डिंडौरी जिले में किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए सही सलाह देने के उद्देश्य से स्थापित मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिले को वर्ष 2026-27 के लिए 7,514 मृदा नमूनों की जांच का लक्ष्य दिया गया था, जिसके विरुद्ध अब तक केवल 3,455 नमूनों की जांच कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा सके हैं। इस प्रकार जिले में अब तक लगभग 46 प्रतिशत लक्ष्य ही पूरा हो सका है। इस बीच, सूत्रों के दावे के अनुसार भारत सरकार की गाइडलाइन के विपरीत कुछ प्रयोगशालाओं में अपेक्षित तकनीकी योग्यता के बिना ही कर्मचारियों से मृदा परीक्षण कराया जा रहा है। सरकार की गाइडलाइन के तहत मिट्टी की जांच 12 निर्धारित पैरामीटरों पर प्रशिक्षित एवं तकनीकी रूप से योग्य कर्मियों द्वारा की जानी चाहिए, जिसके लिए सामान्यतः कृषि विषय में स्नातक (बी.एससी. एग्रीकल्चर) की योग्यता आवश्यक बताई जाती है। इसके अलावा, अधिकांश प्रयोगशालाओं में कर्मचारियों की जानकारी दर्शाने वाला कोई डिस्प्ले बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, जिससे वहां कार्यरत लैब टेक्नीशियन, सहायक अथवा अन्य कर्मचारियों के नाम, पद या योग्यता की कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इससे पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो मृदा स्वास्थ्य कार्ड की रिपोर्ट और उर्वरक संबंधी सलाह की गुणवत्ता प्रभावित होने से किसानों की लागत, उत्पादन और फसल पर सीधा असर पड़ेगा। इसके साथ ही, कई रिपोर्टों में डीएपी उर्वरक की अनुशंसा की जा रही है, लेकिन किसानों का कहना है कि जिले में डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता ही नहीं है, जिससे उनके सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं, किसानों को बुवाई पूरी होने के बाद मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिलने की समस्या भी सामने आई है, जिससे समय निकल जाने पर उन्हें वैज्ञानिक सलाह का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष श्री बिहारी लाल साहू ने कहा कि समय पर मृदा परीक्षण न होना विभाग की बड़ी लापरवाही है। इससे किसान वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों का उपयोग नहीं कर पाएंगे, जिससे पूरे कृषि सत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उधर, कृषि विभाग के अनुविभागीय अधिकारी ने इस संबंध में कहा है कि यह जानकारी उनके संज्ञान में लाई गई है और वे पूरे मामले की जानकारी प्राप्त कर अवगत कराएंगे। स्थानीय लोग अब प्रयोगशालाओं के नियमित निरीक्षण, गुणवत्ता जांच और कर्मचारियों की योग्यता के सत्यापन की मांग कर रहे हैं ताकि योजना का उद्देश्य पूरा हो सके।
डिंडौरी जिले में किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए सही सलाह देने के उद्देश्य से स्थापित मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिले को वर्ष 2026-27 के लिए 7,514 मृदा नमूनों की जांच का लक्ष्य दिया गया था, जिसके विरुद्ध अब तक केवल 3,455 नमूनों की जांच कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा सके हैं। इस प्रकार जिले में अब तक लगभग 46 प्रतिशत लक्ष्य ही पूरा हो सका है। इस बीच, सूत्रों के दावे के अनुसार भारत सरकार की गाइडलाइन के विपरीत कुछ प्रयोगशालाओं में अपेक्षित तकनीकी योग्यता के बिना ही कर्मचारियों से मृदा परीक्षण कराया जा रहा है। सरकार की गाइडलाइन के तहत मिट्टी की जांच 12 निर्धारित पैरामीटरों पर प्रशिक्षित एवं तकनीकी रूप से योग्य कर्मियों द्वारा की जानी चाहिए, जिसके लिए सामान्यतः कृषि विषय में स्नातक (बी.एससी. एग्रीकल्चर)
की योग्यता आवश्यक बताई जाती है। इसके अलावा, अधिकांश प्रयोगशालाओं में कर्मचारियों की जानकारी दर्शाने वाला कोई डिस्प्ले बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, जिससे वहां कार्यरत लैब टेक्नीशियन, सहायक अथवा अन्य कर्मचारियों के नाम, पद या योग्यता की कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इससे पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो मृदा स्वास्थ्य कार्ड की रिपोर्ट और उर्वरक संबंधी सलाह की गुणवत्ता प्रभावित होने से किसानों की लागत, उत्पादन और फसल पर सीधा असर पड़ेगा। इसके साथ ही, कई रिपोर्टों में डीएपी उर्वरक की अनुशंसा की जा रही है, लेकिन किसानों का कहना है कि जिले में डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता ही नहीं है, जिससे उनके सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं, किसानों को बुवाई पूरी होने के बाद मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिलने की समस्या
भी सामने आई है, जिससे समय निकल जाने पर उन्हें वैज्ञानिक सलाह का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष श्री बिहारी लाल साहू ने कहा कि समय पर मृदा परीक्षण न होना विभाग की बड़ी लापरवाही है। इससे किसान वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों का उपयोग नहीं कर पाएंगे, जिससे पूरे कृषि सत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उधर, कृषि विभाग के अनुविभागीय अधिकारी ने इस संबंध में कहा है कि यह जानकारी उनके संज्ञान में लाई गई है और वे पूरे मामले की जानकारी प्राप्त कर अवगत कराएंगे। स्थानीय लोग अब प्रयोगशालाओं के नियमित निरीक्षण, गुणवत्ता जांच और कर्मचारियों की योग्यता के सत्यापन की मांग कर रहे हैं ताकि योजना का उद्देश्य पूरा हो सके।
- डिंडौरी जिले में किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए सही सलाह देने के उद्देश्य से स्थापित मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिले को वर्ष 2026-27 के लिए 7,514 मृदा नमूनों की जांच का लक्ष्य दिया गया था, जिसके विरुद्ध अब तक केवल 3,455 नमूनों की जांच कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा सके हैं। इस प्रकार जिले में अब तक लगभग 46 प्रतिशत लक्ष्य ही पूरा हो सका है। इस बीच, सूत्रों के दावे के अनुसार भारत सरकार की गाइडलाइन के विपरीत कुछ प्रयोगशालाओं में अपेक्षित तकनीकी योग्यता के बिना ही कर्मचारियों से मृदा परीक्षण कराया जा रहा है। सरकार की गाइडलाइन के तहत मिट्टी की जांच 12 निर्धारित पैरामीटरों पर प्रशिक्षित एवं तकनीकी रूप से योग्य कर्मियों द्वारा की जानी चाहिए, जिसके लिए सामान्यतः कृषि विषय में स्नातक (बी.एससी. एग्रीकल्चर) की योग्यता आवश्यक बताई जाती है। इसके अलावा, अधिकांश प्रयोगशालाओं में कर्मचारियों की जानकारी दर्शाने वाला कोई डिस्प्ले बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, जिससे वहां कार्यरत लैब टेक्नीशियन, सहायक अथवा अन्य कर्मचारियों के नाम, पद या योग्यता की कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इससे पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो मृदा स्वास्थ्य कार्ड की रिपोर्ट और उर्वरक संबंधी सलाह की गुणवत्ता प्रभावित होने से किसानों की लागत, उत्पादन और फसल पर सीधा असर पड़ेगा। इसके साथ ही, कई रिपोर्टों में डीएपी उर्वरक की अनुशंसा की जा रही है, लेकिन किसानों का कहना है कि जिले में डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता ही नहीं है, जिससे उनके सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं, किसानों को बुवाई पूरी होने के बाद मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिलने की समस्या भी सामने आई है, जिससे समय निकल जाने पर उन्हें वैज्ञानिक सलाह का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष श्री बिहारी लाल साहू ने कहा कि समय पर मृदा परीक्षण न होना विभाग की बड़ी लापरवाही है। इससे किसान वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों का उपयोग नहीं कर पाएंगे, जिससे पूरे कृषि सत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उधर, कृषि विभाग के अनुविभागीय अधिकारी ने इस संबंध में कहा है कि यह जानकारी उनके संज्ञान में लाई गई है और वे पूरे मामले की जानकारी प्राप्त कर अवगत कराएंगे। स्थानीय लोग अब प्रयोगशालाओं के नियमित निरीक्षण, गुणवत्ता जांच और कर्मचारियों की योग्यता के सत्यापन की मांग कर रहे हैं ताकि योजना का उद्देश्य पूरा हो सके।3
- डिंडोरी जिले के नारायणडीह गांव में हाल ही में निर्मित आंगनवाड़ी भवन की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस भवन के निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरती गई है। इसी लापरवाही का नतीजा है कि पहली ही बारिश होते ही नवनिर्मित भवन की छत से पानी टपकने लगा है।1
- मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना ने लोगों से नशा छोड़ने और भविष्य जोड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ उठाया गया हर कदम समाज को सुरक्षित और सशक्त बनाता है। पुलिस महानिदेशक ने सभी नागरिकों से 'नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0' अभियान से जुड़कर नशामुक्त मध्य प्रदेश बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया है।1
- उमरिया जिले में मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला सम्मेलन का आयोजन 17 जुलाई 2026 को किया जाएगा।3
- उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली नगर में भगवान श्री जगन्नाथ की पारंपरिक रथ यात्रा श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ भव्य रूप से निकाली गई। माता बिरासिनी मंदिर प्रांगण से भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा की सुसज्जित रथ यात्रा वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ शुरू हुई। रथ यात्रा के शुरू होते ही पूरा नगर "जय जगन्नाथ" के जयघोष से गूंज उठा और हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन व रथ खींचने के लिए उमड़ पड़े। इस भव्य रथ यात्रा का शुभारंभ मानपुर विधानसभा की विधायक सुश्री मीना सिंह ने भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना के साथ किया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रवाना होकर यह यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पंडित प्रकाश पालीवाल के निवास पर पहुंची, जहां धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान श्री जगन्नाथ अपने मौसी के घर में विराजमान हुए। मान्यता के अनुसार भगवान यहां तीन दिनों तक विश्राम करेंगे और आगामी सोमवार को बहुड़ा यात्रा के माध्यम से वापस माता बिरासिनी मंदिर लौटेंगे। पूरे नगर में भक्तिमय माहौल के बीच महिला, पुरुष, युवा और बच्चों सहित हजारों श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन करते हुए भगवान के रथ का रस्सा खींचा। रथ यात्रा को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और पुलिस की टीम मुस्तैद रही, जिसमें मंदिर संचालन समिति की अध्यक्ष व पाली एसडीएम मीनाक्षी बंजारे, तहसीलदार निलेश सिंह, नायब तहसीलदार लक्ष्मीकांत शर्मा, एसडीओपी एस.सी. बोहित और थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह स्वयं मौजूद रहे और व्यवस्थाओं की निगरानी की। इस भव्य धार्मिक यात्रा में भाजपा और कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अब सभी को सोमवार को निकलने वाली बहुड़ा यात्रा का बेसब्री से इंतजार है।4
- जय श्री राम। मध्य प्रदेश के शहडोल में श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा आयोजित एक भव्य सम्मान समारोह में समाजसेवी सिल्लू रजक को उपमुख्यमंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ला जी के करकमलों से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें समाजसेवा और मानव सेवा के क्षेत्र में किए गए उनके उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय कार्यों के लिए दिया गया है। सिल्लू रजक को रक्तदान करने, जरूरतमंदों की सहायता करने, सिकलसेल और थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए रक्त उपलब्ध कराने के साथ-साथ लावारिस एवं अज्ञात व्यक्तियों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने जैसे सामाजिक और मानवीय कार्यों में सक्रिय योगदान देने के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया है। इस गरिमामयी समारोह के अवसर पर शहडोल लोकसभा सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह, जयसिंहनगर विधायक श्रीमती मनीषा सिंह, जैतपुर विधायक व पूर्व मंत्री आदरणीय जय सिंह मरावी जी, व्योहारी विधायक आदरणीय श्री शरद कोल जी, भाजपा जिला अध्यक्ष श्रीमती अमिता चपरा, नगर पालिका अध्यक्ष श्री घनश्याम दास जायसवाल, श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय श्री सलब भदौरिया, और श्रमजीवी पत्रकार संघ शहडोल के अध्यक्ष श्री गजेंद्र सिंह सहित तमाम पत्रकार बंधु और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सम्मान प्राप्त करने के बाद समाजसेवी सिल्लू रजक ने श्रमजीवी पत्रकार संघ और सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि उन सभी रक्तदाताओं, सहयोगियों एवं समाजसेवियों का है, जो निस्वार्थ भाव से मानव सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने संकल्प लिया कि भविष्य में भी समाजहित और मानव सेवा के कार्य पूरी निष्ठा, समर्पण और निरंतरता के साथ जारी रहेंगे।2
- श्रमजीवी पत्रकार संघ की उमरिया जिला इकाई का जिला सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस जिला सम्मेलन का आयोजन उमरिया के ताला टाइगर हैवेन रिसॉर्ट में होना तय हुआ है। यह कार्यक्रम 17 जुलाई 2026, शुक्रवार के दिन आयोजित किया जाएगा।2
- मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उमड़ार बांध में नहाने के दौरान डूबे युवक शिवम सोनी का शव करीब 24 घंटे चले लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बरामद कर लिया गया है। इस दर्दनाक हादसे से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। शिवम अपने तीन दोस्तों के साथ बांध में घूमने और नहाने के लिए पहुंचा था। पानी में उतरने के बाद वह अचानक गहरे हिस्से में चला गया और डूबने लगा। उसके दोस्तों ने उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन वह देखते ही देखते पानी में लापता हो गया, जिसके बाद साथियों ने तत्काल पुलिस और परिजनों को इसकी जानकारी दी। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और गोताखोरों ने तलाश शुरू की, लेकिन पानी की गहराई अधिक होने के कारण जबलपुर और सीधी से एसडीआरएफ की अतिरिक्त टीमों को बुलाना पड़ा। इस संयुक्त रेस्क्यू अभियान में उमरिया और शहडोल की एसडीआरएफ टीमों के साथ स्थानीय पुलिस-प्रशासन के 20 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी लगातार जुटे रहे। पानी के भीतर सीमित दृश्यता और अत्यधिक गहराई के कारण अभियान काफी चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन आखिरकार जबलपुर से आई टीम ने शव को बाहर निकाल लिया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी के लिए कलेक्टर राखी सहाय, पुलिस अधीक्षक विजय बागवानी, अतिरिक्त कलेक्टर प्रमोद सेन गुप्ता और एसडीएम अंबिकेश सिंह खुद मौके पर मौजूद रहे और लगातार दिशा-निर्देश देते रहे। युवक का शव मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। कोतवाली थाना प्रभारी मदनलाल मरावी ने बताया कि पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। इस गंभीर हादसे के बाद प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बारिश के मौसम में बांधों और गहरे जलाशयों में सुरक्षा नियमों का पालन करें और गहरे पानी में उतरने का जोखिम न उठाएं।1