झारखंड के लातेहार जिले का कटिया गांव, जो वर्षों पहले नक्सलवाद के साये से बाहर आ चुका है, आज भी विकास की रोशनी से वंचित है। भले ही इसे नक्सल मुक्त होने का तमगा मिल गया हो, लेकिन गांव मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहा है, जिससे ग्रामीणों में गहरा असंतोष व्याप्त है। गांव का एकमात्र प्राथमिक विद्यालय बंद पड़ा है, जिसे सरकार ने पास के दूसरे स्कूल में 'समायोजित' कर दिया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि छोटे बच्चों को पढ़ने के लिए अब 3-4 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, और कई बच्चों ने तो पढ़ाई ही छोड़ दी है। पीने के पानी की स्थिति भी दयनीय है; हैंडपंप खराब पड़े हैं और नल-जल योजना अब तक यहां नहीं पहुंची है। ग्रामीण आज भी दूषित 'चुआरी' का पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब नक्सली थे, तब डर के मारे कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि गांव में नहीं आता था। अब जबकि नक्सली नहीं हैं, तो यह बहाना भी खत्म हो गया है, फिर भी कोई उनकी सुध लेने नहीं आता। न विधायक, न बीडीओ, न मुखिया, कोई भी उनके बीच नहीं पहुंचता। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। गांव में सड़क, अस्पताल और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। नक्सलवाद खत्म होने के बाद भी जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस गांव की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कटिया गांव के लोग सरकार और प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि क्या केवल नक्सल मुक्त होना ही काफी है? क्या जीवन जीने के लिए सिर्फ शांति पर्याप्त है और सुविधाओं की कोई आवश्यकता नहीं? ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक इस गांव तक सरकार नहीं पहुंचेगी, तब तक उनकी यह 'मुक्ति' अधूरी ही रहेगी।
झारखंड के लातेहार जिले का कटिया गांव, जो वर्षों पहले नक्सलवाद के साये से बाहर आ चुका है, आज भी विकास की रोशनी से वंचित है। भले ही इसे नक्सल मुक्त होने का तमगा मिल गया हो, लेकिन गांव मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहा है, जिससे ग्रामीणों में गहरा असंतोष व्याप्त है। गांव का एकमात्र प्राथमिक विद्यालय बंद पड़ा है, जिसे सरकार ने पास के दूसरे स्कूल में 'समायोजित' कर दिया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि छोटे बच्चों को पढ़ने के लिए अब 3-4 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, और कई बच्चों ने
तो पढ़ाई ही छोड़ दी है। पीने के पानी की स्थिति भी दयनीय है; हैंडपंप खराब पड़े हैं और नल-जल योजना अब तक यहां नहीं पहुंची है। ग्रामीण आज भी दूषित 'चुआरी' का पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब नक्सली थे, तब डर के मारे कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि गांव में नहीं आता था। अब जबकि नक्सली नहीं हैं, तो यह बहाना भी खत्म हो गया है, फिर भी कोई उनकी सुध लेने नहीं आता। न विधायक, न बीडीओ, न मुखिया, कोई भी उनके बीच नहीं पहुंचता। ग्रामीणों का आरोप है कि
उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। गांव में सड़क, अस्पताल और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। नक्सलवाद खत्म होने के बाद भी जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस गांव की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कटिया गांव के लोग सरकार और प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि क्या केवल नक्सल मुक्त होना ही काफी है? क्या जीवन जीने के लिए सिर्फ शांति पर्याप्त है और सुविधाओं की कोई आवश्यकता नहीं? ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक इस गांव तक सरकार नहीं पहुंचेगी, तब तक उनकी यह 'मुक्ति' अधूरी ही रहेगी।
- झारखंड के लातेहार जिले का कटिया गांव, जो वर्षों पहले नक्सलवाद के साये से बाहर आ चुका है, आज भी विकास की रोशनी से वंचित है। भले ही इसे नक्सल मुक्त होने का तमगा मिल गया हो, लेकिन गांव मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहा है, जिससे ग्रामीणों में गहरा असंतोष व्याप्त है। गांव का एकमात्र प्राथमिक विद्यालय बंद पड़ा है, जिसे सरकार ने पास के दूसरे स्कूल में 'समायोजित' कर दिया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि छोटे बच्चों को पढ़ने के लिए अब 3-4 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, और कई बच्चों ने तो पढ़ाई ही छोड़ दी है। पीने के पानी की स्थिति भी दयनीय है; हैंडपंप खराब पड़े हैं और नल-जल योजना अब तक यहां नहीं पहुंची है। ग्रामीण आज भी दूषित 'चुआरी' का पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब नक्सली थे, तब डर के मारे कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि गांव में नहीं आता था। अब जबकि नक्सली नहीं हैं, तो यह बहाना भी खत्म हो गया है, फिर भी कोई उनकी सुध लेने नहीं आता। न विधायक, न बीडीओ, न मुखिया, कोई भी उनके बीच नहीं पहुंचता। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। गांव में सड़क, अस्पताल और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। नक्सलवाद खत्म होने के बाद भी जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस गांव की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कटिया गांव के लोग सरकार और प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि क्या केवल नक्सल मुक्त होना ही काफी है? क्या जीवन जीने के लिए सिर्फ शांति पर्याप्त है और सुविधाओं की कोई आवश्यकता नहीं? ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक इस गांव तक सरकार नहीं पहुंचेगी, तब तक उनकी यह 'मुक्ति' अधूरी ही रहेगी।3
- नदी किनारे फिशिंग रॉड के साथ बैठे एक गाँव के लड़के ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिससे हर कोई हैरान है। उसकी मेहनत रंग लाई है क्योंकि उसने एक बहुत बड़ी मछली पकड़ी है, जिसे देखकर लोग बस देखते ही रह गए। यह आज का एक शानदार शिकार रहा, और जिसने भी इतनी विशाल मछली देखी, वह दंग रह गया। इस पल में, हाथ में फिशिंग रॉड और दिल में सुकून के साथ, यह शख्स बताता है कि बस यही ज़िंदगी है।1
- लातेहार में केंद्रीय विद्यालय से सेमरी तक की सड़क के जर्जर होने के कारण ग्रामीणों ने इसके तत्काल निर्माण की मांग तेज कर दी है। खराब सड़क से परेशान स्थानीय लोगों ने लातेहार के उपायुक्त को एक आवेदन सौंपकर जल्द कार्रवाई की गुहार लगाई है और आंदोलन की चेतावनी भी दी है। ग्रामीणों ने आवेदन में बताया कि केंद्रीय विद्यालय से सेमरी तक जाने वाली यह सड़क लंबे समय से खराब हालत में है, जिस पर बड़े-बड़े गड्ढे और उबड़-खाबड़ रास्ते हैं। इस वजह से स्कूली बच्चों, मरीजों और आम लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर बारिश के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों और प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अभी तक सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। लोगों ने मांग की है कि सड़क निर्माण की निविदा प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कर धरातल पर काम अविलंब शुरू कराया जाए। इसी क्रम में, ग्रामीणों ने 29 मई 2026 को शांतिपूर्ण तरीके से उपस्थित होकर प्रशासन से इस अति आवश्यक कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की मांग की। उन्होंने संबंधित विभाग को तत्काल निर्देश जारी करने की अपील की है, जिससे क्षेत्रवासियों को बड़ी राहत मिल सके। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेगा।4
- बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। यह स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है, और इसे लेकर हैरानी के साथ-साथ गहन चिंता भी जताई जा रही है। इस गंभीर विषय पर अधिक ध्यान और चिंतन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।1
- एम.के. इंटर कॉलेज के उन छात्रों के लिए एक शुभ समाचार सामने आया है, जो पहले परीक्षा देने से वंचित रह गए थे। जैक ने इस संबंध में सूचना जारी कर यह बताया है कि अब ऐसे सभी छात्रों की परीक्षा आयोजित की जाएगी।1
- लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र में भारी वाहनों के चालक प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइन का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं। इन चालकों ने नियमों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, जिससे थाना क्षेत्र में दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। ऐसा प्रतीत होता है कि सोशल पुलिसिंग के लाभ के बावजूद, भारी वाहन चालक भयमुक्त होकर नियमों का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं।1
- झारखंड के हजारीबाग जिले में कभी शान से खड़ा रहने वाला एक ऐतिहासिक चर्च आज अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा है, जिसे देखकर किसी का भी दिल बैठ सकता है। अंग्रेजी हुकूमत के दौर की यह धरोहर अब खंडहर में तब्दील हो चुकी है। इसकी मौजूदा दुर्दशा का मुख्य कारण लोगों की बेरुखी और अनदेखी है, जिसने इस महत्वपूर्ण विरासत को पूरी तरह से उपेक्षित कर दिया है। यह तस्वीर इस बात की स्पष्ट गवाह है कि जो कौम अपनी विरासत को भुला देती है, उसका वजूद धुंधला पड़ जाता है।1
- झारखंड के लोहरदगा जिले में ट्रेन सेवा का परिचालन शुरू हो गया है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम से संबंधित समाचार को अपलोड करने का प्रयास किया जा रहा है।1