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रात में जगमगाएगा कालिंजर किला! | ₹2.58 करोड़ की लाइटिंग | Banda News 2026 | बड़ी खबर बांदा के ऐतिहासिक कालिंजर किले के पर्यटन विकास के लिए वॉल इल्यूमिनेशन यानी विशेष लाइटिंग का टेंडर जारी हुआ है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹2.58 करोड़ बताई गई है। इससे किले को रात में आकर्षक रूप देने और पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी है।
Dilip Kumar Bharti
रात में जगमगाएगा कालिंजर किला! | ₹2.58 करोड़ की लाइटिंग | Banda News 2026 | बड़ी खबर बांदा के ऐतिहासिक कालिंजर किले के पर्यटन विकास के लिए वॉल इल्यूमिनेशन यानी विशेष लाइटिंग का टेंडर जारी हुआ है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹2.58 करोड़ बताई गई है। इससे किले को रात में आकर्षक रूप देने और पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी है।
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- रात में जगमगाएगा कालिंजर किला! | ₹2.58 करोड़ की लाइटिंग | Banda News 2026 | बड़ी खबर बांदा के ऐतिहासिक कालिंजर किले के पर्यटन विकास के लिए वॉल इल्यूमिनेशन यानी विशेष लाइटिंग का टेंडर जारी हुआ है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹2.58 करोड़ बताई गई है। इससे किले को रात में आकर्षक रूप देने और पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी है।1
- विद्युत उपकेंद्र की छत टपकी, कंट्रोल-रूम में पानी फैला:कर्मचारी जान जोखिम में डालकर कर रहे काम, मरम्मत की मांग विद्युत उपकेंद्र की छत टपकी, कंट्रोल-रूम में पानी फैला:कर्मचारी जान जोखिम में डालकर कर रहे काम, मरम्मत की मांग तिंदवारी पिछले एक सप्ताह से ज्यादा दोनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच तिंदवारी पपरेंदा मार्ग पर स्थित बिजली सब स्टेशन के परिसर पानी से भर गया। छत से पानी टपकने के कारण बिजली उपकरणों के पास नमी बढ़ गई है, जिससे शॉर्ट सर्किट और करंट फैलने का खतरा पैदा हो गया है। इसके बावजूद संविदाकर्मी जोखिम उठाकर ड्यूटी करने को मजबूर हैं। बारिश के चलते उपकेंद्र के कंट्रोल रूम की छत से लगातार पानी टपक रहा है। फर्श पर कई स्थानों पर पानी जमा हो गया है। स्विच, कंट्रोल पैनल और अन्य विद्युत उपकरणों के आसपास नमी बढ़ने से किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका जताई जा रही है।संविदा विद्युत कर्मियों का कहना है कि उपकेंद्र की हर बरसात में छत टपकती है। इस समस्या की कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक मरम्मत नहीं कराई गई। कर्मचारियों के अनुसार, उन्हें जान जोखिम में डालकर ऐसे माहौल में काम करना पड़ रहा है, जहां जरा सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। बिजली आपूर्ति पर भी मंडरा रहा खतरा स्थानीय लोगों ने भी स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि कंट्रोल रूम में शॉर्ट सर्किट हो गया तो पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। साथ ही ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।विद्युत कर्मियों ने उपकेंद्र भवन की तत्काल मरम्मत कराने और कंट्रोल रूम को सुरक्षित बनाने की मांग की है। उन्होंने बरसात के मौसम में वैकल्पिक व्यवस्था करने की भी अपील की है, ताकि बिजली आपूर्ति निर्बाध बनी रहे और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।1
- मोर्चा पार्टी ने रेल रोको आंदोलन किया सतना । भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने बिरौली रेलवे फाटक पर बन रहे ओवर ब्रिज के विलंब होने पर आक्रोश जताते हुए बिरौली ओवर ब्रिज के सम रेल रोको आंदोलन किया रेलवे पटरी पर जाने से पूर्व ही रॉक लिया गया । इ स मौके पर मोर्चा के पदाधिकारी ने नारेबाजी की साथ ही तहसीलदार को बुलाने की मांग की जिस पर तहसीलदार आंदोलन स्थल पर पहुंचे और उन्होंने आंदोलन कारी को आश्वासन दिया कि आंदोलन समाप्त कीजिए हम आपकी मांगे उचित रूप से पूरी करेंगे । आंदोलन का नेतृत्व पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ एसके त्रिपाठी ने किया इस अवसर पर पार्टी के गंगा विश्वकर्मा जिला उपाध्यक्ष विष्णु सोनी नितिन मिश्रा संजीव शर्मा विष्णु गुप्ता रवि शंकर यादव दिलीप बुनकर मनोज सोनकर गंगा विश्वकर्मा अनूप सतनाहा शशांक यादव पंकज उपाध्याय सहित दर्जनों लोग शामिल रहे ।1
- बिरहुली रेलवे ब्रिज को लेकर भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने सौंपा ज्ञापन, रेलवे ने कहा—हमारी ओर से काम पूरा, PWD की ओर से विलंब सतना, 01 सितंबर 2026। बिरहुली ब्रिज एवं सेमरिया रोड क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही आवागमन की समस्या को लेकर भारतीय जन मोर्चा पार्टी के नेतृत्व में आज जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्रवासियों की समस्याओं के तत्काल समाधान की मांग की गई। पार्टी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि बिरहुली रेलवे ब्रिज का निर्माण लंबे समय से अधूरा पड़ा है तथा रेलवे फाटक बंद होने के कारण क्षेत्र के ग्रामीणों, विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों, मरीजों एवं आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को आवागमन के लिए अनावश्यक रूप से लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। ज्ञापन सौंपने के दौरान रेलवे के अधिकारी से चर्चा में स्पष्ट किया गया कि रेलवे की ओर से ब्रिज से संबंधित कार्य पूरा किया जा चुका है। अधिकारी के अनुसार वर्तमान में विलंब PWD (लोक निर्माण विभाग) की ओर से होने के कारण ब्रिज का काम पूर्ण रूप से जनता के आवागमन के लिए शुरू नहीं हो पा रहा है। भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने मांग की कि रेलवे और PWD के बीच समन्वय कर जिम्मेदारी तय की जाए और जो भी कार्य शेष है उसे युद्धस्तर पर पूरा कराया जाए। पार्टी की प्रमुख मांगें बिरहुली रेलवे ब्रिज का निर्माण तत्काल पूर्ण कराकर आम जनता के लिए खोला जाए। निर्माण पूरा होने तक रेलवे फाटक शीघ्र खोलने अथवा सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था की जाए। निर्माण कार्य में हुई देरी एवं लापरवाही की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों/एजेंसी की जवाबदेही तय की जाए। प्रशासन द्वारा समयबद्ध कार्ययोजना जारी कर क्षेत्रवासियों को इसकी जानकारी दी जाए। रेलवे एवं PWD के बीच समन्वय स्थापित कर समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। पार्टी ने प्रशासन से मांग की कि यह मामला केवल एक सड़क या ब्रिज का नहीं, बल्कि हजारों लोगों के रोजमर्रा के आवागमन, समय, सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा विषय है। इसलिए इसे प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द समाधान कराया जाए। भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो पार्टी क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से आगे की लड़ाई लड़ेगी।1
- बांदा उ.प्र अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आवाह्न पर व उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष माननीय अजय राय पूर्व मंत्री के निर्देशन पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित के नेतृत्व में भेदभाव के खिलाफ लड़ने पर राहुल गांधी के खिलाफ संघी ने जो FIR कराई है वह राजनैतिक द्वेष भाव से पूर्ण है, कांग्रेस पार्टी इसको अनैतिक व अनुचित मानते हुए इसका विरोध करती है। भाजपा-संघ को उखाड़े बिना भेदभाव, छुआछूत और अपमान से आजादी नहीं मिलेगी। इस विषय को लेकर जिला कांग्रेस कार्यालय से लेकर रेलवे स्टेशन तक विरोध प्रदर्शन किया गया। बांदा कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने मीडिया से रूबरू होते हुए बतलाया कि "जननेता राहुल गांधी पर FIR हो गई है, पता है क्यूँ क्योंकि उन्होंने देश के सीनियर दलित नेता के साथ हुए जातिगत भेदभाव पर आरएसएस और भाजपा को नंगा किया था! उन्होंने हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण के बाद मंच के जातिगत आधार पर शुद्धिकरण का विरोध किया था। क्या अब संघियों–भाजपाइयों के राज में भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ लड़ाई लड़ना भी अपराध हो चुका है? ये संघी ये भूल रहे हैं कि आजादी से पहले जो गांधी जी व दलितों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ते थे, आज आजादी के 79 साल बाद उसी गांधी के वंशज राहुल गांधी को दलितों के सम्मान की लड़ाई लड़ने के बदले मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन ये राहुल गांधी है, ये फ्लावर नहीं फायर है अगर इन्होंने ठान लिया है तो देश को संघी भेदभाव जातिगत छुआछूत से आजादी दिला कर ही रहेंगे। और यह आजादी कब मिलेगी जब इस देश से बीजेपी और आरएसएस जड़ से उखड़ जाएगा। क्योंकि जब तक इस देश में आरएसएस और भाजपा रहेगी, तब तक इस देश के दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और महिलाओं को इंसाफ किसी कीमत पर नहीं मिल सकता। अगर शोषितों और वंचितों को भेदभाव और छुआछूत से आजादी चाहिए, अगर समानता और सम्मान के साथ जीने का अधिकार चाहिए तो सबसे पहले भाजपा औऱ संघ को उखाड़ना होगा। क्योंकि सारी बुराईयों, कुरीतियों और पाखंड की जड़ संघी और भाजपाई हैं। आप खुद सोचिए कि जब इस देश में राज्यसभा के नेता विपक्ष भेदभाव और छुआछूत से सुरक्षित नहीं है तो आम गरीब जनता की बात क्या ही करें। दलितों के प्रति संघियों की घृणा का अंदाजा इस बात से लगा लीजिए कि बीते दिनांक 08 अगस्त 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी एक जनसभा को संबोधित करने के लिए उत्तराखंड के हल्द्वानी गए थे। यहां एक रामलीला मंच पर जनसभा को संबोधित करने के बाद खरगे जी जैसे ही मंच से उतरे, उसके महज कुछ ही घंटे बाद तमाम संघी स्वयंसेवक और भाजपाई कार्यकर्ताओं ने रामलीला मंच पर हवन करके उस मंच का शुद्धिकरण किया। पता है क्यों क्योंकि खरगे जी दलित हैं। इन संघियों की नजर में दलित इंसान नहीं होते है। ये वही संघी और भाजपाई हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बंगले में जाने से पहले उस बंगले को गंगाजल से धुलवाया था। क्योंकि इससे पहले उस बंगले में अखिलेश यादव के रूप में एक पिछड़ा मुख्यमंत्री रहता था। पिछड़ों और दलितों के प्रति भाजपा की सोच बहुत जहरीली है। ये लोग दलितों और पिछड़ों को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। एक बात और कि खुद को ओबीसी बताकर वोट मांगने वाले नरेंद्र मोदी खुद दलितों-पिछड़ों की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं। वो भले ही चीख-चीख कर खुद को पिछड़ों का मसीहा बताते हैं, मगर उनके कारनामों से साफ लगता है कि मोदी जी का मन और मस्तिष्क दलितों और पिछड़ों के प्रति भेदभाव और संकीर्णता से सना हुआ है। अगर मोदी जी का इरादा साफ रहा होता तो किस जाहिल संघी और भाजपाई की औकात थी, जो एक दलित नेता के साथ भेदभाव करता, जो पिछड़े मुख्यमंत्री को उसकी जाति के कारण अपमानित करने की हिम्मत करता? इसलिए आपको समझना पड़ेगा कि संघियों की तरह मोदी का इरादा भी समाज के पिछड़ों, दलितों और शोषित वर्गों को न्याय दिलाना नहीं , बल्कि उनका चुनावी इस्तेमाल करना है। उनके नाम पर केवल वोट लेना है। बीते दिनों आपने देखा होगा कि कांग्रेस और राहुल गांधी लंबे समय से ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदाय को उनका हक दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, मगर प्रधानमंत्री खुलेआम जातिगत जनगणना का विरोध करते रहे हैं। वो चुनाव रैलियों में खुद को ओबीसी जरूर बताते हैं, मगर ओबीसी को न्याय देने की बात पर प्रधानमंत्री कहते हैं कि इस देश में जाति है ही नहीं। क्या अब वो प्रधानमंत्री मल्लिकार्जुन खरगे के अपमान के बाद बता सकते हैं कि देश में जाति है कि नहीं ? दरअसल, प्रधानमंत्री जिस संघ की जिस राजनीतिक पाठशाला से निकले हैं, वो पाठशाला वंचित वर्गों के शोषण की प्रयोगशाला है। उनका चरित्र जिस विचारधारा की देन है, वो विचारधारा ही ओबीसी, दलितों और आदिवासियों की बर्बर शोषक है। ये दिखावे के लिए इन वर्गों का हितैषी बनने का नाटक तो जरूर करते हैं, मगर असलियत में ये इन शोषित वर्गों के शत्रु हैं। अगर स्वतंत्रता, समता और सम्मान चाहिए तो सबसे पहले भाजपा और संघ को उखाड़ना होगा क्योंकि इनके रहते आपको भेदभाव, छुआछूत, अपमान और शोषण से आजादी नहीं मिल सकती है।"4
- अमानगंज में मिढासन नदी के पुल से एक 32 वर्षीय युवक द्वारा नदी में छलांग लगाने की सूचना से हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और युवक की तलाश शुरू कर दी गई।1
- baris se joojh rahe yah vyakti jo panee aana jana raj hamare gau ke pradhan dekh kar chale jate lekin kuchh kar nahi rahe aap logo se gujaris hai hamare gau moongus me bhi rad banawai jaay pradhan se gujaris hai jald se jald a kar dekhe1
- सिमरिया के पास का मामला भगवती मानस कल्याण संगठन एवं भारतीय शक्ति चेतना पार्टी द्वारा शराब तस्करों को पकड़ा1