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जगन गुर्जर के बेटे आसाराम गुर्जर ने न्याय की माँग को लेकर एक अपील की है। इस अपील से जुड़े घटनाक्रम में, उनके भाई अब अजमेर पहुँच गए हैं।
Gangapur ki Aabaj
जगन गुर्जर के बेटे आसाराम गुर्जर ने न्याय की माँग को लेकर एक अपील की है। इस अपील से जुड़े घटनाक्रम में, उनके भाई अब अजमेर पहुँच गए हैं।
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- पश्चिम मध्य रेलवे स्काउट एंड गाइड ने गंगापुर सिटी में चलाए जा रहे अपने 'जल सेवा अभियान' का समापन कर दिया है। इस अभियान का समापन रेल यात्रियों को शरबत पिलाकर किया गया। इस गतिविधि के माध्यम से, संगठन ने अपनी जल सेवा पहल को सफलतापूर्वक पूरा किया।1
- जगन गुर्जर के बेटे आसाराम गुर्जर ने न्याय की माँग को लेकर एक अपील की है। इस अपील से जुड़े घटनाक्रम में, उनके भाई अब अजमेर पहुँच गए हैं।1
- करौली जिले के हिंडौन क्षेत्र स्थित भोपुर में गंभीर नदी के पास विद्युत करंट की चपेट में आने से तीन युवकों की मौत का मामला अब सुलझ गया है। प्रशासन और मृतकों के परिजनों के बीच सहमति बनने के बाद दो दिनों से जारी धरना समाप्त कर दिया गया है। प्रशासन ने तीनों मृतकों के परिवारों को कुल 37.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई है। इसके तहत, प्रत्येक परिवार को 50 हजार रुपये नकद, 5 लाख रुपये का मौके पर ही चेक और अगले 15 दिनों में 7 लाख रुपये देने का वादा किया गया है। साथ ही, पीड़ित परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी दी जाएगी। इस मामले में गंभीर लापरवाही बरतने पर विद्युत विभाग के दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है, और तीनों मृतकों का पोस्टमार्टम घटना स्थल पर ही कराया गया था। धरना स्थल पर करौली-धौलपुर सांसद भजनलाल जाटव, टोडाभीम विधायक एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष घनश्याम महर, हिंडौन विधायक अनीता जाटव, जाटव समाज सुधार समिति 360 गांव के अध्यक्ष हट्टी राम, और संबंधित ठेकेदार सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।1
- लालसोट थाना पुलिस ने दयाल ढाबा हत्याकांड में फरार आरोपियों की मदद करने वाले एक शख्स को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान पिंटू सिंह (20) पुत्र जगमोहन गुर्जर निवासी मोरपा, थाना बाटोदा, जिला सवाई माधोपुर के रूप में हुई है। आरोपी ने हत्याकांड के मुख्य शूटरों को अपनी मोटरसाइकिल देकर घटनास्थल से भागने में सहयोग किया था। थानाधिकारी पवन कुमार जाट ने बताया कि मंडावरी क्षेत्र के खेड़ला खुर्द निवासी लेखराज मीणा ने 10 अप्रैल 2026 को इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, लेखराज का भाई धर्मेंद्र उर्फ योगेंद्र मीणा दयाल ढाबे पर खाना खाने गया था। खाना खाने के बाद जैसे ही वह ढाबे से बाहर निकला, स्विफ्ट कार में सवार चेतराम गुर्जर उर्फ राहुल खटाणा, जसराम गुर्जर, देशराज गुर्जर, झंडू मीणा और राज ने उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली छाती में लगने से धर्मेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।1
- पीएमश्री रा उ मा विद्यालय हिण्डोन सिटी के प्रिंसिपल गजेन्द्र शर्मा सेवानिवृत्त हो गए हैं। इस अवसर पर उनके परिवारजन बैंड बाजा लेकर पहुंचे। शुभचिंतकों और विद्यालय स्टाफ ने उनके कार्यकाल की सराहना की। हिंडौन के कई लोगों ने प्रिंसिपल गजेन्द्र शर्मा को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।4
- राजस्थान में सरकारें जब 'प्रशासन गांवों के संग' जैसे बड़े-बड़े शिविर आयोजित करती हैं, तो ग्रामीणों में उम्मीद जगती है कि उनकी सालों पुरानी समस्याओं का समाधान होगा। हालाँकि, जब इन शिविरों में पेयजल जैसी बुनियादी ज़रूरत पर भी चर्चा नहीं होती, तो ग्रामीणों का व्यवस्था से भरोसा उठना स्वाभाविक है। मोरड़ा गांव में पिछले 20 साल यानी दो दशकों से पेयजल का संकट गहराया हुआ है, जहाँ पूरी एक पीढ़ी सिर्फ़ टैंकरों के भरोसे पानी पीकर बड़ी हुई है। मीडिया में आवाज़ उठाने, जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटने और 181 (राजस्थान संपर्क पोर्टल) पर शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है, जो सिस्टम की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। इस स्थिति के लिए जलदाय विभाग (PHED) की घोर लापरवाही, जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक इच्छाशक्ति में कमी और अधिकारियों की जवाबदेही तय न होना प्रमुख कारण हैं। करोड़ों रुपये का बजट कागज़ों में पास होने के बाद भी पानी ज़मीन पर नहीं पहुंचना स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली और मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े करता है। चुनाव में बड़े वादे कर जीतने के बाद जनता की बुनियादी समस्याओं को ठंडे बस्ते में डाल देना नेताओं की उदासीनता का प्रमाण है, जिसने मोरड़ा के ग्रामीणों को 20 साल से प्यासा रखा है। समस्या का समाधान न हो पाने के पीछे कागज़ी खानापूर्ति और भ्रष्टाचार भी एक बड़ी वजह है, जहाँ योजनाओं का पैसा पाइपलाइनों या बोरिंग के नाम पर निकाल लिया जाता है, लेकिन तकनीकी खामी या सही प्लानिंग न होने से पानी घरों तक नहीं पहुंचता। टोडाभीम और करौली के कई इलाकों में भूजल स्तर या तो बहुत नीचे चला गया है या पानी फ्लोराइड युक्त होने के कारण पीने योग्य नहीं है। ऐसी स्थिति में, जब तक गांव को चंबल परियोजना जैसी किसी बड़ी बाहरी नदी या बांध परियोजना से नहीं जोड़ा जाता, स्थानीय स्तर पर बोरिंग कराने से भी हल नहीं निकलता, जिसके लिए बड़े प्रशासनिक प्रयासों की आवश्यकता है, जो अब तक नहीं किए गए। चूंकि शिविरों और सामान्य शिकायतों से कोई असर नहीं हो रहा है, ग्रामीणों को अब सामूहिक आरटीआई के ज़रिए जलदाय विभाग से पिछले 10-20 सालों के बजट और खर्च का हिसाब पूछना चाहिए। साथ ही, स्थानीय अधिकारियों से ऊपर उठकर सीधे जयपुर में जलदाय मंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और जलदाय विभाग के मुख्य सचिव को 181 की पुरानी शिकायतों के टोकन नंबर के साथ एक विस्तृत, हस्ताक्षरित ज्ञापन भेजा जाना चाहिए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री, जलदाय मंत्री और करौली कलेक्टर को टैग कर गांव की खाली मटकियों और टैंकरों की तस्वीरें/वीडियो साझा करके एक अभियान चलाना चाहिए। आगामी चुनावों में 'पानी नहीं तो वोट नहीं' का संकल्प लेना भी लोकतंत्र में जनता का सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है। मोरड़ा के ग्रामीण किसी गलती के लिए नहीं, बल्कि एक लापरवाह सिस्टम और राजनीतिक उपेक्षा के शिकार हुए हैं। यह हक की लड़ाई लंबी हो सकती है, लेकिन एकजुटता और सही रणनीति से इस 20 साल पुराने संकट को खत्म किया जा सकता है।1
- यह रहा आपकी पोस्ट के लिए एक प्रभावशाली और भावनात्मक कैप्शन:1
- पांचना बांध से नहरों में पानी खोले जाने के विषय पर उप नेता प्रतिपक्ष विधायक रामकेश मीणा ने हाई कोर्ट की सुनवाई के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है।1