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2 अप्रैल 2018, वो दिन था खून का, बाज़ी लगाकर 13 बेटों ने लिख दी नयी किताब। संविधान बचाने को निकले थे नंगे पाँव, मौत ने भी सलाम किया, जो शहीद हुए थे गाँव-गाँव। 2 अप्रैल 2018 को एससी एसटी एक्ट को बहाली हेतु अपने प्राण न्योछावर करने वाले इन वीर सपूतों को भावपूर्ण श्रांजलि सत् सत् नमन। 2 अप्रैल 2018, वो दिन था खून का, बाज़ी लगाकर 13 बेटों ने लिख दी नयी किताब। संविधान बचाने को निकले थे नंगे पाँव, मौत ने भी सलाम किया, जो शहीद हुए थे गाँव-गाँव। 2 अप्रैल 2018 को एससी एसटी एक्ट को बहाली हेतु अपने प्राण न्योछावर करने वाले इन वीर सपूतों को भावपूर्ण श्रांजलि सत् सत् नमन।
Vikram Meghwal
2 अप्रैल 2018, वो दिन था खून का, बाज़ी लगाकर 13 बेटों ने लिख दी नयी किताब। संविधान बचाने को निकले थे नंगे पाँव, मौत ने भी सलाम किया, जो शहीद हुए थे गाँव-गाँव। 2 अप्रैल 2018 को एससी एसटी एक्ट को बहाली हेतु अपने प्राण न्योछावर करने वाले इन वीर सपूतों को भावपूर्ण श्रांजलि सत् सत् नमन। 2 अप्रैल 2018, वो दिन था खून का, बाज़ी लगाकर 13 बेटों ने लिख दी नयी किताब। संविधान बचाने को निकले थे नंगे पाँव, मौत ने भी सलाम किया, जो शहीद हुए थे गाँव-गाँव। 2 अप्रैल 2018 को एससी एसटी एक्ट को बहाली हेतु अपने प्राण न्योछावर करने वाले इन वीर सपूतों को भावपूर्ण श्रांजलि सत् सत् नमन।
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- 2 अप्रैल 2018, वो दिन था खून का, बाज़ी लगाकर 13 बेटों ने लिख दी नयी किताब। संविधान बचाने को निकले थे नंगे पाँव, मौत ने भी सलाम किया, जो शहीद हुए थे गाँव-गाँव। 2 अप्रैल 2018 को एससी एसटी एक्ट को बहाली हेतु अपने प्राण न्योछावर करने वाले इन वीर सपूतों को भावपूर्ण श्रांजलि सत् सत् नमन।1
- फिर एक और वीडियो1
- डूंगरपुर जिले के आसपुर थाना क्षेत्र के गोल गांव में बुधवार दोपहर 3 बजे एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां निर्माणाधीन भवन की छत गिरने से एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि ठेकेदार गंभीर रूप से घायल हो गया।आसपुर थाना क्षेत्र के गोल गांव में निर्माणाधीन भवन की छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय नीचे काम कर रहे मजदूर और ठेकेदार मलबे में दब गए। सूचना मिलते ही आसपुर पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू करते हुए दोनों को मलबे से बाहर निकाला। घायलों को तुरंत आसपुर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मजदूर लक्ष्मण को मृत घोषित कर दिया। शव को अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। वहीं हादसे में गंभीर रूप से घायल ठेकेदार सूरजमल पुत्र टीकम मीणा निवासी विजयमाता खेड़ा को प्राथमिक उपचार के बाद डूंगरपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका इलाज जारी है। वीडियो निर्माणाधीन भवन गिरी छत व घायल ठेकेदार का अस्पताल चलता इलाज1
- डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा नगर पालिका में उस समय हंगामे की स्थिति बन गई जब पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष आशीष गांधी और पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष के पुत्र इरफान शेख के बीच विवाद बढ़ गया, जानकारी के अनुसार मामूली कहासुनी के चलते मामला इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई, बताया जा रहा है कि आशीष गांधी कार्यकाल समाप्त होने के बाद नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी सोहील शेख के कार्यालय में मौजूद थे, इसी दौरान ठेकेदारी से जुड़े भुगतान के सिलसिले में इरफान शेख वहां पहुंचे थे, जहां बातचीत के दौरान विवाद हो गया और देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई, घटना के बाद इरफान शेख के गले पर हाथापाई के निशान और टी-शर्ट फटी हुई हालत में वे पुलिस थाना सागवाड़ा पहुंचे और कार्रवाई की मांग की, वहीं विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार आशीष गांधी ने भी इस मामले में थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है, फिलहाल मामला पुलिस के संज्ञान में है और सागवाड़ा क्षेत्र में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।1
- Post by Dhruv Banjara1
- Post by Bapulal Ahari1
- मध्य प्रदेश में आयोजित युवा विधायक सम्मेलन में धरियावद विधायक थावरचंद डामोर ने सदन में किया संबोधन।1
- लोडेश्वर बांध क्षेत्र में ठेकेदारों पर ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप, कार्रवाई की मांग डूंगरपुर जिले के ओबरी थाना क्षेत्र अंतर्गत लोडेश्वर बांध इलाके में मछली ठेकेदारों के खिलाफ ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मटूवेट निवासी लक्ष्मण मीणा और कालू मीणा सहित कई ग्रामीणों ने शिकायत प्रस्तुत कर बताया कि डूंगरपुर निवासी तोसिन पठान और दिल्ली निवासी परवेश पठान, जो मत्स्य विभाग के तहत लोडेश्वर बांध पर ठेकेदार के रूप में कार्यरत हैं, क्षेत्र में भय और आतंक का माहौल बना रहे हैं। शिकायत के अनुसार लोडेश्वर, रंगथोर, गड़ा वेजणिया, बरबोदनिया, छः महूड़ी, मटूवेट और रातड़िया गांवों के किसान अपनी खातेदारी भूमि पर खेती करते हैं और फसल की देखरेख के लिए नियमित रूप से आते-जाते रहते हैं। इस दौरान आरोप है कि दोनों ठेकेदार ग्रामीणों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं, अश्लील गालियां देते हैं और महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार उन्हें बांध के पास आने से रोकते हैं और जान से मारने की धमकियां तक देते हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार पत्थरबाजी करते हैं और कहते हैं कि उन्होंने पुलिस को “खरीद लिया है”, जिससे ग्रामीणों में भारी भय का माहौल है। इस कारण किसान अपनी ही जमीन पर जाने से डर रहे हैं और खेती कार्य प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें तत्काल हटाकर किसी अन्य ठेकेदार को नियुक्त किया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो सभी प्रभावित गांवों के लोग मिलकर बड़ा जन आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। फिलहाल इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।1