बांदा उ.प्र अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आवाह्न पर व उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष माननीय अजय राय पूर्व मंत्री के निर्देशन पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित के नेतृत्व में भेदभाव के खिलाफ लड़ने पर राहुल गांधी के खिलाफ संघी ने जो FIR कराई है वह राजनैतिक द्वेष भाव से पूर्ण है, कांग्रेस पार्टी इसको अनैतिक व अनुचित मानते हुए इसका विरोध करती है। भाजपा-संघ को उखाड़े बिना भेदभाव, छुआछूत और अपमान से आजादी नहीं मिलेगी। इस विषय को लेकर जिला कांग्रेस कार्यालय से लेकर रेलवे स्टेशन तक विरोध प्रदर्शन किया गया। बांदा कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने मीडिया से रूबरू होते हुए बतलाया कि "जननेता राहुल गांधी पर FIR हो गई है, पता है क्यूँ क्योंकि उन्होंने देश के सीनियर दलित नेता के साथ हुए जातिगत भेदभाव पर आरएसएस और भाजपा को नंगा किया था! उन्होंने हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण के बाद मंच के जातिगत आधार पर शुद्धिकरण का विरोध किया था। क्या अब संघियों–भाजपाइयों के राज में भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ लड़ाई लड़ना भी अपराध हो चुका है? ये संघी ये भूल रहे हैं कि आजादी से पहले जो गांधी जी व दलितों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ते थे, आज आजादी के 79 साल बाद उसी गांधी के वंशज राहुल गांधी को दलितों के सम्मान की लड़ाई लड़ने के बदले मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन ये राहुल गांधी है, ये फ्लावर नहीं फायर है अगर इन्होंने ठान लिया है तो देश को संघी भेदभाव जातिगत छुआछूत से आजादी दिला कर ही रहेंगे। और यह आजादी कब मिलेगी जब इस देश से बीजेपी और आरएसएस जड़ से उखड़ जाएगा। क्योंकि जब तक इस देश में आरएसएस और भाजपा रहेगी, तब तक इस देश के दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और महिलाओं को इंसाफ किसी कीमत पर नहीं मिल सकता। अगर शोषितों और वंचितों को भेदभाव और छुआछूत से आजादी चाहिए, अगर समानता और सम्मान के साथ जीने का अधिकार चाहिए तो सबसे पहले भाजपा औऱ संघ को उखाड़ना होगा। क्योंकि सारी बुराईयों, कुरीतियों और पाखंड की जड़ संघी और भाजपाई हैं। आप खुद सोचिए कि जब इस देश में राज्यसभा के नेता विपक्ष भेदभाव और छुआछूत से सुरक्षित नहीं है तो आम गरीब जनता की बात क्या ही करें। दलितों के प्रति संघियों की घृणा का अंदाजा इस बात से लगा लीजिए कि बीते दिनांक 08 अगस्त 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी एक जनसभा को संबोधित करने के लिए उत्तराखंड के हल्द्वानी गए थे। यहां एक रामलीला मंच पर जनसभा को संबोधित करने के बाद खरगे जी जैसे ही मंच से उतरे, उसके महज कुछ ही घंटे बाद तमाम संघी स्वयंसेवक और भाजपाई कार्यकर्ताओं ने रामलीला मंच पर हवन करके उस मंच का शुद्धिकरण किया। पता है क्यों क्योंकि खरगे जी दलित हैं। इन संघियों की नजर में दलित इंसान नहीं होते है। ये वही संघी और भाजपाई हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बंगले में जाने से पहले उस बंगले को गंगाजल से धुलवाया था। क्योंकि इससे पहले उस बंगले में अखिलेश यादव के रूप में एक पिछड़ा मुख्यमंत्री रहता था। पिछड़ों और दलितों के प्रति भाजपा की सोच बहुत जहरीली है। ये लोग दलितों और पिछड़ों को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। एक बात और कि खुद को ओबीसी बताकर वोट मांगने वाले नरेंद्र मोदी खुद दलितों-पिछड़ों की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं। वो भले ही चीख-चीख कर खुद को पिछड़ों का मसीहा बताते हैं, मगर उनके कारनामों से साफ लगता है कि मोदी जी का मन और मस्तिष्क दलितों और पिछड़ों के प्रति भेदभाव और संकीर्णता से सना हुआ है। अगर मोदी जी का इरादा साफ रहा होता तो किस जाहिल संघी और भाजपाई की औकात थी, जो एक दलित नेता के साथ भेदभाव करता, जो पिछड़े मुख्यमंत्री को उसकी जाति के कारण अपमानित करने की हिम्मत करता? इसलिए आपको समझना पड़ेगा कि संघियों की तरह मोदी का इरादा भी समाज के पिछड़ों, दलितों और शोषित वर्गों को न्याय दिलाना नहीं , बल्कि उनका चुनावी इस्तेमाल करना है। उनके नाम पर केवल वोट लेना है। बीते दिनों आपने देखा होगा कि कांग्रेस और राहुल गांधी लंबे समय से ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदाय को उनका हक दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, मगर प्रधानमंत्री खुलेआम जातिगत जनगणना का विरोध करते रहे हैं। वो चुनाव रैलियों में खुद को ओबीसी जरूर बताते हैं, मगर ओबीसी को न्याय देने की बात पर प्रधानमंत्री कहते हैं कि इस देश में जाति है ही नहीं। क्या अब वो प्रधानमंत्री मल्लिकार्जुन खरगे के अपमान के बाद बता सकते हैं कि देश में जाति है कि नहीं ? दरअसल, प्रधानमंत्री जिस संघ की जिस राजनीतिक पाठशाला से निकले हैं, वो पाठशाला वंचित वर्गों के शोषण की प्रयोगशाला है। उनका चरित्र जिस विचारधारा की देन है, वो विचारधारा ही ओबीसी, दलितों और आदिवासियों की बर्बर शोषक है। ये दिखावे के लिए इन वर्गों का हितैषी बनने का नाटक तो जरूर करते हैं, मगर असलियत में ये इन शोषित वर्गों के शत्रु हैं। अगर स्वतंत्रता, समता और सम्मान चाहिए तो सबसे पहले भाजपा और संघ को उखाड़ना होगा क्योंकि इनके रहते आपको भेदभाव, छुआछूत, अपमान और शोषण से आजादी नहीं मिल सकती है।"
बांदा उ.प्र अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आवाह्न पर व उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष माननीय अजय राय पूर्व मंत्री के निर्देशन पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित के नेतृत्व में भेदभाव के खिलाफ लड़ने पर राहुल गांधी के खिलाफ संघी ने जो FIR कराई है वह राजनैतिक द्वेष भाव से पूर्ण है, कांग्रेस पार्टी इसको अनैतिक व अनुचित मानते हुए इसका विरोध करती है। भाजपा-संघ को उखाड़े बिना भेदभाव, छुआछूत और अपमान से आजादी नहीं मिलेगी। इस विषय को लेकर जिला कांग्रेस कार्यालय से लेकर रेलवे स्टेशन तक विरोध प्रदर्शन किया गया। बांदा कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने मीडिया से रूबरू होते हुए बतलाया कि "जननेता राहुल गांधी पर FIR हो गई है, पता है क्यूँ क्योंकि उन्होंने देश के सीनियर दलित नेता के साथ हुए जातिगत भेदभाव पर आरएसएस और भाजपा को नंगा किया था! उन्होंने हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण के बाद मंच के जातिगत आधार पर शुद्धिकरण का विरोध किया था। क्या अब संघियों–भाजपाइयों के राज में भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ लड़ाई लड़ना भी अपराध हो चुका है? ये संघी ये भूल रहे हैं कि आजादी से पहले जो गांधी जी व दलितों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ते थे, आज आजादी के 79 साल बाद उसी गांधी के वंशज राहुल गांधी को दलितों
के सम्मान की लड़ाई लड़ने के बदले मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन ये राहुल गांधी है, ये फ्लावर नहीं फायर है अगर इन्होंने ठान लिया है तो देश को संघी भेदभाव जातिगत छुआछूत से आजादी दिला कर ही रहेंगे। और यह आजादी कब मिलेगी जब इस देश से बीजेपी और आरएसएस जड़ से उखड़ जाएगा। क्योंकि जब तक इस देश में आरएसएस और भाजपा रहेगी, तब तक इस देश के दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और महिलाओं को इंसाफ किसी कीमत पर नहीं मिल सकता। अगर शोषितों और वंचितों को भेदभाव और छुआछूत से आजादी चाहिए, अगर समानता और सम्मान के साथ जीने का अधिकार चाहिए तो सबसे पहले भाजपा औऱ संघ को उखाड़ना होगा। क्योंकि सारी बुराईयों, कुरीतियों और पाखंड की जड़ संघी और भाजपाई हैं। आप खुद सोचिए कि जब इस देश में राज्यसभा के नेता विपक्ष भेदभाव और छुआछूत से सुरक्षित नहीं है तो आम गरीब जनता की बात क्या ही करें। दलितों के प्रति संघियों की घृणा का अंदाजा इस बात से लगा लीजिए कि बीते दिनांक 08 अगस्त 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी एक जनसभा को संबोधित करने के लिए उत्तराखंड के हल्द्वानी गए थे। यहां एक रामलीला मंच पर जनसभा को संबोधित करने के बाद खरगे जी जैसे ही मंच से उतरे, उसके
महज कुछ ही घंटे बाद तमाम संघी स्वयंसेवक और भाजपाई कार्यकर्ताओं ने रामलीला मंच पर हवन करके उस मंच का शुद्धिकरण किया। पता है क्यों क्योंकि खरगे जी दलित हैं। इन संघियों की नजर में दलित इंसान नहीं होते है। ये वही संघी और भाजपाई हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बंगले में जाने से पहले उस बंगले को गंगाजल से धुलवाया था। क्योंकि इससे पहले उस बंगले में अखिलेश यादव के रूप में एक पिछड़ा मुख्यमंत्री रहता था। पिछड़ों और दलितों के प्रति भाजपा की सोच बहुत जहरीली है। ये लोग दलितों और पिछड़ों को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। एक बात और कि खुद को ओबीसी बताकर वोट मांगने वाले नरेंद्र मोदी खुद दलितों-पिछड़ों की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं। वो भले ही चीख-चीख कर खुद को पिछड़ों का मसीहा बताते हैं, मगर उनके कारनामों से साफ लगता है कि मोदी जी का मन और मस्तिष्क दलितों और पिछड़ों के प्रति भेदभाव और संकीर्णता से सना हुआ है। अगर मोदी जी का इरादा साफ रहा होता तो किस जाहिल संघी और भाजपाई की औकात थी, जो एक दलित नेता के साथ भेदभाव करता, जो पिछड़े मुख्यमंत्री को उसकी जाति के कारण अपमानित करने की हिम्मत करता? इसलिए आपको समझना पड़ेगा कि संघियों की तरह
मोदी का इरादा भी समाज के पिछड़ों, दलितों और शोषित वर्गों को न्याय दिलाना नहीं , बल्कि उनका चुनावी इस्तेमाल करना है। उनके नाम पर केवल वोट लेना है। बीते दिनों आपने देखा होगा कि कांग्रेस और राहुल गांधी लंबे समय से ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदाय को उनका हक दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, मगर प्रधानमंत्री खुलेआम जातिगत जनगणना का विरोध करते रहे हैं। वो चुनाव रैलियों में खुद को ओबीसी जरूर बताते हैं, मगर ओबीसी को न्याय देने की बात पर प्रधानमंत्री कहते हैं कि इस देश में जाति है ही नहीं। क्या अब वो प्रधानमंत्री मल्लिकार्जुन खरगे के अपमान के बाद बता सकते हैं कि देश में जाति है कि नहीं ? दरअसल, प्रधानमंत्री जिस संघ की जिस राजनीतिक पाठशाला से निकले हैं, वो पाठशाला वंचित वर्गों के शोषण की प्रयोगशाला है। उनका चरित्र जिस विचारधारा की देन है, वो विचारधारा ही ओबीसी, दलितों और आदिवासियों की बर्बर शोषक है। ये दिखावे के लिए इन वर्गों का हितैषी बनने का नाटक तो जरूर करते हैं, मगर असलियत में ये इन शोषित वर्गों के शत्रु हैं। अगर स्वतंत्रता, समता और सम्मान चाहिए तो सबसे पहले भाजपा और संघ को उखाड़ना होगा क्योंकि इनके रहते आपको भेदभाव, छुआछूत, अपमान और शोषण से आजादी नहीं मिल सकती है।"
- बाढ़ से चंद्रावल नदी के रास्ते में आई दरारें प्रशासन में संभाला मोर्चा ➡️ मौदहा कोतवाली क्षेत्र के पढ़ोहरी के पास क्षतिग्रस्त रपटे का वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ था वायरल ➡️ ग्रामीणों की शिकायत पर मौके पर पहुंची प्रशासनिक टीम ➡️ एसडीएम करनवीर सिंह के नेतृत्व में राजस्व, पुलिस और पीडब्ल्यूडी टीम ने किया निरीक्षण ➡️ जेसीबी से रपटे में फंसा मलबा हटवाकर आवागमन कराया गया बहाल ➡️ हर साल बाढ़ में रपटा क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को होती है परेशानी ➡️ ग्रामीणों ने स्थायी समाधान के लिए रपटे की जगह पुल निर्माण की उठाई मांग1
- 03 पुलिसकर्मी को पुष्पगुच्छ मोमेन्टों प्रदान कर दी गई भावुक विदाई 03 पुलिसकर्मी को पुष्पगुच्छ मोमेन्टों प्रदान कर दी गई भावुक विदाई1
- लोटन प्रसाद प्रेस रिपोर्टर भरुआसुमेरपुर ( हमीरपुर) नेशनल हाइवे चौतिस यानी खूनी हाइवे लाखों रुपए की प्रतिदिन टौल टैक्स वसुलने वाली कम्पनी की हिटलर शाही से नेशनल हाइवे चौतिस गड्ढों में तब्दील हो गया।जगह जगह मिनी तालाब का रुप धारण कर लिया है। जिससे आम दिन होने वाली दुर्घटनाओं में और बढ़ोतरी हो गई है आम जन अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। लेकिन लाखों रुपए की प्रतिदिन टोल टैक्स वसूलने वाली कम्पनियों के कान में जूं तक नहीं रेंग रही।शायद किसी बड़े हादसे का इन्तजार कर रही है। लोटन प्रसाद प्रेस रिपोर्टर भरुआसुमेरपुर ( हमीरपुर) नेशनल हाइवे चौतिस यानी खूनी हाइवे लाखों रुपए की प्रतिदिन टौल टैक्स वसुलने वाली कम्पनी की हिटलर शाही से नेशनल हाइवे चौतिस गड्ढों में तब्दील हो गया।जगह जगह मिनी तालाब का रुप धारण कर लिया है। जिससे आम दिन होने वाली दुर्घटनाओं में और बढ़ोतरी हो गई है आम जन अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। लेकिन लाखों रुपए की प्रतिदिन टोल टैक्स वसूलने वाली कम्पनियों के कान में जूं तक नहीं रेंग रही।शायद किसी बड़े हादसे का इन्तजार कर रही है।4
- बाढ़ की आशंका के बीच स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, जिले में 36 बाढ़ चौकियां स्थापित हमीरपुर। मानसून की भारी बारिश और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है। प्रभावित क्षेत्रों में समय से चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिले में 36 बाढ़ चौकियां स्थापित कर चिकित्सा टीमों की तैनाती की गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अनुसार आपदा की स्थिति में त्वरित उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों का पूर्वाभ्यास एवं मॉकड्रिल कराया जा चुका है। सभी ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य इकाइयों पर रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) सक्रिय कर दी गई हैं। चिकित्सा टीमों को जीवनरक्षक दवाएं, ओआरएस, जिंक टैबलेट, क्लोरीन टैबलेट, ब्लीचिंग पाउडर और एंटी स्नेक वेनम (ASV) समेत आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा दी गई है। जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में एएसवी, एंटी रेबीज वैक्सीन (ARV) तथा अन्य जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बाढ़ एवं जलभराव प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा दल भेजने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने लोगों से जलभराव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सावधानी बरतने तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सा टीम से संपर्क करने की अपील की है।1
- हमीरपुर - पढ़ोरी गांव रपटा धंसा, कई गांवों का संपर्क टूटा,जनपद में लगातार हो रही रिमझिम बारिश के चलते पढ़ोरी रपटा धंसा ।। पढ़ोरी गांव रपटा धंसा, कई गांवों का संपर्क टूटा, जनपद में लगातार हो रही रिमझिम बारिश के चलते पढ़ोरी रपटा धंसा, रपटा धंसने से मौदहा–सिसोलर मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित, कई गांवों का मौदहा नगर से संपर्क हुआ प्रभावित, अस्पताल, बाजार और नौकरी के लिए आने-जाने वाले ग्रामीण परेशान, रास्ता बंद होने से मरीजों और जरूरतमंद लोगों की बढ़ी मुश्किलें, प्रशासन मौके पर मौजूद, वैकल्पिक व्यवस्था के लिए जेसीबी मशीन लगा कर रपटा को किया जा दुरस्त वैकल्पिक व्यवस्था कर जल्द आवागमन बहाल कराने की उठी मांग,4
- मोर्चा पार्टी ने रेल रोको आंदोलन किया सतना । भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने बिरौली रेलवे फाटक पर बन रहे ओवर ब्रिज के विलंब होने पर आक्रोश जताते हुए बिरौली ओवर ब्रिज के सम रेल रोको आंदोलन किया रेलवे पटरी पर जाने से पूर्व ही रॉक लिया गया । इ स मौके पर मोर्चा के पदाधिकारी ने नारेबाजी की साथ ही तहसीलदार को बुलाने की मांग की जिस पर तहसीलदार आंदोलन स्थल पर पहुंचे और उन्होंने आंदोलन कारी को आश्वासन दिया कि आंदोलन समाप्त कीजिए हम आपकी मांगे उचित रूप से पूरी करेंगे । आंदोलन का नेतृत्व पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ एसके त्रिपाठी ने किया इस अवसर पर पार्टी के गंगा विश्वकर्मा जिला उपाध्यक्ष विष्णु सोनी नितिन मिश्रा संजीव शर्मा विष्णु गुप्ता रवि शंकर यादव दिलीप बुनकर मनोज सोनकर गंगा विश्वकर्मा अनूप सतनाहा शशांक यादव पंकज उपाध्याय सहित दर्जनों लोग शामिल रहे ।1
- हमीरपुर :कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में जिलाधिकारी ने दूर-दराज से आए फरियादियों की सुनी समस्याएं, अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के दिए निर्देश हमीरपुर। जिलाधिकारी हमीरपुर श्री अभिषेक गोयल ने आज प्रातः 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई कर जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए फरियादियों की समस्याओं एवं शिकायतों को गंभीरतापूर्वक सुना। जनसुनवाई में बड़ी संख्या में आमजन ने राजस्व, भूमि विवाद, नामांतरण, पैमाइश, कब्जा, रास्ते, आवास, विद्युत, पेयजल सहित विभिन्न विभागों से संबंधित अपनी समस्याएं जिलाधिकारी के समक्ष रखीं। जिलाधिकारी ने प्रत्येक फरियादी की समस्या को ध्यानपूर्वक सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को प्रकरणों की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार एवं समयबद्ध ढंग से गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य केवल शिकायतों को दर्ज करना नहीं, बल्कि प्रत्येक फरियादी को प्रभावी समाधान उपलब्ध कराना है। अधिकारियों द्वारा शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा अनावश्यक विलंब पाए जाने पर जवाबदेही तय की जाएगी। जनसुनवाई के दौरान विशेष रूप से राजस्व संबंधी प्रकरणों में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भूमि विवाद, पैमाइश, नामांतरण, सीमांकन, कब्जे तथा अन्य राजस्व मामलों का निस्तारण नियमानुसार प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि संबंधी मामलों में केवल कागजी रिपोर्ट पर निर्भर न रहें, बल्कि आवश्यकतानुसार स्थलीय निरीक्षण एवं मौके पर सत्यापन कर वास्तविक स्थिति के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने लंबे समय से लंबित राजस्व वादों को लेकर कहा कि पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने अनावश्यक रूप से मुकदमों को खारिज करने अथवा पुनर्स्थापित करने की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण रखते हुए नियमानुसार कम से कम तिथियों में सुनवाई पूरी करने पर जोर दिया। उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में दक्षता बढ़ाने के लिए राजस्व संहिता की प्रमुख धाराओं एवं चकबंदी संबंधी प्रक्रियाओं की विशेष मास्टर ट्रेनिंग आयोजित कराने के निर्देश भी दिए, ताकि राजस्व प्रकरणों का निस्तारण विधिक प्रावधानों के अनुरूप और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके। जनसुनवाई के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी एवं कचरा फैलाने से संबंधित मामलों पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने तालाब पट्टों एवं मत्स्य पालन से प्राप्त होने वाली नीलामी/पट्टा धनराशि का संबंधित पोर्टल पर समय से अंकन कराने तथा नियमानुसार ग्राम निधि में धनराशि जमा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने पूर्व वर्षों की धनराशि का भी सत्यापन कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा, ताकि ग्राम पंचायतों को नियमानुसार मिलने वाले लाभ से वंचित न होना पड़े। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट एवं तहसीलों में सरकारी खरीद में शासन द्वारा निर्धारित मानकों एवं अनुमन्य दरों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिना पूर्व स्वीकृति के अनावश्यक अथवा निर्धारित दरों से अधिक मूल्य पर खरीदारी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई में प्राप्त प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लेते हुए शिकायतकर्ता को संतोषजनक समाधान उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप आमजन की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही, शिथिलता अथवा अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।1
- अतिवृष्टि से फसलों को नुकसान को लेकर बुन्देलखण्ड किसान यूनियन ने एसडीएम चरखारी को दिया ज्ञापन - योगेश पाठक अतिवृष्टि से फसलों को नुकसान को लेकर बुन्देलखण्ड किसान यूनियन ने एसडीएम चरखारी को दिया ज्ञापन - योगेश पाठक1
- विद्युत व्यवस्था में लापरवाही पर डीएम नाराज, दो सप्ताह में सुधार के निर्देश हमीरपुर। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी अभिषेक गोयल की अध्यक्षता में विद्युत विभाग की समीक्षा बैठक हुई। विद्युत आपूर्ति, लाइन लॉस, बुनियादी ढांचे, राजस्व वसूली और जनशिकायतों के निस्तारण की समीक्षा के दौरान अपेक्षित प्रगति और पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध न होने पर डीएम ने नाराजगी जताई। डीएम ने क्षतिग्रस्त विद्युत पोलों को शीघ्र बदलने, झूलते तारों को दुरुस्त कराने और आपूर्ति बाधित होने पर तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने तहसील एवं विकासखंडवार विद्युत मांग, उपलब्ध क्षमता और आपूर्ति के अद्यतन व विश्लेषणात्मक आंकड़े प्रस्तुत करने को कहा। राजस्व वसूली में बड़े बकायेदारों की टॉप-10 व टॉप-20 सूची तैयार कर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। साथ ही विद्युत, जल निगम और जल जीवन मिशन से जुड़ी जनशिकायतों का प्राथमिकता से गुणवत्तापूर्ण एवं स्थायी निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया। डीएम ने दो सप्ताह के भीतर जिले के सभी सात विकासखंडों में ग्राम प्रधानों व जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर स्थानीय विद्युत समस्याओं की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण में जियो-टैगिंग अनिवार्य करते हुए अधिकारियों को मौके पर जाकर सत्यापन और जियो-टैग्ड फोटो अपलोड करने के निर्देश भी दिए।1