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अबूझमाड़ में कैसे बदल रही तस्वीर, नक्सलवाद से विकासवाद की और अग्रसर नारायणपुर मध्य भारत का एक ऐसा इलाका जिसे दशकों तक 'अबूझमाड़' कहा गया। यानी वह, जिस े बुझा न जा सका। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले का यह 3,904 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा, कभी नक्सलियो ं का अभेद्य किला माना जाता था। यहाँ परिंदा भी पर मारने से पहले नक्सलियों की इजाजत लेता था। लेकिन आज, 2026 की दहलीज पर खड़ा अबूझमाड़ अपनी पहचान बदल रहा है। जहा ँ कभी बारूद की गंध थी, वहाँ अब पक्की सड़कों का डामर महक रहा है। कैसे खौफ का काला कोहरा छँटा और विकास का सूरज चमका इस पर खास रिपोर्ट

2 hrs ago
user_AKASH singh thakur
AKASH singh thakur
Narayanpur, Chhattisgarh•
2 hrs ago

अबूझमाड़ में कैसे बदल रही तस्वीर, नक्सलवाद से विकासवाद की और अग्रसर नारायणपुर मध्य भारत का एक ऐसा इलाका जिसे दशकों तक 'अबूझमाड़' कहा गया। यानी वह, जिस े बुझा न जा सका। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले का यह 3,904 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा, कभी नक्सलियो ं का अभेद्य किला माना जाता था। यहाँ परिंदा भी पर मारने से पहले नक्सलियों की इजाजत लेता था। लेकिन आज, 2026 की दहलीज पर खड़ा अबूझमाड़ अपनी पहचान बदल रहा है। जहा ँ कभी बारूद की गंध थी, वहाँ अब पक्की सड़कों का डामर महक रहा है। कैसे खौफ का काला कोहरा छँटा और विकास का सूरज चमका इस पर खास रिपोर्ट

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  • मध्य भारत का एक ऐसा इलाका जिसे दशकों तक 'अबूझमाड़' कहा गया। यानी वह, जिस े बुझा न जा सका। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले का यह 3,904 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा, कभी नक्सलियो ं का अभेद्य किला माना जाता था। यहाँ परिंदा भी पर मारने से पहले नक्सलियों की इजाजत लेता था। लेकिन आज, 2026 की दहलीज पर खड़ा अबूझमाड़ अपनी पहचान बदल रहा है। जहा ँ कभी बारूद की गंध थी, वहाँ अब पक्की सड़कों का डामर महक रहा है। कैसे खौफ का काला कोहरा छँटा और विकास का सूरज चमका इस पर खास रिपोर्ट
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    मध्य भारत का एक ऐसा इलाका जिसे दशकों तक 'अबूझमाड़' कहा गया। यानी वह, जिस े बुझा न जा सका। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले का यह 3,904 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा, कभी नक्सलियो ं का अभेद्य किला माना जाता था। यहाँ परिंदा भी पर मारने से पहले नक्सलियों की इजाजत लेता था। लेकिन आज, 2026 की दहलीज पर खड़ा अबूझमाड़ अपनी पहचान बदल रहा है। जहा ँ कभी बारूद की गंध थी, वहाँ अब पक्की सड़कों का डामर महक रहा है। कैसे खौफ का काला कोहरा छँटा और विकास का सूरज चमका इस पर खास रिपोर्ट
    user_AKASH singh thakur
    AKASH singh thakur
    Narayanpur, Chhattisgarh•
    2 hrs ago
  • अनियन्त्रित होकर बोलेरो वाहन पेड़ से टकराई, एक युवक की हुई मौत, 7 लोग हुए घायल फरसगांव :- नेशनल हाइवे 30 मांझीआठगांव के पास रविवार की सुबह तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला, रविवार सुबह करीब 6 बजे एक तेज रफ्तार बोलेरो वाहन अनियंत्रीय होकर पेड़ से जा टकराई। हादसे में एक युवक की मौत हो गई है, वही 7 लोग घायल है। सूचना मिलते ही तत्काल फरसगांव थाना पुलिस मौके पर पहुची और घायलों को उपचार हेतु अस्प्ताल भिजवाया गया है। फरसगांव थाना से मिली जानकारी अनुसार बकावण्ड क्षेत्र के रहने वाले सभी बोलेरो वाहन क्रमांक सीजी 17 केएल 7959 में सवार होकर रायपुर से अपने घर आ रहे थे। रविवार की सुबह मांझीआठगांव-चिचाड़ी के बीच इनकी वाहन अनियन्त्रित होकर रोड किनारे पेड़ से टकराई । हादसे में वाहन में सवार सभी लोग घायल हो गए, जिनके फरसगांव थाना पुलिस ने उपचार हेतु फरसगांव अस्प्ताल भिजवाया। सभी घायल की जांच में डॉक्टरों ने घायल हेमसागर बघेल को मृत घोषित किया । और बाकी घायलों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें जगदलपुर अस्प्ताल रिफर कर दिया । परिजनों की रिपोर्ट पर फरसगांव थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मृतक के शव का पोस्टमार्टम बाद शव परिजनों को सुपुर्द किया है । फिलहाल फरसगांव थाना पुलिस मर्ग अपराध दर्ज कर जांच विवेचना कर रही है ।
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    अनियन्त्रित होकर बोलेरो वाहन पेड़ से टकराई, एक युवक की हुई मौत, 7 लोग हुए घायल 
फरसगांव :- नेशनल हाइवे 30 मांझीआठगांव के पास रविवार की सुबह तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला, रविवार सुबह करीब 6 बजे एक तेज रफ्तार बोलेरो वाहन अनियंत्रीय होकर पेड़ से जा टकराई। हादसे में एक युवक की मौत हो गई है, वही 7 लोग घायल है। सूचना मिलते ही तत्काल फरसगांव थाना पुलिस मौके पर पहुची और घायलों को उपचार हेतु अस्प्ताल भिजवाया गया है। 
फरसगांव थाना से मिली जानकारी अनुसार बकावण्ड क्षेत्र के रहने वाले 
सभी बोलेरो वाहन क्रमांक सीजी 17 केएल 7959 में सवार होकर रायपुर से अपने घर आ रहे थे। रविवार की सुबह मांझीआठगांव-चिचाड़ी के बीच इनकी वाहन अनियन्त्रित होकर रोड किनारे पेड़ से टकराई । हादसे में वाहन में सवार सभी लोग घायल हो गए, जिनके फरसगांव थाना पुलिस ने उपचार हेतु फरसगांव अस्प्ताल भिजवाया। सभी घायल की जांच में डॉक्टरों ने घायल हेमसागर बघेल को मृत घोषित किया । और बाकी घायलों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें जगदलपुर अस्प्ताल रिफर कर दिया । परिजनों की रिपोर्ट पर फरसगांव थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मृतक के शव का पोस्टमार्टम बाद शव परिजनों को सुपुर्द किया है । फिलहाल फरसगांव थाना पुलिस मर्ग अपराध दर्ज कर जांच विवेचना कर रही है ।
    user_रामकुमार भारद्वाज
    रामकुमार भारद्वाज
    कोंडागाँव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    17 hrs ago
  • फरसगांव के पास सड़क हादसा: झपकी आने से वाहन पेड़ से टकराया, एक गंभीर घायल बस्तर क्षेत्र में एक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। केशकाल की ओर से बकावंड (जगदलपुर) जाते समय फरसगांव के पास चालक को अचानक नींद की झपकी आ गई, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराया।
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    फरसगांव के पास सड़क हादसा: झपकी आने से वाहन पेड़ से टकराया, एक गंभीर घायल बस्तर क्षेत्र में एक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। केशकाल की ओर से बकावंड (जगदलपुर) जाते समय फरसगांव के पास चालक को अचानक नींद की झपकी आ गई, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराया।
    user_ESHENDRA PATEL
    ESHENDRA PATEL
    पत्रकार कोंडागाँव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    22 hrs ago
  • Post by सतभक्ति संदेश
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    Post by सतभक्ति संदेश
    user_सतभक्ति संदेश
    सतभक्ति संदेश
    Fraternal organization केसकाल, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    15 hrs ago
  • Post by Ashish parihar Parihar
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    Post by Ashish parihar Parihar
    user_Ashish parihar Parihar
    Ashish parihar Parihar
    पत्रकार Kanker, Chhattisgarh•
    16 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल को ज्ञापन, पुनर्विचार की मांग बलरामपुर, बलरामपुर जिले में भारत मुक्ति मोर्चा ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में राज्यपाल से विधेयक को सहमति न देने तथा पुनर्विचार के लिए विधानसभा को वापस भेजने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में पहले से ही मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 में लागू है, जिसमें छल, बल या प्रलोभन से धर्मांतरण रोकने का प्रावधान मौजूद है। ऐसे में नए कानून की आवश्यकता पर प्रश्न उठाया गया है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान कानून का कई मामलों में दुरुपयोग हुआ है, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध निराधार एफआईआर, गिरफ्तारी, सामाजिक बहिष्कार और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं। ज्ञापन के अनुसार, प्रस्तावित नए विधेयक में सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास, नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं ओबीसी वर्ग से जुड़े मामलों में 10 से 20 वर्ष की सजा, 10 से 25 लाख रुपये तक जुर्माना तथा अपराध को गैर-जमानती बनाए जाने जैसे कठोर प्रावधान शामिल हैं। साथ ही सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि इससे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की शक्तियां अत्यधिक बढ़ जाएंगी, जिससे दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विधेयक में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ दंड का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे कानून के दुरुपयोग की संभावना और बढ़ जाती है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता प्रतीत होता है, क्योंकि धर्म परिवर्तन व्यक्ति की अंतःकरण की स्वतंत्रता का हिस्सा है। ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि वर्तमान कानून के तहत अब तक किसी भी मामले में “बल, छल या प्रलोभन” से धर्मांतरण सिद्ध नहीं हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कानून का उपयोग न्याय से अधिक अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। ज्ञापन में ‘प्रलोभन’ जैसे शब्दों की अस्पष्ट परिभाषा पर भी आपत्ति जताई गई है। ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से मांग की गई है कि विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटाया जाए, वर्तमान और प्रस्तावित कानून की व्यापक समीक्षा कराई जाए, जिसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधि, नागरिक समाज, मानवाधिकार संगठन और कानून विशेषज्ञ शामिल हों। साथ ही राज्य में धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की गई है। ज्ञापन के अंत में कहा गया है कि यदि इस मामले में उचित समाधान नहीं निकला तो जनहित याचिका के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा। ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी संगठन शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नई दिल्ली धरमू एक्का ने इस काला कानून के बारे में विस्तृत रूप से लोगों को समझाएं, भारत मुक्ति मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक अमिन साय एक्का, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद बलरामपुर जिला संयोजक अनिल खलखो, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक घूरन यादव, राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक रंजीत बड़ा, मिखाई एक्का इस काला कानून बिल का जोरदार विरोध किया, सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने समर्थन दिया साथ बलरामपुर जिले से भारी संख्या में भाग लिया इस कार्य क्रमसंपन्न किया गया।
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    छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल को ज्ञापन, पुनर्विचार की मांग
बलरामपुर, बलरामपुर जिले में भारत मुक्ति मोर्चा ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में राज्यपाल से विधेयक को सहमति न देने तथा पुनर्विचार के लिए विधानसभा को वापस भेजने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में पहले से ही मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 में लागू है, जिसमें छल, बल या प्रलोभन से धर्मांतरण रोकने का प्रावधान मौजूद है। ऐसे में नए कानून की आवश्यकता पर प्रश्न उठाया गया है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान कानून का कई मामलों में दुरुपयोग हुआ है, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध निराधार एफआईआर, गिरफ्तारी, सामाजिक बहिष्कार और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं।
ज्ञापन के अनुसार, प्रस्तावित नए विधेयक में सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास, नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं ओबीसी वर्ग से जुड़े मामलों में 10 से 20 वर्ष की सजा, 10 से 25 लाख रुपये तक जुर्माना तथा अपराध को गैर-जमानती बनाए जाने जैसे कठोर प्रावधान शामिल हैं। साथ ही सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि इससे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की शक्तियां अत्यधिक बढ़ जाएंगी, जिससे दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विधेयक में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ दंड का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे कानून के दुरुपयोग की संभावना और बढ़ जाती है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता प्रतीत होता है, क्योंकि धर्म परिवर्तन व्यक्ति की अंतःकरण की स्वतंत्रता का हिस्सा है।
ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि वर्तमान कानून के तहत अब तक किसी भी मामले में “बल, छल या प्रलोभन” से धर्मांतरण सिद्ध नहीं हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कानून का उपयोग न्याय से अधिक अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। ज्ञापन में ‘प्रलोभन’ जैसे शब्दों की अस्पष्ट परिभाषा पर भी आपत्ति जताई गई है।
ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से मांग की गई है कि विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटाया जाए, वर्तमान और प्रस्तावित कानून की व्यापक समीक्षा कराई जाए, जिसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधि, नागरिक समाज, मानवाधिकार संगठन और कानून विशेषज्ञ शामिल हों। साथ ही राज्य में धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की गई है।
ज्ञापन के अंत में कहा गया है कि यदि इस मामले में उचित समाधान नहीं निकला तो जनहित याचिका के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा। ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी संगठन शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नई दिल्ली धरमू एक्का ने इस काला कानून के बारे में विस्तृत रूप से लोगों को समझाएं, भारत मुक्ति मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक अमिन साय एक्का, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद बलरामपुर जिला संयोजक अनिल खलखो, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक घूरन यादव, राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक रंजीत बड़ा, मिखाई एक्का इस काला कानून बिल का जोरदार विरोध किया, सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने समर्थन दिया साथ बलरामपुर जिले से भारी संख्या में भाग लिया इस  कार्य क्रमसंपन्न किया गया।
    user_ANIL XALXO
    ANIL XALXO
    Farmer राजपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • परतापुर थाना प्रभारी रामेश्वर चतुर्वेदी का वह वीडियो, जिसमें वे आत्मसमर्पण करने वाले हार्डकोर नक्सलियों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन कर रहे हैं, यह दृश्य एक गहरी मिसाल बन गया है। जिन हाथों में कभी बंदूक थी, आज वही हाथ थाली थामे हुए हैं… और सामने खाकी वर्दी में बैठा एक अधिकारी उन्हें अपनेपन से खाना परोस रहा है। यह दृश्य बताता है कि हर भटका हुआ इंसान लौट सकता है, बस उसे एक मौका और अपनापन चाहिए। थाना प्रभारी ने सिर्फ कानून का पालन नहीं किया, बल्कि दिल से इंसानियत निभाई। आत्मसमर्पण के तुरंत बाद जंगल में ही प्रेमपूर्वक भोजन कराना, यह दिखाता है कि पुलिस सिर्फ सख्ती का प्रतीक नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और विश्वास की भी पहचान है। यह पहल उन युवाओं के लिए एक संदेश है जो अब भी भटकाव के रास्ते पर हैं — कि मुख्यधारा में लौटने पर उन्हें ठुकराया नहीं जाएगा, बल्कि खुले दिल से अपनाया जाएगा। यह दृश्य हमें सिखाता है कि बदलाव बंदूक से नहीं, भरोसे और प्यार से आता है। बस्तर के जंगलों में आज सिर्फ सन्नाटा नहीं, बल्कि उम्मीद की एक नई आवाज गूंज रही है — एक ऐसी आवाज, जो कहती है कि हर अंधेरे के बाद उजाला जरूर होता है।
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    परतापुर थाना प्रभारी रामेश्वर चतुर्वेदी का वह वीडियो, जिसमें वे आत्मसमर्पण करने वाले हार्डकोर नक्सलियों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन कर रहे हैं,  यह दृश्य एक गहरी मिसाल बन गया है।
जिन हाथों में कभी बंदूक थी, आज वही हाथ थाली थामे हुए हैं… और सामने खाकी वर्दी में बैठा एक अधिकारी उन्हें अपनेपन से खाना परोस रहा है। यह दृश्य बताता है कि हर भटका हुआ इंसान लौट सकता है, बस उसे एक मौका और अपनापन चाहिए।
थाना प्रभारी ने सिर्फ कानून का पालन नहीं किया, बल्कि दिल से इंसानियत निभाई। आत्मसमर्पण के तुरंत बाद जंगल में ही प्रेमपूर्वक भोजन कराना, यह दिखाता है कि पुलिस सिर्फ सख्ती का प्रतीक नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और विश्वास की भी पहचान है।
यह पहल उन युवाओं के लिए एक संदेश है जो अब भी भटकाव के रास्ते पर हैं — कि मुख्यधारा में लौटने पर उन्हें ठुकराया नहीं जाएगा, बल्कि खुले दिल से अपनाया जाएगा।
यह दृश्य हमें सिखाता है कि बदलाव बंदूक से नहीं, भरोसे और प्यार से आता है। बस्तर के जंगलों में आज सिर्फ सन्नाटा नहीं, बल्कि उम्मीद की एक नई आवाज गूंज रही है — एक ऐसी आवाज, जो कहती है कि हर अंधेरे के बाद उजाला जरूर होता है।
    user_SAMYAK NAHATA
    SAMYAK NAHATA
    Local News Reporter जगदलपुर, बस्तर, छत्तीसगढ़•
    21 hrs ago
  • नारायणपुर जिले के सुदूर और दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र में प्रशासनिक सक्रियता की एक अहम तस्वीर सामने आई है। कलेक्टर नम्रता जैन ने लगभग 150 किलोमीटर का कठिन सफर तय कर ग्राम रेकावाया का दौरा किया और आंगनबाड़ी केंद्र सहित गांव की मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण किया। अपने दौरे के दौरान कलेक्टर नम्रता जैन ने रेकावाया स्थित नव प्रारंभ आंगनबाड़ी केंद्र का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों से बातचीत कर उनके अक्षरज्ञान की जानकारी ली और उनकी सीखने की क्षमता को परखा। इस दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और उन्हें समय पर पोषण आहार उपलब्ध कराया जाए। कलेक्टर ने पालकों से भी संवाद करते हुए अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से आंगनबाड़ी भेजें, ताकि उन्हें प्रारंभिक शिक्षा और पोषण का समुचित लाभ मिल सके। उल्लेखनीय है कि यह आंगनबाड़ी केंद्र जिला प्रशासन के प्रयासों से करीब एक माह पूर्व ही शुरू हुआ है, जिससे अब क्षेत्र के बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही सुविधाएं मिल रही हैं। निरीक्षण के दौरान स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। कलेक्टर ने केंद्र में साफ-सफाई की स्थिति का जायजा लेते हुए कार्यकर्ता को नियमित रूप से परिसर को स्वच्छ रखने और बच्चों को व्यवस्थित तरीके से पढ़ाई कराने के निर्देश दिए। बच्चों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को लेकर सरपंच द्वारा किए गए प्रयासों की उन्होंने सराहना भी की। इसके अलावा कलेक्टर ने आंगनबाड़ी केंद्र में लगे हैंडपंप का निरीक्षण कर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही भंडार कक्ष का अवलोकन करते हुए पोषण आहार के सुरक्षित भंडारण की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। इस निरीक्षण के दौरान सहायक आयुक्त आदिवासी विकास राजेन्द्र सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी अशोक पटेल, जनपद पंचायत ओरछा के सीईओ लोकेश चतुर्वेदी, शिक्षा मिशन समन्वयक दीनबंधु रावटे सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। दुर्गम अबूझमाड़ के रेकावाया जैसे अंतिम छोर तक पहुंचकर कलेक्टर का यह दौरा प्रशासन की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शिक्षा, पोषण और बुनियादी सुविधाओं को लेकर की गई पहल क्षेत्र के विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो सकती है।
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    नारायणपुर जिले के सुदूर और दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र में प्रशासनिक सक्रियता की एक अहम तस्वीर सामने आई है। कलेक्टर नम्रता जैन ने लगभग 150 किलोमीटर का कठिन सफर तय कर ग्राम रेकावाया का दौरा किया और आंगनबाड़ी केंद्र सहित गांव की मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण किया।
अपने दौरे के दौरान कलेक्टर नम्रता जैन ने रेकावाया स्थित नव प्रारंभ आंगनबाड़ी केंद्र का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों से बातचीत कर उनके अक्षरज्ञान की जानकारी ली और उनकी सीखने की क्षमता को परखा। इस दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और उन्हें समय पर पोषण आहार उपलब्ध कराया जाए।
कलेक्टर ने पालकों से भी संवाद करते हुए अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से आंगनबाड़ी भेजें, ताकि उन्हें प्रारंभिक शिक्षा और पोषण का समुचित लाभ मिल सके। उल्लेखनीय है कि यह आंगनबाड़ी केंद्र जिला प्रशासन के प्रयासों से करीब एक माह पूर्व ही शुरू हुआ है, जिससे अब क्षेत्र के बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही सुविधाएं मिल रही हैं।
निरीक्षण के दौरान स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। कलेक्टर ने केंद्र में साफ-सफाई की स्थिति का जायजा लेते हुए कार्यकर्ता को नियमित रूप से परिसर को स्वच्छ रखने और बच्चों को व्यवस्थित तरीके से पढ़ाई कराने के निर्देश दिए। बच्चों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को लेकर सरपंच द्वारा किए गए प्रयासों की उन्होंने सराहना भी की।
इसके अलावा कलेक्टर ने आंगनबाड़ी केंद्र में लगे हैंडपंप का निरीक्षण कर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही भंडार कक्ष का अवलोकन करते हुए पोषण आहार के सुरक्षित भंडारण की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक सुधार के निर्देश दिए।
इस निरीक्षण के दौरान सहायक आयुक्त आदिवासी विकास राजेन्द्र सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी अशोक पटेल, जनपद पंचायत ओरछा के सीईओ लोकेश चतुर्वेदी, शिक्षा मिशन समन्वयक दीनबंधु रावटे सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
दुर्गम अबूझमाड़ के रेकावाया जैसे अंतिम छोर तक पहुंचकर कलेक्टर का यह दौरा प्रशासन की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शिक्षा, पोषण और बुनियादी सुविधाओं को लेकर की गई पहल क्षेत्र के विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो सकती है।
    user_AKASH singh thakur
    AKASH singh thakur
    Narayanpur, Chhattisgarh•
    15 hrs ago
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