शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर साहपुर में भव्य जलयात्रा शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर साहपुर में भव्य जलयात्रा निकाली गई डोभी/गया डोभी प्रखंड क्षेत्र के बजौरा पंचायत अंतर्गत साहपुर गांव में नवनिर्मित शिव मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर भव्य जलयात्रा निकाली गई। जलयात्रा मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होकर पूरे गांव का भ्रमण करती हुई लिलाजन नदी पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में पवित्र जल भरा गया। इसके पश्चात जलयात्रा पुनः मंदिर परिसर में आकर संपन्न हुई। कार्यक्रम का संचालन आचार्य पवन मिश्रा द्वारा विधि-विधान एवं पूरे रीति-रिवाज के साथ कराया गया। आयोजकों ने बताया कि अगले दिन प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी, जबकि गुरुवार को हवन-पूजन के उपरांत भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर दिलीप प्रसाद यादव, रामबली यादव, मोहन यादव, सुनील यादव, धनु यादव, श्रवण मांझी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। गांव में पूरे दिन धार्मिक उल्लास और भक्तिमय वातावरण बना रहा।
शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर साहपुर में भव्य जलयात्रा शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर साहपुर में भव्य जलयात्रा निकाली गई डोभी/गया डोभी प्रखंड क्षेत्र के बजौरा पंचायत अंतर्गत साहपुर गांव में नवनिर्मित शिव मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर भव्य जलयात्रा निकाली गई। जलयात्रा मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होकर पूरे गांव का भ्रमण करती हुई लिलाजन नदी पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में पवित्र जल भरा गया। इसके पश्चात जलयात्रा पुनः मंदिर परिसर में आकर संपन्न हुई। कार्यक्रम का संचालन आचार्य पवन मिश्रा द्वारा विधि-विधान एवं पूरे रीति-रिवाज के साथ कराया गया। आयोजकों ने बताया कि अगले दिन प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी, जबकि गुरुवार को हवन-पूजन के उपरांत भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर दिलीप प्रसाद यादव, रामबली यादव, मोहन यादव, सुनील यादव, धनु यादव, श्रवण मांझी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। गांव में पूरे दिन धार्मिक उल्लास और भक्तिमय वातावरण बना रहा।
- शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर साहपुर में भव्य जलयात्रा निकाली गई डोभी/गया डोभी प्रखंड क्षेत्र के बजौरा पंचायत अंतर्गत साहपुर गांव में नवनिर्मित शिव मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर भव्य जलयात्रा निकाली गई। जलयात्रा मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होकर पूरे गांव का भ्रमण करती हुई लिलाजन नदी पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में पवित्र जल भरा गया। इसके पश्चात जलयात्रा पुनः मंदिर परिसर में आकर संपन्न हुई। कार्यक्रम का संचालन आचार्य पवन मिश्रा द्वारा विधि-विधान एवं पूरे रीति-रिवाज के साथ कराया गया। आयोजकों ने बताया कि अगले दिन प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी, जबकि गुरुवार को हवन-पूजन के उपरांत भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर दिलीप प्रसाद यादव, रामबली यादव, मोहन यादव, सुनील यादव, धनु यादव, श्रवण मांझी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। गांव में पूरे दिन धार्मिक उल्लास और भक्तिमय वातावरण बना रहा।1
- भयमुक्त भ्रष्टाचार बनाम जीरो टॉलरेंस : बिहार में सुशासन का असहज सच बिहार में “सुशासन” अब एक नारा भर रह गया है, जबकि ज़मीनी सच्चाई यह है कि भ्रष्टाचार भयमुक्त होकर फल-फूल रहा है। अगर ऐसा नहीं होता, तो गया नगर प्रखंड के बीडीओ को दिन के उजाले में, अपने ही चेंबर में ₹50,000 रिश्वत लेते हुए निगरानी विभाग की टीम द्वारा रंगे हाथ पकड़ा जाना संभव नहीं होता। पटना में सहायक निदेशक का ₹5 लाख रिश्वत लेते पकड़ा जाना भी इसी कड़ी का एक और उदाहरण है। सवाल यह नहीं है कि गिरफ्तारी हुई या नहीं, सवाल यह है कि गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ? क्या भ्रष्टाचार रुका? क्या दोषियों को सजा मिली? गिरफ्तारी की राजनीति, सजा का अकाल बिहार में हर कुछ महीनों में कोई न कोई अधिकारी निगरानी के हत्थे चढ़ता है। प्रेस नोट जारी होता है, फोटो छपती है, सरकार अपनी पीठ थपथपा लेती है। लेकिन फिर वही अधिकारी कुछ समय बाद ज़मानत पर बाहर, कभी निलंबन से मुक्त, तो कभी बहाल होकर फिर उसी सिस्टम का हिस्सा बन जाता है। यदि यही “जीरो टॉलरेंस” है, तो यह नीति नहीं बल्कि डपोरशंखी घोषणा है। डर किसे नहीं है? आम नागरिक डरा हुआ है— फाइल आगे बढ़ाने से पहले, हक़ माँगने से पहले, शिकायत करने से पहले। लेकिन रिश्वतखोर लोक सेवक निडर है। क्योंकि उसे पता है: सजा की संभावना न्यूनतम है मुकदमे सालों चलेंगे विभागीय संरक्षण मिलेगा और अंततः “सब मैनेज हो जाएगा” निगरानी विभाग पर भी सवाल निगरानी विभाग की भूमिका केवल गिरफ्तारी तक सीमित क्यों है? चार्जशीट में देरी क्यों? दोष सिद्धि की दर इतनी कम क्यों? यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सिस्टम के भीतर सिस्टम भ्रष्टाचार को बचा रहा है? यह आरोप नहीं, बल्कि लोकतंत्र में आवश्यक संदेह है— जिसका जवाब सरकार को देना होगा। "गिरफ्तारी बनाम मानवाधिकार" यदि कोई निर्दोष व्यक्ति गिरफ्तार होता है, तो वह निस्संदेह मानवाधिकार उल्लंघन है। लेकिन जब कोई अधिकारी रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा जाए तो उसे “निर्दोष” कहना कानून और नैतिकता—दोनों का अपमान है। फिर सवाल उठता है: अगर वह अपराधी नहीं है, तो गिरफ्तारी क्यों? और अगर अपराधी है, तो सजा क्यों नहीं? जब्त राशि और खोखला कानून रिश्वत की जब्त राशि सरकारी खजाने में चली जाती है, लेकिन जनता का भरोसा किस खजाने में जमा होता है? जब तक: समयबद्ध ट्रायल कठोर सजा संपत्ति जब्ती और स्थायी बर्खास्तगी नहीं होगी— तब तक भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं, बल्कि उसे सरकारी संरक्षण मिलता रहेगा। निष्कर्ष भ्रष्टाचार की गिरफ्तारी से सरकार की मंशा साबित नहीं होती, बल्कि भ्रष्टाचार की सजा से सुशासन साबित होता है। आज बिहार के सामने सवाल साफ़ है क्या सुशासन एक ब्रांड है, या फिर न्याय, भय और कानून पर आधारित एक वास्तविक शासन? अगर जवाब नहीं बदला, तो इतिहास लिखेगा— भ्रष्टाचार पकड़ा तो गया, पर सजा से बचा लिया गया।3
- पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का समर्पण: राष्ट्रसेवा की प्रेरणादायी गाथा डॉ मनीष भारतीय राजनीति और विचारधारा के क्षेत्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम समर्पण, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा का पर्याय है। आज पुण्यतिथि के अफसर पर उनके समर्पण दिवस पर भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा कार्यालय, गया जी में श्रद्धा और सम्मान के साथ उनका स्मरण किया गया। इस अवसर पर उनके चित्र पर माला एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें सच्चीश्रद्धांजलि दी गई तथा उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया। सर्वप्रथम भाजपा नेता डॉ. मनीष पंकज मिश्रा सहित भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य राजेन्द्र प्रसाद अधिवक्ता संतोष ठाकुर सहित पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के चित्र पर माला-पुष्प अर्पित कर नमन किया। इसके पश्चात उन्होंने कहा पंडित जी के जीवन, उनके विचार और विशेष रूप से “समर्पण” की भावना पर विस्तार से प्रकाश डाला।डॉ. मनीष पंकज मिश्रा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कभी व्यक्तिगत सुख-सुविधा, पद या प्रतिष्ठा को महत्व नहीं दिया। उनका मानना था कि राजनीति सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान का माध्यम है। इसी सोच के आधार पर उन्होंने “एकात्म मानववाद” का सिद्धांत प्रस्तुत किया, जो भारतीय संस्कृति, समाज और अर्थव्यवस्था को समग्र दृष्टि से देखने की प्रेरणा देता है। पंडित जी का समर्पण केवल विचारों तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके आचरण में भी पूर्ण रूप से दिखाई देता था। साधारण जीवन, उच्च विचार और कठोर अनुशासन उनके व्यक्तित्व की विशेषता थी। उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण संगठन निर्माण, राष्ट्र जागरण और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित किया। बिना किसी पद की लालसा के उन्होंने कार्यकर्ताओं को दिशा दी और भारतीय जनसंघ को मजबूत वैचारिक आधार प्रदान किया।इस अबसर पर भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य राजेन्द्र प्रसाद अधिवक्ता ने कहा कि आज के समय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। किसान, मजदूर, युवा और समाज के वंचित वर्गों के कल्याण के लिए उनकी सोच हमें मार्गदर्शन देती है। हर भाजपा कार्यकर्ता का दायित्व है कि पंडित जी के विचारों को जन-जन तक पहुँचाया जाए और उनके बताए रास्ते पर चलकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया जाए। संतोष ठाकुर ने कहा ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने, समाज सेवा में निष्ठा से कार्य करने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प लिया। आज के समर्पण दिवस पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने वाले में भाजपा के वरिष्ठ नेता राणा रणजीत सिंह गोपाल प्रसाद यादव मंटू कुमार बबलू गुप्ता नीरज कुमार सिन्हा हीरा यादव अभिषेक कुमार महेश यादव सहित1
- मुंह छिपाकर दूसरी शादी करने पहुंची महिला को कचहरी के बाहर पहले पति ने दबोच लिया। फिर क्या था तस्वीरें सब कुछ बयां कर रही... मोरे1
- बहुत बड़ा खुलासा हुआ NEEt छात्र जहानाबाद बिहार1
- प्रतापपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित बैंक ऑफ इंडिया के समीप लंबे समय से जर्जर अवस्था में पड़ी सड़क को समाजसेवी अशोक यादव ने मंगलवार की शाम करीब 5 बजे अपने निजी खर्च से मरम्मत कराकर एक मिसाल पेश की है। गजवा पंचायत की मुखिया पूनम कुमारी के पति एवं समाजसेवी अशोक यादव की इस पहल से स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। बताया जाता है कि सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि हल्की बारिश होते ही वह कीचड़ में तब्दील हो जाती थी। इससे बैंक आने-जाने वाले ग्राहकों, राहगीरों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। मिट्टी सूखने के बाद सड़क किनारे ऊँची मेढ़ जैसी संरचना बन गई थी, जिससे कभी भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी। जनहित की इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए समाजसेवी अशोक यादव ने जेसीबी मशीन के माध्यम से सड़क की मरम्मत करवाई। सड़क दुरुस्त होने से आवागमन सुगम हो गया है और लोगों को काफी सहूलियत मिली है। इस सराहनीय कार्य को लेकर क्षेत्र के लोगों ने समाजसेवी अशोक यादव की प्रशंसा की है और उनके इस मानवीय प्रयास को सराहा है।1
- वज़ीरगंज के सहिया गाँव में चोरी का वीडिओ1
- I am Neha pls subscribe my channel मणि.निमजा यह लड़की छोटे से होटल में बैठकर नाश्ता कर ही रही थी कि ऐसा क्या हुआ यह ट्रक के नीचे सीधा कूद गई#वायरस्रील्स1