मलारना चौड़ सीएचसी को ट्रॉमा भवन में शिफ्ट करने का विरोध ग्रामीणों में भारी नाराजगी, बोले—दोनों स्वास्थ्य सेवाएं होंगी प्रभावित मलारना डूंगर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मलारना चौड़ को ट्रॉमा सेंटर भवन में शिफ्ट करने की प्रस्तावित योजना को लेकर क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस निर्णय से न केवल वर्तमान चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि ट्रॉमा सेंटर की मूल उपयोगिता भी खत्म हो जाएगी। ग्रामीणों ने बताया कि लंबे संघर्ष के बाद स्वीकृत ट्रॉमा सेंटर अब शुरू होने से पहले ही अपने उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है। वर्तमान में संचालित सीएचसी लालसोट-कोटा मेगा हाईवे पर स्थित है, जहां से आसपास के तारनपुर, श्रीपुरा, रामड़ी, अनियाला, डीडवाना, किरतपुरा, चैनपुरा, बाढ़ बरियारा, बाढ़ शाहपुरा, बरियारा और लाडोता सहित करीब 20 हजार आबादी को सीधी स्वास्थ्य सुविधा मिलती है। वहीं प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर भवन मुख्य सड़क से लगभग 500 मीटर अंदर स्थित है, जहां तक पहुंच मार्ग भी सुगम नहीं है। बरसात के दौरान यहां 1 से 1.5 फीट तक जलभराव की स्थिति बन जाती है। इसके अलावा परिसर कच्चा है, बाउंड्री वॉल नहीं है, सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है और स्टाफ आवास की भी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे स्थान पर सीएचसी को शिफ्ट करना अव्यवहारिक निर्णय है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बनास नदी पुल से मोरेल नदी पुल तक लगभग 16 किलोमीटर का हाईवे क्षेत्र दुर्घटना की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। ऐसे में इस क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर की विशेष आवश्यकता है, ताकि सड़क हादसों में घायल लोगों को त्वरित उपचार मिल सके। स्थानीय निवासी रामराज खाती ने कहा कि “सीएचसी को ट्रॉमा भवन में शिफ्ट करना गलत निर्णय है, इससे चिकित्सा व्यवस्था बिगड़ जाएगी। इसके बजाय नए भवन के लिए अलग से बजट स्वीकृत कराया जाना चाहिए।” वहीं भाजपा मंडल महामंत्री बनवारी लाल मीणा ने भी कहा कि “ट्रॉमा भवन जलभराव क्षेत्र में है और असुरक्षित भी है। वहां सीएचसी शिफ्ट करने से दोनों सुविधाएं प्रभावित होंगी।” मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि सीएचसी को ट्रॉमा सेंटर भवन में शिफ्ट करने के निर्देश जिला कलेक्टर द्वारा दिए गए हैं। हालांकि उन्होंने सड़क, सुरक्षा, स्टाफ आवास और जलभराव जैसी समस्याओं पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया। ग्रामीणों की प्रमुख मांगें: सीएचसी को वर्तमान स्थान पर ही संचालित रखा जाए ट्रॉमा भवन में ट्रॉमा सेंटर ही शुरू किया जाए नए सीएचसी भवन के लिए अलग से बजट स्वीकृत किया जाए ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि वे इस मुद्दे को क्षेत्रीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के समक्ष उठाएंगे और शीघ्र समाधान की मांग करेंगे।
मलारना चौड़ सीएचसी को ट्रॉमा भवन में शिफ्ट करने का विरोध ग्रामीणों में भारी नाराजगी, बोले—दोनों स्वास्थ्य सेवाएं होंगी प्रभावित मलारना डूंगर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मलारना चौड़ को ट्रॉमा सेंटर भवन में शिफ्ट करने की प्रस्तावित योजना को लेकर क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस निर्णय से न केवल वर्तमान चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि ट्रॉमा सेंटर की मूल उपयोगिता भी खत्म हो जाएगी। ग्रामीणों ने बताया कि लंबे संघर्ष के बाद स्वीकृत ट्रॉमा सेंटर अब शुरू होने से पहले ही अपने उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है। वर्तमान में संचालित सीएचसी लालसोट-कोटा मेगा हाईवे पर स्थित है, जहां से आसपास के तारनपुर, श्रीपुरा, रामड़ी, अनियाला, डीडवाना, किरतपुरा, चैनपुरा, बाढ़ बरियारा, बाढ़ शाहपुरा, बरियारा और लाडोता सहित करीब 20 हजार आबादी को सीधी स्वास्थ्य सुविधा मिलती है। वहीं प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर
भवन मुख्य सड़क से लगभग 500 मीटर अंदर स्थित है, जहां तक पहुंच मार्ग भी सुगम नहीं है। बरसात के दौरान यहां 1 से 1.5 फीट तक जलभराव की स्थिति बन जाती है। इसके अलावा परिसर कच्चा है, बाउंड्री वॉल नहीं है, सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है और स्टाफ आवास की भी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे स्थान पर सीएचसी को शिफ्ट करना अव्यवहारिक निर्णय है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बनास नदी पुल से मोरेल नदी पुल तक लगभग 16 किलोमीटर का हाईवे क्षेत्र दुर्घटना की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। ऐसे में इस क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर की विशेष आवश्यकता है, ताकि सड़क हादसों में घायल लोगों को त्वरित उपचार मिल सके। स्थानीय निवासी रामराज खाती ने कहा कि “सीएचसी को ट्रॉमा भवन में शिफ्ट करना गलत निर्णय है, इससे चिकित्सा व्यवस्था बिगड़ जाएगी।
इसके बजाय नए भवन के लिए अलग से बजट स्वीकृत कराया जाना चाहिए।” वहीं भाजपा मंडल महामंत्री बनवारी लाल मीणा ने भी कहा कि “ट्रॉमा भवन जलभराव क्षेत्र में है और असुरक्षित भी है। वहां सीएचसी शिफ्ट करने से दोनों सुविधाएं प्रभावित होंगी।” मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि सीएचसी को ट्रॉमा सेंटर भवन में शिफ्ट करने के निर्देश जिला कलेक्टर द्वारा दिए गए हैं। हालांकि उन्होंने सड़क, सुरक्षा, स्टाफ आवास और जलभराव जैसी समस्याओं पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया। ग्रामीणों की प्रमुख मांगें: सीएचसी को वर्तमान स्थान पर ही संचालित रखा जाए ट्रॉमा भवन में ट्रॉमा सेंटर ही शुरू किया जाए नए सीएचसी भवन के लिए अलग से बजट स्वीकृत किया जाए ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि वे इस मुद्दे को क्षेत्रीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के समक्ष उठाएंगे और शीघ्र समाधान की मांग करेंगे।
- * *ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट 2026 का रोड शो 23 अप्रैल 2026 को दिल्ली में होगा आयोजित* इसे सभी जगह शेयर करें * 📍 *दिल्ली रोड शो में क्या-क्या होगा* 1. इंवेस्टर और कंपनियों से सीधा कनेक्शन एग्रीटेक कंपनियां, स्टार्टअप, निवेशक और इंडस्ट्री के लोग शामिल होते है राजस्थान में कृषि निवेश के अवसरों की जानकारी दी जाती है 2. B2B और B2G इंटरैक्शन Business to Business मीटिंग Business to Government (कंपनी–सरकार) चर्चा नए प्रोजेक्ट, पार्टनरशिप और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर बातचीत 3. सरकारी योजनाओं की प्रेजेंटेशन राजस्थान सरकार की कृषि, पशुपालन, सिंचाई आदि योजनाओं का प्रस्तुतीकरण निवेशकों को बताया जाता है कि उन्हें क्या लाभ मिलेगा 4. एग्रीटेक इनोवेशन शोकेस नई कृषि तकनीक (जैसे ड्रोन, स्मार्ट फार्मिंग, मशीनरी) की जानकारी स्टार्टअप अपने आइडिया और प्रोडक्ट दिखाते हैं 5. नेटवर्किंग सेशन वैज्ञानिक, नीति-निर्माता (policymakers), उद्योग प्रतिनिधि और किसान संगठनों के बीच संपर्क भविष्य के सहयोग के लिए नेटवर्क बनाना 6. GRAM 2026 के लिए आमंत्रण सभी प्रतिभागियों को जयपुर में 23–25 मई 2026 को हो को होने वाली मुख्य मीट में शामिल होने का निमंत्रण * *🎯 रोड शो का मुख्य उद्देश्य:-* * राजस्थान को एग्रीटेक निवेश का बड़ा हब बनाना देश-विदेश की कंपनियों को जोड़ना किसानों तक नई तकनीक पहुंचाना GRAM 2026 के लिए अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना *👉 *आसान भाषा में समझें तो:-* दिल्ली रोड शो = “निवेश + तकनीक + पार्टनरशिप + GRAM का प्रचार” का कॉम्बिनेशन इवेंट ✍️नोट:- ऐसी महत्वपूर्ण एवं उपयोगी जानकारी सभी जगह शेयर कर दिया करें *रोज ऐसी नई जानकारी हेतु आप *View Chennel* पर क्लिक कर हमें *Follow* कर सकते है 🌾*पिन्टू मीना पहाड़ी* सहायक कृषि अधिकारी *गंगापुरसिटी*1
- मलारना डूंगर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मलारना चौड़ को ट्रॉमा सेंटर भवन में शिफ्ट करने की प्रस्तावित योजना को लेकर क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस निर्णय से न केवल वर्तमान चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि ट्रॉमा सेंटर की मूल उपयोगिता भी खत्म हो जाएगी। ग्रामीणों ने बताया कि लंबे संघर्ष के बाद स्वीकृत ट्रॉमा सेंटर अब शुरू होने से पहले ही अपने उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है। वर्तमान में संचालित सीएचसी लालसोट-कोटा मेगा हाईवे पर स्थित है, जहां से आसपास के तारनपुर, श्रीपुरा, रामड़ी, अनियाला, डीडवाना, किरतपुरा, चैनपुरा, बाढ़ बरियारा, बाढ़ शाहपुरा, बरियारा और लाडोता सहित करीब 20 हजार आबादी को सीधी स्वास्थ्य सुविधा मिलती है। वहीं प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर भवन मुख्य सड़क से लगभग 500 मीटर अंदर स्थित है, जहां तक पहुंच मार्ग भी सुगम नहीं है। बरसात के दौरान यहां 1 से 1.5 फीट तक जलभराव की स्थिति बन जाती है। इसके अलावा परिसर कच्चा है, बाउंड्री वॉल नहीं है, सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है और स्टाफ आवास की भी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे स्थान पर सीएचसी को शिफ्ट करना अव्यवहारिक निर्णय है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बनास नदी पुल से मोरेल नदी पुल तक लगभग 16 किलोमीटर का हाईवे क्षेत्र दुर्घटना की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। ऐसे में इस क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर की विशेष आवश्यकता है, ताकि सड़क हादसों में घायल लोगों को त्वरित उपचार मिल सके। स्थानीय निवासी रामराज खाती ने कहा कि “सीएचसी को ट्रॉमा भवन में शिफ्ट करना गलत निर्णय है, इससे चिकित्सा व्यवस्था बिगड़ जाएगी। इसके बजाय नए भवन के लिए अलग से बजट स्वीकृत कराया जाना चाहिए।” वहीं भाजपा मंडल महामंत्री बनवारी लाल मीणा ने भी कहा कि “ट्रॉमा भवन जलभराव क्षेत्र में है और असुरक्षित भी है। वहां सीएचसी शिफ्ट करने से दोनों सुविधाएं प्रभावित होंगी।” मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि सीएचसी को ट्रॉमा सेंटर भवन में शिफ्ट करने के निर्देश जिला कलेक्टर द्वारा दिए गए हैं। हालांकि उन्होंने सड़क, सुरक्षा, स्टाफ आवास और जलभराव जैसी समस्याओं पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया। ग्रामीणों की प्रमुख मांगें: सीएचसी को वर्तमान स्थान पर ही संचालित रखा जाए ट्रॉमा भवन में ट्रॉमा सेंटर ही शुरू किया जाए नए सीएचसी भवन के लिए अलग से बजट स्वीकृत किया जाए ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि वे इस मुद्दे को क्षेत्रीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के समक्ष उठाएंगे और शीघ्र समाधान की मांग करेंगे।3
- *सवाई माधोपुर, 22 अप्रैल।* ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के विभिन्न विकास कार्यो और योजनाओं की समीक्षा बैठक मंगलवार को जिला कलक्टर काना राम की अध्यक्षता एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव बुडानिया की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई। बैठक में जिला कलक्टर ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित विकास कार्यों की नियमित मॉनीटरिंग सुनिश्चित कर सभी कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण रूप से पूर्ण किया जाए। इस दौरान जिला कलक्टर ने प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा करते हुए जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि प्रथम किस्त प्राप्त सभी लाभार्थियों के आवास कार्य प्रारंभ कर 15 मई तक जिओ-टैगिंग पूर्ण की जाए तथा द्वितीय किस्त प्राप्त लाभार्थियों में से कम से कम 70 प्रतिशत आवास निर्धारित समयावधि में पूर्ण कराए जाएं। स्वामित्व योजना के अंतर्गत मैप 1.0 व 2.0 के तहत वंचित गांवों में ड्रोन सर्वे पूर्ण कर प्रॉपर्टी पार्सल तैयार कर स्वामित्व पट्टा वितरण सुनिश्चित करने, राजकीय विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों में नवीन शौचालय निर्माण एवं क्षतिग्रस्त शौचालयों की मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन, शौचालय निर्माण, कचरा संग्रहण केन्द्र, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट एवं बर्तन बैंक की प्रगति की समीक्षा कर निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण कर जिओ-टैगिंग कराने पर जोर दिया। उन्होंने ग्राम पंचायतों में अटल ज्ञान केन्द्रों हेतु शीघ्र टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर कार्य प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। साथ ही, रिचार्ज शाफ्ट, ओपन जिम, निजी कुंड, कैटल शेड, वित्त आयोग तथा विधायक/सांसद निधि के लंबित कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने एवं लंबित यूसी/सीसी शीघ्र भिजवाने के निर्देश दिए। *लापरवाही पर सख्ती, अनुपस्थित अधिकारियो को नोटिस, बीडीओ को चार्जशीट के निर्देश :* - उन्होंने बिना किसी सूचना में बैठक में अनुपस्थित होने पर तीन सहायक अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। विभागीय दायित्वों में लापरवाही बरतने एवं निर्देशों की अवहेलना पर सवाई माधोपुर और मलारना डूंगर विकास अधिकारी को 17 सीसीए के तहत चार्जशीट जारी करने के निर्देश मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव बुडानिया को दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा तथा संतोषजनक प्रगति नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। संपर्क पोर्टल एवं ई-फाइल प्रणाली पर लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिला कलक्टर ने कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी एवं स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाए, जिससे ग्रामीणों को अधिकतम लाभ मिल सके। बैठक में एसीईओ शैलेन्द्र सिंह, डॉ. सरोज बैरवा सहित सभी विकास अधिकारी एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।1
- बामनवास। क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अस्पताल की प्रयोगशाला (लैब) का आधुनिकीकरण कर दिया गया है, जिससे अब पहले के 37 टेस्ट की तुलना में 106 प्रकार की जांच सुविधाएँ उपलब्ध हो गई हैं। अब ऑनलाइन मिलेगी टेस्ट रिपोर्ट नई व्यवस्था के तहत मरीजों को बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सभी जांच रिपोर्ट अब ऑनलाइन उपलब्ध होंगी, जिन्हें मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से आसानी से देखा जा सकेगा। इससे समय की बचत के साथ-साथ अस्पताल में भीड़ भी कम होगी। लैब का विस्तार, स्टाफ भी हुआ दोगुना लैब के भौतिक क्षेत्र का विस्तार किया गया है और स्टाफ की संख्या भी बढ़ाई गई है। इससे जांच प्रक्रिया तेज हुई है और मरीजों को समय पर रिपोर्ट मिल रही है।1
- Post by जनहित आवाज1
- धराड़ी प्रथा से गूंजी शहनाई, सादगीपूर्ण विवाह बना मिसाल नवदंपती व बारातियों को भेंट किए 51 पौधे, जल-जंगल-जमीन बचाने का दिया संदेश सपोटरा । क्षेत्र के ग्राम सेवियापुरा में मंगलवार को परंपरा, सादगी और सामाजिक जागरूकता का अनूठा संगम देखने को मिला, जहां धराड़ी प्रथा के तहत आदिवासी समाज का विवाह समारोह संपन्न कराया गया। लाड़ी शिमला आदिवासी एवं लाड़ा महेंद्र आदिवासी ने परण फेरा पद्धति से सात फेरे लेकर वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। विवाह समारोह क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। समारोह में फिजूलखर्ची से दूर रहकर समाज सुधार और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। जेजेएम टीम करौली एवं समाज प्रतिनिधियों की मौजूदगी में विवाह संस्कार वैदिक रीति से संपन्न हुआ। आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं समाजबंधु शामिल हुए। विवाह अवसर पर जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संदेश देते हुए नवदंपती तथा बारातियों को 51 फलदार, फूलदार और छायादार पौधे उपहार स्वरूप भेंट किए गए। इनमें आम, अमरूद, अनार, चीकू, आंवला, कटहल, संतरा, नींबू, बरगद, पीपल, जामुन, अशोक, गुलाब, चमेली, हरसिंगार सहित कई प्रजातियों के पौधे शामिल रहे। आयोजकों ने बताया कि धराड़ी प्रथा से करौली जिले में यह दूसरी शादी है, जबकि राजस्थान में अब तक 485 विवाह इस परंपरा से संपन्न कराए जा चुके हैं। टीम ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान चलाते हुए मृत्यु भोज जैसी परंपराओं पर भी अंकुश लगाने का संकल्प दोहराया।2
- लालसोट विधानसभा क्षेत्र के रामगढ़ पचवारा/डिडवाना समीप सुबह स्टेट हाईवे-24 पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब एक चलती इलेक्ट्रिक स्कूटी अचानक आग का गोला बन गई। घटना डिडवाना गांव के पास की है, जहां रामगढ़ पचवारा से लालसोट की ओर जा रहे स्कूटी सवार ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते अपनी जान बचा ली। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चलते-चलते स्कूटी से अचानक धुआं उठने लगा। खतरा भांपते हुए चालक ने तुरंत वाहन को सड़क किनारे रोक दिया और दूर हट गया। देखते ही देखते स्कूटी ने भीषण आग पकड़ ली और कुछ ही पलों में धू-धू कर जलने लगी। हाईवे पर यह नजारा देख मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्कूटी चालक लोकेश सैनी ने बताया कि उन्होंने करीब दो महीने पहले ही नई इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदी थी। वह रामगढ़ पचवारा से लालसोट सामान लेने जा रहे थे, तभी रास्ते में अचानक स्कूटी से धुआं निकलने लगा। उन्होंने तुरंत स्कूटी रोकी, लेकिन कुछ ही क्षणों में उसमें आग लग गई और पूरी स्कूटी जलकर राख हो गई। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन घटना ने इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।2
- Post by जनहित आवाज1