Shuru
Apke Nagar Ki App…
ऑटो चालकों के लिए यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, यातायात नियमों एवं यात्रियों की सुरक्षा के प्रति किया जागरूक
अजय कुमार केवट
ऑटो चालकों के लिए यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, यातायात नियमों एवं यात्रियों की सुरक्षा के प्रति किया जागरूक
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- ऑटो चालकों के लिए यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, यातायात नियमों एवं यात्रियों की सुरक्षा के प्रति किया जागरूक1
- शहडोल: ऑटो चालकों के लिए यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, यात्रियों की सुरक्षा के प्रति किया गया जागरूक शहडोल: दिनांक 12 सितंबर 2026 को पुलिस अधीक्षक शहडोल डॉ. संजय कुमार अग्रवाल के निर्देशन में यातायात थाना परिसर में ऑटो चालकों के लिए यातायात जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ऑटो संघ के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ऑटो चालक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य बिंदु एवं निर्देश: अनिवार्य पंजीयन और पहचान पत्र: कार्यक्रम के दौरान ऑटो चालकों को थाना यातायात में अनिवार्य रूप से पंजीयन करवाकर थाना यातायात द्वारा जारी ऑटो क्रमांक प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। शहरी एवं ग्रामीण ऑटो के लिए पृथक-पृथक मोनो जारी किया जाएगा और ऑटो चालकों हेतु पहचान पत्र भी जारी किया जाएगा। थाना यातायात में ऑटो का पंजीयन अनिवार्य है, अन्यथा की स्थिति में वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पार्किंग और दस्तावेज: शहर में निर्धारित स्थानों पर ऑटो पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। सभी ऑटो चालकों को निर्देशित किया गया कि वे ऑटो के सभी आवश्यक दस्तावेज पूर्ण एवं वैध रखें तथा यातायात नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करें। यात्रियों की सुरक्षा और सहयोग: यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निर्धारित नियमों के अनुरूप वाहन चलाने एवं यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की गई। सुरक्षा एवं संदिग्ध गतिविधियों की सूचना: ऑटो चालकों को यह भी निर्देश दिए गए कि किसी संदिग्ध व्यक्ति अथवा गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित पुलिस अधिकारी अथवा थाने को सूचना दें, जिससे समय रहते आवश्यक पुलिस कार्रवाई की जा सके। समस्याओं का निराकरण: ऑटो चालकों द्वारा दस्तावेज संबंधी समस्याओं से अवगत कराने पर यातायात पुलिस द्वारा आश्वस्त किया गया कि उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए कलेक्टर एवं क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी से चर्चा कर आवश्यकतानुसार शिविर आयोजित कराने का प्रयास किया जाएगा। अंत में, यातायात पुलिस द्वारा ऑटो संघ एवं चालकों से यातायात नियमों का पालन करते हुए यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित यातायात व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने की विशेष अपील की गई।1
- शिक्षा के सफ़र में खतरे में जिंदगी, शंभूनाथ विश्वविद्यालय के 52 सीटर बस में 100-100 छात्र... कोई सीट के लिए जूझ रहा है तो कोई बस के गेट पर लटककर सफर करने को मजबूर1
- 24 घंटे हो गए हैं जानवर को कैद किए हुए सिंहपुर और शहडोल के बीच में पडमनिया गांव गाय को कल से कैद कर के रखे हैं जब की बगल मे गौशाला है पुलिस प्रशासन और प्रशासन इस पर ध्यान दीजिए जिससे गौ माता को सुरक्षित जगह पहुंचा कर जिससे गौ माताओ को खाने पीने की व्यवस्था हो सके 24 घंटे हो गए हैं जानवर को कैद किए हुए सिंहपुर और शहडोल के बीच में पडमनिया गांव गाय को कल से कैद कर के रखे हैं जब की बगल मे गौशाला है पुलिस प्रशासन और प्रशासन इस पर ध्यान दीजिए जिससे गौ माता को सुरक्षित जगह पहुंचा कर जिससे गौ माताओ को खाने पीने की व्यवस्था हो सके1
- चीफ रिपोर्टर योगेश कुमार वर्मन संभाग शहडोल जिला शहडोल मप्र नयाटोला स्कूल में मेरे को बहुत कमियां समझ में आई जिसमें से खाने का व्यवस्था नहीं था वहां बच्चों के लिए कोई व्यवस्था किया गया नहीं था यानी वहां के जो सचिव हैं उनका फोन बंद आ रहा था मैं गया वहां कॉल किया उनको तो पूरी लापरवाही चल रही है वहां समूह वालों की जो सचिव है विजय यादव... उनके द्वारा लापरवाही बढ़ते जा रही है खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं हैं शासकीय प्राथमिक विद्यालय नयाटोला. जैतपुर चीफ रिपोर्टर योगेश कुमार वर्मन संभाग शहडोल जिला शहडोल मप्र नयाटोला स्कूल में मेरे को बहुत कमियां समझ में आई जिसमें से खाने का व्यवस्था नहीं था वहां बच्चों के लिए कोई व्यवस्था किया गया नहीं था यानी वहां के जो सचिव हैं उनका फोन बंद आ रहा था मैं गया वहां कॉल किया उनको तो पूरी लापरवाही चल रही है वहां समूह वालों की जो सचिव है विजय यादव... उनके द्वारा लापरवाही बढ़ते जा रही है खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं हैं शासकीय प्राथमिक विद्यालय नयाटोला. जैतपुर1
- ऑटो चालकों के लिए यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, यातायात नियमों एवं यात्रियों की सुरक्षा के प्रति किया जागरूक शहडोल, 12 सितंबर 2026 पुलिस अधीक्षक शहडोल डॉ. संजय कुमार अग्रवाल के निर्देशन में आज दिनांक 12 सितंबर 2026 को यातायात थाना परिसर में ऑटो चालकों के लिए यातायात जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ऑटो संघ के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ऑटो चालक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान ऑटो चालकों को यातायात नियमों, यात्रियों की सुरक्षा एवं आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में विस्तार से जागरूक किया गया। यातायात पुलिस द्वारा निर्देशित किया गया कि - सभी ऑटो चालक थाना यातायात में अनिवार्य रूप से पंजीयन कराकर थाना यातायात द्वारा जारी ऑटो क्रमांक प्राप्त करेंगे। शहरी एवं ग्रामीण ऑटो के लिए पृथक-पृथक मोनो जारी किया जावेगा। ऑटो चालकों हेतु पहचान पत्र जारी किया जाएगा। थाना यातायात में ऑटो का पंजीयन अनिवार्य है, अन्यथा वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। साथ ही शहर में निर्धारित स्थानों पर ऑटो पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। ऑटो चालकों को निर्देशित किया गया कि ऑटो के सभी आवश्यक दस्तावेज़ पूर्ण एवं वैध रखें तथा यातायात नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करें। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निर्धारित नियमों के अनुरूप वाहन संचालित करने एवं यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की गई। ऑटो चालकों को यह भी निर्देश दिए गए कि किसी संदिग्ध व्यक्ति अथवा गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित पुलिस अधिकारी अथवा थाना को सूचना दें, जिससे समय रहते आवश्यक पुलिस कार्रवाई की जा सके। कार्यक्रम के दौरान ऑटो चालकों द्वारा दस्तावेज़ संबंधी समस्याओं से अवगत कराने पर यातायात पुलिस द्वारा बताया गया कि उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए कलेक्टर एवं क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी से चर्चा कर आवश्यकतानुसार शिविर आयोजित कराने का प्रयास किया जाएगा। अंत में यातायात पुलिस द्वारा ऑटो संघ एवं चालकों से यातायात नियमों का पालन करते हुए यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित यातायात व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने की अपील की गई।3
- मध्य प्रदेश का उमरिया जिला के अधिकतर गांव में अवैध मुरूम खनन का खेल, हम बात कर रहे हैं उमरिया जिले के जनपद पंचायत पाली अंतर्गत ग्राम बरबस पुर की जहां NH43 में ओवर ब्रिज के काम के लिए हफ्तों से बिना खनिज विभाग के परमीशन के राजस्व भूमि से पोकलेन से धरती का सीना चीरते हुए लाल मुरुम निकालने का काम चल रहा था , और सूचना के बाद भी खनिज विभाग और पाली का राजस्व विभाग सोया रहा है बिरसिंहपुर --पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बरबसुर में पोकलेन मशीन और बड़े बड़े हाईवा से मुरूम का अवैध उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से चल रहा है। खनिज माफिया ठेकेदार बेखौफ होकर रात-दिन मुरूम निकालकर खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शिकायत के बावजूद मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध खनन को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण मिल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरबसुर के ग्रामीणों ने शनिवार को पोकलेन मशीन से हो रहे अवैध मुरूम उत्खनन और बड़े बड़े हाईवा ट्रकों से हो रहे परिवहन की सूचना जिला माइनिंग अधिकारी एवं माइनिंग क्षेत्र अधिकारी पाली के राजस्व अधिकारियों को फोन पर दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले को दिखवाया जाएगा और जल्द-से-जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल तब खुल गई, जब फोन लगाने के 8 से 10 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग का कोई अमला या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि दिन-दहाड़े पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम का उत्खनन करते हैं। खनन स्थल से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों हाईवा के माध्यम से मुरूम का परिवहन भी निरंतर जारी है। अवैध खनन से गांव के आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, खनन के कारण गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायत करने की सोची, लेकिन खनन माफियाओं के दबदबे के चलते लोग सामने आने से डरते हैं। उल्लेखनीय है कि मुरूम खनन के लिए शासन से खनन पट्टा या अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के मुरूम निकालना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई से कतराते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब शिकायत के घंटों बाद तक विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आखिर कब पहुंचेगा? क्या विभाग अवैध खननकर्ताओं को खुली छूट दे रहा है? ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि पोकलेन जैसी बड़ी मशीन से घंटों खनन होता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह अपने आप में संदेहास्पद है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। इधर, इस संबंध में जब जिला माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन तो पहले भी मिला था, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर को शिकायत करने को बाध्य होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मुरूम खनन से न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा होता है। मध्य प्रदेश का उमरिया जिला के अधिकतर गांव में अवैध मुरूम खनन का खेल, हम बात कर रहे हैं उमरिया जिले के जनपद पंचायत पाली अंतर्गत ग्राम बरबस पुर की जहां NH43 में ओवर ब्रिज के काम के लिए हफ्तों से बिना खनिज विभाग के परमीशन के राजस्व भूमि से पोकलेन से धरती का सीना चीरते हुए लाल मुरुम निकालने का काम चल रहा था , और सूचना के बाद भी खनिज विभाग और पाली का राजस्व विभाग सोया रहा है बिरसिंहपुर --पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बरबसुर में पोकलेन मशीन और बड़े बड़े हाईवा से मुरूम का अवैध उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से चल रहा है। खनिज माफिया ठेकेदार बेखौफ होकर रात-दिन मुरूम निकालकर खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शिकायत के बावजूद मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध खनन को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण मिल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरबसुर के ग्रामीणों ने शनिवार को पोकलेन मशीन से हो रहे अवैध मुरूम उत्खनन और बड़े बड़े हाईवा ट्रकों से हो रहे परिवहन की सूचना जिला माइनिंग अधिकारी एवं माइनिंग क्षेत्र अधिकारी पाली के राजस्व अधिकारियों को फोन पर दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले को दिखवाया जाएगा और जल्द-से-जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल तब खुल गई, जब फोन लगाने के 8 से 10 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग का कोई अमला या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि दिन-दहाड़े पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम का उत्खनन करते हैं। खनन स्थल से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों हाईवा के माध्यम से मुरूम का परिवहन भी निरंतर जारी है। अवैध खनन से गांव के आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, खनन के कारण गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायत करने की सोची, लेकिन खनन माफियाओं के दबदबे के चलते लोग सामने आने से डरते हैं। उल्लेखनीय है कि मुरूम खनन के लिए शासन से खनन पट्टा या अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के मुरूम निकालना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई से कतराते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब शिकायत के घंटों बाद तक विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आखिर कब पहुंचेगा? क्या विभाग अवैध खननकर्ताओं को खुली छूट दे रहा है? ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि पोकलेन जैसी बड़ी मशीन से घंटों खनन होता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह अपने आप में संदेहास्पद है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। इधर, इस संबंध में जब जिला माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन तो पहले भी मिला था, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर को शिकायत करने को बाध्य होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मुरूम खनन से न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा होता है। खनन के बाद गड्ढे खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे बारिश के मौसम में जान-माल का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में जरूरत है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाए।4
- *💥स्वास्थ्य मंत्री जी, बयान नहीं… आदेश चाहिए!* आप सत्ता में हैं, अधिकार आपके पास है। यदि सरकारी डॉक्टरों द्वारा निजी अस्पतालों में निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की नीति है, तो फिर सवाल यह है कि पिछले 5 वर्षों में 15 से अधिक निजी क्लीनिक शहडोल जिले में कैसे अस्तित्व में आ गए...? डॉक्टर कॉलोनी में गायत्री मंदिर से लेकर आसपास के 500 मीटर के दायरे में इतने सारे क्लिनिक क्या प्राइवेट चिकित्सकों के खुले हैं...? जिस अस्पताल कॉलोनी में सरकारी डॉक्टरों के रहने की व्यवस्था है, वहीं सुबह से शाम तक मरीजों की भीड़ क्यों दिखाई देती है? क्या सरकारी आवास निजी क्लीनिक चलाने की जगह बन गए हैं...? *मंत्री जी,भाषणों और बयानों से स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं सुधरेगी।* एक बार स्पष्ट आदेश जारी करके सख्ती से पालन कराइए—फिर देखिए कि व्यवस्था खुद इलाज मांगती है या मरीजों को ही इलाज के लिए भटकना पड़ता है। *जनता जवाब चाहती है—बयान नहीं, कार्रवाई चाहिए।* *💥स्वास्थ्य मंत्री जी, बयान नहीं… आदेश चाहिए!* आप सत्ता में हैं, अधिकार आपके पास है। यदि सरकारी डॉक्टरों द्वारा निजी अस्पतालों में निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की नीति है, तो फिर सवाल यह है कि पिछले 5 वर्षों में 15 से अधिक निजी क्लीनिक शहडोल जिले में कैसे अस्तित्व में आ गए...? डॉक्टर कॉलोनी में गायत्री मंदिर से लेकर आसपास के 500 मीटर के दायरे में इतने सारे क्लिनिक क्या प्राइवेट चिकित्सकों के खुले हैं...? जिस अस्पताल कॉलोनी में सरकारी डॉक्टरों के रहने की व्यवस्था है, वहीं सुबह से शाम तक मरीजों की भीड़ क्यों दिखाई देती है? क्या सरकारी आवास निजी क्लीनिक चलाने की जगह बन गए हैं...? *मंत्री जी,भाषणों और बयानों से स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं सुधरेगी।* एक बार स्पष्ट आदेश जारी करके सख्ती से पालन कराइए—फिर देखिए कि व्यवस्था खुद इलाज मांगती है या मरीजों को ही इलाज के लिए भटकना पड़ता है। *जनता जवाब चाहती है—बयान नहीं, कार्रवाई चाहिए।*1