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कलेक्टर ने ली समय-सीमा की बैठक,ग्रीष्मकाल में सतत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने दिए निर्देश,एग्री स्टेक पोर्टल में पात्र सभी किसानों का पंजीयन सुनिश्चित करें - कलेक्टर बलरामपुर। कलेक्टर राजेंद्र कटारा की अध्यक्षता में संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में समय-सीमा की बैठक आयोजित हुई। बैठक में कलेक्टर ने प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा, राजस्व प्रकरण, आयुष्मान कार्ड, स्वास्थ्य और पेयजल की उपलब्धता सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कलेक्टर श्री राजेंद्र कटारा ने राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए अविवादित नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा सहित अन्य राजस्व प्रकरणों का त्वरित एवं प्राथमिकता के साथ निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने आम नागरिकों से जुड़े राजस्व प्रकरणों तथा हाईकोर्ट में लंबित प्रकरणों का भी शीघ्र निराकरण करने को कहा। साथ ही कलेक्टर ने एग्री स्टेक पोर्टल में जिले के सभी पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सके। प्रधानमंत्री आवास योजना एवं पीएम जनमन आवासों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने लक्ष्य के अनुरूप प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वीकृत, पूर्ण एवं अपूर्ण आवासों की विस्तृत जानकारी ली तथा लंबित आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ मिल सके। उन्होंने पीएम जनमन के अंतर्गत स्वीकृत गतिविधियों की भी जानकारी लेकर कार्य में प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत पीएम जनमन मोबाइल मेडिकल यूनिट के संचालन एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने आयुष्मान भारत योजना एवं वय वंदन योजना के अंतर्गत कार्ड निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए शेष हितग्राहियों के कार्ड शीघ्र बनाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिक से अधिक स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री कटारा ने गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संबंधी समस्याओं का चिन्हांकन कर तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए, ताकि ग्रीष्मकाल में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और सुचारू रूप से पेयजल उपलब्ध हो सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पेयजल आपूर्ति पर सतत निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी दिए। आगामी होने वाले जनगणना के संबंध में कलेक्टर श्री कटारा ने जिला सांख्यिकी अधिकारी से तैयारियों की जानकारी लेते हुए नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर, अपर कलेक्टर श्री आर.एस. लाल, श्री अभिषेक गुप्ता सहित विभागीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।

2 hrs ago
user_Puran Dewangan
Puran Dewangan
Rajpur, Balrampur•
2 hrs ago

कलेक्टर ने ली समय-सीमा की बैठक,ग्रीष्मकाल में सतत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने दिए निर्देश,एग्री स्टेक पोर्टल में पात्र सभी किसानों का पंजीयन सुनिश्चित करें - कलेक्टर बलरामपुर। कलेक्टर राजेंद्र कटारा की अध्यक्षता में संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में समय-सीमा की बैठक आयोजित हुई। बैठक में कलेक्टर ने प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा, राजस्व प्रकरण, आयुष्मान कार्ड, स्वास्थ्य और पेयजल की उपलब्धता सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कलेक्टर श्री राजेंद्र कटारा ने राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए अविवादित नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा सहित अन्य राजस्व प्रकरणों का त्वरित एवं प्राथमिकता के साथ निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने आम नागरिकों से जुड़े राजस्व प्रकरणों तथा हाईकोर्ट में लंबित प्रकरणों का भी शीघ्र निराकरण करने को कहा। साथ ही कलेक्टर ने एग्री स्टेक पोर्टल में जिले के सभी पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सके। प्रधानमंत्री आवास योजना एवं पीएम जनमन आवासों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने लक्ष्य के अनुरूप प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वीकृत, पूर्ण एवं अपूर्ण आवासों की विस्तृत जानकारी ली तथा लंबित आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ मिल सके। उन्होंने पीएम जनमन के अंतर्गत स्वीकृत गतिविधियों की भी जानकारी लेकर कार्य में प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत पीएम जनमन मोबाइल मेडिकल यूनिट के संचालन एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने आयुष्मान भारत योजना एवं वय वंदन योजना के अंतर्गत कार्ड निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए शेष हितग्राहियों के कार्ड शीघ्र बनाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिक से अधिक स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री कटारा ने गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संबंधी समस्याओं का चिन्हांकन कर तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए, ताकि ग्रीष्मकाल में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और सुचारू रूप से पेयजल उपलब्ध हो सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पेयजल आपूर्ति पर सतत निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी दिए। आगामी होने वाले जनगणना के संबंध में कलेक्टर श्री कटारा ने जिला सांख्यिकी अधिकारी से तैयारियों की जानकारी लेते हुए नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर, अपर कलेक्टर श्री आर.एस. लाल, श्री अभिषेक गुप्ता सहित विभागीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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  • बलरामपुर। कलेक्टर राजेंद्र कटारा की अध्यक्षता में संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में समय-सीमा की बैठक आयोजित हुई। बैठक में कलेक्टर ने प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा, राजस्व प्रकरण, आयुष्मान कार्ड, स्वास्थ्य और पेयजल की उपलब्धता सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कलेक्टर श्री राजेंद्र कटारा ने राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए अविवादित नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा सहित अन्य राजस्व प्रकरणों का त्वरित एवं प्राथमिकता के साथ निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने आम नागरिकों से जुड़े राजस्व प्रकरणों तथा हाईकोर्ट में लंबित प्रकरणों का भी शीघ्र निराकरण करने को कहा। साथ ही कलेक्टर ने एग्री स्टेक पोर्टल में जिले के सभी पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सके। प्रधानमंत्री आवास योजना एवं पीएम जनमन आवासों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने लक्ष्य के अनुरूप प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वीकृत, पूर्ण एवं अपूर्ण आवासों की विस्तृत जानकारी ली तथा लंबित आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ मिल सके। उन्होंने पीएम जनमन के अंतर्गत स्वीकृत गतिविधियों की भी जानकारी लेकर कार्य में प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत पीएम जनमन मोबाइल मेडिकल यूनिट के संचालन एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने आयुष्मान भारत योजना एवं वय वंदन योजना के अंतर्गत कार्ड निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए शेष हितग्राहियों के कार्ड शीघ्र बनाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिक से अधिक स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री कटारा ने गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संबंधी समस्याओं का चिन्हांकन कर तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए, ताकि ग्रीष्मकाल में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और सुचारू रूप से पेयजल उपलब्ध हो सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पेयजल आपूर्ति पर सतत निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी दिए। आगामी होने वाले जनगणना के संबंध में कलेक्टर श्री कटारा ने जिला सांख्यिकी अधिकारी से तैयारियों की जानकारी लेते हुए नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर, अपर कलेक्टर श्री आर.एस. लाल, श्री अभिषेक गुप्ता सहित विभागीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।
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    बलरामपुर। कलेक्टर राजेंद्र कटारा की अध्यक्षता में संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में समय-सीमा की बैठक आयोजित हुई। बैठक में कलेक्टर ने प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा, राजस्व प्रकरण, आयुष्मान कार्ड, स्वास्थ्य और पेयजल की उपलब्धता सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कलेक्टर श्री राजेंद्र कटारा ने राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए अविवादित नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा सहित अन्य राजस्व प्रकरणों का त्वरित एवं प्राथमिकता के साथ निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने आम नागरिकों से जुड़े राजस्व प्रकरणों तथा हाईकोर्ट में लंबित प्रकरणों का भी शीघ्र निराकरण करने को कहा। साथ ही कलेक्टर ने एग्री स्टेक पोर्टल में जिले के सभी पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सके।
प्रधानमंत्री आवास योजना एवं पीएम जनमन आवासों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने लक्ष्य के अनुरूप प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वीकृत, पूर्ण एवं अपूर्ण आवासों की विस्तृत जानकारी ली तथा लंबित आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ मिल सके। उन्होंने पीएम जनमन के अंतर्गत स्वीकृत गतिविधियों की भी जानकारी लेकर कार्य में प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत पीएम जनमन मोबाइल मेडिकल यूनिट के संचालन एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने आयुष्मान भारत योजना एवं वय वंदन योजना के अंतर्गत कार्ड निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए शेष हितग्राहियों के कार्ड शीघ्र बनाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिक से अधिक स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर श्री कटारा ने गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संबंधी समस्याओं का चिन्हांकन कर तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए, ताकि ग्रीष्मकाल में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और सुचारू रूप से पेयजल उपलब्ध हो सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पेयजल आपूर्ति पर सतत निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी दिए। आगामी होने वाले जनगणना के संबंध में कलेक्टर श्री कटारा ने जिला सांख्यिकी अधिकारी से तैयारियों की जानकारी लेते हुए नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।
बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर, अपर कलेक्टर श्री आर.एस. लाल, श्री अभिषेक गुप्ता सहित विभागीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।
    user_Puran Dewangan
    Puran Dewangan
    Rajpur, Balrampur•
    2 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल को ज्ञापन, पुनर्विचार की मांग बलरामपुर, बलरामपुर जिले में भारत मुक्ति मोर्चा ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में राज्यपाल से विधेयक को सहमति न देने तथा पुनर्विचार के लिए विधानसभा को वापस भेजने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में पहले से ही मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 में लागू है, जिसमें छल, बल या प्रलोभन से धर्मांतरण रोकने का प्रावधान मौजूद है। ऐसे में नए कानून की आवश्यकता पर प्रश्न उठाया गया है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान कानून का कई मामलों में दुरुपयोग हुआ है, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध निराधार एफआईआर, गिरफ्तारी, सामाजिक बहिष्कार और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं। ज्ञापन के अनुसार, प्रस्तावित नए विधेयक में सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास, नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं ओबीसी वर्ग से जुड़े मामलों में 10 से 20 वर्ष की सजा, 10 से 25 लाख रुपये तक जुर्माना तथा अपराध को गैर-जमानती बनाए जाने जैसे कठोर प्रावधान शामिल हैं। साथ ही सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि इससे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की शक्तियां अत्यधिक बढ़ जाएंगी, जिससे दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विधेयक में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ दंड का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे कानून के दुरुपयोग की संभावना और बढ़ जाती है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता प्रतीत होता है, क्योंकि धर्म परिवर्तन व्यक्ति की अंतःकरण की स्वतंत्रता का हिस्सा है। ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि वर्तमान कानून के तहत अब तक किसी भी मामले में “बल, छल या प्रलोभन” से धर्मांतरण सिद्ध नहीं हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कानून का उपयोग न्याय से अधिक अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। ज्ञापन में ‘प्रलोभन’ जैसे शब्दों की अस्पष्ट परिभाषा पर भी आपत्ति जताई गई है। ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से मांग की गई है कि विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटाया जाए, वर्तमान और प्रस्तावित कानून की व्यापक समीक्षा कराई जाए, जिसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधि, नागरिक समाज, मानवाधिकार संगठन और कानून विशेषज्ञ शामिल हों। साथ ही राज्य में धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की गई है। ज्ञापन के अंत में कहा गया है कि यदि इस मामले में उचित समाधान नहीं निकला तो जनहित याचिका के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा। ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी संगठन शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नई दिल्ली धरमू एक्का ने इस काला कानून के बारे में विस्तृत रूप से लोगों को समझाएं, भारत मुक्ति मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक अमिन साय एक्का, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद बलरामपुर जिला संयोजक अनिल खलखो, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक घूरन यादव, राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक रंजीत बड़ा, मिखाई एक्का इस काला कानून बिल का जोरदार विरोध किया, सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने समर्थन दिया साथ बलरामपुर जिले से भारी संख्या में भाग लिया इस कार्य क्रमसंपन्न किया गया।
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    छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल को ज्ञापन, पुनर्विचार की मांग
बलरामपुर, बलरामपुर जिले में भारत मुक्ति मोर्चा ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में राज्यपाल से विधेयक को सहमति न देने तथा पुनर्विचार के लिए विधानसभा को वापस भेजने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में पहले से ही मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 में लागू है, जिसमें छल, बल या प्रलोभन से धर्मांतरण रोकने का प्रावधान मौजूद है। ऐसे में नए कानून की आवश्यकता पर प्रश्न उठाया गया है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान कानून का कई मामलों में दुरुपयोग हुआ है, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध निराधार एफआईआर, गिरफ्तारी, सामाजिक बहिष्कार और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं।
ज्ञापन के अनुसार, प्रस्तावित नए विधेयक में सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास, नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं ओबीसी वर्ग से जुड़े मामलों में 10 से 20 वर्ष की सजा, 10 से 25 लाख रुपये तक जुर्माना तथा अपराध को गैर-जमानती बनाए जाने जैसे कठोर प्रावधान शामिल हैं। साथ ही सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि इससे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की शक्तियां अत्यधिक बढ़ जाएंगी, जिससे दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विधेयक में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ दंड का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे कानून के दुरुपयोग की संभावना और बढ़ जाती है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता प्रतीत होता है, क्योंकि धर्म परिवर्तन व्यक्ति की अंतःकरण की स्वतंत्रता का हिस्सा है।
ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि वर्तमान कानून के तहत अब तक किसी भी मामले में “बल, छल या प्रलोभन” से धर्मांतरण सिद्ध नहीं हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कानून का उपयोग न्याय से अधिक अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। ज्ञापन में ‘प्रलोभन’ जैसे शब्दों की अस्पष्ट परिभाषा पर भी आपत्ति जताई गई है।
ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से मांग की गई है कि विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटाया जाए, वर्तमान और प्रस्तावित कानून की व्यापक समीक्षा कराई जाए, जिसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधि, नागरिक समाज, मानवाधिकार संगठन और कानून विशेषज्ञ शामिल हों। साथ ही राज्य में धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की गई है।
ज्ञापन के अंत में कहा गया है कि यदि इस मामले में उचित समाधान नहीं निकला तो जनहित याचिका के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा। ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी संगठन शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नई दिल्ली धरमू एक्का ने इस काला कानून के बारे में विस्तृत रूप से लोगों को समझाएं, भारत मुक्ति मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक अमिन साय एक्का, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद बलरामपुर जिला संयोजक अनिल खलखो, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक घूरन यादव, राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक रंजीत बड़ा, मिखाई एक्का इस काला कानून बिल का जोरदार विरोध किया, सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने समर्थन दिया साथ बलरामपुर जिले से भारी संख्या में भाग लिया इस  कार्य क्रमसंपन्न किया गया।
    user_ANIL XALXO
    ANIL XALXO
    Farmer राजपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    10 hrs ago
  • Post by सतभक्ति संदेश
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    Post by सतभक्ति संदेश
    user_सतभक्ति संदेश
    सतभक्ति संदेश
    Fraternal organization केसकाल, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    1 day ago
  • Post by Ashish parihar Parihar
    1
    Post by Ashish parihar Parihar
    user_Ashish parihar Parihar
    Ashish parihar Parihar
    पत्रकार Kanker, Chhattisgarh•
    1 hr ago
  • नमस्कार,मैं हूं योगेश कुमार साहू और आप देख रहे हैं द छत्तीसगढ़। आज छत्तीसगढ़ की अदालत ने एक ऐसे मामले में फैसला सुनाया है जिसने कानूनी और सामाजिक बहस को फिर से तेज कर दिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि एक बालिग और शादीशुदा महिला की मर्जी और पूरी सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध रेप की श्रेणी में नहीं आते। कोर्ट ने इस आधार पर एक युवक को 4 साल पुराने रेप केस से पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया। आइए जानते हैं इस पूरे मामले को विस्तार से। दरअसल, मामला बेमेतरा जिले का है। वर्ष 2022 में एक शादीशुदा महिला ने आरोपी युवक के खिलाफ रेप का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला बेमेतरा के एक एग्रीकल्चरल कॉलेज में मजदूरी का काम करती थी। वहीं गांव का ही एक युवक भी मजदूरी के लिए आता था। दोनों के बीच धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई। महिला की शिकायत के अनुसार, 19 जून 2022 को आरोपी ने उससे बात शुरू की और शादी का वादा करके उसे बहलाने की कोशिश की। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने बार-बार शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया। 25 जुलाई 2022 की सुबह करीब 4 बजे, जब महिला शौच के लिए जा रही थी, तब आरोपी उससे मिला। उसने फिर शादी का भरोसा दिलाया और महिला को अपने घर ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। उस समय महिला 3 महीने की गर्भवती थी। महिला ने बताया कि सामाजिक बदनामी के डर से उसने इस घटना की जानकारी किसी को नहीं बताई। बाद में जब पति ने पूछताछ की तो उसने सारी बात बता दी और फिर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले की जांच की और आरोपी के खिलाफ चालान पेश किया। ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयानों, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों का गहन अध्ययन किया। कोर्ट को यह साबित नहीं हो सका कि संबंध बिना सहमति के या जबरदस्ती बने थे। नतीजतन, ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। इस फैसले के खिलाफ पीड़िता महिला ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई। हाईकोर्ट में विस्तृत सुनवाई हुई। कोर्ट ने गवाहों के बयानों, महिला के अपने कोर्ट बयान और उपलब्ध मेडिकल एवं अन्य सबूतों को ध्यान से देखा। हाईकोर्ट ने पाया कि: • गवाहों के बयानों से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने जान से मारने या चोट पहुंचाने की कोई धमकी देकर सहमति हासिल की थी। • ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे साबित हो कि महिला को यह भ्रम था कि वह कानूनी रूप से आरोपी की पत्नी है। • महिला के बयान से साफ जाहिर होता है कि संबंध सहमति से बने थे। • महिला पहले से शादीशुदा थी और उस समय गर्भवती भी थी। • यह भी साबित नहीं हुआ कि महिला नशे में थी, उसकी मानसिक स्थिति खराब थी या वह सहमति देने की स्थिति में नहीं थी। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में सख्त शब्दों में कहा: “एक बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध रेप का जुर्म नहीं बनते।” कोर्ट ने महिला की याचिका को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के दोषमुक्त करने वाले फैसले को बरकरार रखा। आरोपी युवक को इस मामले से पूरी राहत मिल गई। दोस्तों, यह फैसला कानूनी रूप से सहमति की अहमियत को रेखांकित करता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत रेप की परिभाषा में सहमति का अभाव एक महत्वपूर्ण तत्व है। जब कोई महिला बालिग हो, समझदार हो और अपनी स्वतंत्र मर्जी से संबंध बनाती है, तो अदालतें इसे रेप नहीं मानतीं। हालांकि, झूठे वादे या धोखे से सहमति हासिल करने के मामलों में अलग व्याख्या हो सकती है, लेकिन इस केस में सबूत सहमति की ओर इशारा करते थे। यह मामला हमें याद दिलाता है कि कानून सबूतों और तथ्यों पर आधारित होता है, न कि सिर्फ आरोपों पर। साथ ही, समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के साथ-साथ निर्दोष व्यक्तियों को भी न्याय मिलना चाहिए। योगेश कुमार साहू के साथ द छत्तीसगढ़ का यह विशेष रिपोर्ट आपको कैसा लगा? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं। क्या आपको लगता है कि सहमति वाले मामलों में अदालतों को और सख्त होना चाहिए या सबूतों को प्राथमिकता देनी चाहिए? कानून की सच्चाई हमेशा सबूतों में छुपी होती है, और न्याय तभी सार्थक होता है जब वह निष्पक्ष और तथ्यपरक हो। सतर्क रहें, जागरूक रहें।धन्यवाद, जय छत्तीसगढ़! द छत्तीसगढ़ – सच्चाई की आवाज।
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    नमस्कार,मैं हूं योगेश कुमार साहू और आप देख रहे हैं द छत्तीसगढ़।
आज छत्तीसगढ़ की अदालत ने एक ऐसे मामले में फैसला सुनाया है जिसने कानूनी और सामाजिक बहस को फिर से तेज कर दिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि एक बालिग और शादीशुदा महिला की मर्जी और पूरी सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध रेप की श्रेणी में नहीं आते। कोर्ट ने इस आधार पर एक युवक को 4 साल पुराने रेप केस से पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया। आइए जानते हैं इस पूरे मामले को विस्तार से।
दरअसल, मामला बेमेतरा जिले का है। वर्ष 2022 में एक शादीशुदा महिला ने आरोपी युवक के खिलाफ रेप का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला बेमेतरा के एक एग्रीकल्चरल कॉलेज में मजदूरी का काम करती थी। वहीं गांव का ही एक युवक भी मजदूरी के लिए आता था। दोनों के बीच धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई।
महिला की शिकायत के अनुसार, 19 जून 2022 को आरोपी ने उससे बात शुरू की और शादी का वादा करके उसे बहलाने की कोशिश की। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने बार-बार शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया।
25 जुलाई 2022 की सुबह करीब 4 बजे, जब महिला शौच के लिए जा रही थी, तब आरोपी उससे मिला। उसने फिर शादी का भरोसा दिलाया और महिला को अपने घर ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। उस समय महिला 3 महीने की गर्भवती थी। महिला ने बताया कि सामाजिक बदनामी के डर से उसने इस घटना की जानकारी किसी को नहीं बताई। बाद में जब पति ने पूछताछ की तो उसने सारी बात बता दी और फिर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
पुलिस ने मामले की जांच की और आरोपी के खिलाफ चालान पेश किया। ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयानों, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों का गहन अध्ययन किया। कोर्ट को यह साबित नहीं हो सका कि संबंध बिना सहमति के या जबरदस्ती बने थे। नतीजतन, ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
इस फैसले के खिलाफ पीड़िता महिला ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट में विस्तृत सुनवाई हुई। कोर्ट ने गवाहों के बयानों, महिला के अपने कोर्ट बयान और उपलब्ध मेडिकल एवं अन्य सबूतों को ध्यान से देखा। हाईकोर्ट ने पाया कि:
•  गवाहों के बयानों से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने जान से मारने या चोट पहुंचाने की कोई धमकी देकर सहमति हासिल की थी।
•  ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे साबित हो कि महिला को यह भ्रम था कि वह कानूनी रूप से आरोपी की पत्नी है।
•  महिला के बयान से साफ जाहिर होता है कि संबंध सहमति से बने थे।
•  महिला पहले से शादीशुदा थी और उस समय गर्भवती भी थी।
•  यह भी साबित नहीं हुआ कि महिला नशे में थी, उसकी मानसिक स्थिति खराब थी या वह सहमति देने की स्थिति में नहीं थी।
हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में सख्त शब्दों में कहा:
“एक बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध रेप का जुर्म नहीं बनते।”
कोर्ट ने महिला की याचिका को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के दोषमुक्त करने वाले फैसले को बरकरार रखा। आरोपी युवक को इस मामले से पूरी राहत मिल गई।
दोस्तों, यह फैसला कानूनी रूप से सहमति की अहमियत को रेखांकित करता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत रेप की परिभाषा में सहमति का अभाव एक महत्वपूर्ण तत्व है। जब कोई महिला बालिग हो, समझदार हो और अपनी स्वतंत्र मर्जी से संबंध बनाती है, तो अदालतें इसे रेप नहीं मानतीं। हालांकि, झूठे वादे या धोखे से सहमति हासिल करने के मामलों में अलग व्याख्या हो सकती है, लेकिन इस केस में सबूत सहमति की ओर इशारा करते थे।
यह मामला हमें याद दिलाता है कि कानून सबूतों और तथ्यों पर आधारित होता है, न कि सिर्फ आरोपों पर। साथ ही, समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के साथ-साथ निर्दोष व्यक्तियों को भी न्याय मिलना चाहिए।
योगेश कुमार साहू के साथ द छत्तीसगढ़ का यह विशेष रिपोर्ट आपको कैसा लगा? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं। क्या आपको लगता है कि सहमति वाले मामलों में अदालतों को और सख्त होना चाहिए या सबूतों को प्राथमिकता देनी चाहिए?
कानून की सच्चाई हमेशा सबूतों में छुपी होती है, और न्याय तभी सार्थक होता है जब वह निष्पक्ष और तथ्यपरक हो। सतर्क रहें, जागरूक रहें।धन्यवाद, जय छत्तीसगढ़! द छत्तीसगढ़ – सच्चाई की आवाज।
    user_YOGESH KUAMR SAHU
    YOGESH KUAMR SAHU
    News Anchor बालोद, बालोद, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
  • नारायणपुर में कृषि को रसायन मुक्त और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जैविक नियंत्रण विषय पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान किसानों को मित्र कीटों के माध्यम से फसल सुरक्षा की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। नारायणपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में “आदिवासी उप परियोजना (Tribal Sub Plan)” के अंतर्गत अखिल भारतीय जैविक नियंत्रण अनुसंधान परियोजना के तहत 28 मार्च 2026 को जैविक नियंत्रण पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम केंद्र के प्रमुख डॉ. दिव्येंदु दास के कुशल मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. योगेश मेश्राम, मुख्य अन्वेषक (AICRP on Biological Control) ने किसानों को जैविक कीट नियंत्रण की अवधारणा और इसके महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मित्र कीट (Beneficial Insects) फसलों के लिए हानिकारक कीटों को नियंत्रित कर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं। डॉ. मेश्राम ने किसानों को तना छेदक जैसे हानिकारक कीटों के नियंत्रण के लिए ट्राइकोग्रामा प्रजाति के अंड परजीवी के उपयोग की जानकारी दी। इसके साथ ही इल्ली अवस्था के नियंत्रण हेतु रेडूविड बग (मित्र परभक्षी कीट) के प्रयोग की सलाह दी गई। उन्होंने बताया कि बैसिलस थुरिंजिएन्सिस (BT) का उपयोग भी फसलों में हानिकारक कीटों के प्रभावी नियंत्रण के लिए अत्यंत उपयोगी है। रस चूसने वाले कीटों के नियंत्रण के लिए मेटाराइजियम एनिसोप्ली के प्रयोग की सलाह दी गई, वहीं खेतों में पीला चिपचिपा प्रपंच (Yellow Sticky Trap) लगाने से भी कीट नियंत्रण में मदद मिलती है। गाजर घास जैसी खरपतवार के नियंत्रण के लिए मैक्सिकन बीटल जैसे मित्र जीवों के उपयोग के बारे में भी किसानों को जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि जैविक कीट नियंत्रण न केवल फसलों को सुरक्षित रखता है, बल्कि पर्यावरण को भी प्रदूषण मुक्त बनाए रखता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और मानव स्वास्थ्य पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. हरेंद्र टोंडे, डॉ. ललित वर्मा, डॉ. आलिया अफरोज एवं डॉ. अंकिता सिंह ने भी किसानों को जैविक खेती और जैविक कीट नियंत्रण के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान केंद्र के अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के अंत में किसानों को जैविक कीट नियंत्रण के लिए मित्र जीवों का वितरण किया गया, ताकि वे इन तकनीकों को अपने खेतों में अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुआ। इससे उन्हें रसायन मुक्त खेती अपनाने और जैविक तरीकों से फसल सुरक्षा करने की प्रेरणा मिली। कृषि विज्ञान केंद्र का यह प्रयास न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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    नारायणपुर में कृषि को रसायन मुक्त और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जैविक नियंत्रण विषय पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान किसानों को मित्र कीटों के माध्यम से फसल सुरक्षा की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई।
नारायणपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में “आदिवासी उप परियोजना (Tribal Sub Plan)” के अंतर्गत अखिल भारतीय जैविक नियंत्रण अनुसंधान परियोजना के तहत 28 मार्च 2026 को जैविक नियंत्रण पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम केंद्र के प्रमुख डॉ. दिव्येंदु दास के कुशल मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. योगेश मेश्राम, मुख्य अन्वेषक (AICRP on Biological Control) ने किसानों को जैविक कीट नियंत्रण की अवधारणा और इसके महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मित्र कीट (Beneficial Insects) फसलों के लिए हानिकारक कीटों को नियंत्रित कर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं।
डॉ. मेश्राम ने किसानों को तना छेदक जैसे हानिकारक कीटों के नियंत्रण के लिए ट्राइकोग्रामा प्रजाति के अंड परजीवी के उपयोग की जानकारी दी। इसके साथ ही इल्ली अवस्था के नियंत्रण हेतु रेडूविड बग (मित्र परभक्षी कीट) के प्रयोग की सलाह दी गई। उन्होंने बताया कि बैसिलस थुरिंजिएन्सिस (BT) का उपयोग भी फसलों में हानिकारक कीटों के प्रभावी नियंत्रण के लिए अत्यंत उपयोगी है।
रस चूसने वाले कीटों के नियंत्रण के लिए मेटाराइजियम एनिसोप्ली के प्रयोग की सलाह दी गई, वहीं खेतों में पीला चिपचिपा प्रपंच (Yellow Sticky Trap) लगाने से भी कीट नियंत्रण में मदद मिलती है। गाजर घास जैसी खरपतवार के नियंत्रण के लिए मैक्सिकन बीटल जैसे मित्र जीवों के उपयोग के बारे में भी किसानों को जागरूक किया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि जैविक कीट नियंत्रण न केवल फसलों को सुरक्षित रखता है, बल्कि पर्यावरण को भी प्रदूषण मुक्त बनाए रखता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और मानव स्वास्थ्य पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. हरेंद्र टोंडे, डॉ. ललित वर्मा, डॉ. आलिया अफरोज एवं डॉ. अंकिता सिंह ने भी किसानों को जैविक खेती और जैविक कीट नियंत्रण के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान केंद्र के अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण के अंत में किसानों को जैविक कीट नियंत्रण के लिए मित्र जीवों का वितरण किया गया, ताकि वे इन तकनीकों को अपने खेतों में अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुआ। इससे उन्हें रसायन मुक्त खेती अपनाने और जैविक तरीकों से फसल सुरक्षा करने की प्रेरणा मिली। कृषि विज्ञान केंद्र का यह प्रयास न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
    user_AKASH singh thakur
    AKASH singh thakur
    Narayanpur, Chhattisgarh•
    7 hrs ago
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    औदगी, रायपुर, छत्तीसगढ़•
    6 hrs ago
  • Post by Ashish parihar Parihar
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    Post by Ashish parihar Parihar
    user_Ashish parihar Parihar
    Ashish parihar Parihar
    पत्रकार Kanker, Chhattisgarh•
    1 hr ago
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