logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

I am Neha pls subscribe my channel मणि.निमजा यह लड़की छोटे से होटल में बैठकर नाश्ता कर ही रही थी कि ऐसा क्या हुआ यह ट्रक के नीचे सीधा कूद गई#वायरस्रील्स

9 hrs ago
user_Neha Sinha
Neha Sinha
Photographer Amas, Gaya•
9 hrs ago

I am Neha pls subscribe my channel मणि.निमजा यह लड़की छोटे से होटल में बैठकर नाश्ता कर ही रही थी कि ऐसा क्या हुआ यह ट्रक के नीचे सीधा कूद गई#वायरस्रील्स

More news from Gaya and nearby areas
  • मुंह छिपाकर दूसरी शादी करने पहुंची महिला को कचहरी के बाहर पहले पति ने दबोच लिया। फिर क्या था तस्वीरें सब कुछ बयां कर रही... मोरे
    1
    मुंह छिपाकर दूसरी शादी करने पहुंची महिला को कचहरी के बाहर पहले पति ने दबोच लिया। फिर क्या था तस्वीरें सब कुछ बयां कर रही... मोरे
    user_Neha Sinha
    Neha Sinha
    Photographer Amas, Gaya•
    9 hrs ago
  • भयमुक्त भ्रष्टाचार बनाम जीरो टॉलरेंस : बिहार में सुशासन का असहज सच बिहार में “सुशासन” अब एक नारा भर रह गया है, जबकि ज़मीनी सच्चाई यह है कि भ्रष्टाचार भयमुक्त होकर फल-फूल रहा है। अगर ऐसा नहीं होता, तो गया नगर प्रखंड के बीडीओ को दिन के उजाले में, अपने ही चेंबर में ₹50,000 रिश्वत लेते हुए निगरानी विभाग की टीम द्वारा रंगे हाथ पकड़ा जाना संभव नहीं होता। पटना में सहायक निदेशक का ₹5 लाख रिश्वत लेते पकड़ा जाना भी इसी कड़ी का एक और उदाहरण है। सवाल यह नहीं है कि गिरफ्तारी हुई या नहीं, सवाल यह है कि गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ? क्या भ्रष्टाचार रुका? क्या दोषियों को सजा मिली? गिरफ्तारी की राजनीति, सजा का अकाल बिहार में हर कुछ महीनों में कोई न कोई अधिकारी निगरानी के हत्थे चढ़ता है। प्रेस नोट जारी होता है, फोटो छपती है, सरकार अपनी पीठ थपथपा लेती है। लेकिन फिर वही अधिकारी कुछ समय बाद ज़मानत पर बाहर, कभी निलंबन से मुक्त, तो कभी बहाल होकर फिर उसी सिस्टम का हिस्सा बन जाता है। यदि यही “जीरो टॉलरेंस” है, तो यह नीति नहीं बल्कि डपोरशंखी घोषणा है। डर किसे नहीं है? आम नागरिक डरा हुआ है— फाइल आगे बढ़ाने से पहले, हक़ माँगने से पहले, शिकायत करने से पहले। लेकिन रिश्वतखोर लोक सेवक निडर है। क्योंकि उसे पता है: सजा की संभावना न्यूनतम है मुकदमे सालों चलेंगे विभागीय संरक्षण मिलेगा और अंततः “सब मैनेज हो जाएगा” निगरानी विभाग पर भी सवाल निगरानी विभाग की भूमिका केवल गिरफ्तारी तक सीमित क्यों है? चार्जशीट में देरी क्यों? दोष सिद्धि की दर इतनी कम क्यों? यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सिस्टम के भीतर सिस्टम भ्रष्टाचार को बचा रहा है? यह आरोप नहीं, बल्कि लोकतंत्र में आवश्यक संदेह है— जिसका जवाब सरकार को देना होगा। "गिरफ्तारी बनाम मानवाधिकार" यदि कोई निर्दोष व्यक्ति गिरफ्तार होता है, तो वह निस्संदेह मानवाधिकार उल्लंघन है। लेकिन जब कोई अधिकारी रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा जाए तो उसे “निर्दोष” कहना कानून और नैतिकता—दोनों का अपमान है। फिर सवाल उठता है: अगर वह अपराधी नहीं है, तो गिरफ्तारी क्यों? और अगर अपराधी है, तो सजा क्यों नहीं? जब्त राशि और खोखला कानून रिश्वत की जब्त राशि सरकारी खजाने में चली जाती है, लेकिन जनता का भरोसा किस खजाने में जमा होता है? जब तक: समयबद्ध ट्रायल कठोर सजा संपत्ति जब्ती और स्थायी बर्खास्तगी नहीं होगी— तब तक भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं, बल्कि उसे सरकारी संरक्षण मिलता रहेगा। निष्कर्ष भ्रष्टाचार की गिरफ्तारी से सरकार की मंशा साबित नहीं होती, बल्कि भ्रष्टाचार की सजा से सुशासन साबित होता है। आज बिहार के सामने सवाल साफ़ है क्या सुशासन एक ब्रांड है, या फिर न्याय, भय और कानून पर आधारित एक वास्तविक शासन? अगर जवाब नहीं बदला, तो इतिहास लिखेगा— भ्रष्टाचार पकड़ा तो गया, पर सजा से बचा लिया गया।
    3
    भयमुक्त भ्रष्टाचार बनाम जीरो टॉलरेंस : बिहार में सुशासन का असहज सच
बिहार में “सुशासन” अब एक नारा भर रह गया है, जबकि ज़मीनी सच्चाई यह है कि भ्रष्टाचार भयमुक्त होकर फल-फूल रहा है। अगर ऐसा नहीं होता, तो गया नगर प्रखंड के बीडीओ को दिन के उजाले में, अपने ही चेंबर में ₹50,000 रिश्वत लेते हुए निगरानी विभाग की टीम द्वारा रंगे हाथ पकड़ा जाना संभव नहीं होता। पटना में सहायक निदेशक का ₹5 लाख रिश्वत लेते पकड़ा जाना भी इसी कड़ी का एक और उदाहरण है।
सवाल यह नहीं है कि गिरफ्तारी हुई या नहीं, सवाल यह है कि
गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ?
क्या भ्रष्टाचार रुका?
क्या दोषियों को सजा मिली?
गिरफ्तारी की राजनीति, सजा का अकाल
बिहार में हर कुछ महीनों में कोई न कोई अधिकारी निगरानी के हत्थे चढ़ता है। प्रेस नोट जारी होता है, फोटो छपती है, सरकार अपनी पीठ थपथपा लेती है। लेकिन फिर वही अधिकारी कुछ समय बाद ज़मानत पर बाहर, कभी निलंबन से मुक्त, तो कभी बहाल होकर फिर उसी सिस्टम का हिस्सा बन जाता है।
यदि यही “जीरो टॉलरेंस” है, तो यह नीति नहीं बल्कि डपोरशंखी घोषणा है।
डर किसे नहीं है?
आम नागरिक डरा हुआ है—
फाइल आगे बढ़ाने से पहले,
हक़ माँगने से पहले,
शिकायत करने से पहले।
लेकिन रिश्वतखोर लोक सेवक निडर है।
क्योंकि उसे पता है:
सजा की संभावना न्यूनतम है
मुकदमे सालों चलेंगे
विभागीय संरक्षण मिलेगा
और अंततः “सब मैनेज हो जाएगा”
निगरानी विभाग पर भी सवाल
निगरानी विभाग की भूमिका केवल गिरफ्तारी तक सीमित क्यों है?
चार्जशीट में देरी क्यों?
दोष सिद्धि की दर इतनी कम क्यों?
यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि
क्या सिस्टम के भीतर सिस्टम भ्रष्टाचार को बचा रहा है?
यह आरोप नहीं, बल्कि लोकतंत्र में आवश्यक संदेह है—
जिसका जवाब सरकार को देना होगा।
"गिरफ्तारी बनाम मानवाधिकार"
यदि कोई निर्दोष व्यक्ति गिरफ्तार होता है, तो वह निस्संदेह मानवाधिकार उल्लंघन है।
लेकिन जब कोई अधिकारी रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा जाए
तो उसे “निर्दोष” कहना
कानून और नैतिकता—दोनों का अपमान है।
फिर सवाल उठता है:
अगर वह अपराधी नहीं है, तो गिरफ्तारी क्यों?
और अगर अपराधी है, तो सजा क्यों नहीं?
जब्त राशि और खोखला कानून
रिश्वत की जब्त राशि सरकारी खजाने में चली जाती है,
लेकिन जनता का भरोसा
किस खजाने में जमा होता है?
जब तक:
समयबद्ध ट्रायल
कठोर सजा
संपत्ति जब्ती
और स्थायी बर्खास्तगी
नहीं होगी—
तब तक भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं,
बल्कि उसे सरकारी संरक्षण मिलता रहेगा।
निष्कर्ष
भ्रष्टाचार की गिरफ्तारी से सरकार की मंशा साबित नहीं होती,
बल्कि भ्रष्टाचार की सजा से सुशासन साबित होता है।
आज बिहार के सामने सवाल साफ़ है
क्या सुशासन एक ब्रांड है,
या फिर न्याय, भय और कानून पर आधारित एक वास्तविक शासन?
अगर जवाब नहीं बदला,
तो इतिहास लिखेगा—
भ्रष्टाचार पकड़ा तो गया, पर सजा से बचा लिया गया।
    user_Vijay Kumar
    Vijay Kumar
    Photographer शेरघाटी, गया, बिहार•
    2 hrs ago
  • Post by गौतम चंद्रवंशी जी
    1
    Post by गौतम चंद्रवंशी जी
    user_गौतम चंद्रवंशी जी
    गौतम चंद्रवंशी जी
    Video Player Repair Service औरंगाबाद, औरंगाबाद, बिहार•
    9 hrs ago
  • होली का वीडियो
    1
    होली का वीडियो
    user_भास्कर न्यूज़ औरंगाबाद बिहार
    भास्कर न्यूज़ औरंगाबाद बिहार
    Press advisory औरंगाबाद, औरंगाबाद, बिहार•
    21 hrs ago
  • छात्र की हत्या के विरोध में परैया बाजार में मशाल जुलूस, अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग परैया। प्रखंड मुख्य बाजार परैया में नीट छात्रा की हत्या के विरोध में बुधवार को लोगों ने मशाल जुलूस निकालकर आक्रोश व्यक्त किया। जुलूस में शामिल लोगों ने हत्याकांड में शामिल अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। मशाल जुलूस बाजार क्षेत्र के विभिन्न मार्गों से होते हुए निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। जुलूस के दौरान लोगों ने प्रशासन से घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग की। इस मौके पर प्रखंड प्रमुख जितेंद्र नारायण, आचार्य महादेव उर्फ मुन्ना, पूजा यादव, डॉ. मनोज सिंह, गबर सिंह, अरविन्द ठाकुर, रामबली सिंह, मुटुर ठाकुर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि छात्रा की हत्या एक जघन्य अपराध है और ऐसे अपराधियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए, ताकि समाज में कानून व्यवस्था बनी रहे। जुलूस के अंत में लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए न्याय दिलाने की अपील की।
    1
    छात्र की हत्या के विरोध में परैया बाजार में मशाल जुलूस, अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग
परैया।
प्रखंड मुख्य बाजार परैया में  नीट छात्रा की हत्या के विरोध में बुधवार को लोगों ने मशाल जुलूस निकालकर आक्रोश व्यक्त किया। जुलूस में शामिल लोगों ने हत्याकांड में शामिल अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। मशाल जुलूस बाजार क्षेत्र के विभिन्न मार्गों से होते हुए निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। जुलूस के दौरान लोगों ने प्रशासन से घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग की। इस मौके पर प्रखंड प्रमुख जितेंद्र नारायण, आचार्य महादेव उर्फ मुन्ना, पूजा यादव, डॉ. मनोज सिंह, गबर सिंह, अरविन्द ठाकुर, रामबली सिंह, मुटुर ठाकुर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि छात्रा की हत्या एक जघन्य अपराध है और ऐसे अपराधियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए, ताकि समाज में कानून व्यवस्था बनी रहे।
जुलूस के अंत में लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए न्याय दिलाने की अपील की।
    user_Prem Kumar
    Prem Kumar
    परैया, गया, बिहार•
    37 min ago
  • शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर साहपुर में भव्य जलयात्रा निकाली गई डोभी/गया डोभी प्रखंड क्षेत्र के बजौरा पंचायत अंतर्गत साहपुर गांव में नवनिर्मित शिव मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर भव्य जलयात्रा निकाली गई। जलयात्रा मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होकर पूरे गांव का भ्रमण करती हुई लिलाजन नदी पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में पवित्र जल भरा गया। इसके पश्चात जलयात्रा पुनः मंदिर परिसर में आकर संपन्न हुई। कार्यक्रम का संचालन आचार्य पवन मिश्रा द्वारा विधि-विधान एवं पूरे रीति-रिवाज के साथ कराया गया। आयोजकों ने बताया कि अगले दिन प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी, जबकि गुरुवार को हवन-पूजन के उपरांत भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर दिलीप प्रसाद यादव, रामबली यादव, मोहन यादव, सुनील यादव, धनु यादव, श्रवण मांझी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। गांव में पूरे दिन धार्मिक उल्लास और भक्तिमय वातावरण बना रहा।
    1
    शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर साहपुर में  भव्य जलयात्रा निकाली गई
डोभी/गया
डोभी प्रखंड क्षेत्र के बजौरा पंचायत अंतर्गत साहपुर गांव में नवनिर्मित शिव मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर  भव्य जलयात्रा निकाली गई। जलयात्रा मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होकर पूरे गांव का भ्रमण करती हुई लिलाजन नदी पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में पवित्र जल भरा गया। इसके पश्चात जलयात्रा पुनः मंदिर परिसर में आकर संपन्न हुई।
कार्यक्रम का संचालन आचार्य पवन मिश्रा द्वारा विधि-विधान एवं पूरे रीति-रिवाज के साथ कराया गया। आयोजकों ने बताया कि अगले दिन प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी, जबकि गुरुवार को हवन-पूजन के उपरांत भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर दिलीप प्रसाद यादव, रामबली यादव, मोहन यादव, सुनील यादव, धनु यादव, श्रवण मांझी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। गांव में पूरे दिन धार्मिक उल्लास और भक्तिमय वातावरण बना रहा।
    user_महेंद्र शर्मा
    महेंद्र शर्मा
    पत्रकार, # डोभी, गया, बिहार•
    7 hrs ago
  • प्रतापपुर प्रखंड कार्यालय के पुराने भवन में झारखंड सरकार द्वारा आवंटित चीनी और नमक कई वर्षों से रखे-रखे सड़ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय से पड़े इन खाद्य सामग्रियों की सुध लेने की जहमत किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या पदाधिकारी ने नहीं उठाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उक्त चीनी और नमक वर्षों पहले ही यहां जमा किए गए थे, लेकिन उनका वितरण नहीं किया गया। समय पर वितरण नहीं होने के कारण अब सामग्री खराब हो चुकी है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है? एक ओर राज्य सरकार गरीबों के लिए खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंदों तक पहुंचने वाली सामग्री का इस तरह बर्बाद होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते इनका वितरण किया गया होता, तो गरीब परिवारों को इसका लाभ मिल सकता था। इस मामले में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) पापु यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी से भी दूरभाष के माध्यम से संपर्क साधने का प्रयास किया गया, परंतु संपर्क स्थापित नहीं हो सका। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है। स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    1
    प्रतापपुर प्रखंड कार्यालय के पुराने भवन में झारखंड सरकार द्वारा आवंटित चीनी और नमक कई वर्षों से रखे-रखे सड़ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय से पड़े इन खाद्य सामग्रियों की सुध लेने की जहमत किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या पदाधिकारी ने नहीं उठाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उक्त चीनी और नमक वर्षों पहले ही यहां जमा किए गए थे, लेकिन उनका वितरण नहीं किया गया। समय पर वितरण नहीं होने के कारण अब सामग्री खराब हो चुकी है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है? एक ओर राज्य सरकार गरीबों के लिए खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंदों तक पहुंचने वाली सामग्री का इस तरह बर्बाद होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते इनका वितरण किया गया होता, तो गरीब परिवारों को इसका लाभ मिल सकता था। इस मामले में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) पापु यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी से भी दूरभाष के माध्यम से संपर्क साधने का प्रयास किया गया, परंतु संपर्क स्थापित नहीं हो सका। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है। स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    user_Headline jharkhand
    Headline jharkhand
    Press-Media Pratappur, Chatra•
    33 min ago
  • I am Neha pls subscribe my channel मणि.निमजा यह लड़की छोटे से होटल में बैठकर नाश्ता कर ही रही थी कि ऐसा क्या हुआ यह ट्रक के नीचे सीधा कूद गई#वायरस्रील्स
    1
    I am Neha pls subscribe my channel मणि.निमजा यह लड़की छोटे से होटल में बैठकर नाश्ता कर ही रही थी कि ऐसा क्या हुआ यह ट्रक के नीचे सीधा कूद गई#वायरस्रील्स
    user_Neha Sinha
    Neha Sinha
    Photographer Amas, Gaya•
    9 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.