गौनाहा में बाघ का आतंक, दो गाभिन गायों का शिकार; 6 घंटे बाद भी वन विभाग की टीम नहीं पहुंची, ग्रामीणों में भारी आक्रोश गौनाहा प्रखंड अंतर्गत मंगुराहा वन क्षेत्र में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से करीब छह किलोमीटर दूर हरपुर फॉर्म सरेह में बाघ के आतंक से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। हड़बोड़ा नदी के समीप बाघ ने दो गाभिन गायों पर हमला कर उन्हें अपना शिकार बना लिया। घटना के बाद पशुपालकों और किसानों में डर का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें अपने पशुओं को चराने, खेतों में जाने और पशुओं के लिए घास लाने तक में भय सताने लगा है। बताया गया कि ग्राम तारा बसवरिया निवासी पशुपालक रमेश यादव शुक्रवार, 14 अगस्त को रोज की तरह अपने पशुओं को दोन नहर के पुल संख्या 28 के उत्तर बगल हड़बोड़ा नदी के किनारे हरपुर सरेह में चराने के लिए लेकर गए थे। इसी दौरान शाम करीब छह बजे बाघ ने हमला कर उनकी दो गाभिन गायों को मार डाला। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने मंगुराहा वन विभाग के पदाधिकारियों और कर्मियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग की कथित कार्यहीनता के कारण बाघ जंगल से बाहर तक पहुंच गया और एक गरीब पशुपालक की दो गाभिन गायों का शिकार कर लिया। ग्रामीणों का सवाल है कि जब वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल में वन्यजीवों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था विभाग द्वारा की जाती है, तो आखिर बाघ भोजन की तलाश में जंगल से बाहर क्यों निकल रहा है? ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते बाघ को नियंत्रित नहीं किया गया तो वह पशुओं के बाद इंसानों को भी अपना शिकार बना सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि बाघ के डर के कारण दोन नहर रोड से गुजरने वाले यात्रियों में भी भय बना हुआ है। उनका कहना है कि बाघ कभी भी सड़क पर आने वाले लोगों या आसपास काम कर रहे किसानों और पशुपालकों पर हमला कर सकता है। घटना के करीब छह घंटे बाद तक किसी अधिकारी या वन विभाग की टीम के मौके पर नहीं पहुंचने को लेकर भी ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। हालांकि वन कर्मी मंसूर मियां को फोन कर बुलाया गया, जो मौके पर ग्रामीणों के साथ मौजूद रहे। इधर, मंगुराहा रेंजर अंशुमन कुमार ने बताया कि बाघ से किसी तरह की अप्रिय घटना न हो, इसके लिए क्षेत्र में लोगों को सतर्क रहने की सूचना दी गई है। दोन नहर सड़क पर सुबह छह बजे से शाम तक वन विभाग के कर्मियों की तैनाती की जाएगी, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि मृत गायों के स्वामियों को वन विभाग की ओर से प्रति गाय 24 हजार रुपये मुआवजा दिया जाएगा। बाघ के खुलेआम जंगल से बाहर निकलकर पशुओं का शिकार करने की घटना ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बाघ के आतंक से ग्रामीणों को कब राहत मिलेगी और वन विभाग उसे जंगल की सीमा में रखने के लिए क्या ठोस कदम उठाएगा।
गौनाहा में बाघ का आतंक, दो गाभिन गायों का शिकार; 6 घंटे बाद भी वन विभाग की टीम नहीं पहुंची, ग्रामीणों में भारी आक्रोश गौनाहा प्रखंड अंतर्गत मंगुराहा वन क्षेत्र में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से करीब छह किलोमीटर दूर हरपुर फॉर्म सरेह में बाघ के आतंक से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। हड़बोड़ा नदी के समीप बाघ ने दो गाभिन गायों पर हमला कर उन्हें अपना शिकार बना लिया। घटना के बाद पशुपालकों और किसानों में डर का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें अपने पशुओं को चराने, खेतों में जाने और पशुओं के लिए घास लाने तक में भय सताने लगा है। बताया गया कि ग्राम तारा बसवरिया निवासी पशुपालक रमेश यादव शुक्रवार, 14 अगस्त को रोज की तरह अपने पशुओं को दोन नहर के पुल संख्या 28 के उत्तर बगल हड़बोड़ा नदी के किनारे हरपुर सरेह में चराने के लिए लेकर गए थे। इसी दौरान शाम करीब छह बजे बाघ ने हमला कर उनकी दो गाभिन गायों को मार डाला। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने मंगुराहा वन विभाग के पदाधिकारियों और कर्मियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग की कथित कार्यहीनता के कारण बाघ जंगल से बाहर तक पहुंच गया और एक गरीब पशुपालक की दो गाभिन गायों का शिकार कर लिया। ग्रामीणों का सवाल है कि जब वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल में वन्यजीवों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था विभाग द्वारा की जाती है, तो आखिर बाघ भोजन की तलाश में जंगल से बाहर क्यों निकल रहा है? ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते बाघ को नियंत्रित नहीं किया गया तो वह पशुओं के बाद इंसानों को भी अपना शिकार बना सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि बाघ के डर के कारण दोन नहर रोड से गुजरने वाले यात्रियों में भी भय बना हुआ है। उनका कहना है कि बाघ कभी भी सड़क पर आने वाले लोगों या आसपास काम कर रहे किसानों और पशुपालकों पर हमला कर सकता है। घटना के करीब छह घंटे बाद तक किसी अधिकारी या वन विभाग की टीम के मौके पर नहीं पहुंचने को लेकर भी ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। हालांकि वन कर्मी मंसूर मियां को फोन कर बुलाया गया, जो मौके पर ग्रामीणों के साथ मौजूद रहे। इधर, मंगुराहा रेंजर अंशुमन कुमार ने बताया कि बाघ से किसी तरह की अप्रिय घटना न हो, इसके लिए क्षेत्र में लोगों को सतर्क रहने की सूचना दी गई है। दोन नहर सड़क पर सुबह छह बजे से शाम तक वन विभाग के कर्मियों की तैनाती की जाएगी, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि मृत गायों के स्वामियों को वन विभाग की ओर से प्रति गाय 24 हजार रुपये मुआवजा दिया जाएगा। बाघ के खुलेआम जंगल से बाहर निकलकर पशुओं का शिकार करने की घटना ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बाघ के आतंक से ग्रामीणों को कब राहत मिलेगी और वन विभाग उसे जंगल की सीमा में रखने के लिए क्या ठोस कदम उठाएगा।
- श्रावण मास में पावन रुद्राभिषेक एवं महाप्रसाद का आयोजन ।। श्रावण मास के पावन अवसर पर रविवार को पावर हाउस कैंपस, बेतिया में भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा से पावन रुद्राभिषेक एवं महाप्रसाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन पूर्व उपमुख्यमंत्री सह बेतिया विधायक रेणु देवी के भाजीजा एवं भाजपा बिहार के प्रदेश सह संयोजक, नगर निकाय प्रकोष्ठ राहुल कुमार के द्वारा किया गया। राहुल कुमार ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। मुख्य यजमान राहुल कुमार एवं उनकी धर्मपत्नी ने मुख्य आचार्य के सानिध्य में विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक एवं पूजन संपन्न किया। इस दौरान पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। पूजन के पश्चात बाबा भोलेनाथ की भक्ति प्रस्तुति संदीप तिवारी मृदुल एवं उनकी टीम द्वारा की गई। भक्ति गीतों की प्रस्तुति सुनकर श्रद्धालु भक्त भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। कार्यक्रम के दौरान सांसद डॉ. संजय जायसवाल, नरकटियागंज विधायक संजय पाण्डेय, चनपटिया के पूर्व विधायक उमाकांत सिंह सहित वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता अनिल झा, अनिल वर्मा एवं डॉ. सुशील चौधरी को अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। आयोजन में बेतिया विधानसभा क्षेत्र के बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने भगवान भोलेनाथ से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।4
- शहीदों को नमन के साथ भाकपा की राष्ट्रव्यापी पदयात्रा का समापन, सड़कों पर गूंजा जनसंघर्ष का संदेश भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के आह्वान पर 6 अगस्त से शुरू हुए राष्ट्रव्यापी पदयात्रा अभियान का समापन आज 15 अगस्त को बेतिया जिला मुख्यालय में भव्य पदयात्रा के साथ किया गया। जिला पार्टी कार्यालय से सैकड़ों की संख्या में भाकपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने पदयात्रा निकाली, जो बेतिया के प्रमुख मार्गों से होते हुए शहीद पार्क पहुंची। यहां 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के शहीदों को माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई और राष्ट्रव्यापी पदयात्रा अभियान का औपचारिक समापन किया गया। भाकपा जिला सचिव ओम प्रकाश क्रांति ने बताया कि 6 अगस्त से पश्चिमी चम्पारण जिले के विभिन्न प्रखंडों के करीब 100 गांवों, बाजारों, हाटों, टोलों और बसावटों में पदयात्रा कर पार्टी का संदेश किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों और महिलाओं तक पहुंचाया गया। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने सीधे आम जनता से संवाद किया और ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं को करीब से समझने तथा उन्हें चिन्हित करने का काम किया। पदयात्रा के अनुभव साझा करते हुए जिला सचिव ओम प्रकाश क्रांति ने कहा कि जनता खाद की कालाबाजारी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से बुरी तरह परेशान है तथा लोगों में सरकार और व्यवस्था के प्रति आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के विकास के दावे गांवों में विफल होते नजर आ रहे हैं। आज भी अनेक गांवों की सड़कें बदहाल हैं और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग जलजमाव की समस्या से जूझ रहे हैं। जल-नल योजना भी कई जगहों पर धरातल के बजाय कागजों तक सीमित नजर आ रही है और लोगों को पेपर वर्क में उलझाकर रखा गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के घरों पर लगाए जा रहे टैक्स को लेकर भी लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और चिकित्सा की व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक है। पदयात्रा के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने इन समस्याओं को सीधे जनता से सुना और विभिन्न गांवों की स्थानीय समस्याओं को चिन्हित किया। जिला सचिव ने कहा कि इन समस्याओं को अब पार्टी अपने आगामी जनआंदोलनों का हिस्सा बनाएगी और जनता की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा। समापन पदयात्रा में जिला स्तर के भाकपा के तमाम नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रमुख रूप से जिला नेता राधामोहन यादव, बब्लू दूबे, अशोक मिश्र, तारीक, फरमान, साधु सिंह, चन्द्रिका प्रसाद, ज्वाला कांत द्विवेदी, सुबोध मुखिया, राजेन्द्र साह, ध्रुव नाथ तिवारी, मनोज साह, इदू, लक्की, संजय सिंह, आरती, पीताम्बर शर्मा, एन.डी. तिवारी, चन्द्र भूषण सिंह, गिरजा शंकर ठाकुर, सुनील राम, अली साहेब, शिवजी राय, कृष्ण नन्दन सिंह, तारकेश्वर सहनी, गुड्डू श्रीवास्तव, मदन शर्मा, कैलाश प्रसाद, गायत्री देवी, गंगा वर्मा, चंदन राव, लछुमन राम, विशुन प्रसाद, परसन साह, मोहन यादव, इद्रीश, सुनील राय, पप्पू, मंजूर, बहादुर सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने पदयात्रा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पदयात्रा के सफल समापन पर जिला सचिव ओम प्रकाश क्रांति ने अभियान में शामिल सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पदयात्रा के दौरान जनता से मिले व्यापक समर्थन और गांवों की समस्याओं से मिले अनुभव को पार्टी आगे के संघर्षों की दिशा तय करने में इस्तेमाल करेगी। साथ ही उन्होंने जिले में पार्टी संगठन को और मजबूत एवं सशक्त बनाने के लिए कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर जनता के सवालों पर लगातार संघर्ष करने का आह्वान किया।1
- Virat Kohli se Bhartiya Khiladi the Jo 26 January aur 15 August ko Sanjiv 15 August ko1
- राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भारत ने हर्षोल्लास के साथ बेतिया के नया टोला में मनाया 80 वां स्वतंत्रता दिवस समारोह। 15 August. स्वतन्त्रता दिवस समारोह पर बेतिया के प्रदेश सह जिला कार्यालय, नया टोला, बेतिया में आयोजित किया गया। 15.08.2026.1
- बगहा के गौतम कुमार के बाद अब पूर्वी चम्पारण जिले के चकिया से एक लड़का गायब खबर पूर्वी चम्पारण जिले के चकिया थाना क्षेत्र के बैसाहा पंचायत अंतर्गत बारा गोविन्द गांव का है जहां सागर कुमार नाम का एक 9 वर्षीय लड़का गायब हो गया है,, अभी बगहा के गौतम कुमार के गायब होने का मामला शांत ही नहीं हुआ था इसी बीच ये घटना घट गई।1
- पूरे सुगौली में मना देश की आजादी का जश्न। तिरंगा झंडा से पटा कार्यालय,प्रतिष्ठान,घर, व्यवसायिक स्थल और वाहन।1
- 15 अगस्त पर दुदही के गर्ल्स स्कूल में नहीं फहरा तिरंगा" : मो. जयबुन निशा स्कूल पर उठे सवाल, प्रबंधन से मांगा जवाब दुदही, कुशीनगर 15, अगस्त 2026 को पूरा देश 80वां स्वतंत्रता दिवस उत्साह के साथ मना रहा था। सरकारी कार्यालयों से लेकर स्कूलों तक तिरंगा फहराकर शहीदों को नमन किया गया। लेकिन इसी बीच नगर पंचायत दुदही स्थित *मो. जयबुन निशा गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल हिंदी-इंग्लिश-उर्दू* में ध्वजारोहण न होने की खबर से सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि पिछले वर्ष इसी स्कूल में स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया गया था। ऐसे में इस बार राष्ट्रीय पर्व पर ध्वजारोहण न होने से कई सवाल उठ रहे हैं। *सबसे बड़े सवाल:* 1. आखिर इस बार स्कूल में 15 अगस्त के कार्यक्रम की कोई तैयारी क्यों नहीं की गई? 2. क्या स्कूल प्रबंधन ने ध्वजारोहण न करने का कोई निर्णय लिया था? 3. क्या इसके पीछे कोई प्रशासनिक या तकनीकी कारण था? 4. यदि कार्यक्रम नहीं हुआ तो क्या इसकी जानकारी शिक्षा विभाग या अभिभावकों को दी गई थी? 5. स्कूल में छात्राओं के लिए कोई सांस्कृतिक या देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित हुआ या नहीं? ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं होता। बच्चों में देशभक्ति और संविधान के प्रति सम्मान की भावना जगाने की जिम्मेदारी भी शिक्षण संस्थानों की ही है। ऐसे में राष्ट्रीय पर्व पर ध्वजारोहण न होना गंभीर मामला है। फिलहाल स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रबंधन और शिक्षा विभाग इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण दें। यदि कोई वैध कारण है तो उसे सार्वजनिक किया जाए, और यदि लापरवाही हुई है तो जांच कर कार्रवाई हो। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि *मो. जयबुन निशा गर्ल्स स्कूल प्रबंधन* इस मामले में क्या जवाब देता है।1
- गौनाहा में बाघ का आतंक, दो गाभिन गायों का शिकार; 6 घंटे बाद भी वन विभाग की टीम नहीं पहुंची, ग्रामीणों में भारी आक्रोश गौनाहा प्रखंड अंतर्गत मंगुराहा वन क्षेत्र में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से करीब छह किलोमीटर दूर हरपुर फॉर्म सरेह में बाघ के आतंक से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। हड़बोड़ा नदी के समीप बाघ ने दो गाभिन गायों पर हमला कर उन्हें अपना शिकार बना लिया। घटना के बाद पशुपालकों और किसानों में डर का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें अपने पशुओं को चराने, खेतों में जाने और पशुओं के लिए घास लाने तक में भय सताने लगा है। बताया गया कि ग्राम तारा बसवरिया निवासी पशुपालक रमेश यादव शुक्रवार, 14 अगस्त को रोज की तरह अपने पशुओं को दोन नहर के पुल संख्या 28 के उत्तर बगल हड़बोड़ा नदी के किनारे हरपुर सरेह में चराने के लिए लेकर गए थे। इसी दौरान शाम करीब छह बजे बाघ ने हमला कर उनकी दो गाभिन गायों को मार डाला। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने मंगुराहा वन विभाग के पदाधिकारियों और कर्मियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग की कथित कार्यहीनता के कारण बाघ जंगल से बाहर तक पहुंच गया और एक गरीब पशुपालक की दो गाभिन गायों का शिकार कर लिया। ग्रामीणों का सवाल है कि जब वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल में वन्यजीवों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था विभाग द्वारा की जाती है, तो आखिर बाघ भोजन की तलाश में जंगल से बाहर क्यों निकल रहा है? ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते बाघ को नियंत्रित नहीं किया गया तो वह पशुओं के बाद इंसानों को भी अपना शिकार बना सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि बाघ के डर के कारण दोन नहर रोड से गुजरने वाले यात्रियों में भी भय बना हुआ है। उनका कहना है कि बाघ कभी भी सड़क पर आने वाले लोगों या आसपास काम कर रहे किसानों और पशुपालकों पर हमला कर सकता है। घटना के करीब छह घंटे बाद तक किसी अधिकारी या वन विभाग की टीम के मौके पर नहीं पहुंचने को लेकर भी ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। हालांकि वन कर्मी मंसूर मियां को फोन कर बुलाया गया, जो मौके पर ग्रामीणों के साथ मौजूद रहे। इधर, मंगुराहा रेंजर अंशुमन कुमार ने बताया कि बाघ से किसी तरह की अप्रिय घटना न हो, इसके लिए क्षेत्र में लोगों को सतर्क रहने की सूचना दी गई है। दोन नहर सड़क पर सुबह छह बजे से शाम तक वन विभाग के कर्मियों की तैनाती की जाएगी, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि मृत गायों के स्वामियों को वन विभाग की ओर से प्रति गाय 24 हजार रुपये मुआवजा दिया जाएगा। बाघ के खुलेआम जंगल से बाहर निकलकर पशुओं का शिकार करने की घटना ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बाघ के आतंक से ग्रामीणों को कब राहत मिलेगी और वन विभाग उसे जंगल की सीमा में रखने के लिए क्या ठोस कदम उठाएगा।1