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झारखंड के लातेहार में कोयला खदानों के कारण ग्रामीण विकास के बजाय विनाश का सामना कर रहे हैं। खदानों से उड़ती धूल, जगह-जगह टूटी सड़कें और व्यापक प्रदूषण ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। इसके बावजूद, आज तक कई प्रभावित परिवारों को उनका अपेक्षित मुआवज़ा नहीं मिल पाया है। यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि आख़िर कब जनता की आवाज़ सुनी जाएगी और उनकी पीड़ा का समाधान होगा। प्रभावित ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनकी यह पीड़ा अब हर मंच तक पहुँचाई जाएगी, क्योंकि जनता का दर्द ही उनकी राजनीति का आधार है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि उन्हें तत्काल मुआवज़ा दिया जाए और प्रदूषण पर लगाम लगाई जाए।
Yuva team jharkhand
झारखंड के लातेहार में कोयला खदानों के कारण ग्रामीण विकास के बजाय विनाश का सामना कर रहे हैं। खदानों से उड़ती धूल, जगह-जगह टूटी सड़कें और व्यापक प्रदूषण ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। इसके बावजूद, आज तक कई प्रभावित परिवारों को उनका अपेक्षित मुआवज़ा नहीं मिल पाया है। यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि आख़िर कब जनता की आवाज़ सुनी जाएगी और उनकी पीड़ा का समाधान होगा। प्रभावित ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनकी यह पीड़ा अब हर मंच तक पहुँचाई जाएगी, क्योंकि जनता का दर्द ही उनकी राजनीति का आधार है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि उन्हें तत्काल मुआवज़ा दिया जाए और प्रदूषण पर लगाम लगाई जाए।
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- झारखंड के लातेहार जिले के रिचूघुट्टा गांव में रविवार को पेशारार, देदरिया और भूसूर पंचायतों के प्रभावित ग्रामीणों, रैयतों और बेरोजगार युवकों ने एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का नेतृत्व विधायक प्रतिनिधि पवन कुमार ने किया, जिन्होंने आरोप लगाया कि हिंडालको पिछले 70 वर्षों से क्षेत्र में कार्यरत है, बावजूद इसके ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीवीसी की प्रस्तावित कोल साइडिंग परियोजना तब तक शुरू नहीं करने दी जाएगी, जब तक स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार और क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित नहीं की जातीं। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ स्थानीय हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। सभी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि आगामी 9 जून को 5 हजार ग्रामीणों की विशाल सभा आयोजित की जाएगी, जिसमें कंपनी प्रबंधन को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। पवन कुमार ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो ग्रामीणों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा, क्योंकि उनका मानना है कि हिंडालको-डीवीसी की मनमानी अब नहीं चलेगी।1
- Post by Yuva team jharkhand1
- लातेहार के सदर प्रखंड की पेशारार, देदरिया और भूसूर पंचायत के ग्रामीणों ने रविवार को रिचूघुटा गांव में एक बैठक आयोजित कर हिंडालको बॉक्साइट साइडिंग और डीवीसी कंपनी की प्रस्तावित नई कोयला साइडिंग परियोजना का जोरदार विरोध किया। इस बैठक की अध्यक्षता विधायक प्रतिनिधि पवन कुमार ने की। पवन कुमार ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि हिंडालको कंपनी पिछले लगभग 70 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्यरत है, लेकिन आज भी तीनों पंचायतों के ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी ने स्थानीय गांवों और पंचायतों के विकास के लिए अपेक्षित कार्य नहीं किए हैं। डीवीसी कंपनी द्वारा प्रस्तावित कोल साइडिंग परियोजना पर चेतावनी देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को रोजगार और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक साइडिंग का कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आगामी 9 जून को एक बड़ी जनसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें लगभग पांच हजार ग्रामीण शामिल होंगे। इस सभा के बाद, ग्रामीण उपायुक्त को अपनी मांगों से संबंधित आवेदन सौंपेंगे। ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जाता है, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। उपस्थित ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ स्थानीय हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि क्षेत्र के संसाधनों का तो दोहन किया जा रहा है, लेकिन इसका लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है। इस बैठक में सूरज कुमार गुप्ता, उमेश कुमार सिंह, राजेंद्र सिंह, कारू प्रसाद, बबलू प्रसाद, बसंत सिंह, अरुण कुमार सिंह, राहुल सिंह, राजदेव प्रसाद, राहुल कुमार, श्यामलाल उरांव, बीरबल सिंह, जमुना लोहार, कलदेव गझू, संजय गुप्ता, बसंत प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।2
- बालूमाथ प्रखंड कार्यालय में एनटीपीसी द्वारा आयोजित पर्यावरण जनसुनवाई का विरोध करने के लिए स्थानीय ग्रामीण शंकर उरांव ने रविवार सुबह 11:00 बजे आह्वान किया है। जानकारी के अनुसार, बालूमाथ प्रखंड कार्यालय परिसर में 1 मई को एनटीपीसी की पर्यावरण जनसुनवाई आयोजित की गई है, जिसमें सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण भाग लेंगे। हालांकि, स्थानीय ग्रामीण और आजसू नेता शंकर उरांव ने अधिक से अधिक ग्रामीणों से इस जनसुनवाई का विरोध करने की अपील की है।1
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- विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर 31 मई 2026 को गारू थाना परिसर में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। गारू थाना प्रभारी जयप्रकाश शर्मा के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम में सभी पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों ने तंबाकू एवं अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने तथा समाज को इनके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की शपथ ली। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए थाना प्रभारी ने बताया कि तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है, जिससे कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और आम लोगों को भी तंबाकू से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। शपथ ग्रहण के दौरान उपस्थित पुलिस पदाधिकारियों और जवानों ने स्वयं तंबाकू का सेवन न करने का संकल्प लिया। साथ ही, उन्होंने समाज को नशामुक्त और तंबाकूमुक्त बनाने के लिए निरंतर जागरूकता फैलाने का कार्य करने का भी प्रण लिया। इस अवसर पर तंबाकू निषेध से संबंधित संदेशों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने पर विशेष बल दिया गया।2
- केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 'वनवासी' शब्द के प्रयोग से आहत होकर आदिवासी कांग्रेस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस विरोध के दौरान, उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का पुतला दहन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।1
- झारखंड के लातेहार में कोयला खदानों के कारण ग्रामीण विकास के बजाय विनाश का सामना कर रहे हैं। खदानों से उड़ती धूल, जगह-जगह टूटी सड़कें और व्यापक प्रदूषण ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। इसके बावजूद, आज तक कई प्रभावित परिवारों को उनका अपेक्षित मुआवज़ा नहीं मिल पाया है। यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि आख़िर कब जनता की आवाज़ सुनी जाएगी और उनकी पीड़ा का समाधान होगा। प्रभावित ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनकी यह पीड़ा अब हर मंच तक पहुँचाई जाएगी, क्योंकि जनता का दर्द ही उनकी राजनीति का आधार है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि उन्हें तत्काल मुआवज़ा दिया जाए और प्रदूषण पर लगाम लगाई जाए।1