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हमीरपुर के राठ स्थित सत्कार वाटिका में आज एक भव्य सर्व जातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य फिजूलखर्ची रोकना और गरीब परिवारों की बेटियों की शादी कराना है, जो सामाजिक एकता का अनूठा संदेश दे रहा है।
मनोज कुमार
हमीरपुर के राठ स्थित सत्कार वाटिका में आज एक भव्य सर्व जातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य फिजूलखर्ची रोकना और गरीब परिवारों की बेटियों की शादी कराना है, जो सामाजिक एकता का अनूठा संदेश दे रहा है।
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- कानपुर देहात के माती कलेक्ट्रेट कार्यालय में जिलाधिकारी कपिल सिंह द्वारा जनसुनवाई का आयोजन किया गया। जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ने जनसामान्य की विभिन्न शिकायतों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध, पारदर्शी तथा गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। प्राप्त प्रार्थना पत्रों के संबंध में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि सभी प्रकरणों का संतोषजनक निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब से बचा जाए। इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ताओं को उनके प्रकरणों के निस्तारण की प्रगति और स्थिति से समय-समय पर अवगत कराने के निर्देश भी दिए गए।1
- राजधानी लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग की घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के मद्देनज़र, प्रदेश भर में बेसमेंट और बिना फायर एनओसी के चल रहे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई का अभियान जारी है। इसी क्रम में, बुधवार को जालौन जिला प्रशासन ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे संस्थानों के खिलाफ अभियान चलाया। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह के निर्देश पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए जनपद में तहसीलवार पांच संयुक्त जांच टीमों का गठन किया गया है, जिनमें विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारी शामिल हैं। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडे ने बताया कि सबसे पहले कोचिंग संस्थानों का चिन्हांकन किया जा रहा है, और जांच में यह देखा जा रहा है कि कहां पर संस्थान बिना अनुमति के चल रहे हैं, कहां पर फायर सेफ्टी के इंतज़ाम नहीं हैं, और कौन से कोचिंग सेंटर बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं। जहां बचाव के पर्याप्त संसाधन और सुरक्षा व्यवस्था नहीं मिली, वहां के संस्थानों को सील किया जा रहा है। जिला प्रशासन की टीम ने बुधवार को जनपद के एक दर्जन से अधिक पंजीकृत कोचिंग संस्थानों की जांच की। जांच में ये सभी सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद उन्हें सील कर दिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण और सीलिंग का यह क्रम लगातार जारी रहेगा जब तक सभी अवैध और असुरक्षित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती। इसके साथ ही, प्रशासन द्वारा लोगों को जागरूक करने का कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है, जिसमें उन्हें यह बताया जा रहा है कि वे उन इमारतों में जाएं, जहां सुरक्षा उपकरण, आपातकालीन निकास और अग्निशमन प्रबंध मौजूद हों। जिला प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए यह अभियान मिशन मोड पर चलाया जा रहा है।1
- जालौन जिले के कड़ौरा थाना क्षेत्र के मनराललपुर गांव में एक घर के बगल में जानबूझकर आग लगाए जाने का मामला सामने आया है। गोलाउली पोस्ट के अंतर्गत आने वाले इस गांव में किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा यह आग इरादतन लगाई गई है।1
- एक व्यक्ति ने अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को 400 फीट गहरी खाई में धकेल कर मौत के घाट उतार दिया। यह क्रूर कृत्य इसलिए किया गया क्योंकि वह अपने बॉयफ्रेंड के साथ शादी करना चाहती थी। इस जघन्य वारदात के बाद अब सभी की यही पुकार है कि पीड़ित को न्याय मिलेगा, लेकिन सवाल यह है कि क्या वास्तव में न्याय मिलेगा?1
- जालौन जिले के आटा थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी चोरी की वारदात का 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। थाना आटा पुलिस और स्वाट/सर्विलांस की संयुक्त टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें लगभग 21 लाख रुपये मूल्य का 135 ग्राम सोने के टुकड़े (थपिया) और 97 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। इस पूरे मामले का खुलासा सीओ कालपी राजेश कमल ने किया है। जानकारी के अनुसार, 23 जून को मनोज सिंह नामक व्यक्ति ने आटा थाने में तहरीर दी थी कि उसकी माँ और बड़ी बहू के घर से सोने के टुकड़े चोरी हो गए हैं। इस सूचना पर थाना आटा में तत्काल मुकदमा पंजीकृत किया गया। पुलिस अधीक्षक जालौन विनय कुमार सिंह के पर्यवेक्षण और अपर पुलिस अधीक्षक जालौन के नेतृत्व में थाना आटा पुलिस के साथ-साथ स्वाट और सर्विलांस यूनिट के जवानों को मिलाकर एक संयुक्त टीम गठित की गई थी। गठित टीम ने 24 जून को चेकिंग के दौरान दो संदिग्ध व्यक्तियों मिठठू और अंकित द्विवेदी को गिरफ्तार किया। ये दोनों ग्राम आटा के पिपरांया के निवासी हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से 135 ग्राम सोने के दो टुकड़े (थपिया) और 97 हजार रुपये नकद बरामद किए। बरामदगी के आधार पर सभी विधिक प्रक्रियाएं पूरी करते हुए दोनों अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है।1
- राजधानी लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग की घटना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद, प्रदेशभर में बिना फायर एनओसी और बेसमेंट में चल रहे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का अभियान शुरू हो गया है। इसी कड़ी में, बुधवार को जालौन जिला प्रशासन ने भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे एक दर्जन से अधिक कोचिंग संस्थानों को सील करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। यह अभियान जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह के निर्देश पर चलाया गया। जनपद में तहसीलवार पाँच संयुक्त जांच टीमें गठित की गई हैं, जिनमें विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारी शामिल हैं। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडे ने बताया कि इन टीमों द्वारा सबसे पहले कोचिंग संस्थानों का चिन्हांकन किया जा रहा है। जाँच में यह देखा जा रहा है कि कौन से संस्थान बिना अनुमति के चल रहे हैं, कहाँ पर पर्याप्त फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं हैं, और कौन से कोचिंग सेंटर बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं। बुधवार को जिला प्रशासन की टीम ने एक दर्जन से अधिक पंजीकृत कोचिंग संस्थानों की जांच की, और सुरक्षा मानकों पर खरा न उतरने के कारण उन सभी को सील कर दिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण और सीलिंग का यह क्रम लगातार जारी रहेगा और अभियान तब तक चलेगा जब तक सभी अवैध तथा असुरक्षित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती। इसके साथ ही, प्रशासन लोगों को जागरूक करने का कार्यक्रम भी चला रहा है, जिसमें उन्हें ऐसी इमारतों में जाने की सलाह दी जा रही है जहाँ आपातकालीन निकास, अग्निशमन प्रबंध और अन्य सुरक्षा उपकरण मौजूद हों। जिला प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा, और भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए यह अभियान 'मिशन मोड' पर चलाया जा रहा है।6
- हमीरपुर जिले के सरीला विकासखंड की बरहरा ग्राम पंचायत में पिछले 15 वर्षों में कराए गए विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान के कार्यकाल के दौरान बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का दावा करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद गांव की हालत बदहाल बनी हुई है, जो विकास के दावों की पोल खोलता है। ग्रामीणों के अनुसार, नाली का निर्माण हुए महज 6 महीने ही बीते थे कि वह टूटकर ध्वस्त हो गई, वहीं सीसी रोड जगह-जगह से उखड़ चुकी है। टूटी सड़कें और कीचड़युक्त गलियां लोगों के आवागमन में बड़ी बाधा हैं, खासकर बरसात के मौसम में स्थिति और खराब हो जाती है। विशेष रूप से, तालाब के सुंदरीकरण का काम केवल कागजों पर हुआ है, जबकि मौके पर उसकी हालत जस की तस है। गौशाला के निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं, जहां पशुओं के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफाई कर्मचारी कभी गांव नहीं आता, लेकिन फिर भी भुगतान हो रहा है, और कीटनाशक छिड़काव किए बिना ही बिल पास कर भुगतान लेने का आरोप भी लगाया गया है। इस मामले में खंड विकास अधिकारी ने कहा है कि ग्रामीणों की शिकायतें उन्हें मिली हैं और इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि यदि लिखित शिकायत मिलती है तो बिंदुवार जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि विकास कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है, उनका आरोप है कि 15 साल के कार्यकाल में करोड़ों का बजट आया, लेकिन धरातल पर कोई विकास नहीं दिखता। वे पंचायत में पारदर्शिता की कमी और कार्यों की गुणवत्ता की जांच न होने पर सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "15 साल में प्रधान जी ने सिर्फ कागजों पर विकास किया। नाली 6 महीने नहीं चली, सड़कें टूटी पड़ी हैं। सफाई कर्मचारी का चेहरा तक नहीं देखा। हम डीएम से जांच की मांग करते हैं।" फिलहाल, बरहरा पंचायत में लगे इन आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी। हालांकि, ग्रामीणों की इन शिकायतों ने विकास कार्यों की गुणवत्ता और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।1
- कानपुर देहात के रुरा थाना क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर लड़ाई-झगड़े की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए शिकायत पत्र दिए। पुलिस ने इन शिकायतों पर जांच पड़ताल की। थाना प्रभारी सुधीर भारद्वाज ने बताया कि माहौल बिगाड़ने के आरोप में दो लोगों पर शांतिभंग की कार्यवाही की गई है।1
- जनपद जालौन के कदौरा विकास खंड की ग्राम पंचायत कुँआखेड़ा के मजरा दादूपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित तौर पर एक गंभीर घोटाला सामने आया है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव पर पात्र लाभार्थियों के नाम सूची से हटाने और अपात्र व्यक्तियों को योजना का लाभ देने का सीधा आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है, और उन्होंने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, दादूपुर निवासी वंदना पत्नी राजकुमार का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की पिछली पात्रता सूची में क्रमांक-04 पर दर्ज था। वंदना ने बताया कि उनके पति दिव्यांग हैं और उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है, बावजूद इसके कथित तौर पर पुरानी सूची को रद्द कर एक नई सूची जारी की गई, जिससे उनका नाम हटा दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि नई सूची में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जो योजना की पात्रता की श्रेणी में नहीं आते हैं, और योजना के चयन में पारदर्शिता नहीं बरती गई, बल्कि मनमाने ढंग से लाभार्थियों का चुनाव किया गया। राजकुमार, शिवराम, तिलक सिंह, विनोद कुमार, काशीप्रसाद, आशाराम, कुलदीप, संदीप कुमार और नीलू कुमार सहित दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर इस संबंध में अपनी शिकायत दर्ज कराई है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इस मामले की शिकायत पहले भी खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कदौरा से की जा चुकी थी, लेकिन आज तक न तो कोई जांच हुई और न ही कोई कार्रवाई की गई। इस उपेक्षा से लोगों में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति नाराजगी और बढ़ गई है। न्याय की उम्मीद में, ग्रामीण लगभग 45 से 50 किलोमीटर की दूरी तय कर उरई पहुंचे और जिलाधिकारी से इस मामले में हस्तक्षेप की गुहार लगाई। ग्रामीणों ने कई अहम सवाल उठाए हैं, जैसे कि पात्र लाभार्थियों की पुरानी सूची क्यों बदली गई, नई सूची बनाने का आधार क्या था, चयन प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या नहीं, और शिकायतों के बावजूद जांच क्यों नहीं कराई गई। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और वास्तविक पात्र लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। फिलहाल, यह मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आ चुका है, और सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या शिकायत की निष्पक्ष जांच होगी और पात्र लाभार्थियों को न्याय मिल पाएगा।1