राज्य सरकार द्वारा ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से चिकारड़ा में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर अपने अपेक्षित परिणाम देने में विफल रहा। शिविर में विभिन्न विभागों की उपस्थिति और समस्याओं के निराकरण के दावों के बावजूद, ग्रामीणों द्वारा उठाए गए कई महत्वपूर्ण मुद्दे अनसुलझे ही रह गए। प्रमुख समस्याओं में वर्षों से लंबित नालियों की सफाई, सड़क निर्माण, गंदगी और चारागाह व सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण शामिल थे। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत द्वारा नालियों से अतिक्रमण हटाने और सफाई के दावे सहायक विकास अधिकारी नरेश ढाबरिया और ग्राम विकास अधिकारी मनोज मेघवाल के मौके पर निरीक्षण करने पर झूठे पाए गए, जिससे अधिकारियों ने वास्तविक स्थिति से भिन्न जानकारी देने को गंभीरता से लिया। शिविर में लगभग 35 से 40 आवेदन और प्रकरण पंजीकृत हुए, जिनमें से अधिकांश में केवल औपचारिक कार्रवाई ही हुई, जबकि कई मामले लंबित छोड़ दिए गए। पट्टों से संबंधित अधिकांश आवेदन भी लंबित रहे। सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि शिविर में कोई भी ऐसा वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था जो मौके पर ठोस निर्णय लेकर समस्याओं का समाधान कर सके; उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और विकास अधिकारी स्तर के अधिकारियों की अनुपस्थिति में नायब तहसीलदार भूपेंद्र वसी और सहायक विकास अधिकारी नरेश ढाबरिया ने व्यवस्थाओं और कार्यवाही की जिम्मेदारी संभाली। सड़क जैसी मूलभूत समस्या से जुड़े मामलों के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का कोई अधिकारी या प्रतिनिधि शिविर में उपस्थित नहीं था, जो ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना रहा, खासकर चिकारड़ा जैसे बड़े क्षेत्र में जहाँ सड़क, बिजली और पेयजल प्रमुख समस्याएँ हैं। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि जब ग्राम पंचायत आबादी क्षेत्र और चारागाह भूमि पर अतिक्रमण हटाने में प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाती, तो यह व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उनका कहना था कि जिन शिविरों में जिला कलक्टर स्वयं उपस्थित होती हैं, वहाँ अधिकांश वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहते हैं और समस्याओं का समाधान मौके पर ही होता है, जबकि अन्य शिविरों में कई विभागों के अधिकारी अपेक्षित गंभीरता और मुस्तैदी नहीं दिखाते, जिससे अनेक समस्याएँ लंबित रह जाती हैं। शिविर स्थल पर भीषण गर्मी के बावजूद पेयजल, कूलर और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने से ग्रामीण बेहाल रहे; प्रचार-प्रसार की कमी के कारण भी बड़ी संख्या में ग्रामीणों को जानकारी नहीं मिल पाई। इसके अतिरिक्त, बस स्टैंड का सार्वजनिक शौचालय और मूत्रालय वर्षों से बंद पड़े होने का मुद्दा भी उठाया गया, जबकि आयुर्वेद और एलोपैथिक विभाग के कार्मिकों ने स्वास्थ्य सेवाओं में सक्रियता दिखाते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
राज्य सरकार द्वारा ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से चिकारड़ा में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर अपने अपेक्षित परिणाम देने में विफल रहा। शिविर में विभिन्न विभागों की उपस्थिति और समस्याओं के निराकरण के दावों के बावजूद, ग्रामीणों द्वारा उठाए गए कई महत्वपूर्ण मुद्दे अनसुलझे ही रह गए। प्रमुख समस्याओं में वर्षों से लंबित नालियों की सफाई, सड़क निर्माण, गंदगी और चारागाह व सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण शामिल थे। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत द्वारा नालियों से अतिक्रमण हटाने और सफाई के दावे सहायक विकास अधिकारी नरेश ढाबरिया और ग्राम विकास अधिकारी मनोज मेघवाल के मौके पर निरीक्षण करने पर झूठे पाए गए, जिससे अधिकारियों ने वास्तविक स्थिति से भिन्न जानकारी देने को गंभीरता से लिया। शिविर में लगभग 35 से 40 आवेदन और प्रकरण पंजीकृत हुए, जिनमें से अधिकांश में केवल औपचारिक कार्रवाई
ही हुई, जबकि कई मामले लंबित छोड़ दिए गए। पट्टों से संबंधित अधिकांश आवेदन भी लंबित रहे। सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि शिविर में कोई भी ऐसा वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था जो मौके पर ठोस निर्णय लेकर समस्याओं का समाधान कर सके; उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और विकास अधिकारी स्तर के अधिकारियों की अनुपस्थिति में नायब तहसीलदार भूपेंद्र वसी और सहायक विकास अधिकारी नरेश ढाबरिया ने व्यवस्थाओं और कार्यवाही की जिम्मेदारी संभाली। सड़क जैसी मूलभूत समस्या से जुड़े मामलों के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का कोई अधिकारी या प्रतिनिधि शिविर में उपस्थित नहीं था, जो ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना रहा, खासकर चिकारड़ा जैसे बड़े क्षेत्र में जहाँ सड़क, बिजली और पेयजल प्रमुख समस्याएँ हैं। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि जब ग्राम पंचायत आबादी क्षेत्र और चारागाह भूमि पर अतिक्रमण हटाने में
प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाती, तो यह व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उनका कहना था कि जिन शिविरों में जिला कलक्टर स्वयं उपस्थित होती हैं, वहाँ अधिकांश वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहते हैं और समस्याओं का समाधान मौके पर ही होता है, जबकि अन्य शिविरों में कई विभागों के अधिकारी अपेक्षित गंभीरता और मुस्तैदी नहीं दिखाते, जिससे अनेक समस्याएँ लंबित रह जाती हैं। शिविर स्थल पर भीषण गर्मी के बावजूद पेयजल, कूलर और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने से ग्रामीण बेहाल रहे; प्रचार-प्रसार की कमी के कारण भी बड़ी संख्या में ग्रामीणों को जानकारी नहीं मिल पाई। इसके अतिरिक्त, बस स्टैंड का सार्वजनिक शौचालय और मूत्रालय वर्षों से बंद पड़े होने का मुद्दा भी उठाया गया, जबकि आयुर्वेद और एलोपैथिक विभाग के कार्मिकों ने स्वास्थ्य सेवाओं में सक्रियता दिखाते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
- राज्य सरकार द्वारा ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से चिकारड़ा में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर अपने अपेक्षित परिणाम देने में विफल रहा। शिविर में विभिन्न विभागों की उपस्थिति और समस्याओं के निराकरण के दावों के बावजूद, ग्रामीणों द्वारा उठाए गए कई महत्वपूर्ण मुद्दे अनसुलझे ही रह गए। प्रमुख समस्याओं में वर्षों से लंबित नालियों की सफाई, सड़क निर्माण, गंदगी और चारागाह व सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण शामिल थे। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत द्वारा नालियों से अतिक्रमण हटाने और सफाई के दावे सहायक विकास अधिकारी नरेश ढाबरिया और ग्राम विकास अधिकारी मनोज मेघवाल के मौके पर निरीक्षण करने पर झूठे पाए गए, जिससे अधिकारियों ने वास्तविक स्थिति से भिन्न जानकारी देने को गंभीरता से लिया। शिविर में लगभग 35 से 40 आवेदन और प्रकरण पंजीकृत हुए, जिनमें से अधिकांश में केवल औपचारिक कार्रवाई ही हुई, जबकि कई मामले लंबित छोड़ दिए गए। पट्टों से संबंधित अधिकांश आवेदन भी लंबित रहे। सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि शिविर में कोई भी ऐसा वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था जो मौके पर ठोस निर्णय लेकर समस्याओं का समाधान कर सके; उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और विकास अधिकारी स्तर के अधिकारियों की अनुपस्थिति में नायब तहसीलदार भूपेंद्र वसी और सहायक विकास अधिकारी नरेश ढाबरिया ने व्यवस्थाओं और कार्यवाही की जिम्मेदारी संभाली। सड़क जैसी मूलभूत समस्या से जुड़े मामलों के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का कोई अधिकारी या प्रतिनिधि शिविर में उपस्थित नहीं था, जो ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना रहा, खासकर चिकारड़ा जैसे बड़े क्षेत्र में जहाँ सड़क, बिजली और पेयजल प्रमुख समस्याएँ हैं। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि जब ग्राम पंचायत आबादी क्षेत्र और चारागाह भूमि पर अतिक्रमण हटाने में प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाती, तो यह व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उनका कहना था कि जिन शिविरों में जिला कलक्टर स्वयं उपस्थित होती हैं, वहाँ अधिकांश वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहते हैं और समस्याओं का समाधान मौके पर ही होता है, जबकि अन्य शिविरों में कई विभागों के अधिकारी अपेक्षित गंभीरता और मुस्तैदी नहीं दिखाते, जिससे अनेक समस्याएँ लंबित रह जाती हैं। शिविर स्थल पर भीषण गर्मी के बावजूद पेयजल, कूलर और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने से ग्रामीण बेहाल रहे; प्रचार-प्रसार की कमी के कारण भी बड़ी संख्या में ग्रामीणों को जानकारी नहीं मिल पाई। इसके अतिरिक्त, बस स्टैंड का सार्वजनिक शौचालय और मूत्रालय वर्षों से बंद पड़े होने का मुद्दा भी उठाया गया, जबकि आयुर्वेद और एलोपैथिक विभाग के कार्मिकों ने स्वास्थ्य सेवाओं में सक्रियता दिखाते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।3
- 🌹*लघु फिल्म - गौतमेश्वर महादेव दर्शन, अरनोद प्रतापगढ़ राजस्थान । ◆ सम्पादन - लक्ष्मी नारायण परमार चित्तौड़ ।।* 🚩🚩🙏🙏🚩🚩 🌹*लघु फिल्म - गौतमेश्वर महादेव दर्शन, अरनोद प्रतापगढ़ राजस्थान । ◆ सम्पादन - लक्ष्मी नारायण परमार चित्तौड़ ।।* 🚩🚩🙏🙏🚩🚩1
- छोटी सादड़ी के नवनिर्मित श्याम मंदिर में श्याम मित्र मंडल और क्षेत्रीय निवासियों द्वारा ग्यारस (एकादशी) का उत्सव हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस शुभ अवसर पर गोमा ना और अन्य गांवों से निशान यात्रा भी मंदिर पहुंचेगी। आयोजन के दौरान भजन संध्या का कार्यक्रम रखा जाएगा और प्रसादी का वितरण भी किया जाएगा।3
- धरियावद नगर के ब्रह्मपुरी मोहल्ले के एक साधारण राजपूत परिवार से आने वाले तनवीर राजपूत के अग्निवीर सेवा प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने पैतृक गांव धरियावद लौटने पर पूरे राजपूत समाज और क्षेत्र में खुशी का माहौल छा गया। उनका अग्निवीर सेवा में चयन हुआ था और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जब वे घर पहुंचे, तो नगरवासियों सहित राजपूत समाज और उनके घर परिवार वालों ने पुष्प मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान, नया बस स्टैंड से उनका स्वागत कर एक जुलूस निकाला गया, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए उनके घर तक पहुंचा। उनके मोहल्ले के निवासियों ने भी तनवीर का स्वागत किया, उन्हें शुभकामनाओं के साथ बधाइयां दीं तथा स्वाभिमान के साथ मिठाइयां बांटीं। इस पूरे पल को देखकर आज धरियावद क्षेत्र में खूब चर्चा रही और क्षेत्रवासियों सहित घर परिवार वालों व राजपूत समाज ने बड़ा ही गर्व महसूस किया।2
- मंदसौर में बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के जेसीबी मशीन चलाए जाने के मामले में गोरक्षा विभाग ने कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से, गोरक्षा विभाग ने मांग उठाई है कि पीड़ित परिवार को अपनी बात रखने और न्याय पाने का अवसर मिले।1
- चित्तौड़गढ़ में तेज आंधी-तूफान के बाद आखिरकार झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया है। इस बारिश ने खेतों को नई संजीवनी प्रदान की है, जिससे किसानों ने राहत की सांस ली है।1
- राष्ट्रीय अफीम किसान संघ के नेतृत्व में निकाली जा रही अफीम किसान जागरण रैली को उदयपुर जिले में किसानों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। यह रैली अफीम किसानों के अधिकारों, लंबित मांगों और समस्याओं के समाधान के लिए शुरू की गई है। 23 जून को डूंगला से शुरू हुई यह रैली बड़ीसादड़ी, कानोड़, भींडर और वल्लभनगर पहुंची, जहां किसानों ने जगह-जगह रैली का स्वागत किया और अफीम किसानों की मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए संबंधित उपखंड अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे। इस दौरान हजारों किसान तपती गर्मी के बावजूद अपने हक और अधिकारों की आवाज बुलंद करने के लिए एकत्र हुए। बड़ीसादड़ी में शंभूलाल मेनारिया, राजा चौधरी, रवि मेनारिया सहित सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। वहीं, कानोड़ में तहसील कार्यकारिणी का गठन किया गया और रामेश्वरलाल जाट को तहसील अध्यक्ष नियुक्त किया गया। रैली में जिला अध्यक्ष विजयलाल मेनारिया, तहसील अध्यक्ष भगतलाल व्यास, संरक्षक गणपत सिंह चुंडावत, रामेश्वर कुमावत, उदयलाल जाट, दुर्गाशंकर मेनारिया और जगदीश जटली सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। 24 जून को यह रैली मावली पहुंची, जहां क्षेत्रीय विधायक पुष्कर डांगी किसानों के समर्थन में उपखंड कार्यालय तक पहुंचे और रैली में शामिल हुए। इस अवसर पर राष्ट्रीय अफीम किसान संघ के अध्यक्ष दुर्गेश जोशी एवं जिला अध्यक्ष विजयलाल मेनारिया का किसानों द्वारा स्वागत किया गया। इसके बाद बाबूलाल गाडरी (सनवाड़), ओंकार जणवा, नारायण, गंगाराम, शंकर, जगदीश, देवलाल, मंगनीराम, भरत मेनारिया (सरपंच), सुरेश दाधीच, रामेश्वर खटीक, मधुलाल जाट, मांगीलाल गुर्जर, अंबालाल (सरपंच, पालना), मंगूसिंह (महुड़ा), शिवाजी डिंगराकिया, गोपाल डबोक सहित सैकड़ों किसानों ने मावली उपखंड कार्यालय पहुंचकर उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने सरकार के समक्ष अफीम किसानों की समस्याओं के समाधान और मांगों के निराकरण के लिए अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए। संघ के अध्यक्ष दुर्गेश जोशी ने बताया कि आगामी दिनों में भी यह जागरण रैली विभिन्न तहसीलों और उपखंड मुख्यालयों पर पहुंचेगी, ताकि प्रशासन के माध्यम से अफीम किसानों की आवाज सरकार तक पहुंचाई जा सके और उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं का शीघ्र समाधान हो सके।3
- आरजे27 उदयपुर के पास देबारी रोड पर एक बड़ा सड़क हादसा हुआ है।1