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ग्रामीण अंचल में रास्तों को लेकर अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती है, जिस पर शासन-प्रशासन को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। ग्रामीणों ने अपील की है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों के रास्तों पर पर्याप्त ध्यान दिया जाए, तो इससे विवाद उत्पन्न नहीं होंगे। उनका मानना है कि ऐसा होने पर लोग आपस में बेहतर समन्वय स्थापित कर सकेंगे, जिससे समाज का सौहार्दपूर्ण माहौल भी बिगड़ने से बचेगा।
Arun Lodhi
ग्रामीण अंचल में रास्तों को लेकर अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती है, जिस पर शासन-प्रशासन को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। ग्रामीणों ने अपील की है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों के रास्तों पर पर्याप्त ध्यान दिया जाए, तो इससे विवाद उत्पन्न नहीं होंगे। उनका मानना है कि ऐसा होने पर लोग आपस में बेहतर समन्वय स्थापित कर सकेंगे, जिससे समाज का सौहार्दपूर्ण माहौल भी बिगड़ने से बचेगा।
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- पवई विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी 'मन की बात' कार्यक्रम को 31 मई को सुनने के लिए जनता से अपील की है। उन्होंने आह्वान किया है कि यह कार्यक्रम जन-जन तक पहुँचे। विधायक ने पार्टी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों, दोनों से इस पहल में सक्रिय सहभागिता करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि देशहित से जुड़े मुद्दों और प्रेरणादायक विचारों को सुनने के लिए अधिक से अधिक लोगों को इस कार्यक्रम से जुड़ना चाहिए।1
- कटनी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का आक्रोश चरम पर पहुँच गया है, जिसके चलते शुक्रवार को मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला सचिव हरप्रीत लक्की सिंह के नेतृत्व में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, कटनी ने अधीक्षक भू अभिलेख अधिकारी को कलेक्टर आशीष तिवारी के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले 20 दिनों के भीतर उनकी लंबित और जायज मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो प्रदेश भर के 32 हजार संविदा कर्मचारी चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। ज्ञापन सौंपते हुए संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत 32 हजार संविदा कर्मचारी मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने में रात-दिन निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। इन्हीं कर्मचारियों की कड़ी मेहनत के कारण मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत किया गया है, बावजूद इसके सरकार द्वारा लगातार उनके हितों की अनदेखी की जा रही है। कर्मचारियों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि माननीय मुख्यमंत्री की उपस्थिति में उनकी मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन एक वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी शासन स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे प्रदेश भर के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। संविदा कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री द्वारा 30 जनवरी 2026 को दशहरा मैदान (टी.टी. नगर) में आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में की गई घोषणा के अनुसार तत्काल नियमितीकरण शामिल है। इसके अतिरिक्त, वे सामान्य प्रशासन विभाग की 2023 की नीति के तहत एन.पी.एस. (NPS) और स्वास्थ्य बीमा का लाभ, अन्य राज्यों की तर्ज पर प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की वार्षिक वेतनवृद्धि, नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता (DA), सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के वेतन में पी.बी.आई. (PBI) का समायोजन और पूर्व की तरह इंडिकेटर लागू करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों ने शासन द्वारा किए गए समकक्षता (वेतन विसंगति) के गलत निर्धारण पर तुरंत पुनर्विचार कर संशोधन करने और नियमित कर्मचारियों की तरह सभी अवकाश स्वीकृत करने की भी मांग की है। साथ ही, जब तक 'समान कार्य-समान वेतन' और समान सुविधाएँ नहीं मिल जातीं, तब तक 'सार्थक ऐप' के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था बंद करने की अपील की गई है। कर्मचारियों ने बताया कि 02 जून से वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे और इस दिन से जिले के सभी कर्मचारी विभाग द्वारा दिए गए सभी प्रकार के ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यों का पूर्णतः बहिष्कार करेंगे। संघ ने ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट किया है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार के उदासीन रवैये के कारण वे आंदोलन के लिए विवश हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 2 जून से स्वास्थ्य सुविधाएँ ठप होती हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।1
- तमिलनाडु की जनता ने अपने आने वाले पांच साल के लिए एक सुनहरा भविष्य चुना है, जहाँ मुख्यमंत्री एक्टर विजय थलपति जी ने कई योजनाओं की शुरुआत की है। इन योजनाओं का सीधा लाभ गरीब और आम जनता को मिलेगा, जिससे आने वाले पांच सालों में काफी बचत होगी। यह बचत प्रदेश को और मजबूत करेगी, जिससे आम परिवारों का जीवन सुखमय होगा।1
- जनपद पंचायत पटेरा की तिदनी ग्राम पंचायत में पंचायत द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि 15वें वित्त आयोग की राशि से बनाई जा रही पुलियों में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार किया जा रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता नियमों को ताक पर रखकर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पुलिया निर्माण में मजबूत बेस की जगह सीधे मिट्टी भर दी गई है, और ऊपरी हिस्से में गिट्टी तथा सीमेंट की मात्रा भी बेहद कम है। आरोप है कि रेत और गुणवत्तायुक्त सामग्री के बजाय नाले से निकला बजरीनुमा मटेरियल इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ये पुलियाएँ शुरुआत से ही कमजोर दिख रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलियों की हालत इतनी खराब है कि अभी से ही वाहन गुजरने पर निर्माण धंसने लगा है। ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की है कि बरसात शुरू होते ही ये पुलियाएँ जवाब दे सकती हैं, जिससे गाँव का संपर्क प्रभावित होने का गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा। पुलियों के किनारों पर बनाई गई पट्टियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं; आरोप है कि कहीं पट्टी छोटी बनाई गई तो कहीं निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया, और लंबाई-चौड़ाई में भी कोई एकरूपता नहीं है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण के बाद नियमानुसार तराई तक नहीं की गई, जिससे सीमेंट अपनी पकड़ नहीं बना पा रहा है। उनका कहना है कि पंचायत स्तर पर खुलेआम गुणवत्ता विहीन काम कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है और सरपंच-सचिव अपनी मनमानी से निर्माण करा रहे हैं। इस मामले को लेकर जब उप यंत्री रोहित नायक से चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि यदि कुछ ऐसा है तो उन्हें समझ नहीं आया है, लेकिन वे स्वयं जाकर देखेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर इस तरह की गड़बड़ी मिली तो इन कार्यों का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। अब ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। पंचायत के निर्माण कार्यों पर उठे इन सवालों ने गाँव में विकास कार्यों की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।1
- राजस्थान के चूरू जिले में एक भीषण धूल भरी आंधी और रेत के बवंडर ने ऐसा कहर बरपाया कि दोपहर में ही आसमान पर घना अंधेरा छा गया, जिससे माहौल पूरी तरह रात जैसा लगने लगा। स्थानीय लोगों के अनुसार, अचानक से तेज हवाएं चलने लगीं और देखते ही देखते रेत का एक विशाल गुबार पूरे इलाके में फैल गया, जिसने कुछ ही मिनटों के भीतर दिन के उजाले को पूरी तरह निगल लिया। यह भयंकर रेत का बवंडर 50 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से आया है, जिसने गंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ़, चूरू और सीकर सहित राजस्थान के कई जिलों को प्रभावित किया है। इस तूफानी मौसम के कारण इन क्षेत्रों में हल्की बारिश भी हो रही है, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।1
- ग्रामीण अंचल में रास्तों को लेकर अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती है, जिस पर शासन-प्रशासन को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। ग्रामीणों ने अपील की है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों के रास्तों पर पर्याप्त ध्यान दिया जाए, तो इससे विवाद उत्पन्न नहीं होंगे। उनका मानना है कि ऐसा होने पर लोग आपस में बेहतर समन्वय स्थापित कर सकेंगे, जिससे समाज का सौहार्दपूर्ण माहौल भी बिगड़ने से बचेगा।1
- पन्ना कुआँ हादसे के बाद अब पीड़ित परिवारों पर बीमारियों का कहर टूट पड़ा है, जिससे बिहरपुरवा गाँव में हड़कंप मच गया है। भीषण गर्मी, भूख-प्यास और मानसिक तनाव के कारण एक ही परिवार के कई सदस्यों की तबीयत बिगड़ गई है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थिति को देखते हुए बिहरपुरवा गाँव में 24 घंटे एक मेडिकल टीम तैनात की गई है और अजयगढ़ अस्पताल में बीमारों का इलाज जारी है।1
- दमोह जिले में सड़क सुरक्षा समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक हाल ही में संपन्न हुई, जिसमें जिला कलेक्टर श्री यादव ने कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए। बैठक के दौरान, कलेक्टर ने संबंधित एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे सड़क पर रोड मार्किंग, चेतावनी संकेतों की स्थापना और सुरक्षा से संबंधित अन्य सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अवश्य पूरा करें।1
- पन्ना-अमानगंज मार्ग पर मिट्टी से लदी एक ट्रॉली पलट गई, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया। इस घटना में ट्रॉली का चालक बाल-बाल बच गया और कोई जनहानि नहीं हुई।1