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छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल को ज्ञापन, पुनर्विचार की मांग छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल को ज्ञापन, पुनर्विचार की मांग बलरामपुर, बलरामपुर जिले में भारत मुक्ति मोर्चा ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में राज्यपाल से विधेयक को सहमति न देने तथा पुनर्विचार के लिए विधानसभा को वापस भेजने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में पहले से ही मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 में लागू है, जिसमें छल, बल या प्रलोभन से धर्मांतरण रोकने का प्रावधान मौजूद है। ऐसे में नए कानून की आवश्यकता पर प्रश्न उठाया गया है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान कानून का कई मामलों में दुरुपयोग हुआ है, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध निराधार एफआईआर, गिरफ्तारी, सामाजिक बहिष्कार और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं। ज्ञापन के अनुसार, प्रस्तावित नए विधेयक में सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास, नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं ओबीसी वर्ग से जुड़े मामलों में 10 से 20 वर्ष की सजा, 10 से 25 लाख रुपये तक जुर्माना तथा अपराध को गैर-जमानती बनाए जाने जैसे कठोर प्रावधान शामिल हैं। साथ ही सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि इससे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की शक्तियां अत्यधिक बढ़ जाएंगी, जिससे दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विधेयक में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ दंड का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे कानून के दुरुपयोग की संभावना और बढ़ जाती है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता प्रतीत होता है, क्योंकि धर्म परिवर्तन व्यक्ति की अंतःकरण की स्वतंत्रता का हिस्सा है। ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि वर्तमान कानून के तहत अब तक किसी भी मामले में “बल, छल या प्रलोभन” से धर्मांतरण सिद्ध नहीं हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कानून का उपयोग न्याय से अधिक अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। ज्ञापन में ‘प्रलोभन’ जैसे शब्दों की अस्पष्ट परिभाषा पर भी आपत्ति जताई गई है। ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से मांग की गई है कि विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटाया जाए, वर्तमान और प्रस्तावित कानून की व्यापक समीक्षा कराई जाए, जिसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधि, नागरिक समाज, मानवाधिकार संगठन और कानून विशेषज्ञ शामिल हों। साथ ही राज्य में धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की गई है। ज्ञापन के अंत में कहा गया है कि यदि इस मामले में उचित समाधान नहीं निकला तो जनहित याचिका के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा। ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी संगठन शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नई दिल्ली धरमू एक्का ने इस काला कानून के बारे में विस्तृत रूप से लोगों को समझाएं, भारत मुक्ति मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक अमिन साय एक्का, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद बलरामपुर जिला संयोजक अनिल खलखो, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक घूरन यादव, राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक रंजीत बड़ा, मिखाई एक्का इस काला कानून बिल का जोरदार विरोध किया, सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने समर्थन दिया साथ बलरामपुर जिले से भारी संख्या में भाग लिया इस कार्य क्रमसंपन्न किया गया।

2 hrs ago
user_ANIL XALXO
ANIL XALXO
Farmer राजपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
2 hrs ago

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल को ज्ञापन, पुनर्विचार की मांग छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल को ज्ञापन, पुनर्विचार की मांग बलरामपुर, बलरामपुर जिले में भारत मुक्ति मोर्चा ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में राज्यपाल से विधेयक को सहमति न देने तथा पुनर्विचार के लिए विधानसभा को वापस भेजने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में पहले से ही मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 में लागू है, जिसमें छल, बल या प्रलोभन से धर्मांतरण रोकने का प्रावधान मौजूद है। ऐसे में नए कानून की आवश्यकता पर प्रश्न उठाया गया है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान कानून का कई मामलों में दुरुपयोग हुआ है, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध निराधार एफआईआर, गिरफ्तारी, सामाजिक बहिष्कार और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं। ज्ञापन के

अनुसार, प्रस्तावित नए विधेयक में सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास, नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं ओबीसी वर्ग से जुड़े मामलों में 10 से 20 वर्ष की सजा, 10 से 25 लाख रुपये तक जुर्माना तथा अपराध को गैर-जमानती बनाए जाने जैसे कठोर प्रावधान शामिल हैं। साथ ही सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि इससे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की शक्तियां अत्यधिक बढ़ जाएंगी, जिससे दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विधेयक में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ दंड का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे कानून के दुरुपयोग की संभावना और बढ़ जाती है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता प्रतीत होता है, क्योंकि धर्म

परिवर्तन व्यक्ति की अंतःकरण की स्वतंत्रता का हिस्सा है। ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि वर्तमान कानून के तहत अब तक किसी भी मामले में “बल, छल या प्रलोभन” से धर्मांतरण सिद्ध नहीं हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कानून का उपयोग न्याय से अधिक अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। ज्ञापन में ‘प्रलोभन’ जैसे शब्दों की अस्पष्ट परिभाषा पर भी आपत्ति जताई गई है। ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से मांग की गई है कि विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटाया जाए, वर्तमान और प्रस्तावित कानून की व्यापक समीक्षा कराई जाए, जिसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधि, नागरिक समाज, मानवाधिकार संगठन और कानून विशेषज्ञ शामिल हों। साथ ही राज्य में धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की गई है। ज्ञापन के अंत में कहा गया है कि यदि इस मामले में

उचित समाधान नहीं निकला तो जनहित याचिका के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा। ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी संगठन शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नई दिल्ली धरमू एक्का ने इस काला कानून के बारे में विस्तृत रूप से लोगों को समझाएं, भारत मुक्ति मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक अमिन साय एक्का, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद बलरामपुर जिला संयोजक अनिल खलखो, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक घूरन यादव, राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक रंजीत बड़ा, मिखाई एक्का इस काला कानून बिल का जोरदार विरोध किया, सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने समर्थन दिया साथ बलरामपुर जिले से भारी संख्या में भाग लिया इस कार्य क्रमसंपन्न किया गया।

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    छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल को ज्ञापन, पुनर्विचार की मांग
बलरामपुर, बलरामपुर जिले में भारत मुक्ति मोर्चा ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में राज्यपाल से विधेयक को सहमति न देने तथा पुनर्विचार के लिए विधानसभा को वापस भेजने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में पहले से ही मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 में लागू है, जिसमें छल, बल या प्रलोभन से धर्मांतरण रोकने का प्रावधान मौजूद है। ऐसे में नए कानून की आवश्यकता पर प्रश्न उठाया गया है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान कानून का कई मामलों में दुरुपयोग हुआ है, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध निराधार एफआईआर, गिरफ्तारी, सामाजिक बहिष्कार और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं।
ज्ञापन के अनुसार, प्रस्तावित नए विधेयक में सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास, नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं ओबीसी वर्ग से जुड़े मामलों में 10 से 20 वर्ष की सजा, 10 से 25 लाख रुपये तक जुर्माना तथा अपराध को गैर-जमानती बनाए जाने जैसे कठोर प्रावधान शामिल हैं। साथ ही सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि इससे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की शक्तियां अत्यधिक बढ़ जाएंगी, जिससे दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विधेयक में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ दंड का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे कानून के दुरुपयोग की संभावना और बढ़ जाती है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता प्रतीत होता है, क्योंकि धर्म परिवर्तन व्यक्ति की अंतःकरण की स्वतंत्रता का हिस्सा है।
ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि वर्तमान कानून के तहत अब तक किसी भी मामले में “बल, छल या प्रलोभन” से धर्मांतरण सिद्ध नहीं हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कानून का उपयोग न्याय से अधिक अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। ज्ञापन में ‘प्रलोभन’ जैसे शब्दों की अस्पष्ट परिभाषा पर भी आपत्ति जताई गई है।
ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से मांग की गई है कि विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटाया जाए, वर्तमान और प्रस्तावित कानून की व्यापक समीक्षा कराई जाए, जिसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधि, नागरिक समाज, मानवाधिकार संगठन और कानून विशेषज्ञ शामिल हों। साथ ही राज्य में धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की गई है।
ज्ञापन के अंत में कहा गया है कि यदि इस मामले में उचित समाधान नहीं निकला तो जनहित याचिका के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा। ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी संगठन शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नई दिल्ली धरमू एक्का ने इस काला कानून के बारे में विस्तृत रूप से लोगों को समझाएं, भारत मुक्ति मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक अमिन साय एक्का, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद बलरामपुर जिला संयोजक अनिल खलखो, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक घूरन यादव, राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक रंजीत बड़ा, मिखाई एक्का इस काला कानून बिल का जोरदार विरोध किया, सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने समर्थन दिया साथ बलरामपुर जिले से भारी संख्या में भाग लिया इस  कार्य क्रमसंपन्न किया गया।
    user_ANIL XALXO
    ANIL XALXO
    Farmer राजपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • Post by सतभक्ति संदेश
    1
    Post by सतभक्ति संदेश
    user_सतभक्ति संदेश
    सतभक्ति संदेश
    Fraternal organization केसकाल, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    15 hrs ago
  • Post by Ashish parihar Parihar
    1
    Post by Ashish parihar Parihar
    user_Ashish parihar Parihar
    Ashish parihar Parihar
    पत्रकार Kanker, Chhattisgarh•
    16 hrs ago
  • संस्कारधानी राजनांदगांव में रामनवमी का पर्व इस बार विशेष उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया, जहां आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर में निकली भव्य शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया, और हर ओर “जय श्री राम” के जयघोष गूंजते रहे। रामनवमी के पावन अवसर पर यह ऐतिहासिक शोभायात्रा शहर के महावीर चौक से प्रारंभ हुई। यहां भगवान सियारामचंद्र जी की विधिवत पूजा-अर्चना कर यात्रा का शुभारंभ किया गया। सजे-धजे रथों, आकर्षक झांकियों और धार्मिक ध्वजों के साथ यह शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए आगे बढ़ी। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। महिलाएं, युवा और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर भगवान श्रीराम के भजनों और जयकारों से माहौल को पूरी तरह से भक्तिमय बना रहे थे। हर गली और चौक में लोगों ने यात्रा का स्वागत पुष्प वर्षा और आरती के साथ किया। यह भव्य यात्रा जी.ई. रोड स्थित श्री हनुमानजी मंदिर प्रांगण पहुंचकर सम्पन्न हुई, जहां श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्री हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद सभी भक्तों के बीच प्रसादी का वितरण किया गया। इस आयोजन में गुजरात समाज के प्रमुख जन, जिला साहू संघ के अध्यक्ष भागवत साहू सहित सर्व समाज के गणमान्य नागरिकों की सक्रिय भागीदारी रही। साथ ही पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, महापौर मधुसूदन यादव, विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान “जय श्री राम” के गगनभेदी जयघोष ने पूरे शहर को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी दे गया।
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    संस्कारधानी राजनांदगांव में रामनवमी का पर्व इस बार विशेष उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया, जहां आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर में निकली भव्य शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया, और हर ओर “जय श्री राम” के जयघोष गूंजते रहे।
रामनवमी के पावन अवसर पर यह ऐतिहासिक शोभायात्रा शहर के महावीर चौक से प्रारंभ हुई। यहां भगवान सियारामचंद्र जी की विधिवत पूजा-अर्चना कर यात्रा का शुभारंभ किया गया। सजे-धजे रथों, आकर्षक झांकियों और धार्मिक ध्वजों के साथ यह शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए आगे बढ़ी।
शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। महिलाएं, युवा और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर भगवान श्रीराम के भजनों और जयकारों से माहौल को पूरी तरह से भक्तिमय बना रहे थे। हर गली और चौक में लोगों ने यात्रा का स्वागत पुष्प वर्षा और आरती के साथ किया।
यह भव्य यात्रा जी.ई. रोड स्थित श्री हनुमानजी मंदिर प्रांगण पहुंचकर सम्पन्न हुई, जहां श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्री हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद सभी भक्तों के बीच प्रसादी का वितरण किया गया।
इस आयोजन में गुजरात समाज के प्रमुख जन, जिला साहू संघ के अध्यक्ष भागवत साहू सहित सर्व समाज के गणमान्य नागरिकों की सक्रिय भागीदारी रही। साथ ही पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, महापौर मधुसूदन यादव, विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
पूरे आयोजन के दौरान “जय श्री राम” के गगनभेदी जयघोष ने पूरे शहर को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी दे गया।
    user_YOGESH KUAMR SAHU
    YOGESH KUAMR SAHU
    News Anchor बालोद, बालोद, छत्तीसगढ़•
    3 hrs ago
  • अनियन्त्रित होकर बोलेरो वाहन पेड़ से टकराई, एक युवक की हुई मौत, 7 लोग हुए घायल फरसगांव :- नेशनल हाइवे 30 मांझीआठगांव के पास रविवार की सुबह तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला, रविवार सुबह करीब 6 बजे एक तेज रफ्तार बोलेरो वाहन अनियंत्रीय होकर पेड़ से जा टकराई। हादसे में एक युवक की मौत हो गई है, वही 7 लोग घायल है। सूचना मिलते ही तत्काल फरसगांव थाना पुलिस मौके पर पहुची और घायलों को उपचार हेतु अस्प्ताल भिजवाया गया है। फरसगांव थाना से मिली जानकारी अनुसार बकावण्ड क्षेत्र के रहने वाले सभी बोलेरो वाहन क्रमांक सीजी 17 केएल 7959 में सवार होकर रायपुर से अपने घर आ रहे थे। रविवार की सुबह मांझीआठगांव-चिचाड़ी के बीच इनकी वाहन अनियन्त्रित होकर रोड किनारे पेड़ से टकराई । हादसे में वाहन में सवार सभी लोग घायल हो गए, जिनके फरसगांव थाना पुलिस ने उपचार हेतु फरसगांव अस्प्ताल भिजवाया। सभी घायल की जांच में डॉक्टरों ने घायल हेमसागर बघेल को मृत घोषित किया । और बाकी घायलों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें जगदलपुर अस्प्ताल रिफर कर दिया । परिजनों की रिपोर्ट पर फरसगांव थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मृतक के शव का पोस्टमार्टम बाद शव परिजनों को सुपुर्द किया है । फिलहाल फरसगांव थाना पुलिस मर्ग अपराध दर्ज कर जांच विवेचना कर रही है ।
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    अनियन्त्रित होकर बोलेरो वाहन पेड़ से टकराई, एक युवक की हुई मौत, 7 लोग हुए घायल 
फरसगांव :- नेशनल हाइवे 30 मांझीआठगांव के पास रविवार की सुबह तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला, रविवार सुबह करीब 6 बजे एक तेज रफ्तार बोलेरो वाहन अनियंत्रीय होकर पेड़ से जा टकराई। हादसे में एक युवक की मौत हो गई है, वही 7 लोग घायल है। सूचना मिलते ही तत्काल फरसगांव थाना पुलिस मौके पर पहुची और घायलों को उपचार हेतु अस्प्ताल भिजवाया गया है। 
फरसगांव थाना से मिली जानकारी अनुसार बकावण्ड क्षेत्र के रहने वाले 
सभी बोलेरो वाहन क्रमांक सीजी 17 केएल 7959 में सवार होकर रायपुर से अपने घर आ रहे थे। रविवार की सुबह मांझीआठगांव-चिचाड़ी के बीच इनकी वाहन अनियन्त्रित होकर रोड किनारे पेड़ से टकराई । हादसे में वाहन में सवार सभी लोग घायल हो गए, जिनके फरसगांव थाना पुलिस ने उपचार हेतु फरसगांव अस्प्ताल भिजवाया। सभी घायल की जांच में डॉक्टरों ने घायल हेमसागर बघेल को मृत घोषित किया । और बाकी घायलों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें जगदलपुर अस्प्ताल रिफर कर दिया । परिजनों की रिपोर्ट पर फरसगांव थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मृतक के शव का पोस्टमार्टम बाद शव परिजनों को सुपुर्द किया है । फिलहाल फरसगांव थाना पुलिस मर्ग अपराध दर्ज कर जांच विवेचना कर रही है ।
    user_रामकुमार भारद्वाज
    रामकुमार भारद्वाज
    कोंडागाँव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    17 hrs ago
  • फरसगांव के पास सड़क हादसा: झपकी आने से वाहन पेड़ से टकराया, एक गंभीर घायल बस्तर क्षेत्र में एक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। केशकाल की ओर से बकावंड (जगदलपुर) जाते समय फरसगांव के पास चालक को अचानक नींद की झपकी आ गई, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराया।
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    फरसगांव के पास सड़क हादसा: झपकी आने से वाहन पेड़ से टकराया, एक गंभीर घायल बस्तर क्षेत्र में एक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। केशकाल की ओर से बकावंड (जगदलपुर) जाते समय फरसगांव के पास चालक को अचानक नींद की झपकी आ गई, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराया।
    user_ESHENDRA PATEL
    ESHENDRA PATEL
    पत्रकार कोंडागाँव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    22 hrs ago
  • मध्य भारत का एक ऐसा इलाका जिसे दशकों तक 'अबूझमाड़' कहा गया। यानी वह, जिस े बुझा न जा सका। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले का यह 3,904 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा, कभी नक्सलियो ं का अभेद्य किला माना जाता था। यहाँ परिंदा भी पर मारने से पहले नक्सलियों की इजाजत लेता था। लेकिन आज, 2026 की दहलीज पर खड़ा अबूझमाड़ अपनी पहचान बदल रहा है। जहा ँ कभी बारूद की गंध थी, वहाँ अब पक्की सड़कों का डामर महक रहा है। कैसे खौफ का काला कोहरा छँटा और विकास का सूरज चमका इस पर खास रिपोर्ट
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    मध्य भारत का एक ऐसा इलाका जिसे दशकों तक 'अबूझमाड़' कहा गया। यानी वह, जिस े बुझा न जा सका। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले का यह 3,904 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा, कभी नक्सलियो ं का अभेद्य किला माना जाता था। यहाँ परिंदा भी पर मारने से पहले नक्सलियों की इजाजत लेता था। लेकिन आज, 2026 की दहलीज पर खड़ा अबूझमाड़ अपनी पहचान बदल रहा है। जहा ँ कभी बारूद की गंध थी, वहाँ अब पक्की सड़कों का डामर महक रहा है। कैसे खौफ का काला कोहरा छँटा और विकास का सूरज चमका इस पर खास रिपोर्ट
    user_AKASH singh thakur
    AKASH singh thakur
    Narayanpur, Chhattisgarh•
    2 hrs ago
  • Post by Ashish parihar Parihar
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    Post by Ashish parihar Parihar
    user_Ashish parihar Parihar
    Ashish parihar Parihar
    पत्रकार Kanker, Chhattisgarh•
    16 hrs ago
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