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आज भारतीय किसान संघ की साजा तहसील इकाई ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा, जिसमें खरीफ की बुआई से पहले किसानों को खाद, बीज, डीजल और बिजली की सम्पूर्ण एवं निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई है। किसानों ने विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि प्रति एकड़ 1 डीएपी और 2 यूरिया उपलब्ध हो। ज्ञापन में खाद की कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगाने, नगद भुगतान पर भी खाद उपलब्ध कराने और डीजल को जेरीकैन में देने जैसी महत्वपूर्ण मांगें भी शामिल हैं। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की जाती है, तो एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। भारतीय किसान संघ ने अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करते हुए 'भारतीय किसान संघ जिंदाबाद' और 'जय बलराम' के नारे लगाए।
भारतीय किसान संघ जिला बेमेतरा
आज भारतीय किसान संघ की साजा तहसील इकाई ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा, जिसमें खरीफ की बुआई से पहले किसानों को खाद, बीज, डीजल और बिजली की सम्पूर्ण एवं निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई है। किसानों ने विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि प्रति एकड़ 1 डीएपी और 2 यूरिया उपलब्ध हो। ज्ञापन में खाद की कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगाने, नगद भुगतान पर भी खाद उपलब्ध कराने और डीजल को जेरीकैन में देने जैसी महत्वपूर्ण मांगें भी शामिल हैं। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की जाती है, तो एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। भारतीय किसान संघ ने अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करते हुए 'भारतीय किसान संघ जिंदाबाद' और 'जय बलराम' के नारे लगाए।
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- राज टॉकीज रायपुर ने अपनी सेवाओं के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। दर्शक अब बुक माय शो प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं, जिसके लिए एक सीधा लिंक उपलब्ध कराया गया है। इसके साथ ही, सिनेमाघर ने एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया है। इच्छुक दर्शक दिए गए लिंक पर क्लिक करके इस ग्रुप से जुड़ सकते हैं और अन्य लोगों को जोड़ने के लिए यह लिंक उन्हें भी भेज सकते हैं। किसी भी सहायता या जानकारी के लिए राज टॉकीज रायपुर के दिए गए संपर्क नंबर पर फोन किया जा सकता है।1
- खुर्सीपार पुलिस ने दीन दयाल उपाध्याय स्टेडियम में क्रिकेट मैच के दौरान खिलाड़ियों को धमकाने और अभद्र व्यवहार करने वाले आरोपी सर्वेश सिंह के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की है। आरोपी ने स्वयं को माननीय गृह मंत्री का ओएसडी बताकर कानून व्यवस्था प्रभावित करने का प्रयास किया था। घटना 25 मई, 2026 को खुर्सीपार स्थित दीन दयाल उपाध्याय स्टेडियम में हुई, जिसकी शिकायत प्रार्थी जय प्रकाश ने 27 मई, 2026 को खुर्सीपार थाने में दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, सर्वेश सिंह ने खिलाड़ियों पर दबाव बनाने और उनके साथ अभद्र व्यवहार करने के लिए स्वयं को एक प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। आरोपी सर्वेश सिंह, उम्र 38 वर्ष, नेताजी चौक लिंक रोड, थाना जांजगीर, जिला जांजगीर-चांपा (छ.ग.) का निवासी है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए, खुर्सीपार पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी सर्वेश सिंह के विरुद्ध इस्तगासा क्रमांक 42/102/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNSS) की धारा 170, 126, 135(3) के अंतर्गत वैधानिक कार्यवाही की। पुलिस ने आरोपी को अनुविभागीय दण्डाधिकारी छावनी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया। इस कार्यवाही में थाना खुर्सीपार पुलिस स्टाफ की त्वरित एवं प्रभावी भूमिका सराहनीय रही। दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आपराधिक कृत्य की सूचना तत्काल पुलिस को दें। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था प्रभावित करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।2
- गर्मी के मौसम में कोल्ड ड्रिंक, खासकर थम्सअप, पीने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी साझा की गई है। इस संदेश में कहा गया है कि थम्सअप का सेवन करने से पहले कुछ 'ज़रूरी' जानकारी अवश्य देख लें। पोस्ट में इस जानकारी को अन्य लोगों के साथ भी साझा करने का आग्रह किया गया है ताकि अधिक से अधिक लोगों तक यह संदेश पहुँच सके।1
- बिल्हा थाना क्षेत्र से एक 17 वर्ष 9 माह की नाबालिग लड़की कोचिंग के लिए घर से निकली और तब से लापता है। परिजनों ने बिल्हा पुलिस थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है, जिसमें एक अज्ञात व्यक्ति पर बहला-फुसलाकर अपहरण करने का संदेह जताया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, बिल्हा थाना क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत में कोटवारी का काम करने वाले 26 वर्षीय भाई ने बुधवार शाम 7 बजकर 12 मिनट पर थाने में रिपोर्ट लिखवाई। उसने बताया कि उसकी सबसे छोटी बहन, जिसकी जन्मतिथि 17 अगस्त 2008 है और जो 12वीं कक्षा पास है, 24 मई 2026 की सुबह करीब 9:30 बजे बिल्हा स्थित कंप्यूटर सेंटर में कोचिंग जाने की बात कहकर घर से निकली थी। रिपोर्ट दर्ज होने तक वह वापस नहीं लौटी है, और आसपास व रिश्तेदारों में उसकी तलाश करने पर भी कोई जानकारी नहीं मिली। प्रार्थी ने अपनी नाबालिग बहन को किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का संदेह व्यक्त किया है। बिल्हा पुलिस ने इस रिपोर्ट पर अपराध धारा- 137(2) भान्यासं. के तहत मामला दर्ज कर लिया है और नाबालिग बालिका की तलाश जारी है। पुलिस द्वारा बुधवार रात 10:30 बजे दी गई जानकारी के अनुसार, इन दिनों नाबालिग लड़कियों और शादीशुदा महिलाओं के भागने के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अक्सर देखा जाता है कि जिन घरों में माहौल खराब होता है, आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती, या जहां माता-पिता में से कोई एक नहीं होता, या माता-पिता के बीच लगातार लड़ाई-झगड़े होते हैं, या पिता शराबी और आवारा किस्म के होते हैं, उन घरों की महिलाएं और लड़कियां प्रेम जाल में फंसकर अपने भविष्य को सुरक्षित करने की उम्मीद से घर छोड़ देती हैं। इस विशेष मामले में, मोबाइल फोन को भी लड़की के भागने की एक मुख्य वजह माना जा रहा है, क्योंकि भाइयों ने अपनी बहन पर विश्वास करके उसे पढ़ाई के लिए नया मोबाइल खरीद कर दिया था। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि उनकी नाबालिग बहन ने उनके साथ विश्वासघात कर किसी लड़के के साथ घर छोड़ दिया है। हालांकि, यह भी बताया गया है कि नाबालिग बालिकाओं को लेकर भागने वाले युवा पुरुषों को पकड़े जाने के बाद अपहरण, बहला-फुसलाकर ले जाने, बलात्कार और पोस्को एक्ट के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर उन्हें 20 साल तक की जेल हो सकती है, जिससे उनका और उनके परिवार का भविष्य भी बर्बाद हो जाता है, क्योंकि परिजनों को उन्हें छुड़वाने में लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। बाद में उनके पास पछताने के अलावा कुछ नहीं बचता, और जब तक वे जेल से छूटते हैं, तब तक उनकी प्रेमिका की शादी किसी और से हो चुकी होती है और बच्चे भी हो चुके होते हैं। इसलिए, नाबालिग लड़कियों को भगाने से पहले युवाओं को अपने भविष्य के बारे में सौ बार सोचना चाहिए।1
- खैरागढ़ छुईखदान गंडई जिले के थाना गातापार क्षेत्र के ग्राम चंगुर्दा घाटी में पुलिस ने पशु तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। 28 मई गुरुवार को सुबह 9 बजे मिली जानकारी के बाद, थाना गातापार पुलिस और जिला पुलिस टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इन आरोपियों को चार मवेशियों को क्रूरतापूर्वक पैदल महाराष्ट्र के कत्लखाने ले जाते हुए रंगे हाथों पकड़ा। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मध्य प्रदेश के बालाघाट निवासी राजकुमार देशमुख और महाराष्ट्र के गोंदिया निवासी वितेश बावनथडे के रूप में हुई है। कार्रवाई के दौरान, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार बैल, दो मोबाइल फोन और एक मोटरसाइकिल सहित कुल 1.04 लाख रुपए का सामान जब्त किया। इन आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर उप जेल सलोनी भेजा गया है।1
- छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले में ग्राम पंचायत दरिमा की महिलाएं शराब ठेकों को बंद या स्थानांतरित करने की मांग लेकर कलेक्टर के जनदर्शन में पहुंची थीं। इस दौरान कलेक्टर ने उनसे एक अटपटा सवाल पूछा कि क्या उन्हें महतारी वंदना योजना के तहत ₹1000 मिल रहे हैं। जब महिलाओं ने इसकी पुष्टि की, तो कलेक्टर ने कथित तौर पर यह कहकर अहसान जताने की कोशिश की कि शराब बेचना भी सरकार की योजना है, और अगर उन्हें महतारी वंदना के ₹1000 हर महीने चाहिए तो वे शराब बिक्री का विरोध क्यों करती हैं। कलेक्टर की इस बात से महिलाएं अत्यंत क्रोधित हो गईं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अगर महतारी वंदना की राशि इस शर्त पर मिल रही है कि उनके नौजवान परिवार शराब में डूब जाएं, तो उन्हें सरकार के ₹1000 नहीं चाहिए। यह घटना सरकार की उस सोच पर सवाल उठाती है, जहां पहले यह पूछा जाता था कि महिलाओं को इतना पैसा देने के लिए फंड कहां से आएगा, लेकिन अब सरकार खुलकर कह रही है कि महतारी वंदना के ₹1000 देने के लिए उन्हें मजबूरी में शराब दुकानों की संख्या बढ़ानी पड़ रही है। इसे 'गाय मार कर जूता दान' वाली कहावत जैसा बताया गया है। अंबिकापुर में प्रशासन के सबसे बड़े अधिकारी, यानी जिलाधीश द्वारा कही गई यह बात दर्शाती है कि सरकार ने अपनी 'मनमानी गारंटी' का भार सिस्टम चलाने वालों पर डाल रखा है, जिससे यह धारणा बन गई है कि महतारी वंदना योजना शराब के पैसे से ही संचालित हो रही है। कलेक्टर की बातों ने महिलाओं के दिमाग की बत्ती जला दी, और उन्हें यह समझने में देर नहीं लगी कि उनके घरों में कलह का कारण उन्हें मिलने वाली महतारी वंदना की राशि ही हो सकती है। इस पूरे मामले को छत्तीसगढ़ में इस बात के चरितार्थ होने के रूप में देखा जा रहा है कि चुनाव जीतने के लालच में पार्टियों के वादे अंततः जनता को ही भारी पड़ते हैं।1
- राज टॉकीज, रायपुर के लिए अब अपनी टिकटें बुक करने का समय है।1
- बिलासपुर जिले के चकरभाठा थाना क्षेत्र से एक 15 वर्ष 5 माह की नाबालिग बालिका के घर से लापता होने का मामला सामने आया है। बुधवार रात 10:00 बजे चकरभाठा पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, थाना क्षेत्र के एक गाँव में रहने वाले 40 वर्षीय पिता ने बुधवार शाम 19:20 बजे थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनकी 15 साल 5 माह की बेटी 26/05/2026 को दोपहर करीब 01:30 बजे बिना बताए घर से कहीं चली गई है और अभी तक वापस नहीं आई है। परिवार ने आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। पिता ने आशंका जताई है कि उनकी नाबालिग बेटी को कोई अज्ञात व्यक्ति बहला-फुसलाकर अपहरण कर ले गया है। प्रार्थी की रिपोर्ट पर चकरभाठा पुलिस ने अपराध धारा 137(2) BNS के तहत मामला दर्ज कर लिया है और गुमशुदा बालिका की तलाश जारी है। उल्लेखनीय है कि इन दिनों नाबालिग लड़कियों और शादीशुदा महिलाओं के घर से भागने के मामले तेजी से बढ़े हैं। अक्सर ऐसे मामलों में यह देखा जाता है कि जिन घरों का माहौल या आर्थिक स्थिति खराब होती है, या जहाँ माता-पिता नहीं होते, या माता-पिता के बीच अक्सर लड़ाई-झगड़ा होता है, या पिता शराबी और आवारा किस्म के होते हैं, उन घरों की महिलाएं और लड़कियां प्रेम जाल में फंसकर अपने भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से घर छोड़कर भाग जाती हैं। हालांकि, नाबालिग बालिकाओं के मामले में, जो पुरुष उन्हें भगाकर ले जाते हैं, पकड़े जाने के बाद उन पर अपहरण, बहला-फुसलाकर भगाने, शारीरिक संबंध बनाने और पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर कार्रवाई की जाती है। इसके परिणामस्वरूप ऐसे युवाओं और पुरुषों को 20 साल तक जेल की सजा भुगतनी पड़ती है, जिससे उनका और उनके परिवार का भविष्य खराब हो जाता है। बाद में उनके पास पछताने के अलावा कुछ नहीं बचता, और जब तक वे जेल से छूटते हैं, तब तक उनकी प्रेमिका की शादी और बच्चे हो चुके होते हैं। इसलिए नाबालिग लड़कियों को भगाकर ले जाने से पहले अपने भविष्य के बारे में सौ बार सोच लेना चाहिए।1
- छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिला मुख्यालय में नौतपा की भीषण गर्मी के बीच रसोई गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत सामने आई है, जहाँ चर्चित बम्लेश्वरी गैस एजेंसी के सामने उपभोक्ता लंबी कतारों में खड़े अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। सूरज देवता के आग बरसाने और पारा आसमान छूने के बावजूद, लोग छांव के बजाय रसोई गैस सिलेंडर ढूंढ रहे हैं, जिसे 'सिलेंडर सत्याग्रह' या मजबूरी की इंतहा बताया जा रहा है। बाजार में सिलेंडर की किल्लत इस कदर हावी है कि ग्राहक अब सिर्फ "बस सिलेंडर दे दो, चाहे जैसे भी दो!" की रट लगाए हुए हैं और अपनी जेब ढीली करके ब्लैक मार्केट (कालाबाजारी) से भी सिलेंडर खरीदने को मजबूर और तैयार बैठे हैं। इस गंभीर स्थिति के बावजूद, स्थानीय प्रशासन को कथित तौर पर इसकी कानों-कान खबर नहीं है, या यदि खबर है भी, तो अब तक इसका कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन इस नौतपा में 'कूलर की ठंडी हवा' खाकर सो रहा है। एक तरफ छत्तीसगढ़ में आए दिन विकास, व्यवस्था और 'सुशासन-तिहार' (सुशासन उत्सव) के बड़े-बड़े ढिंढोरे पीटे जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि आम नागरिक को अपनी बुनियादी जरूरत—रसोई गैस—के लिए इस जानलेवा धूप में कतारबद्ध होना पड़ रहा है। यह स्थिति 'दावों का सुशासन' और 'धरातल की हकीकत' के बीच के बड़े विरोधाभास को उजागर करती है, जहाँ 'सुशासन-तिहार के भव्य आयोजन' एक तरफ हैं और 'ब्लैक में सिलेंडर खरीदने की मजबूरी' दूसरी तरफ। जनता पूछ रही है कि इस किल्लत का जिम्मेदार कौन है और क्या बम्लेश्वरी गैस एजेंसी की अव्यवस्था अधिकारियों की नजरों से इतनी दूर है कि उन्हें धूप में खड़े ये बेबस चेहरे दिखाई नहीं देते। बलौदाबाजार की जनता को अब किसी 'तिहार' की नहीं, बल्कि एक अदद गैस सिलेंडर और इस समस्या के स्थायी समाधान की दरकार है, और प्रशासन के 'कुंभकर्णी नींद' से जागने का इंतजार है।2