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मां शारदा मंदिर बनने के बाद थमी बाढ़ की मार, सिख किसानों को मिली राहत पलिया (खीरी)। वर्ष 2012 में आई भीषण बाढ़ ने पलिया क्षेत्र के सिख फार्मरों की कमर तोड़ दी थी। ग्राम खैराना में शारदा नदी के उफान ने सैकड़ों एकड़ फसल को तबाह कर दिया था। हालात ऐसे हो गए थे कि किसानों को अपने घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ा था। हर साल आने वाली बाढ़ किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी थी। इस आपदा से परेशान सिख फार्मरों ने बाढ़ के प्रकोप से बचाव के लिए आस्था का सहारा लिया और ग्राम पंचायत निबुआबोझ के खैराना गांव में एक विशाल मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर में मां शारदा की स्थापना की गई। ग्रामीणों का मानना है कि मंदिर बनने के बाद से क्षेत्र में बाढ़ का संकट पूरी तरह थम गया है। निबुआबोझ की ग्राम प्रधान प्रभुजोत कौर और सन्दीप सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर निर्माण के बाद से न तो बाढ़ आई और न ही किसानों की फसलें बर्बाद हुईं। इससे क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत मिली है। मंदिर परिसर में धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां भी नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं। हर वर्ष 10 मई को यहां खेल प्रतियोगिता (टूर्नामेंट) का आयोजन होता है, जबकि 14 अगस्त को विशाल भंडारा आयोजित किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मंदिर के नाम कई एकड़ जमीन दर्ज है, जिस पर खेती भी की जाती है। इसके लिए मंदिर के नाम एक ट्रैक्टर भी खरीदा गया है। मंदिर में एक पुजारी नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं, जबकि सेवादार भी व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं। ग्रामीणों के लिए यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि आपदा से मुक्ति का प्रतीक बन चुका है।

2 hrs ago
user_निर्जेश मिश्र "पत्रकार"
निर्जेश मिश्र "पत्रकार"
लखीमपुर खीरी, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

मां शारदा मंदिर बनने के बाद थमी बाढ़ की मार, सिख किसानों को मिली राहत पलिया (खीरी)। वर्ष 2012 में आई भीषण बाढ़ ने पलिया क्षेत्र के सिख फार्मरों की कमर तोड़ दी थी। ग्राम खैराना में शारदा नदी के उफान ने सैकड़ों एकड़ फसल को तबाह कर दिया था। हालात ऐसे हो गए थे कि किसानों को अपने घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ा था। हर साल आने वाली बाढ़ किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी थी। इस आपदा से परेशान सिख फार्मरों ने बाढ़ के प्रकोप से बचाव के लिए आस्था का सहारा लिया और ग्राम पंचायत निबुआबोझ के खैराना गांव में एक विशाल मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर में मां शारदा की स्थापना की गई। ग्रामीणों का मानना है कि मंदिर बनने के बाद से क्षेत्र में बाढ़ का संकट पूरी तरह थम गया है। निबुआबोझ की ग्राम प्रधान प्रभुजोत कौर और सन्दीप सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर निर्माण के बाद से न तो बाढ़ आई और न ही किसानों की फसलें बर्बाद हुईं। इससे क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत मिली है। मंदिर परिसर में धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां भी नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं। हर वर्ष 10 मई को यहां खेल प्रतियोगिता (टूर्नामेंट) का आयोजन होता है, जबकि 14 अगस्त को विशाल भंडारा आयोजित किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मंदिर के नाम कई एकड़ जमीन दर्ज है, जिस पर खेती भी की जाती है। इसके लिए मंदिर के नाम एक ट्रैक्टर भी खरीदा गया है। मंदिर में एक पुजारी नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं, जबकि सेवादार भी व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं। ग्रामीणों के लिए यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि आपदा से मुक्ति का प्रतीक बन चुका है।

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  • पलिया (खीरी)। वर्ष 2012 में आई भीषण बाढ़ ने पलिया क्षेत्र के सिख फार्मरों की कमर तोड़ दी थी। ग्राम खैराना में शारदा नदी के उफान ने सैकड़ों एकड़ फसल को तबाह कर दिया था। हालात ऐसे हो गए थे कि किसानों को अपने घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ा था। हर साल आने वाली बाढ़ किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी थी। इस आपदा से परेशान सिख फार्मरों ने बाढ़ के प्रकोप से बचाव के लिए आस्था का सहारा लिया और ग्राम पंचायत निबुआबोझ के खैराना गांव में एक विशाल मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर में मां शारदा की स्थापना की गई। ग्रामीणों का मानना है कि मंदिर बनने के बाद से क्षेत्र में बाढ़ का संकट पूरी तरह थम गया है। निबुआबोझ की ग्राम प्रधान प्रभुजोत कौर और सन्दीप सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर निर्माण के बाद से न तो बाढ़ आई और न ही किसानों की फसलें बर्बाद हुईं। इससे क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत मिली है। मंदिर परिसर में धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां भी नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं। हर वर्ष 10 मई को यहां खेल प्रतियोगिता (टूर्नामेंट) का आयोजन होता है, जबकि 14 अगस्त को विशाल भंडारा आयोजित किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मंदिर के नाम कई एकड़ जमीन दर्ज है, जिस पर खेती भी की जाती है। इसके लिए मंदिर के नाम एक ट्रैक्टर भी खरीदा गया है। मंदिर में एक पुजारी नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं, जबकि सेवादार भी व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं। ग्रामीणों के लिए यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि आपदा से मुक्ति का प्रतीक बन चुका है।
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    पलिया (खीरी)। वर्ष 2012 में आई भीषण बाढ़ ने पलिया क्षेत्र के सिख फार्मरों की कमर तोड़ दी थी। ग्राम खैराना में शारदा नदी के उफान ने सैकड़ों एकड़ फसल को तबाह कर दिया था। हालात ऐसे हो गए थे कि किसानों को अपने घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ा था। हर साल आने वाली बाढ़ किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी थी।
इस आपदा से परेशान सिख फार्मरों ने बाढ़ के प्रकोप से बचाव के लिए आस्था का सहारा लिया और ग्राम पंचायत निबुआबोझ के खैराना गांव में एक विशाल मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर में मां शारदा की स्थापना की गई। ग्रामीणों का मानना है कि मंदिर बनने के बाद से क्षेत्र में बाढ़ का संकट पूरी तरह थम गया है। निबुआबोझ की ग्राम प्रधान प्रभुजोत कौर और सन्दीप सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर निर्माण के बाद से न तो बाढ़ आई और न ही किसानों की फसलें बर्बाद हुईं। इससे क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत मिली है।
मंदिर परिसर में धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां भी नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं। हर वर्ष 10 मई को यहां खेल प्रतियोगिता (टूर्नामेंट) का आयोजन होता है, जबकि 14 अगस्त को विशाल भंडारा आयोजित किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
मंदिर के नाम कई एकड़ जमीन दर्ज है, जिस पर खेती भी की जाती है। इसके लिए मंदिर के नाम एक ट्रैक्टर भी खरीदा गया है। मंदिर में एक पुजारी नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं, जबकि सेवादार भी व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं।
ग्रामीणों के लिए यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि आपदा से मुक्ति का प्रतीक बन चुका है।
    user_निर्जेश मिश्र "पत्रकार"
    निर्जेश मिश्र "पत्रकार"
    लखीमपुर खीरी, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • लखीमपुर। लखीमपुर की पुण्यभूमि ने एक बार फिर उस अद्भुत क्षण को साकार होते देखा, जब आस्था ने रंगों का रूप धारण कर लिया और भक्ति ने फूलों की वर्षा में अपनी मधुर अभिव्यक्ति दी। स्थानीय एलआरपी चौराहे के निकट स्थित इस्कॉन मंदिर परिसर में 25 मार्च को आयोजित “फूलों की होली - ब्रह्मोत्सव” ने श्रद्धा, संस्कृति और आध्यात्मिक उल्लास का ऐसा संगम रचा, जिसने उपस्थित हर हृदय को राधा-कृष्ण प्रेम में सराबोर कर दिया। सायं 4 बजे जैसे ही उत्सव का शुभारंभ हुआ, वातावरण “हरे कृष्ण” महामंत्र के दिव्य उद्घोषों से गूंज उठा।भक्ति की इस सुरसरिता में जब 501 किलोग्राम पुष्पों की वर्षा आरंभ हुई, तो हर ओर रंगों के स्थान पर फूलों की सुगंधित छटा बिखर गई, एक ऐसा दृश्य, जिसने समय को भी ठहरने पर विवश कर दिया। इस भव्य आयोजन की गरिमा उस समय और बढ़ गई, जब परम पूज्य संत भक्ति आश्रय वैष्णव स्वामी महाराज जी का प्रथम बार लखीमपुर आगमन हुआ। उनके सान्निध्य एवं प्रवचन ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया। साथ ही, प्रेम हरिनाम प्रभु (अध्यक्ष, इस्कॉन कानपुर) की पावन उपस्थिति ने भक्तों के उत्साह को और भी ऊँचाइयों तक पहुंचा दिया। कानपुर से पधारी कीर्तन मण्डली ने जब मृदंग और झांझ की थाप पर संकीर्तन प्रारंभ किया, तो भक्तजन स्वयं को थिरकने से रोक न सके। फूलों की वर्षा के बीच नृत्य करती श्रद्धा, झूमते भाव और भक्ति में डूबे चेहरे, यह सब मिलकर एक ऐसा अलौकिक दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे, जिसे शब्दों में बाँध पाना कठिन था। कार्यक्रम में बच्चों द्वारा प्रस्तुत मधुर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी सभी का मन मोह लिया। उनकी निष्कलुष अभिव्यक्तियों में भक्ति की सरलता और सच्चाई स्पष्ट झलक रही थी। इस अवसर पर मंदिर के नित्य सेवक भक्तों को विशेष उपहार भेंट कर उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई, यह भाव अपने आप में सेवा और समर्पण की अनूठी मिसाल बना। आयोजन के समापन पर भव्य भंडारे के माध्यम से सभी को प्रसाद वितरण किया गया, जहां हर श्रद्धालु ने प्रेमपूर्वक प्रसाद ग्रहण कर इस दिव्य अनुभव को अपने हृदय में संजो लिया। इस संपूर्ण आयोजन को भव्यता और दिव्यता प्रदान करने में संयोजक सुनील मुकुंद प्रभु की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही। उनके कुशल संयोजन और इस्कॉन परिवार के समर्पित प्रयासों ने इस ब्रह्मोत्सव को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भक्ति और प्रेम का जीवंत उत्सव बना दिया। यह “फूलों की होली” केवल रंगों का उत्सव नहीं थी, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला एक आध्यात्मिक सेतु थी, एक ऐसा अनुभव, जिसने लखीमपुर की धरा को भक्ति के सुगंधित पुष्पों से सदा के लिए महका दिया। उक्त जानकारी नूतन मिश्रा, मीडिया प्रभारी एवं स्पर्श सिन्हा सह मीडिया प्रभारी द्वारा दी गई।
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    लखीमपुर। लखीमपुर की पुण्यभूमि ने एक बार फिर उस अद्भुत क्षण को साकार होते देखा, जब आस्था ने रंगों का रूप धारण कर लिया और भक्ति ने फूलों की वर्षा में अपनी मधुर अभिव्यक्ति दी। स्थानीय एलआरपी चौराहे के निकट स्थित इस्कॉन मंदिर परिसर में 25 मार्च को आयोजित “फूलों की होली - ब्रह्मोत्सव” ने श्रद्धा, संस्कृति और आध्यात्मिक उल्लास का ऐसा संगम रचा, जिसने उपस्थित हर हृदय को राधा-कृष्ण प्रेम में सराबोर कर दिया।
सायं 4 बजे जैसे ही उत्सव का शुभारंभ हुआ, वातावरण “हरे कृष्ण” महामंत्र के दिव्य उद्घोषों से गूंज उठा।भक्ति की इस सुरसरिता में जब 501 किलोग्राम पुष्पों की वर्षा आरंभ हुई, तो हर ओर रंगों के स्थान पर फूलों की सुगंधित छटा बिखर गई, एक ऐसा दृश्य, जिसने समय को भी ठहरने पर विवश कर दिया। इस भव्य आयोजन की गरिमा उस समय और बढ़ गई, जब परम पूज्य संत भक्ति आश्रय वैष्णव स्वामी महाराज जी का प्रथम बार लखीमपुर आगमन हुआ। उनके सान्निध्य एवं प्रवचन ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया। साथ ही, प्रेम हरिनाम प्रभु (अध्यक्ष, इस्कॉन कानपुर) की पावन उपस्थिति ने भक्तों के उत्साह को और भी ऊँचाइयों तक पहुंचा दिया। कानपुर से पधारी कीर्तन मण्डली ने जब मृदंग और झांझ की थाप पर संकीर्तन प्रारंभ किया, तो भक्तजन स्वयं को थिरकने से रोक न सके। फूलों की वर्षा के बीच नृत्य करती श्रद्धा, झूमते भाव और भक्ति में डूबे चेहरे, यह सब मिलकर एक ऐसा अलौकिक दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे, जिसे शब्दों में बाँध पाना कठिन था। कार्यक्रम में बच्चों द्वारा प्रस्तुत मधुर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी सभी का मन मोह लिया। उनकी निष्कलुष अभिव्यक्तियों में भक्ति की सरलता और सच्चाई स्पष्ट झलक रही थी। इस अवसर पर मंदिर के नित्य सेवक भक्तों को विशेष उपहार भेंट कर उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई, यह भाव अपने आप में सेवा और समर्पण की अनूठी मिसाल बना। आयोजन के समापन पर भव्य भंडारे के माध्यम से सभी को प्रसाद वितरण किया गया, जहां हर श्रद्धालु ने प्रेमपूर्वक प्रसाद ग्रहण कर इस दिव्य अनुभव को अपने हृदय में संजो लिया। इस संपूर्ण आयोजन को भव्यता और दिव्यता प्रदान करने में संयोजक सुनील मुकुंद प्रभु की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही। उनके कुशल संयोजन और इस्कॉन परिवार के समर्पित प्रयासों ने इस ब्रह्मोत्सव को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भक्ति और प्रेम का जीवंत उत्सव बना दिया। यह “फूलों की होली” केवल रंगों का उत्सव नहीं थी, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला एक आध्यात्मिक सेतु थी, एक ऐसा अनुभव, जिसने लखीमपुर की धरा को भक्ति के सुगंधित पुष्पों से सदा के लिए महका दिया।
उक्त जानकारी नूतन मिश्रा, मीडिया प्रभारी एवं स्पर्श सिन्हा सह मीडिया प्रभारी द्वारा दी गई।
    user_Dileep Tripathi
    Dileep Tripathi
    Farmer लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • अंकित संवाद-शाहिद लखाही ASTv24 digital सिंगाही खीरी। थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक स्थानीय व्यक्ति ने थाने में तैनात दरोगा मोहित पर ₹6000 रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने घटनाक्रम को बताकर बनवाया वीडियो। पीड़ित ने बताया कि, 8 मार्च को उसके खेत में कुछ दबंग प्रवृत्ति के लोग बकरियां चरा रहे थे। जब उसका नाबालिग बेटा बकरियों को भगाने गया, तभी एक बकरी खेत के पास लगे तार में फंसकर मर गई। आरोप है कि इस बात को लेकर दबंगों ने बच्चे को बेरहमी से मारा, जिससे उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पड़ गए। घटना के बाद पीड़ित ने 8 मार्च को थाने में तहरीर दी। तहरीर आधार पर 9 मार्च को दर्ज मुकदमे में पुलिस ने पीड़ित के नाबालिग बेटे और आरोपियों—दोनों पर समान धाराएं लगा दीं। इससे पीड़ित ने न्याय न मिलने की बात कही।जिसपर घटना समय मौजूदा थाना प्रभारी ने मामले की विवेचना दरोगा मोहित को दी, मोहित दरोगा पीड़ित के घर पहुंचे, जहां उन्होंने उसे डराया-धमकाया और धाराएं हटाने के नाम पर ₹6000 ले लिए। जिसका वीडियो पीड़ित ने स्वतंत्रता पूर्वक बनवाकर कबूला। पीड़ित ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर उच्च अधिकारियों को ट्वीट के माध्यम से अवगत कराया। ट्वीट के बाद गुस्साए दरोगा मोहित फिर से पीड़ित के घर पहुंचे और उसपर वर्दी की धौंस दिखाते हुए दबाव बनाने लगे कि लिखित में दो की हमने कोई पैसा नहीं लिया। पीड़ित दरोगा के दबाव के कारण परेशान होकर पीड़ित घर से कहीं निकल गया रात भर घर नही आया।मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और लोग निष्पक्ष जांच व कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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    अंकित संवाद-शाहिद लखाही ASTv24 digital 
सिंगाही खीरी। थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक स्थानीय व्यक्ति ने थाने में तैनात दरोगा मोहित पर ₹6000 रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने घटनाक्रम को बताकर बनवाया वीडियो।
पीड़ित ने बताया कि, 8 मार्च को उसके खेत में कुछ दबंग प्रवृत्ति के लोग बकरियां चरा रहे थे। जब उसका नाबालिग बेटा बकरियों को भगाने गया, तभी एक बकरी खेत के पास लगे तार में फंसकर मर गई। आरोप है कि इस बात को लेकर दबंगों ने बच्चे को बेरहमी से मारा, जिससे उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पड़ गए।
घटना के बाद पीड़ित ने 8 मार्च को थाने में तहरीर दी। तहरीर आधार पर 9 मार्च को दर्ज मुकदमे में पुलिस ने पीड़ित के नाबालिग बेटे और आरोपियों—दोनों पर समान धाराएं लगा दीं। इससे पीड़ित ने न्याय न मिलने की बात कही।जिसपर घटना समय मौजूदा थाना प्रभारी ने  मामले की विवेचना दरोगा मोहित को दी, मोहित दरोगा पीड़ित के घर पहुंचे, जहां उन्होंने उसे डराया-धमकाया और धाराएं हटाने के नाम पर ₹6000 ले लिए। जिसका वीडियो पीड़ित ने स्वतंत्रता पूर्वक बनवाकर कबूला।
पीड़ित ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर उच्च अधिकारियों को ट्वीट के माध्यम से अवगत कराया। ट्वीट के बाद गुस्साए दरोगा मोहित फिर से पीड़ित के घर पहुंचे और उसपर  वर्दी की धौंस दिखाते हुए दबाव बनाने लगे कि लिखित में दो की हमने कोई पैसा नहीं लिया। पीड़ित दरोगा के दबाव के कारण  परेशान होकर पीड़ित घर से कहीं निकल गया रात भर घर नही आया।मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और लोग निष्पक्ष जांच व कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
    user_Shahid lakhahi
    Shahid lakhahi
    Mechanic लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी जिले के थाना नीमगांव क्षेत्र के मलिकपुर गांव का गन्ना कोल्हू अब सिर्फ रस नहीं, बल्कि मानव ड्रामा का नया सेंटर बन चुका है। 11 मार्च को कुलदीप कुमार गौतम अपनी चप्पल फिसलने के कारण खौलते रस की कड़ाही में गिर गए और बुरी तरह झुलस गए। जैसे ही हादसा हुआ, कोल्हू मालिक साजिद खान तुरंत उनका इलाज कराते हुए दर-दर भटक कर परिजन की सहमति से उन्हें जिला अस्पताल और फिर लखनऊ के बर्न अस्पताल भेजा। 12 दिन तक इलाज चलता रहा, लेकिन दुर्भाग्यवश 23 मार्च को कुलदीप का निधन हो गया। लेकिन मौत के तुरंत बाद, सोशल मीडिया का जादू और परिवार की “कुशल कल्पना शक्ति” सक्रिय हो गई। वायरल वीडियो में खुद मृतक स्पष्ट रूप से बता रहे थे कि हादसा उनकी चप्पल फिसलने की वजह से हुआ। बावजूद इसके, परिजनों ने कोल्हू मालिक को मुख्य आरोपी बना दिया। सवाल उठता है — अगर मालिक ने उसे गिराया होता, तो 12 दिन तक कोई वीडियो या तहरीर क्यों नहीं? क्यों “साहसी परिवार” इंतजार करता रहा, और मौत के तुरंत बाद ही दृश्य कथानक तैयार कर लिया? वीडियो ने सच को इतनी साफ़ तरीके से पेश किया कि कोई “कानून और न्याय का क्लास” लेने बिना भी समझ सकता है कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था, न कि कोई अपराध। पर लोगों का नया नारा है — “मृत्यु का लाभ उठाओ, मालिक को फंसाओ”। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर याद दिलाया कि इंसानियत, सोशल मीडिया और कानून की लड़ाई में अक्सर सच सबसे कमजोर पड़ जाता है, और वीडियो ही अकेला न्यायधीश बनकर सामने खड़ा हो जाता है।
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    लखीमपुर खीरी जिले के थाना नीमगांव क्षेत्र के मलिकपुर गांव का गन्ना कोल्हू अब सिर्फ रस नहीं, बल्कि मानव ड्रामा का नया सेंटर बन चुका है। 11 मार्च को कुलदीप कुमार गौतम अपनी चप्पल फिसलने के कारण खौलते रस की कड़ाही में गिर गए और बुरी तरह झुलस गए। जैसे ही हादसा हुआ, कोल्हू मालिक साजिद खान तुरंत उनका इलाज कराते हुए दर-दर भटक कर परिजन की सहमति से उन्हें जिला अस्पताल और फिर लखनऊ के बर्न अस्पताल भेजा। 12 दिन तक इलाज चलता रहा, लेकिन दुर्भाग्यवश 23 मार्च को कुलदीप का निधन हो गया। लेकिन मौत के तुरंत बाद, सोशल मीडिया का जादू और परिवार की “कुशल कल्पना शक्ति” सक्रिय हो गई। वायरल वीडियो में खुद मृतक स्पष्ट रूप से बता रहे थे कि हादसा उनकी चप्पल फिसलने की वजह से हुआ। बावजूद इसके, परिजनों ने कोल्हू मालिक को मुख्य आरोपी बना दिया। सवाल उठता है — अगर मालिक ने उसे गिराया होता, तो 12 दिन तक कोई वीडियो या तहरीर क्यों नहीं? क्यों “साहसी परिवार” इंतजार करता रहा, और मौत के तुरंत बाद ही दृश्य कथानक तैयार कर लिया? वीडियो ने सच को इतनी साफ़ तरीके से पेश किया कि कोई “कानून और न्याय का क्लास” लेने बिना भी समझ सकता है कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था, न कि कोई अपराध। पर लोगों का नया नारा है — “मृत्यु का लाभ उठाओ, मालिक को फंसाओ”। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर याद दिलाया कि इंसानियत, सोशल मीडिया और कानून की लड़ाई में अक्सर सच सबसे कमजोर पड़ जाता है, और वीडियो ही अकेला न्यायधीश बनकर सामने खड़ा हो जाता है।
    user_खुर्शीद आलम
    खुर्शीद आलम
    Newspaper publisher लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • खीरी में इंसानियत जगी — बेबस बुजुर्ग महिला हसीना की मदद को आगे आए लोग उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद से एक दिल को छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक बेसहारा और लगभग दृष्टिहीन बुजुर्ग महिला, हसीना (उम्र करीब 60 वर्ष), मजबूरी और गरीबी के बीच किसी दूसरे के खाली प्लॉट पर झिल्ली तानकर जीवन बिताने को मजबूर थी। हालात इतने खराब थे कि उनके पास न रहने का ठिकाना था, न ही खाने-पीने की कोई स्थायी व्यवस्था। उनकी इस दर्दभरी जिंदगी को हमारे न्यूज़ चैनल न्यू ऐप ने आम जनता तक पहुंचाया। इस खबर को गंभीरता से लेते हुए पत्रकार शाहनवाज़ गौरी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर के माध्यम से जिला प्रशासन को अवगत कराया। खबर के प्रसारित होते ही इंसानियत जाग उठी और धीरे-धीरे लोग मदद के लिए आगे आने लगे। खीरी डॉट कॉम के हेड और नगर पंचायत खीरी के पूर्व चेयरमैन गुफरान अहमद अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बुजुर्ग महिला की मदद का जिम्मा उठाया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता लकी मिश्रा ने भी महिला की सहायता का आश्वासन दिया। अब राहत की बात यह है कि हसीना की मदद के लिए समाज के विभिन्न वर्गों से लोग आगे आ रहे हैं। यह तस्वीर बताती है कि अगर किसी की पीड़ा को सही मंच मिले, तो इंसानियत आज भी जिंदा है।
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    खीरी में इंसानियत जगी — बेबस बुजुर्ग महिला हसीना की मदद को आगे आए लोग
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद से एक दिल को छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक बेसहारा और लगभग दृष्टिहीन बुजुर्ग महिला, हसीना (उम्र करीब 60 वर्ष), मजबूरी और गरीबी के बीच किसी दूसरे के खाली प्लॉट पर झिल्ली तानकर जीवन बिताने को मजबूर थी।
हालात इतने खराब थे कि उनके पास न रहने का ठिकाना था, न ही खाने-पीने की कोई स्थायी व्यवस्था। उनकी इस दर्दभरी जिंदगी को हमारे न्यूज़ चैनल न्यू ऐप ने आम जनता तक पहुंचाया।
इस खबर को गंभीरता से लेते हुए पत्रकार शाहनवाज़ गौरी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर के माध्यम से जिला प्रशासन को अवगत कराया। खबर के प्रसारित होते ही इंसानियत जाग उठी और धीरे-धीरे लोग मदद के लिए आगे आने लगे।
खीरी डॉट कॉम के हेड और नगर पंचायत खीरी के पूर्व चेयरमैन गुफरान अहमद अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बुजुर्ग महिला की मदद का जिम्मा उठाया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता लकी मिश्रा ने भी महिला की सहायता का आश्वासन दिया।
अब राहत की बात यह है कि हसीना की मदद के लिए समाज के विभिन्न वर्गों से लोग आगे आ रहे हैं। यह तस्वीर बताती है कि अगर किसी की पीड़ा को सही मंच मिले, तो इंसानियत आज भी जिंदा है।
    user_Nawaz ahmad Rizvi
    Nawaz ahmad Rizvi
    लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • Post by खीरी न्यूज़ अपडेट
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    Post by खीरी न्यूज़ अपडेट
    user_खीरी न्यूज़ अपडेट
    खीरी न्यूज़ अपडेट
    रिपोर्टर लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी - पलिया निघासन और गोला क्षेत्र में बाघ और तेंदुए के लगातार हमलों से दहशत के साथ ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है, वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं एक दिन पहले खेतों में हमला करने वाले तेंदुए को ग्रामीणों ने साहस दिखाकर पकड़ लिया और बिना नुकसान पहुंचाए वन विभाग को सौंप दिया, इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा ग्रामीण पर मुकदमा दर्ज किए जाने की बात कहने से लोगों में नाराजगी है ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों ने अपने लोगों को इन हमलों में खोया है, वही इस दर्द को समझ सकते हैं,
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    लखीमपुर खीरी - पलिया निघासन और गोला क्षेत्र में बाघ और तेंदुए के लगातार हमलों से दहशत के साथ ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है, वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं
एक दिन पहले खेतों में हमला करने वाले तेंदुए को ग्रामीणों ने साहस दिखाकर पकड़ लिया और बिना नुकसान पहुंचाए वन विभाग को सौंप दिया, इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा ग्रामीण पर मुकदमा दर्ज किए जाने की बात कहने से लोगों में नाराजगी है
ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों ने अपने लोगों को इन हमलों में खोया है, वही इस दर्द को समझ सकते हैं,
    user_संदीप कुमार शर्मा
    संदीप कुमार शर्मा
    Photographer लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी. सिंगाही थाना क्षेत्र के सिधौना स्थित फुटहा फार्म में बुधवार शाम दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहां घर के भीतर घुसे तेंदुए ने सात साल की मासूम को परिजनों की आंखों के सामने उठाकर ले गया और कुछ ही दूरी पर उसे मौत के घाट उतार दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई है, वहीं परिजनों और ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश है।फुटहा फार्म निवासी जोगा सिंह की सात वर्षीय पुत्री सिमरन बुधवार शाम करीब सात बजे घर के भीतर थी। इसी दौरान अचानक एक तेंदुआ घर में घुस आया और परिजनों के सामने ही बच्ची को जबड़े में दबोचकर लेकर भाग निकला। घटना से घर में चीख-पुकार मच गई। परिजन और आसपास के लोग शोर मचाते हुए तेंदुए के पीछे दौड़े, लेकिन वह बच्ची को लेकर तेजी से खेतों की ओर निकल गया। करीब पांच सौ मीटर दूर गेहूं और मसूर के खेत में कुछ देर बाद बच्ची का क्षत-विक्षत शव मिला। यह दृश्य देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और इलाके में दहशत का माहौल बन गया।ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में पिछले कई दिनों से तेंदुए की सक्रियता बनी हुई है। इससे पहले भी वह दो पालतू कुत्तों और एक बछिया को अपना निवाला बना चुका है। इसके बावजूद वन विभाग ने ठोस कार्रवाई नहीं की। सूचना देने के बाद भी विभागीय टीम के देर से पहुंचने पर ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। ग्रामीणों ने पास के खेत में तेंदुए के छिपे होने की आशंका जताई है, जिसके चलते लोग भयभीत हैं और बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। खबर लिखे जाने तक सिंगाही थाने के दो कांस्टेबल मौके पर पहुंच चुके थे। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम राजीव निगम और सीओ शिवम कुमार मौके के लिए रवाना हो गए। वहीं बेलरायां रेंज के रेंजर भूपेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि क्षेत्र में तेंदुए की सक्रियता को देखते हुए पहले से ही दो स्थानों पर पिंजरे लगाए गए हैं और गश्ती टीम निगरानी कर रही है। उन्होंने ग्रामीणों से सतर्क रहने और बच्चों को अकेला न छोड़ने की अपील की है।
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    लखीमपुर खीरी. सिंगाही थाना क्षेत्र के सिधौना स्थित फुटहा फार्म में बुधवार शाम दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहां घर के भीतर घुसे तेंदुए ने सात साल की मासूम को परिजनों की आंखों के सामने उठाकर ले गया और कुछ ही दूरी पर उसे मौत के घाट उतार दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई है, वहीं परिजनों और ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश है।फुटहा फार्म निवासी जोगा सिंह की सात वर्षीय पुत्री सिमरन बुधवार शाम करीब सात बजे घर के भीतर थी। इसी दौरान अचानक एक तेंदुआ घर में घुस आया और परिजनों के सामने ही बच्ची को जबड़े में दबोचकर लेकर भाग निकला। घटना से घर में चीख-पुकार मच गई। परिजन और आसपास के लोग शोर मचाते हुए तेंदुए के पीछे दौड़े, लेकिन वह बच्ची को लेकर तेजी से खेतों की ओर निकल गया।
करीब पांच सौ मीटर दूर गेहूं और मसूर के खेत में कुछ देर बाद बच्ची का क्षत-विक्षत शव मिला। यह दृश्य देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और इलाके में दहशत का माहौल बन गया।ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में पिछले कई दिनों से तेंदुए की सक्रियता बनी हुई है। इससे पहले भी वह दो पालतू कुत्तों और एक बछिया को अपना निवाला बना चुका है। इसके बावजूद वन विभाग ने ठोस कार्रवाई नहीं की। सूचना देने के बाद भी विभागीय टीम के देर से पहुंचने पर ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई।
ग्रामीणों ने पास के खेत में तेंदुए के छिपे होने की आशंका जताई है, जिसके चलते लोग भयभीत हैं और बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। खबर लिखे जाने तक सिंगाही थाने के दो कांस्टेबल मौके पर पहुंच चुके थे।
घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम राजीव निगम और सीओ शिवम कुमार मौके के लिए रवाना हो गए। वहीं बेलरायां रेंज के रेंजर भूपेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि क्षेत्र में तेंदुए की सक्रियता को देखते हुए पहले से ही दो स्थानों पर पिंजरे लगाए गए हैं और गश्ती टीम निगरानी कर रही है। उन्होंने ग्रामीणों से सतर्क रहने और बच्चों को अकेला न छोड़ने की अपील की है।
    user_Shahid lakhahi
    Shahid lakhahi
    Mechanic लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    16 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी। कस्बा खीरी के मोहल्ला बुखारी टोला में बेवा बुजुर्ग हसीना बानो की दयनीय स्थिति सामने आने के बाद मदद का सिलसिला शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने के बाद खीरी नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष व वर्तमान समाजवादी पार्टी के जिला सचिव गुफरान अहमद ने आगे बढ़कर राशन सामग्री और नगद सहायता उपलब्ध कराई। मामला तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन ने भी संज्ञान लिया। जिला पूर्ति अधिकारी अंजनी सिंह द्वारा मौके पर राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई। साथ ही कस्बा खीरी निवासी लकी मिश्रा द्वारा आवश्यक दस्तावेज जुटवाए जा रहे हैं, ताकि नया राशन कार्ड जारी कराने की प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके। इस पहल से बुजुर्ग महिला को तत्काल राहत मिली है। स्थानीय लोगों ने इस मानवीय प्रयास की सराहना की है, वहीं अब उम्मीद जताई जा रही है कि आगे भी प्रशासन की ओर से स्थायी सहायता सुनिश्चित की जाएगी।
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    लखीमपुर खीरी। कस्बा खीरी के मोहल्ला बुखारी टोला में बेवा बुजुर्ग हसीना बानो की दयनीय स्थिति सामने आने के बाद मदद का सिलसिला शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने के बाद खीरी नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष व वर्तमान समाजवादी पार्टी के जिला सचिव गुफरान अहमद ने आगे बढ़कर राशन सामग्री और नगद सहायता उपलब्ध कराई।
मामला तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन ने भी संज्ञान लिया। जिला पूर्ति अधिकारी अंजनी सिंह द्वारा मौके पर राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई। साथ ही कस्बा खीरी निवासी लकी मिश्रा द्वारा आवश्यक दस्तावेज जुटवाए जा रहे हैं, ताकि नया राशन कार्ड जारी कराने की प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके।
इस पहल से बुजुर्ग महिला को तत्काल राहत मिली है। स्थानीय लोगों ने इस मानवीय प्रयास की सराहना की है, वहीं अब उम्मीद जताई जा रही है कि आगे भी प्रशासन की ओर से स्थायी सहायता सुनिश्चित की जाएगी।
    user_Shahnawaz Gauri
    Shahnawaz Gauri
    पत्रकार लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
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