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More news from Jharkhand and nearby areas
- यह संदेश अपनों के प्यार और जनता के विश्वास को अपनी सच्ची पहचान बताता है। इसमें कहा गया है कि दुनिया साथ दे या न दे, अपने हमेशा साथ रहते हैं, और अपनों के लिए जीना ही असली जिंदगी है। यह संदेश आगे ज़ोर देता है कि रिश्ते दौलत से नहीं, बल्कि साथ निभाने से मजबूत होते हैं, और अपनों का विश्वास ही उसकी वास्तविक पहचान है।1
- बालूमाथ प्रखंड कार्यालय में एनटीपीसी द्वारा आयोजित पर्यावरण जनसुनवाई का विरोध करने के लिए स्थानीय ग्रामीण शंकर उरांव ने रविवार सुबह 11:00 बजे आह्वान किया है। जानकारी के अनुसार, बालूमाथ प्रखंड कार्यालय परिसर में 1 मई को एनटीपीसी की पर्यावरण जनसुनवाई आयोजित की गई है, जिसमें सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण भाग लेंगे। हालांकि, स्थानीय ग्रामीण और आजसू नेता शंकर उरांव ने अधिक से अधिक ग्रामीणों से इस जनसुनवाई का विरोध करने की अपील की है।1
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- आज रांची में प्रांतीय यादव महासभा झारखंड (जिला इकाई रांची) द्वारा “प्रदेश अध्यक्ष सम्मान समारोह” का आयोजन चैम्बर भवन, मेन रोड पर किया गया। इस समारोह में यादव समाज के गणमान्य लोग, पदाधिकारी और समाजसेवी बड़ी संख्या में उपस्थित हुए। समारोह के दौरान अखिल भारतीय यादव महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चौधरी जगराम सिंह यादव और झारखंड प्रदेश अध्यक्ष बलवंत कुमार यादव का विशेष रूप से सम्मान किया गया। उपस्थित समाजबंधुओं ने श्री बलवंत कुमार यादव को पुष्प गुच्छ भेंट कर और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया, साथ ही उनके नेतृत्व में समाज की एकता एवं विकास के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना भी की। इस अवसर पर वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पीताम्बर दास एवं झारखंड प्रभारी सह राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह सहित कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। वक्ताओं ने यादव समाज को संगठित करने, शिक्षा को बढ़ावा देने, सामाजिक जागरूकता बढ़ाने तथा युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। इस कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न जिलों से आए समाज के लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। सम्मान समारोह सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जहाँ समाज के उत्थान और संगठन की मजबूती के लिए सामूहिक प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया गया।2
- झारखंड के लोहरदगा जिले में एक तालाब के सुंदरीकरण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल हो रही जानकारी के अनुसार, आरोप लगाया जा रहा है कि तालाब का सुंदरीकरण ‘थूक पॉलिश’ लगाकर किया जा रहा है, जिससे कार्य की गुणवत्ता पर गहरी चिंता जताई जा रही है।1
- झारखंड के एक अति पिछड़े क्षेत्र में असुर भवन का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन इस परियोजना पर काम कर रहे मजदूरों को उनका भुगतान नहीं दिया जा रहा है।1
- एम.के. इंटर कॉलेज के उन छात्रों के लिए एक शुभ समाचार सामने आया है, जो पहले परीक्षा देने से वंचित रह गए थे। जैक ने इस संबंध में सूचना जारी कर यह बताया है कि अब ऐसे सभी छात्रों की परीक्षा आयोजित की जाएगी।1
- झारखंड के लातेहार जिले का कटिया गांव, जो वर्षों पहले नक्सलवाद के साये से बाहर आ चुका है, आज भी विकास की रोशनी से वंचित है। भले ही इसे नक्सल मुक्त होने का तमगा मिल गया हो, लेकिन गांव मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहा है, जिससे ग्रामीणों में गहरा असंतोष व्याप्त है। गांव का एकमात्र प्राथमिक विद्यालय बंद पड़ा है, जिसे सरकार ने पास के दूसरे स्कूल में 'समायोजित' कर दिया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि छोटे बच्चों को पढ़ने के लिए अब 3-4 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, और कई बच्चों ने तो पढ़ाई ही छोड़ दी है। पीने के पानी की स्थिति भी दयनीय है; हैंडपंप खराब पड़े हैं और नल-जल योजना अब तक यहां नहीं पहुंची है। ग्रामीण आज भी दूषित 'चुआरी' का पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब नक्सली थे, तब डर के मारे कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि गांव में नहीं आता था। अब जबकि नक्सली नहीं हैं, तो यह बहाना भी खत्म हो गया है, फिर भी कोई उनकी सुध लेने नहीं आता। न विधायक, न बीडीओ, न मुखिया, कोई भी उनके बीच नहीं पहुंचता। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। गांव में सड़क, अस्पताल और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। नक्सलवाद खत्म होने के बाद भी जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस गांव की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कटिया गांव के लोग सरकार और प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि क्या केवल नक्सल मुक्त होना ही काफी है? क्या जीवन जीने के लिए सिर्फ शांति पर्याप्त है और सुविधाओं की कोई आवश्यकता नहीं? ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक इस गांव तक सरकार नहीं पहुंचेगी, तब तक उनकी यह 'मुक्ति' अधूरी ही रहेगी।3