गौ हद धाम में गौ माता की मौत पर फूटा गुस्सा जिंदा गाय की पुकार नहीं सुनी, मौत के बाद नगर पालिका में पहुंची ‘व्यवस्था’! गौ हद धाम में गौ माता की मौत पर फूटा गुस्सा जिंदा गाय की पुकार नहीं सुनी, मौत के बाद नगर पालिका में पहुंची ‘व्यवस्था’! गौ हद धाम। गौ हद धाम में एक बीमार गाय की मौत ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। गौ सेवकों का आरोप है कि पिछले दो-तीन दिनों से लगातार अधिकारियों और नगर पालिका को गाय की हालत की सूचना दी जा रही थी, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। बताया गया कि गाय गड्ढे में फंसी हुई थी और उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। जब सरकारी व्यवस्था से मदद नहीं मिली तो आखिरकार गौ सेवकों को स्वयं मौके पर उतरना पड़ा। उन्होंने अपने हाथों से गाय को गड्ढे से बाहर निकाला, उसकी सेवा की और आसपास की सफाई भी की। लेकिन व्यवस्था शायद तब भी ‘फाइल आने’ का इंतजार कर रही थी। गौ सेवकों के अनुसार, इसके बाद भी अगले दो दिनों तक गाय की स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया और अंततः गौ माता ने दम तोड़ दिया। बस फिर क्या था… जिस नगर पालिका तक जिंदा गाय की पीड़ा की आवाज नहीं पहुंची, वहां मृत गाय खुद पहुंच गई। गौ सेवक मृत गौ माता को लेकर नगर पालिका कार्यालय पहुंचे और सीएमओ कार्यालय में उसे रखकर प्रदर्शन किया। पूरे नगर पालिका परिसर में “गौ हद धाम जिंदाबाद, नगर पालिका मुर्दाबाद” के नारे गूंजते रहे। सबसे बड़ा सवाल यही है— अगर नगर पालिका को सूचना दी गई थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अगर सूचना नहीं मिली थी, तो शिकायत व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है? और अगर सूचना मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, तो जिम्मेदारी किसकी है? एक बेजुबान जान बचाने के लिए गौ सेवकों को गड्ढे में उतरना पड़े और उसकी मौत के बाद व्यवस्था को जगाने के लिए उसे नगर पालिका कार्यालय तक लाना पड़े—तो फिर गौ सेवा की सरकारी व्यवस्था आखिर किसके लिए है? व्यंग्य देखिए— गाय जिंदा थी तो मामला ‘देखते हैं’ पर अटका रहा, गाय मर गई तो मामला ‘जांच’ तक पहुंच गया। लेकिन सवाल यह है कि जांच से उस गौ माता की जिंदगी वापस आएगी क्या? यह घटना केवल एक गाय की मौत नहीं है। यह उस व्यवस्था के सामने खड़ा सवाल है, जो अक्सर मौत के बाद कागजों में ज्यादा सक्रिय और जिंदगी बचाने के समय जमीन पर कम दिखाई देती है। अब गौ सेवकों का सवाल सीधा है— “गौ माता की मौत का जिम्मेदार कौन?” और गौ हद धाम की जनता का सवाल इससे भी बड़ा होना चाहिए— “अगर एक बेजुबान की जान बचाने के लिए भी जनता को खुद व्यवस्था बनानी पड़े, तो नगर पालिका आखिर कर क्या रही है?” जवाब चाहिए। जिम्मेदारी चाहिए। और ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें शिकायत का जवाब गौ माता की मौत के बाद नहीं, उसकी जिंदगी रहते मिले।
गौ हद धाम में गौ माता की मौत पर फूटा गुस्सा जिंदा गाय की पुकार नहीं सुनी, मौत के बाद नगर पालिका में पहुंची ‘व्यवस्था’! गौ हद धाम में गौ माता की मौत पर फूटा गुस्सा जिंदा गाय की पुकार नहीं सुनी, मौत के बाद नगर पालिका में पहुंची ‘व्यवस्था’! गौ हद धाम। गौ हद धाम में एक बीमार गाय की मौत ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। गौ सेवकों का आरोप है कि पिछले दो-तीन दिनों से लगातार अधिकारियों और नगर पालिका को गाय की हालत की सूचना दी जा रही थी, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। बताया गया कि गाय गड्ढे में फंसी हुई थी और उसकी हालत लगातार
बिगड़ रही थी। जब सरकारी व्यवस्था से मदद नहीं मिली तो आखिरकार गौ सेवकों को स्वयं मौके पर उतरना पड़ा। उन्होंने अपने हाथों से गाय को गड्ढे से बाहर निकाला, उसकी सेवा की और आसपास की सफाई भी की। लेकिन व्यवस्था शायद तब भी ‘फाइल आने’ का इंतजार कर रही थी। गौ सेवकों के अनुसार, इसके बाद भी अगले दो दिनों तक गाय की स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया और अंततः गौ माता ने दम तोड़ दिया। बस फिर क्या था… जिस नगर पालिका तक जिंदा गाय की पीड़ा की आवाज नहीं पहुंची, वहां मृत गाय खुद पहुंच गई। गौ सेवक मृत गौ माता को लेकर नगर पालिका कार्यालय पहुंचे और सीएमओ कार्यालय में उसे रखकर
प्रदर्शन किया। पूरे नगर पालिका परिसर में “गौ हद धाम जिंदाबाद, नगर पालिका मुर्दाबाद” के नारे गूंजते रहे। सबसे बड़ा सवाल यही है— अगर नगर पालिका को सूचना दी गई थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अगर सूचना नहीं मिली थी, तो शिकायत व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है? और अगर सूचना मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, तो जिम्मेदारी किसकी है? एक बेजुबान जान बचाने के लिए गौ सेवकों को गड्ढे में उतरना पड़े और उसकी मौत के बाद व्यवस्था को जगाने के लिए उसे नगर पालिका कार्यालय तक लाना पड़े—तो फिर गौ सेवा की सरकारी व्यवस्था आखिर किसके लिए है? व्यंग्य देखिए— गाय जिंदा थी तो मामला ‘देखते हैं’ पर अटका रहा, गाय मर गई तो मामला ‘जांच’ तक पहुंच गया। लेकिन सवाल यह
है कि जांच से उस गौ माता की जिंदगी वापस आएगी क्या? यह घटना केवल एक गाय की मौत नहीं है। यह उस व्यवस्था के सामने खड़ा सवाल है, जो अक्सर मौत के बाद कागजों में ज्यादा सक्रिय और जिंदगी बचाने के समय जमीन पर कम दिखाई देती है। अब गौ सेवकों का सवाल सीधा है— “गौ माता की मौत का जिम्मेदार कौन?” और गौ हद धाम की जनता का सवाल इससे भी बड़ा होना चाहिए— “अगर एक बेजुबान की जान बचाने के लिए भी जनता को खुद व्यवस्था बनानी पड़े, तो नगर पालिका आखिर कर क्या रही है?” जवाब चाहिए। जिम्मेदारी चाहिए। और ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें शिकायत का जवाब गौ माता की मौत के बाद नहीं, उसकी जिंदगी रहते मिले।
- गौ हद धाम में गौ माता की मौत पर फूटा गुस्सा जिंदा गाय की पुकार नहीं सुनी, मौत के बाद नगर पालिका में पहुंची ‘व्यवस्था’! गौ हद धाम में गौ माता की मौत पर फूटा गुस्सा जिंदा गाय की पुकार नहीं सुनी, मौत के बाद नगर पालिका में पहुंची ‘व्यवस्था’! गौ हद धाम। गौ हद धाम में एक बीमार गाय की मौत ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। गौ सेवकों का आरोप है कि पिछले दो-तीन दिनों से लगातार अधिकारियों और नगर पालिका को गाय की हालत की सूचना दी जा रही थी, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। बताया गया कि गाय गड्ढे में फंसी हुई थी और उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। जब सरकारी व्यवस्था से मदद नहीं मिली तो आखिरकार गौ सेवकों को स्वयं मौके पर उतरना पड़ा। उन्होंने अपने हाथों से गाय को गड्ढे से बाहर निकाला, उसकी सेवा की और आसपास की सफाई भी की। लेकिन व्यवस्था शायद तब भी ‘फाइल आने’ का इंतजार कर रही थी। गौ सेवकों के अनुसार, इसके बाद भी अगले दो दिनों तक गाय की स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया और अंततः गौ माता ने दम तोड़ दिया। बस फिर क्या था… जिस नगर पालिका तक जिंदा गाय की पीड़ा की आवाज नहीं पहुंची, वहां मृत गाय खुद पहुंच गई। गौ सेवक मृत गौ माता को लेकर नगर पालिका कार्यालय पहुंचे और सीएमओ कार्यालय में उसे रखकर प्रदर्शन किया। पूरे नगर पालिका परिसर में “गौ हद धाम जिंदाबाद, नगर पालिका मुर्दाबाद” के नारे गूंजते रहे। सबसे बड़ा सवाल यही है— अगर नगर पालिका को सूचना दी गई थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अगर सूचना नहीं मिली थी, तो शिकायत व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है? और अगर सूचना मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, तो जिम्मेदारी किसकी है? एक बेजुबान जान बचाने के लिए गौ सेवकों को गड्ढे में उतरना पड़े और उसकी मौत के बाद व्यवस्था को जगाने के लिए उसे नगर पालिका कार्यालय तक लाना पड़े—तो फिर गौ सेवा की सरकारी व्यवस्था आखिर किसके लिए है? व्यंग्य देखिए— गाय जिंदा थी तो मामला ‘देखते हैं’ पर अटका रहा, गाय मर गई तो मामला ‘जांच’ तक पहुंच गया। लेकिन सवाल यह है कि जांच से उस गौ माता की जिंदगी वापस आएगी क्या? यह घटना केवल एक गाय की मौत नहीं है। यह उस व्यवस्था के सामने खड़ा सवाल है, जो अक्सर मौत के बाद कागजों में ज्यादा सक्रिय और जिंदगी बचाने के समय जमीन पर कम दिखाई देती है। अब गौ सेवकों का सवाल सीधा है— “गौ माता की मौत का जिम्मेदार कौन?” और गौ हद धाम की जनता का सवाल इससे भी बड़ा होना चाहिए— “अगर एक बेजुबान की जान बचाने के लिए भी जनता को खुद व्यवस्था बनानी पड़े, तो नगर पालिका आखिर कर क्या रही है?” जवाब चाहिए। जिम्मेदारी चाहिए। और ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें शिकायत का जवाब गौ माता की मौत के बाद नहीं, उसकी जिंदगी रहते मिले।4
- नदी में भैंस निकालने गया युवक तेज बहाव बहा,घंटों तलाशी के बाद नहीं मिला युवक का कोई सुराग एसडीआरएफ का रेस्क्यू जारी। भिंड जिले के पांडरी गांव में युवक कुंवारी नदी से भेंस निकालने के दौरान नदी के तेज बहाव में बह गया। प्रत्यक्षदर्शी लक्ष्मन ने जानकारी देते हुए बताया कि कंछेद उर्फ वऊआ पुत्र इंद्रजीत राजावत 35 ब्रहदबल सिंह सरपंच के भतीजे 17 सितंबर को करीब डेढ़ बजे कुंवारी नदी से भेंस को निकालने के लिए नदी में उतरे थे उसी दौरान नदी के तेज बहाव में बह गए, जिसके बाद लक्ष्मन ने उन्हें डूबता देखा परिजनों को सूचना दी परिजन मौके पर पहुंचे और सरपंच ने ऊमरी पुलिस को सूचना दी जिसके बाद ऊमरी थाना प्रभारी ब्रजेंद सेंगर ने एसडीआरएफ को सूचना दी, एसडीआरएफ टीम तत्काल मौके पर पहुंची और रेस्क्यू शुरू किया मगर देर शाम युवक नहीं मिला,अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू बंद करना पड़ा, जिसके बाद 18 सितंबर को रेस्क्यू टीम ने सुबह फिर रेस्क्यू ऑपरेशन चालू कर उत्तर प्रदेश के सिंदोस पुल तक देखा मगर 20 घंटे बीत जाने के बाद भी युवक का पता नहीं लगा, रेस्क्यू जारी है।2
- जालौन में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पर सवाललाखो की लागत. फिर भी अंधेरा जालौन। जालौन-उरई चौराहा से कोंच चौराहा तक सड़क किनारे लगी कई स्ट्रीट लाइटें पोल से पके आम की तरह गिरकर बेकार पड़ी हैं। वहीं दर्जनों खंभों पर लाइटें खराब होने से रात के समय सड़क पर अंधेरा छा जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रमुख मार्ग होने के बावजूद स्ट्रीट लाइट नहीं है । रात में अंधेरे के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि लाखों रुपये के बजट से लगी स्ट्रीट लाइटों की देखरेख की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? खराब पड़ी लाइटों कियो सही नहीं कराया जा रहा नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इन खराब लाइटों की जानकारी नहीं है, या जानबूझकर ध्यान नहीं दिया जा रहा शिकायत के बावजूद व्यवस्था दुरुस्त नहीं की जा रही? अब देखने वाली बात होगी कि नगर पालिका जालौन कब तक इस समस्या का संज्ञान लेकर खराब स्ट्रीट लाइटों और गिरे पोलों को दुरुस्त कराती है।1
- बुढ़वा मंगल पर क्षेत्र के सुप्रसिद्ध धारावाहिक धाम पर लगेगा भव्य मेला महंत रामदास महाराज ने की लोगों से अपील बुढ़वा मंगल पर क्षेत्र के सुप्रसिद्ध धारावाहिक धाम पर लगेगा भव्य मेला महंत रामदास महाराज ने की लोगों से अपील कहा वेखटक होकर आए प्रशासन की है पूरी व्यवस्था1
- कालीबाड़ी मंदिर में आज भागवत कथा का बहुत अच्छा काफी भक्तजन कथा को सुनने आ रहे हैं कालीबाड़ी मंदिर में कथा का आयोजन किया जा रहा है जिसमें कथा में काफी महिलाएं व पुरुष शामिल हुए कथा का आनंद लिया1
- . इटावा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री बृजेश कुमार श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण एवं क्षेत्राधिकारी आयुषी सिंह के नेतृत्व में जसवंतनगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई शराब तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा । पुलिस ने करीब 50 लाख रुपये की अवैध शराब से भरा ट्रक पकड़ा।1
- निजी भूमि पर अवैध रूप से जेसीबी चलाने का आरोप पीड़ित ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार बसरेहर, इटावा समाचार इटावा। तहसील सदर क्षेत्र के ग्राम बरालोकपुर निवासी पदम कुमार पुत्र कौशल किशोर ने निजी भूमि पर बिना पूर्व सूचना या नोटिस के जेसीबी चलाकर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने कांग्रेस जिला प्रतिनिधिमंडल के साथ जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल से मुलाकात कर मामले में न्याय की गुहार लगाई। डीएम के आदेश के बाद दोबारा निर्माण शुरू करने का आरोप पदम कुमार के अनुसार, बरालोकपुर में चंडी देवी मंदिर से मस्जिद तक सार्वजनिक गली एवं नाली निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। इसी निर्माण कार्य के दौरान उनकी निजी स्वामित्व वाली भूमि गाटा संख्या 3330 पर कथित रूप से अवैध तरीके से जेसीबी मशीन चला दी गई। पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने ग्राम प्रधान से निर्माण कार्य और जेसीबी चलाने का कारण पूछा, तो उन्हें कोई स्पष्ट एवं संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। उन्होंने बताया कि उक्त भूमि से संबंधित सिविल वाद मुकदमा संख्या 790/2024, मिथिलेश कुमारी बनाम कौशल किशोर, न्यायालय में लंबित है। पहले निर्माण रुकवाया गया, फिर शुरू करने का आरोप शिकायतकर्ता ने बताया कि इससे पूर्व 9 सितंबर 2026 को जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र पर कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य रोकने के आदेश दिए गए थे। आरोप है कि आदेश के पालन में पंचायत सचिव ने मौके पर जाकर काम रुकवा दिया था। पदम कुमार का कहना है कि इसके बावजूद अब बसरेहर ब्लॉक प्रशासन द्वारा दोबारा निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है। उन्होंने इसे अपनी निजी भूमि पर दोबारा हस्तक्षेप बताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। राजस्व टीम से पैमाइश कराने की मांग पीड़ित ने जिलाधिकारी से मामले का संज्ञान लेते हुए अपनी निजी भूमि पर किए जा रहे कथित अवैध हस्तक्षेप एवं निर्माण कार्य को तत्काल रुकवाने की मांग की। साथ ही हल्का लेखपाल एवं राजस्व टीम को मौके पर भेजकर भूमि की सही पैमाइश कराने तथा मामले का निष्पक्ष समाधान कराने की गुहार लगाई। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल रहा मौजूद जिलाधिकारी से मुलाकात के दौरान कांग्रेस जिला अध्यक्ष आशुतोष दीक्षित, शहर अध्यक्ष राशिद खान, कांग्रेस जिला महासचिव सतीश नागर, कांग्रेस जिला प्रवक्ता प्रेरणा जुबेरी, कांग्रेस नेता एडवोकेट पल्लब दुबे सहित अन्य लोग मौजूद रहे। नोट: भूमि विवाद और जेसीबी चलाने के आरोपों पर प्रशासन एवं संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। शिवा ठाकुर की खबर1
- भिंड में नबागत एसडीएम महेंद्र सौजन्य ने समाल मोर्चा की धमाकेदार कार्रवाई भिंड में नबागत एसडीएम महेंद्र सौजन्य ने समाल मोर्चा की धमाकेदार कार्रवाई अवैध रूप से संचालित हो रही शराब की दुकान पर कार्रवाई1