स्वामी बालकादेवाचार्य ने प्रारंभ की 41 दिवसीय पंच धूणी अग्नि तपस्या विश्व शांति एवं सदभावना के उद्देश्य से शुरू की इस कठिन तपस्या का 17 मई को होगा समापन सनातन संस्कृति में विश्व को एक ही परिवार मानकर 'वसुदेव कुटुंबकम् ' की परिकल्पना के साथ सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की बात कही जाती है। वेदों और उपनिषदों में कहा भी गया है :- सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् ॥ भारतीय सनातन संस्कृति के सच्चे संत और तपस्वी सदैव विश्व शांति के लिए यज्ञ, हवन, जप, तप इत्यादि करते हैं। खैरथल जिले के शीतलदास बेनामी आश्रम, रैणागिरी के पीठाधीश्वर स्वामी बालकादेवाचार्य जी महाराज ने भी विश्व शांति के लिए 41 दिवसीय, पंच धूणी अग्नि तपस्या का संकल्प लिया है। स्वामी बालकादेवाचार्य जी महाराज द्वारा रसगण स्थित आश्रम में सोमवार 6 अप्रैल से प्रारंभ की गई यह कठिन तपस्या 17 मई को पूर्ण होगी। महाराज जी ने PY Talks से बात करते हुए कहा कि संतों का जन्म ही विश्व कल्याण के लिए होता है। उन्होंने कहा कि इस तपस्या का उद्देश्य विश्व शांति और सामाजिक एवं आध्यात्मिक जागरूकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि सबको अपने भावनाएं एवं आचार विचार शुद्ध रखने चाहिए।
स्वामी बालकादेवाचार्य ने प्रारंभ की 41 दिवसीय पंच धूणी अग्नि तपस्या विश्व शांति एवं सदभावना के उद्देश्य से शुरू की इस कठिन तपस्या का 17 मई को होगा समापन सनातन संस्कृति में विश्व को एक ही परिवार मानकर 'वसुदेव कुटुंबकम् ' की परिकल्पना के साथ सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की बात कही जाती है। वेदों और उपनिषदों में कहा भी गया है :- सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् ॥ भारतीय सनातन संस्कृति के सच्चे संत और तपस्वी सदैव विश्व शांति के लिए यज्ञ, हवन, जप, तप इत्यादि करते हैं। खैरथल जिले के शीतलदास बेनामी आश्रम, रैणागिरी के पीठाधीश्वर स्वामी बालकादेवाचार्य जी महाराज ने भी विश्व शांति के लिए 41 दिवसीय, पंच धूणी अग्नि तपस्या का संकल्प लिया है। स्वामी बालकादेवाचार्य जी महाराज द्वारा रसगण स्थित आश्रम में सोमवार 6 अप्रैल से प्रारंभ की गई यह कठिन तपस्या 17 मई को पूर्ण होगी। महाराज जी ने PY Talks से बात करते हुए कहा कि संतों का जन्म ही विश्व कल्याण के लिए होता है। उन्होंने कहा कि इस तपस्या का उद्देश्य विश्व शांति और सामाजिक एवं आध्यात्मिक जागरूकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि सबको अपने भावनाएं एवं आचार विचार शुद्ध रखने चाहिए।
- भिवाड़ी में कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल! तिजारा के पूर्व विधायक संदीप यादव और उनके भाई मनोज यादव के साथ बीती रात एक सोसाइटी में नशेड़ियों द्वारा बदतमीजी और जान से मारने की धमकी का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद इलाके में भारी रोष है।1
- सनातन संस्कृति में विश्व को एक ही परिवार मानकर 'वसुदेव कुटुंबकम् ' की परिकल्पना के साथ सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की बात कही जाती है। वेदों और उपनिषदों में कहा भी गया है :- सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् ॥ भारतीय सनातन संस्कृति के सच्चे संत और तपस्वी सदैव विश्व शांति के लिए यज्ञ, हवन, जप, तप इत्यादि करते हैं। खैरथल जिले के शीतलदास बेनामी आश्रम, रैणागिरी के पीठाधीश्वर स्वामी बालकादेवाचार्य जी महाराज ने भी विश्व शांति के लिए 41 दिवसीय, पंच धूणी अग्नि तपस्या का संकल्प लिया है। स्वामी बालकादेवाचार्य जी महाराज द्वारा रसगण स्थित आश्रम में सोमवार 6 अप्रैल से प्रारंभ की गई यह कठिन तपस्या 17 मई को पूर्ण होगी। महाराज जी ने PY Talks से बात करते हुए कहा कि संतों का जन्म ही विश्व कल्याण के लिए होता है। उन्होंने कहा कि इस तपस्या का उद्देश्य विश्व शांति और सामाजिक एवं आध्यात्मिक जागरूकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि सबको अपने भावनाएं एवं आचार विचार शुद्ध रखने चाहिए।1
- Post by Voice of Labour1
- Post by R Balvinder Singh1
- राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश अलवर कार्यालय कांग्रेस कमेटी की संगठन बढाओ - लोकतंत्र बचाओ अभियान की बैठक जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष प्रकाश गगंवात जी की अध्यक्षता में रखी गई है जिसमें जिला प्रभारी फुलसिह ओला साहब, श्री टीकाराम जूली प्रतिपक्ष नेता राजस्थान,श्री मांगीलाल विधायक राजगढ़, आर्यन जुबेर रामगढ़ प्रत्याशी जिला अध्यक्ष जलाराम SC प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष मानवधिकार संगठन आल इंडिया कांग्रेस कमेटी विभाग जिला उपाध्यक्ष विकास बोहरा, जिला उपाध्यक्ष बनवारी लाल, जिला उपाध्यक्ष एससी प्रकोष्ठ धर्मवीर वर्मा जिसमें सभी रिंकु पार्षद खुदनपुरी वार्ड नंबर 42पूर्व पार्षद राहुल खान, ब्लॉक अध्यक्ष,पूर्व ब्लाक अध्यक्ष, जिला कमेटी मैं आने वाले मंडल क्षेत्र के सदस्य,ब्लाक कमेटी मैं आने वाले मंडल क्षेत्र के सदस्य, अग्रिम संगठनों के पदाधिकारी व सभी सम्मानित कांग्रेसजन सादर आमंत्रित है ।2
- Post by Kotputli-Behror Breaking Live1
- सीकरी तहसील क्षेत्र में आज लगातार लगभग 1 घंटे तक तेज बारिश हुई। बारिश के चलते कई जगहों पर जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे आमजन को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश से जहां गर्मी से राहत मिली, वहीं कुछ क्षेत्रों में सड़कों की हालत खराब होने के कारण दिक्कतें भी बढ़ गईं। प्रशासन से जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की जा रही है।1
- किशनगढ़ बास के घाट बंबोरा स्थित हनुमान जी के मंदिर में वार्षिक मेले का हुआ आयोजन किशनगढ़ बास स्थित घाटा बंबोरा का ऐतिहासिक हनुमान मंदिर लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आते हैं. अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित इस मंदिर के महाराज ने बताया कि यह मंदिर करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराना है. अब इसे मनोकामना सिद्ध हनुमान जी मंदिर के नाम से जाना जाता है. अलवर भिवाड़ी मेगा हाईवे पर अरावली पर्वतमालाओं के बीच स्थित किशनगढ़ बास के गांव घाटा बंबोरा का यह मंदिर भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है. श्रद्धालुओं का मानना है कि जो भी व्यक्ति यहां सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है. यहां हर वर्ष अप्रैल माह में विशाल मेला भी आयोजित होता है. जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं और हनुमान जी की पूजा अर्चना करते हैं. सेठ की मुराद हनुमान जी ने की पूरी मंदिर के पुजारी ने एक किस्सा बताया कि दिल्ली से एक सेठ मंदिर में आए थे. उनके तीन बेटे थे, जिनकी शादियां हो चुकी थीं, लेकिन किसी के भी संतान नहीं थी. वह व्यक्ति मंदिर के सामने रोने लगे. तब मंदिर के महाराज ने उन्हें सलाह दी कि हनुमान जी के सामने जाकर अपनी बात रखें. जब सेठ ने मंदिर में प्रवेश कर भगवान से प्रार्थना की तो कुछ समय बाद उनके तीनों बेटों के संतान हुई और उनका परिवार बढ़ गया. राजस्थान सहित कई राज्यों से आते हैं श्रद्धालु किशनगढ़ बास स्थित यह मंदिर अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित है. यह दिल्ली से करीब 128 किलोमीटर और खैरथल तिजारा जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर है. यहां अलवर जिले सहित राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और अन्य प्रदेशों से श्रद्धालु आते हैं. भक्त बजरंगबली के दर्शन कर अपनी कामनाएं व्यक्त करते हैं और मंदिर की शांति और आस्था के वातावरण में पूजा अर्चना करते हैं.1