विशेष सत्कार किया जाता है। इस पर्व को सामाजिक समरसता और पारिवारिक स्नेह का उत्सव भी कहा जाता है। पारंपरिक व्यंजन और लोक-आस्था उत्सव से एक सप्ताह पूर्व घरों की लिपाई-पुताई की जाती है। अमावस्या से पूर्व भंगड़ी और गेहूं के आटे से प्रतीकात्मक बकरे बनाए जाते हैं। ‘सिल्ल’ की रात घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में राजा बली का भित्ति चित्र बनाकर घी, शहद, मंडे (स्थानीय डोसा), सतु, मांस, शराब और अन्य पकवान अर्पित किए जाते हैं। दीवारों पर चिड़िया, देवी-देवताओं और विभिन्न आकृतियों का चित्रण कर काले-सफेद रंगों से ‘चौक’ सजाया जाता है। जुकारू उत्सव की समस्त पांगी वासियों को शुभकामनाएं देता हूं यह पर्व पांगी की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। “जुकारू केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देने वाला लोकपर्व है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी पंगवाल समाज ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को जिस प्रकार सहेज कर रखा है, वह सराहनीय है। आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी जड़ों और लोक परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा इस पर्व से मिलती है।” पूर्व वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी जुकारू उत्सव पांगी की सांस्कृतिक आत्मा है। “यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और नई पीढ़ी को परंपराओं के संरक्षण का संदेश देता है। सरकार भी जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।” डॉ. जनक राज विधायक भरमौरी-पांगी जुकारू पर्व पर समस्त पांगी वासियों और प्रदेश वासियों शुभकामनायें जुकारू पर्व पंगवाल समुदाय का आपसी भाईचारे का पर्व है जिसके लिए लोग साल भर इंतजार करते है। पांगी के लोग जहां भी रहते है इस पर्व को धूमधाम के साथ मनाते हैं पंगवाल संस्कृति की अपनी अलग पहचान है जिसको बचाए रखना हम सब का कर्तव्य है। सतीश शर्मा सदस्य जनजातीय सलाहकार समिति पांगी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पंगवाल समाज ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखा है, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है। सतीश कुमार राणा अध्यक्ष भाजपा मंडल पांगी जुकारू को सामाजिक समरसता का पर्व है यह त्योहार आपसी भाईचारे और मेल-मिलाप को मजबूत करता है। हमारे पूर्वजों ने आपसी भाईचारे और पांगी की संस्कृति को जीवत रखने के लिए मेलो त्योहारों का आयोजन किया था जो आज तक जिन्दा है और आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेणा स्त्रोत भी है सुभाष चौहान पूर्व अध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस कमेटी पांगी जुकारू केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है। प्रशासन की ओर से क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं, पर्व के सफल आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। अमनदीप सिंह उपमंडल अधिकारी पांगी आधुनिकता के दौर में भी पंगवाल समाज अपनी परंपराओं को जीवित रखे हुए है, जो गर्व की बात है। जुकारू उत्सव एक बार फिर यह संदेश देता है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सामूहिकता, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता की भावना से समाज को सशक्त बनाया जा सकता है। इन्द्र प्रकाश शर्मा अध्यक्ष पांगी फर्स्ट पंगवाल फर्स्ट। आपसी भाई चारे के प्रतीक जुकारू पर्व पांगी वासी सदियों से मनाते आ रहे है यह एक ऐसा पर्व जिस दिन सभी लोग साल भर के आपसी भेदभाव को भुलाकर एक साथ मिल कर एक दूसरे के गले मिलते हैं तरह तरह के पकवान बांट के खुशी मनाते हैं देवराज राणा पूर्व महासचिव ब्लॉक कांग्रेस कमेटी पांगी। प्रस्तुति :- कृष्ण चंद राणा सम्पादक पांगी न्यूज़ टुडे।
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    राजा बली की पूजा से हुआ शुभारंभ, जनजातीय क्षेत्र में एक ही तिथि पर सामूहिक आयोजन; बेटियों के सम्मान और सांस्कृतिक एकता का अनूठा पर्व
जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में पंगवाल समुदाय का पारंपरिक जुकारू उत्सव हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ आरंभ हो गया है। 15 दिनों तक चलने वाला यह लोकपर्व माघ मास की पूर्णिमा के बाद आने वाली अमावस्या से शुरू होता है और आपसी मिलन, भाईचारे व सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष विशेष बात यह है कि पूरे पांगी में पर्व एक ही तिथि पर सामूहिक रूप से मनाया जा रहा है। गत वर्ष देवलुओं के तालमेल के अभाव में अलग-अलग तिथियों पर आयोजन हुआ था।
राजा बली की पूजा से शुरुआत
फाल्गुन अमावस्या की रात ‘सिल्ल’ के नाम से जानी जाती है। इस दिन पूरे पांगी में राजा बली की विधिवत पूजा कर पहला भोग अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने वामन अवतार में राजा बली को वरदान दिया था कि वे माघ और फाल्गुन मास की अमावस्या को पृथ्वी पर आकर अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसी आस्था के साथ पांगी, लाहुल और कुल्लू क्षेत्रों में यह पर्व श्रद्धा से मनाया जाता है।
बारह दिनों का विशेष महत्व
जुकारू उत्सव लगभग एक माह तक विभिन्न रूपों में मनाया जाता है, किंतु प्रारंभिक 12 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
माघ पूर्णिमा – ‘खाहुल/चजगी’
अमावस्या – ‘सिल्ल’ (राजा बली को अर्पण)
शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि – ‘पड़िद’ (पितरों को समर्पित)
द्वितीय, तृतीय व पंचमी – धरती माता की पूजा
षष्ठी से द्वादशी – देवी-देवताओं की पूजा व मेलों का आयोजन
मान्यता है कि धरती माता की पूजा से खेतों में उत्तम फसल होती है।
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में एकता की मिसाल
करीब 1601 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली पांगी घाटी के सुदूर गांव — संसारी नाला से हिलूटवान, चस्क भटोरी से सुराल भटोरी तक — एक साथ इस पर्व को मनाते हैं। समुद्र तल से लगभग 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित चस्क भटोरी गांव में भी लोग पूरे उत्साह से भाग लेते हैं। जनश्रुतियों के अनुसार, सदियों पूर्व जब संचार साधन और पंचांग उपलब्ध नहीं थे, तब बुजुर्गों की सूझबूझ से पूरे क्षेत्र के लिए एक तिथि निर्धारित की गई थी, ताकि आपसी द्वेष समाप्त कर मेल-मिलाप को बढ़ावा दिया जा सके।
बेटियों को विशेष सम्मान
पंगवाल संस्कृति में बेटियों को विशेष स्थान प्राप्त है। जुकारू के अवसर पर विवाहित बेटियां मायके आती हैं और उनका विशेष सत्कार किया जाता है। इस पर्व को सामाजिक समरसता और पारिवारिक स्नेह का उत्सव भी कहा जाता है।
पारंपरिक व्यंजन और लोक-आस्था
उत्सव से एक सप्ताह पूर्व घरों की लिपाई-पुताई की जाती है। अमावस्या से पूर्व भंगड़ी और गेहूं के आटे से प्रतीकात्मक बकरे बनाए जाते हैं। ‘सिल्ल’ की रात घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में राजा बली का भित्ति चित्र बनाकर घी, शहद, मंडे (स्थानीय डोसा), सतु, मांस, शराब और अन्य पकवान अर्पित किए जाते हैं।
दीवारों पर चिड़िया, देवी-देवताओं और विभिन्न आकृतियों का चित्रण कर काले-सफेद रंगों से ‘चौक’ सजाया जाता है।
जुकारू उत्सव की समस्त पांगी वासियों को शुभकामनाएं देता हूं यह पर्व पांगी की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। “जुकारू केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देने वाला लोकपर्व है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी पंगवाल समाज ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को जिस प्रकार सहेज कर रखा है, वह सराहनीय है। आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी जड़ों और लोक परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा इस पर्व से मिलती है।” पूर्व वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी 
जुकारू उत्सव पांगी की सांस्कृतिक आत्मा है। “यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और नई पीढ़ी को परंपराओं के संरक्षण का संदेश देता है। सरकार भी जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।”  डॉ. जनक राज विधायक भरमौरी-पांगी 
जुकारू पर्व पर समस्त पांगी वासियों और प्रदेश वासियों शुभकामनायें जुकारू पर्व पंगवाल समुदाय का आपसी भाईचारे का पर्व है जिसके लिए लोग साल भर इंतजार करते है। पांगी के लोग जहां भी रहते है इस पर्व को धूमधाम के साथ मनाते हैं पंगवाल संस्कृति की अपनी अलग पहचान है जिसको बचाए रखना हम सब का कर्तव्य है।
सतीश शर्मा सदस्य जनजातीय सलाहकार समिति पांगी 
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पंगवाल समाज ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखा है, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है। सतीश कुमार राणा अध्यक्ष भाजपा मंडल पांगी 
जुकारू को सामाजिक समरसता का पर्व है यह त्योहार आपसी भाईचारे और मेल-मिलाप को मजबूत करता है। हमारे पूर्वजों ने आपसी भाईचारे और पांगी की संस्कृति को जीवत रखने के लिए मेलो त्योहारों का आयोजन किया था जो आज तक जिन्दा है और आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेणा स्त्रोत भी है सुभाष चौहान पूर्व अध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस कमेटी पांगी 
जुकारू केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है। प्रशासन की ओर से क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं, पर्व के सफल आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। अमनदीप सिंह उपमंडल अधिकारी पांगी 
आधुनिकता के दौर में भी पंगवाल समाज अपनी परंपराओं को जीवित रखे हुए है, जो गर्व की बात है।
जुकारू उत्सव एक बार फिर यह संदेश देता है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सामूहिकता, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता की भावना से समाज को सशक्त बनाया जा सकता है। इन्द्र प्रकाश शर्मा अध्यक्ष पांगी फर्स्ट पंगवाल फर्स्ट।
आपसी भाई चारे के प्रतीक जुकारू पर्व पांगी वासी सदियों से मनाते आ रहे है यह एक ऐसा पर्व जिस दिन सभी लोग साल भर के आपसी भेदभाव को भुलाकर एक साथ मिल कर एक दूसरे के गले मिलते हैं तरह तरह के पकवान बांट के खुशी मनाते हैं देवराज राणा पूर्व महासचिव ब्लॉक कांग्रेस कमेटी पांगी।
प्रस्तुति :- कृष्ण चंद राणा सम्पादक पांगी न्यूज़ टुडे।
    user_PANGI NEWS TODAY
    PANGI NEWS TODAY
    Book Shop पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    20 hrs ago
  • सुजानपुर हिमाचल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि झूठ और भ्रम की राजनीति के सहारे प्रदेश नहीं चल सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बार-बार रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट (आर.डी.जी ) को लेकर केंद्र सरकार पर निराधार आरोप लगा रहे हैं, जबकि 15वें वित्त आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह ग्रांट चरणबद्ध तरीके से समाप्त की जाएगी और राज्यों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। आज यहां जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने कहा कि जिन 17 राज्यों को इस संबंध में पहले से सचेत किया गया था, उनमें से 11 राज्य भाजपा शासित हैं, लेकिन वहां की सरकारों ने केंद्र पर दोषारोपण करने के बजाय अपने संसाधन बढ़ाने और वित्तीय प्रबंधन सुधारने पर ध्यान दिया। हिमाचल प्रदेश को भी इसी दिशा में काम करना चाहिए था, लेकिन सुक्खू सरकार बहानेबाजी की राजनीति में उलझी हुई है। उन्होंने कहा कि पूर्व यूपीए सरकार के कार्यकाल में हिमाचल को लगभग 18,000 करोड़ रुपये की रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट मिली थी, जबकि पिछले 10 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने प्रदेश को लगभग 88,000 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा केंद्र पर लगातार आरोप लगाना पूरी तरह राजनीतिक और तथ्यों से परे है। राजेंद्र राणा ने कहा कि राज्य सरकार का दायित्व होता है कि वह प्रदेश की आय बढ़ाने के लिए ठोस नीतियां बनाए, नए राजस्व स्रोत विकसित करे और वित्तीय अनुशासन लागू करे। लेकिन वर्तमान सरकार का रवैया ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रशासन चलाने के बजाय छात्र संगठन की राजनीति की जा रही हो, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने विधानसभा बजट सत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यपाल द्वारा सरकार के अभिभाषण को पढ़ने से इनकार करना प्रदेश के इतिहास की अभूतपूर्व घटना है। यह सरकार की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि सरकार के दावों में दम होता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। राजेंद्र राणा ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में वित्तीय संसाधनों के दुरुपयोग ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को और कमजोर किया है। महंगाई, बेरोजगारी और विकास कार्यों की धीमी गति से जनता त्रस्त है और अब सरकार से जवाब मांग रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश हित में आवश्यक है कि सरकार आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति छोड़कर आत्मनिर्भरता, राजस्व वृद्धि और सुशासन पर ध्यान केंद्रित करे। हिमाचल प्रदेश की जनता एक जिम्मेदार, पारदर्शी और दूरदर्शी नेतृत्व की अपेक्षा रखती है
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    सुजानपुर
हिमाचल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि झूठ और भ्रम की राजनीति के सहारे प्रदेश नहीं चल सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बार-बार रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट (आर.डी.जी ) को लेकर केंद्र सरकार पर निराधार आरोप लगा रहे हैं, जबकि 15वें वित्त आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह ग्रांट चरणबद्ध तरीके से समाप्त की जाएगी और राज्यों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
आज यहां जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने कहा कि जिन 17 राज्यों को इस संबंध में पहले से सचेत किया गया था, उनमें से 11 राज्य भाजपा शासित हैं, लेकिन वहां की सरकारों ने केंद्र पर दोषारोपण करने के बजाय अपने संसाधन बढ़ाने और वित्तीय प्रबंधन सुधारने पर ध्यान दिया। हिमाचल प्रदेश को भी इसी दिशा में काम करना चाहिए था, लेकिन सुक्खू सरकार बहानेबाजी की राजनीति में उलझी हुई है।
उन्होंने कहा कि पूर्व यूपीए सरकार के कार्यकाल में हिमाचल को लगभग 18,000 करोड़ रुपये की रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट मिली थी, जबकि पिछले 10 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने प्रदेश को लगभग 88,000 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा केंद्र पर लगातार आरोप लगाना पूरी तरह राजनीतिक और तथ्यों से परे है।
राजेंद्र राणा ने कहा कि राज्य सरकार का दायित्व होता है कि वह प्रदेश की आय बढ़ाने के लिए ठोस नीतियां बनाए, नए राजस्व स्रोत विकसित करे और वित्तीय अनुशासन लागू करे। लेकिन वर्तमान सरकार का रवैया ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रशासन चलाने के बजाय छात्र संगठन की राजनीति की जा रही हो, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने विधानसभा बजट सत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यपाल द्वारा सरकार के अभिभाषण को पढ़ने से इनकार करना प्रदेश के इतिहास की अभूतपूर्व घटना है। यह सरकार की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि सरकार के दावों में दम होता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।
राजेंद्र राणा ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में वित्तीय संसाधनों के दुरुपयोग ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को और कमजोर किया है। महंगाई, बेरोजगारी और विकास कार्यों की धीमी गति से जनता त्रस्त है और अब सरकार से जवाब मांग रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश हित में आवश्यक है कि सरकार आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति छोड़कर आत्मनिर्भरता, राजस्व वृद्धि और सुशासन पर ध्यान केंद्रित करे। हिमाचल प्रदेश की जनता एक जिम्मेदार, पारदर्शी और दूरदर्शी नेतृत्व की अपेक्षा रखती है
    user_Ranjna Kumari
    Ranjna Kumari
    टीरा सुजानपुर, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    23 hrs ago
  • Post by Till The End News
    1
    Post by Till The End News
    user_Till The End News
    Till The End News
    Local News Reporter मजालता, उधमपुर, जम्मू और कश्मीर•
    10 hrs ago
  • उपमंडल बंगाणा क्षेत्र में बुधवार को कांग्रेस पूर्व सैनिक सेल कुटलैहड़ की विशेष बैठक शिवालिक होटल बंगाणा में संपन्न हुई जिसमें पूर्व सैनिक सेल के अध्यक्ष केवल कृष्ण शर्मा, रामकृष्ण शर्मा, पंडित राम लोक शर्मा, मेहर सिंह ,प्रकाश चंद, अमृतलाल शर्मा ,सुरजीत सिंह , मेहर सिंह ढटवालिया,अश्विनी कुमार शर्मा , कर्मचंद शर्मा , तिलक राज सेना मेडल अश्वनी कुमार ,विजय कुमार शर्मा,तिलक राज शर्मा, विजय कुमार और कैप्टन चमन लाल शर्मा आदि पूर्व सैनिक शामिल हुए। पूर्व सैनिक सेल के सभी सदस्यों ने अध्यक्ष केवल कृष्ण शर्मा की अध्यक्षता में  देसराज मोदगिल को राष्ट्रीय किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर शॉल टोपी और फूलों का गुलदस्ता देकर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि अभी कुछ ही दिन पहले राष्ट्रीय किसान संगठन के राष्ट्रीय अधिवेशन बंगलौर में देसराज मोदगिल राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं।  इसी के साथ पूर्व सैनिक सैल ने रामकृष्ण शर्मा  को भी राष्ट्रीय किसान संगठन के हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने पर सम्मानित किया। पूर्व सैनिक सेल कुटलैहड़ ने दोनों को हार्दिक बधाई दी है।  केवल कृष्ण शर्मा ने कहा की केंद्र की भाजपा सरकार ने हिमाचल की राजस्व घाटा अनुदान को बंद करके हिमाचल प्रदेश के साथ अन्याय किया है उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है की हिमाचल प्रदेश की आर डी जी ग्रांट को पुणे जारी किया जाए
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    उपमंडल बंगाणा क्षेत्र में बुधवार को कांग्रेस पूर्व सैनिक सेल कुटलैहड़ की विशेष बैठक शिवालिक होटल बंगाणा में संपन्न हुई जिसमें पूर्व सैनिक सेल के अध्यक्ष केवल कृष्ण शर्मा, रामकृष्ण शर्मा, पंडित राम लोक शर्मा, मेहर सिंह ,प्रकाश चंद, अमृतलाल शर्मा ,सुरजीत सिंह , मेहर सिंह ढटवालिया,अश्विनी कुमार शर्मा , कर्मचंद शर्मा , तिलक राज सेना मेडल अश्वनी कुमार ,विजय कुमार शर्मा,तिलक राज शर्मा, विजय कुमार और कैप्टन चमन लाल शर्मा आदि पूर्व सैनिक शामिल हुए। पूर्व सैनिक सेल के सभी सदस्यों ने अध्यक्ष केवल कृष्ण शर्मा की अध्यक्षता में  देसराज मोदगिल को राष्ट्रीय किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर शॉल टोपी और फूलों का गुलदस्ता देकर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि अभी कुछ ही दिन पहले राष्ट्रीय किसान संगठन के राष्ट्रीय अधिवेशन बंगलौर में देसराज मोदगिल राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। 
इसी के साथ पूर्व सैनिक सैल ने रामकृष्ण शर्मा  को भी राष्ट्रीय किसान संगठन के हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने पर सम्मानित किया। पूर्व सैनिक सेल कुटलैहड़ ने दोनों को हार्दिक बधाई दी है।  केवल कृष्ण शर्मा ने कहा की केंद्र की भाजपा सरकार ने हिमाचल की राजस्व घाटा अनुदान को बंद करके हिमाचल प्रदेश के साथ अन्याय किया है उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है की हिमाचल प्रदेश की आर डी जी ग्रांट को पुणे जारी किया जाए
    user_Abhishek Kumar Bhatia
    Abhishek Kumar Bhatia
    Local News Reporter बंगाना, ऊना, हिमाचल प्रदेश•
    1 hr ago
  • हमीरपुर हमीरपुर जिला के दुग्ध उत्पादक किसानों ने उपायुक्त हमीरपुर को ज्ञापन सौंप कर दुग्ध सबंधी आ रही समस्या से अवगत करवाया है। प्रतिनिधिमंडल के दौरान आए हुए दुग्ध उत्पादकों ने बताया कि दुग्ध उत्पादन के लिए विभाग के द्वारा दिलचस्पी नही दिखाई दे रही है जिसके चलते पिछले कुछ महीनों से दुग्ध उत्पादकों को समस्या हो रही है। इस अवसर पर किसान अनिल कुमार, रंजन सिंह के अलावा अन्य दूध उत्पादक मौजूद रहे। दूध उत्पादकों ने उपायुक्त हमीरपुर गर्धवा राठौर को ज्ञापन सौंपा और जल्द समस्या हल करने की गुहार लगाइ्र है। किसान अनिल कुमार  ने बताया कि पिछले लगभग छह माह से पशुपालन विभाग द्वारा अन्य विभागों के सहयोग से विशेषकर हिमफैड की मदद से सोसायटियों का गठन युद्धस्तर पर किया गया था और किसानों को आश्वस्त किया गया था कि घर.द्वार से दुग्ध एकत्रण की व्यवस्था की जाएगी तथा पशुपालकों को चारा और कम रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसलिए इन योजनाओं से प्रेरित होकर अनेक किसानों ने अतिरिक्त दुग्ध उत्पादन शुरू कर दिया।लेकिन अभी तक जिले में दुग्ध एकत्रण प्रणाली प्रभावी रूप से शुरू नहीं हो पाई है जिससे दुग्ध उत्पादक किसानों को आर्थिक नुकसान और विपणन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वही अन्य किसानों ने विभाग से मांग की है कि इस दिशा में शीघ्र और प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि पशुपालकों को राहत मिल सके।प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास जताया कि विभाग की उद्यमशीलता और सकारात्मक पहल पशुपालकों के लिए वरदान सिद्ध होगी। वहीं किसान रंजन ने बताया कि दुग्ध उत्पादकों के द्वारा दूध की पैदावार तेा की जा रही है लेकिन दूध बेचने के लिए अब समस्या बन रही है इसलिए जिला उपायुकत से आज मुलाकात की जा रही है। उन्हांेने बताया कि दूध उत्पादन में दो सौ लीटर की क्षमता पूरी की जा रही है लेकिन खपत के लिए कोई काम सरकार नही कर रही है जिसके लिए दुध उत्पादकों के द्वारा अब जिला प्रशासन से इस समरूस्या का हल करने के लिए गुहार लगाइ्र है
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    हमीरपुर
हमीरपुर जिला के दुग्ध उत्पादक किसानों ने उपायुक्त हमीरपुर को ज्ञापन सौंप कर दुग्ध सबंधी आ रही समस्या से अवगत करवाया है। प्रतिनिधिमंडल के दौरान आए हुए दुग्ध उत्पादकों ने बताया कि दुग्ध उत्पादन के लिए विभाग के द्वारा दिलचस्पी नही दिखाई दे रही है जिसके चलते पिछले कुछ महीनों से दुग्ध उत्पादकों को समस्या हो रही है। इस अवसर पर किसान अनिल कुमार, रंजन सिंह के अलावा अन्य दूध उत्पादक मौजूद रहे। दूध उत्पादकों ने उपायुक्त हमीरपुर गर्धवा राठौर को ज्ञापन सौंपा और जल्द समस्या हल करने की गुहार लगाइ्र है।
किसान अनिल कुमार  ने बताया कि पिछले लगभग छह माह से पशुपालन विभाग द्वारा अन्य विभागों के सहयोग से विशेषकर हिमफैड की मदद से सोसायटियों का गठन युद्धस्तर पर किया गया था और किसानों को आश्वस्त किया गया था कि घर.द्वार से दुग्ध एकत्रण की व्यवस्था की जाएगी तथा पशुपालकों को चारा और कम रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसलिए इन योजनाओं से प्रेरित होकर अनेक किसानों ने अतिरिक्त दुग्ध उत्पादन शुरू कर दिया।लेकिन अभी तक जिले में दुग्ध एकत्रण प्रणाली प्रभावी रूप से शुरू नहीं हो पाई है जिससे दुग्ध उत्पादक किसानों को आर्थिक नुकसान और विपणन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
वही अन्य किसानों ने विभाग से मांग की है कि इस दिशा में शीघ्र और प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि पशुपालकों को राहत मिल सके।प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास जताया कि विभाग की उद्यमशीलता और सकारात्मक पहल पशुपालकों के लिए वरदान सिद्ध होगी।
वहीं किसान रंजन ने बताया कि दुग्ध उत्पादकों के द्वारा दूध की पैदावार तेा की जा रही है लेकिन दूध बेचने के लिए अब समस्या बन रही है इसलिए जिला उपायुकत से आज मुलाकात की जा रही है। उन्हांेने बताया कि दूध उत्पादन में दो सौ लीटर की क्षमता पूरी की जा रही है लेकिन खपत के लिए कोई काम सरकार नही कर रही है जिसके लिए दुध उत्पादकों के द्वारा अब जिला प्रशासन से इस समरूस्या का हल करने के लिए गुहार लगाइ्र है
    user_खबरी लाल
    खबरी लाल
    रिपोर्टर हमीरपुर, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    22 hrs ago
  • डेरा प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों के कालू की बड़ दौरे से गूंजा परिसर, बड़ी संख्या में संगत ने किए दर्शन भरवाईं:18 कालू की बड़ में उस समय श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला जब डेरा प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों अपने दौरे पर पहुंचे। मंगलवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे बाबा जी हेलीकॉप्टर के माध्यम से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जहां पहले से ही बड़ी संख्या में संगत उनके स्वागत के लिए मौजूद थी।बाबा जी के आगमन के साथ ही पूरा परिसर जयकारों और श्रद्धा के नारों से गूंज उठा। दूर-दराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुंचे हुए थे। संगत ने बाबा जी के चरणों में नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर बाबा जी ने उपस्थित संगत को आशीर्वाद देते हुए सेवा, सच्चाई और मानवता के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय सेवादारों और प्रशासन की ओर से भी विशेष इंतजाम किए गए थे।बाबा जी के इस दौरे को लेकर क्षेत्र में दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
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    डेरा प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों के कालू की बड़ दौरे से गूंजा परिसर, बड़ी संख्या में संगत ने किए दर्शन
भरवाईं:18
कालू की बड़ में उस समय श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला जब डेरा प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों अपने दौरे पर पहुंचे। मंगलवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे बाबा जी हेलीकॉप्टर के माध्यम से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जहां पहले से ही बड़ी संख्या में संगत उनके स्वागत के लिए मौजूद थी।बाबा जी के आगमन के साथ ही पूरा परिसर जयकारों और श्रद्धा के नारों से गूंज उठा। दूर-दराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुंचे हुए थे। संगत ने बाबा जी के चरणों में नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर बाबा जी ने उपस्थित संगत को आशीर्वाद देते हुए सेवा, सच्चाई और मानवता के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय सेवादारों और प्रशासन की ओर से भी विशेष इंतजाम किए गए थे।बाबा जी के इस दौरे को लेकर क्षेत्र में दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
    user_Aman Sharma
    Aman Sharma
    ऊना, ऊना, हिमाचल प्रदेश•
    2 hrs ago
  • चंबा: उपमंडल स्तर पर पहुंचे सेब के पौधे, बर्फबारी के बाद बागवानों को मिली बड़ी राहत। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश जिले के विभिन्न उपमंडलों में सेब के पौधों की खेप पहुंचने से बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं। हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद जहां मौसम में ठंड बढ़ गई थी, वहीं अब सेब के पौधे समय पर उपलब्ध होने से बागवानी कार्यों को गति मिल गई है। जानकारी के अनुसार कृषि एवं बागवानी विभाग द्वारा उपमंडल स्तर पर सेब के उन्नत किस्मों के पौधे उपलब्ध करवाए गए हैं, जिससे स्थानीय बागवानों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पौधों के वितरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है ताकि अधिक से अधिक किसानों और बागवानों को इसका लाभ मिल सके। बागवानों का कहना है कि बर्फबारी के बाद भूमि में पर्याप्त नमी होने के कारण पौधारोपण के लिए यह समय बेहद उपयुक्त है। ऐसे में पौधों की समय पर आपूर्ति से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और भविष्य में आर्थिक रूप से भी लाभ होगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष बागवानी को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सेब सहित अन्य फलदार पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही बागवानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है ताकि पौधारोपण सही तरीके से किया जा सके। सेब के पौधे पहुंचने से क्षेत्र में बागवानी गतिविधियां तेज होंगी और बागवानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद जगी है। बाइट डॉ प्रमोद शाह उद्यान उपनिदेशक चंबा।
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    चंबा: उपमंडल स्तर पर पहुंचे सेब के पौधे, बर्फबारी के बाद बागवानों को मिली बड़ी राहत।
मोहम्मद आशिक
चंबा हिमाचल प्रदेश 
जिले के विभिन्न उपमंडलों में सेब के पौधों की खेप पहुंचने से बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं। हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद जहां मौसम में ठंड बढ़ गई थी, वहीं अब सेब के पौधे समय पर उपलब्ध होने से बागवानी कार्यों को गति मिल गई है।
जानकारी के अनुसार कृषि एवं बागवानी विभाग द्वारा उपमंडल स्तर पर सेब के उन्नत किस्मों के पौधे उपलब्ध करवाए गए हैं, जिससे स्थानीय बागवानों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पौधों के वितरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है ताकि अधिक से अधिक किसानों और बागवानों को इसका लाभ मिल सके।
बागवानों का कहना है कि बर्फबारी के बाद भूमि में पर्याप्त नमी होने के कारण पौधारोपण के लिए यह समय बेहद उपयुक्त है। ऐसे में पौधों की समय पर आपूर्ति से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और भविष्य में आर्थिक रूप से भी लाभ होगा।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष बागवानी को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सेब सहित अन्य फलदार पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही बागवानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है ताकि पौधारोपण सही तरीके से किया जा सके।
सेब के पौधे पहुंचने से क्षेत्र में बागवानी गतिविधियां तेज होंगी और बागवानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद जगी है।
बाइट डॉ प्रमोद शाह उद्यान उपनिदेशक चंबा।
    user_Mohd Ashiq
    Mohd Ashiq
    Journalist Chamba, Himachal Pradesh•
    6 hrs ago
  • सुजानपुर सुजानपुर होली मेला ग्राउंड की नीलामी के बाद अब भुगतान प्रक्रिया भी तेज़ी से आगे बढ़ रही है। नीलामी विजेता New Raju Tent House की ओर से होली मेला कमेटी के खाते में बोली की आधे से ज्यादा राशि जमा करवा दी गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार राजू टेंट हाउस द्वारा आरटीजीएस के माध्यम से करीब सवा करोड़ रुपये सीधे होली मेला कमेटी के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं। यह राशि कुल नीलामी बोली का बड़ा हिस्सा बताई जा रही है। कमेटी सूत्रों का कहना है कि तय शर्तों के अनुसार भुगतान प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जा रही है और शेष राशि भी निर्धारित समय के भीतर जमा करवाई जाएगी। गौरतलब है कि होली मेले की तैयारियां ज़ोरों पर हैं और नीलामी राशि जमा होने के बाद अब ग्राउंड व्यवस्था, स्टॉल प्लानिंग और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मेला कमेटी ने समय पर भुगतान के लिए राजू टेंट हाउस का आभार जताया है और कहा है कि इस सहयोग से होली मेले की तैयारियों को और गति मिलेगी।
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    सुजानपुर
सुजानपुर होली मेला ग्राउंड की नीलामी के बाद अब भुगतान प्रक्रिया भी तेज़ी से आगे बढ़ रही है। नीलामी विजेता New Raju Tent House की ओर से होली मेला कमेटी के खाते में बोली की आधे से ज्यादा राशि जमा करवा दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार राजू टेंट हाउस द्वारा आरटीजीएस के माध्यम से करीब सवा करोड़ रुपये सीधे होली मेला कमेटी के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं। यह राशि कुल नीलामी बोली का बड़ा हिस्सा बताई जा रही है।
कमेटी सूत्रों का कहना है कि तय शर्तों के अनुसार भुगतान प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जा रही है और शेष राशि भी निर्धारित समय के भीतर जमा करवाई जाएगी।
गौरतलब है कि होली मेले की तैयारियां ज़ोरों पर हैं और नीलामी राशि जमा होने के बाद अब ग्राउंड व्यवस्था, स्टॉल प्लानिंग और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
मेला कमेटी ने समय पर भुगतान के लिए राजू टेंट हाउस का आभार जताया है और कहा है कि इस सहयोग से होली मेले की तैयारियों को और गति मिलेगी।
    user_Ranjna Kumari
    Ranjna Kumari
    टीरा सुजानपुर, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    1 day ago
  • हमीरपुर हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड की मार्च माह में शुरू होने वाली परीक्षाओं और स्कूलों की वार्षिक परीक्षाओं में छात्रों के प्रदर्शन को बेहतरीन करने के उद्देश्य से हमीरपुर शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय के द्वारा सभी स्कूल प्रधानाचार्य को अपने स्कूलों में कमजोरी तथा मेधावी छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रिमेडियल क्लासेस चलाने के निर्देश जारी किए हैं शिक्षा विभाग के द्वारा प्रदेश में गुणात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने तथा सरकारी स्कूलों के छात्रों के बोर्ड में बेहतर प्रदर्शन के लगातार कार्य किया जा रहे हैं । हमीरपुर शिक्षा उपनिदेशक एलिमेंट्री कमल किशोर भारती ने बताया कि विभाग के द्वारा फरवरी माह में ही सभी स्कूल प्रधानाचार्य को इसकी गाइडलाइन भेज दी गई है ताकि परीक्षाओं से पहले छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाया जा सके और कमजोर छात्रों को परीक्षा के दौरान आने वाली दिक्कतों को कम किया जा सके। उन्होंने बताया कि स्कूल प्रमुखों को कहा गया है कि छात्रों के अभिभावकों को भी अवगत करवा कर बच्चों का रिकॉर्ड रखा जाए । उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह करने से जहाँ छात्रों के परीक्षा परिणाम बेहतर होंगे वही सरकारी स्कूल के छात्र बोर्ड मेरिट में बेहतर स्थान प्राप्त करेंगे ।
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    हमीरपुर
हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड की मार्च माह में शुरू होने वाली परीक्षाओं और स्कूलों की वार्षिक परीक्षाओं में छात्रों के प्रदर्शन को बेहतरीन करने के उद्देश्य से हमीरपुर शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय के द्वारा सभी स्कूल प्रधानाचार्य को अपने स्कूलों में कमजोरी तथा मेधावी छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रिमेडियल क्लासेस चलाने के निर्देश जारी किए हैं शिक्षा विभाग के द्वारा प्रदेश में गुणात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने तथा सरकारी स्कूलों के छात्रों के बोर्ड में बेहतर प्रदर्शन के लगातार कार्य किया जा रहे हैं ।
हमीरपुर शिक्षा उपनिदेशक एलिमेंट्री कमल किशोर भारती ने बताया कि विभाग के द्वारा फरवरी माह में ही सभी स्कूल प्रधानाचार्य को इसकी गाइडलाइन भेज दी गई है ताकि परीक्षाओं से पहले छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाया जा सके और कमजोर छात्रों को परीक्षा के दौरान आने वाली दिक्कतों को कम किया जा सके। उन्होंने बताया कि स्कूल प्रमुखों को कहा गया है कि छात्रों के अभिभावकों को भी अवगत करवा कर बच्चों का रिकॉर्ड रखा जाए । उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह करने से जहाँ छात्रों के परीक्षा परिणाम बेहतर होंगे वही सरकारी स्कूल के छात्र बोर्ड मेरिट में बेहतर स्थान प्राप्त करेंगे ।
    user_खबरी लाल
    खबरी लाल
    रिपोर्टर हमीरपुर, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    22 hrs ago
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