कानपुर देहात में थाना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी) टीम की प्रभारी निरीक्षक रीना गौतम ने अपनी टीम के साथ, श्रम विभाग के श्रम प्रवर्तन अधिकारी राजेश श्रीवास्तव और बाल संरक्षण अधिकारी धर्मेंद्र ओझा के साथ मिलकर बालश्रम, भिक्षावृत्ति और बाल विवाह के विरुद्ध एक संयुक्त अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान जनपद के भीड़भाड़ वाले स्थानों, चौराहों और विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर सघन निरीक्षण किया गया। गुरुवार शाम करीब सात बजे पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, कुल 26 प्रतिष्ठानों की जांच की गई, जिसमें 10 निरीक्षण टिप्पणियां अंकित की गईं। अभियान में 13 नाबालिग बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराते हुए उनका रेस्क्यू किया गया, जिन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने हेतु आवश्यक काउंसलिंग भी प्रदान की गई। थाना एएचटी टीम ने प्रतिष्ठान संचालकों और आमजन को बालश्रम, बाल भिक्षावृत्ति तथा बाल विवाह के दुष्परिणामों के संबंध में जागरूक किया। उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कार्य पर लगाना कानूनन अपराध है। इसके अतिरिक्त, शासन एवं प्रशासन द्वारा संचालित हेल्पलाइन नंबर 1098, 112, 181, 1076, 1090 और 108 के संबंध में विस्तृत जानकारी भी दी गई। कानपुर देहात पुलिस ने जनपदवासियों से अपील की है कि यदि उन्हें कहीं भी बालश्रम, बाल भिक्षावृत्ति अथवा बाल विवाह जैसी घटनाओं की जानकारी प्राप्त होती है, तो वे तत्काल संबंधित हेल्पलाइन अथवा निकटतम पुलिस इकाई को सूचित करें, जिससे समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
कानपुर देहात में थाना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी) टीम की प्रभारी निरीक्षक रीना गौतम ने अपनी टीम के साथ, श्रम विभाग के श्रम प्रवर्तन अधिकारी राजेश श्रीवास्तव और बाल संरक्षण अधिकारी धर्मेंद्र ओझा के साथ मिलकर बालश्रम, भिक्षावृत्ति और बाल विवाह के विरुद्ध एक संयुक्त अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान जनपद के भीड़भाड़ वाले स्थानों, चौराहों और विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर सघन निरीक्षण किया गया। गुरुवार शाम करीब सात बजे पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, कुल 26 प्रतिष्ठानों की जांच की गई, जिसमें 10 निरीक्षण टिप्पणियां अंकित की गईं। अभियान में 13 नाबालिग बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराते हुए उनका रेस्क्यू किया गया, जिन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने हेतु आवश्यक काउंसलिंग भी प्रदान की गई। थाना एएचटी टीम ने प्रतिष्ठान संचालकों और आमजन को बालश्रम, बाल भिक्षावृत्ति तथा बाल विवाह के दुष्परिणामों के संबंध में जागरूक किया। उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कार्य पर लगाना कानूनन अपराध है। इसके अतिरिक्त, शासन एवं प्रशासन द्वारा संचालित हेल्पलाइन नंबर 1098, 112, 181, 1076, 1090 और 108 के संबंध में विस्तृत जानकारी भी दी गई। कानपुर देहात पुलिस ने जनपदवासियों से अपील की है कि यदि उन्हें कहीं भी बालश्रम, बाल भिक्षावृत्ति अथवा बाल विवाह जैसी घटनाओं की जानकारी प्राप्त होती है, तो वे तत्काल संबंधित हेल्पलाइन अथवा निकटतम पुलिस इकाई को सूचित करें, जिससे समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
- कानपुर देहात में थाना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी) टीम की प्रभारी निरीक्षक रीना गौतम ने अपनी टीम के साथ, श्रम विभाग के श्रम प्रवर्तन अधिकारी राजेश श्रीवास्तव और बाल संरक्षण अधिकारी धर्मेंद्र ओझा के साथ मिलकर बालश्रम, भिक्षावृत्ति और बाल विवाह के विरुद्ध एक संयुक्त अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान जनपद के भीड़भाड़ वाले स्थानों, चौराहों और विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर सघन निरीक्षण किया गया। गुरुवार शाम करीब सात बजे पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, कुल 26 प्रतिष्ठानों की जांच की गई, जिसमें 10 निरीक्षण टिप्पणियां अंकित की गईं। अभियान में 13 नाबालिग बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराते हुए उनका रेस्क्यू किया गया, जिन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने हेतु आवश्यक काउंसलिंग भी प्रदान की गई। थाना एएचटी टीम ने प्रतिष्ठान संचालकों और आमजन को बालश्रम, बाल भिक्षावृत्ति तथा बाल विवाह के दुष्परिणामों के संबंध में जागरूक किया। उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कार्य पर लगाना कानूनन अपराध है। इसके अतिरिक्त, शासन एवं प्रशासन द्वारा संचालित हेल्पलाइन नंबर 1098, 112, 181, 1076, 1090 और 108 के संबंध में विस्तृत जानकारी भी दी गई। कानपुर देहात पुलिस ने जनपदवासियों से अपील की है कि यदि उन्हें कहीं भी बालश्रम, बाल भिक्षावृत्ति अथवा बाल विवाह जैसी घटनाओं की जानकारी प्राप्त होती है, तो वे तत्काल संबंधित हेल्पलाइन अथवा निकटतम पुलिस इकाई को सूचित करें, जिससे समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।1
- उत्तर प्रदेश के सजेती थाना क्षेत्र स्थित किरार गाँव के पास चल रहे रेलवे ट्रैक और पुल निर्माण कार्य के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी के अधीन कार्यरत एक 16 वर्षीय किशोर श्रमिक की ऊंचाई से गिरने के कारण मौत हो गई। मृतक की पहचान 16 वर्षीय जमाल हक, पुत्र नजमुल हक के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार के कटिहार जिले के शमशेरगंज के वार्ड नंबर 02 का निवासी था। जमाल अपने गाँव के 4-5 साथियों के साथ इस रेलवे निर्माण कार्य में लगा हुआ था। किरार गाँव के पास पुल पर काम करते समय वह अचानक अनियंत्रित होकर ऊंचाई से नीचे गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के तुरंत बाद उसके साथ काम कर रहे कर्मचारी और ग्रामीण उसे इलाज के लिए अस्पताल ले गए, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रशासन की सूचना पर सजेती थाना पुलिस मौके पर पहुँची और शव को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की कानूनी जाँच शुरू कर दी है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि युवक की मौत के सटीक कारणों और हादसे की असली वजह का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। इस घटना के बाद मृतक के साथियों और गाँव में कोहराम मच गया है।2
- लखनऊ में हुई घटना के बाद जालौन में एक बड़ी कार्रवाई की गई है।1
- मूल पोस्ट के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि एक निश्चित कहानी पर 1076 लगाने की आवश्यकता होगी।1
- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में नकली कोल्डड्रिंक से भरा एक ट्रक पकड़ा गया है। यह पूरा फर्जी खेल दिल्ली की वरुण बेवरेज कंपनी के नाम पर चल रहा था, जिसका भंडाफोड़ कंपनी मैनेजर की शिकायत के बाद हुआ। पुलिस के अनुसार, UP82T5354 नंबर का यह ट्रक कोंच कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नई बस्ती स्थित कंजर बाबा के पास रामकिशन अग्रवाल की गोदाम पर नकली कोल्डड्रिंक उतार रहा था। इस पूरे गोरखधंधे में कूटरचित दस्तावेज तैयार कर नकली कोल्डड्रिंक को बाजार में बेचा जा रहा था। कोंच कोतवाली पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। इस प्रकरण में वरुण बेवरेज कंपनी, गुरुग्राम के एएसएम राकेश मिश्रा, शिकायतकर्ता आशुतोष व्यास और ट्रक चालक सुरेंदर के बयान दर्ज किए गए हैं।1
- एडीजी जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय का निरीक्षण किया, जिसके तहत उन्होंने कार्यालय की विभिन्न शाखाओं का दौरा किया। इस दौरान, महोदया ने अभिलेखों, कार्यालयी कार्यप्रणाली और जनशिकायतों के निस्तारण संबंधी व्यवस्थाओं का गहन अवलोकन किया। उन्होंने अपराध शाखा, महिला सहायता प्रकोष्ठ, सीसीटीएनएस शाखा, शिकायत प्रकोष्ठ, विशेष जांच प्रकोष्ठ सहित अन्य कार्यालयी शाखाओं के कार्यों की समीक्षा की। इस निरीक्षण में, एडीजी जोन ने अभिलेखों के सुव्यवस्थित एवं अद्यतन रख-रखाव के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। साथ ही, लंबित प्रकरणों के शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण और जनसामान्य से प्राप्त शिकायतों के त्वरित एवं निष्पक्ष समाधान पर विशेष बल दिया गया। गुरुवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, निरीक्षण में कार्यालय परिसर की स्वच्छता, अभिलेखों के रख-रखाव, तकनीकी संसाधनों के उपयोग और कार्यालयी कार्यों की गुणवत्ता का भी परीक्षण किया गया। महोदया ने कार्यालय में संचालित विभिन्न तकनीकी नवाचारों और जनहितकारी व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त कर उनकी सराहना की और उन्हें और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक निर्देश भी प्रदान किए।1
- सोशल मीडिया पर एक कथित वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में खलबली मच गई है, जो उरई कोतवाली के कंट्रोल रूम से जुड़ा बताया जा रहा है। इस वीडियो में ड्यूटी के दौरान कंट्रोल रूम में एक महिला और पुरुष पुलिसकर्मी के दिखाई देने का दावा किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने तत्काल संज्ञान लिया। पुलिस अधीक्षक के संज्ञान के बाद संबंधित मुंशी/सिपाही को निलंबित कर दिया गया है, जबकि महिला सिपाही के खिलाफ जांच के आदेश जारी किए गए हैं। विभाग अब वायरल वीडियो की सत्यता और इसके पीछे की परिस्थितियों की जांच में जुट गया है। इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं, जैसे कि क्या कंट्रोल रूम जैसे संवेदनशील स्थान में अनुशासन का उल्लंघन हुआ है, क्या यह वीडियो पूरी तरह वास्तविक है या इसके पीछे कोई और सच्चाई है, और क्या जांच के बाद और भी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, यह खबर वायरल वीडियो और सामने आई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है, और वीडियो की प्रामाणिकता तथा पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। संबंधित अधिकारियों का विस्तृत बयान अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है और शुरू ऐप इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता।1