राजस्थान में सरकारें जब 'प्रशासन गांवों के संग' जैसे बड़े-बड़े शिविर आयोजित करती हैं, तो ग्रामीणों में उम्मीद जगती है कि उनकी सालों पुरानी समस्याओं का समाधान होगा। हालाँकि, जब इन शिविरों में पेयजल जैसी बुनियादी ज़रूरत पर भी चर्चा नहीं होती, तो ग्रामीणों का व्यवस्था से भरोसा उठना स्वाभाविक है। मोरड़ा गांव में पिछले 20 साल यानी दो दशकों से पेयजल का संकट गहराया हुआ है, जहाँ पूरी एक पीढ़ी सिर्फ़ टैंकरों के भरोसे पानी पीकर बड़ी हुई है। मीडिया में आवाज़ उठाने, जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटने और 181 (राजस्थान संपर्क पोर्टल) पर शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है, जो सिस्टम की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। इस स्थिति के लिए जलदाय विभाग (PHED) की घोर लापरवाही, जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक इच्छाशक्ति में कमी और अधिकारियों की जवाबदेही तय न होना प्रमुख कारण हैं। करोड़ों रुपये का बजट कागज़ों में पास होने के बाद भी पानी ज़मीन पर नहीं पहुंचना स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली और मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े करता है। चुनाव में बड़े वादे कर जीतने के बाद जनता की बुनियादी समस्याओं को ठंडे बस्ते में डाल देना नेताओं की उदासीनता का प्रमाण है, जिसने मोरड़ा के ग्रामीणों को 20 साल से प्यासा रखा है। समस्या का समाधान न हो पाने के पीछे कागज़ी खानापूर्ति और भ्रष्टाचार भी एक बड़ी वजह है, जहाँ योजनाओं का पैसा पाइपलाइनों या बोरिंग के नाम पर निकाल लिया जाता है, लेकिन तकनीकी खामी या सही प्लानिंग न होने से पानी घरों तक नहीं पहुंचता। टोडाभीम और करौली के कई इलाकों में भूजल स्तर या तो बहुत नीचे चला गया है या पानी फ्लोराइड युक्त होने के कारण पीने योग्य नहीं है। ऐसी स्थिति में, जब तक गांव को चंबल परियोजना जैसी किसी बड़ी बाहरी नदी या बांध परियोजना से नहीं जोड़ा जाता, स्थानीय स्तर पर बोरिंग कराने से भी हल नहीं निकलता, जिसके लिए बड़े प्रशासनिक प्रयासों की आवश्यकता है, जो अब तक नहीं किए गए। चूंकि शिविरों और सामान्य शिकायतों से कोई असर नहीं हो रहा है, ग्रामीणों को अब सामूहिक आरटीआई के ज़रिए जलदाय विभाग से पिछले 10-20 सालों के बजट और खर्च का हिसाब पूछना चाहिए। साथ ही, स्थानीय अधिकारियों से ऊपर उठकर सीधे जयपुर में जलदाय मंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और जलदाय विभाग के मुख्य सचिव को 181 की पुरानी शिकायतों के टोकन नंबर के साथ एक विस्तृत, हस्ताक्षरित ज्ञापन भेजा जाना चाहिए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री, जलदाय मंत्री और करौली कलेक्टर को टैग कर गांव की खाली मटकियों और टैंकरों की तस्वीरें/वीडियो साझा करके एक अभियान चलाना चाहिए। आगामी चुनावों में 'पानी नहीं तो वोट नहीं' का संकल्प लेना भी लोकतंत्र में जनता का सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है। मोरड़ा के ग्रामीण किसी गलती के लिए नहीं, बल्कि एक लापरवाह सिस्टम और राजनीतिक उपेक्षा के शिकार हुए हैं। यह हक की लड़ाई लंबी हो सकती है, लेकिन एकजुटता और सही रणनीति से इस 20 साल पुराने संकट को खत्म किया जा सकता है।
राजस्थान में सरकारें जब 'प्रशासन गांवों के संग' जैसे बड़े-बड़े शिविर आयोजित करती हैं, तो ग्रामीणों में उम्मीद जगती है कि उनकी सालों पुरानी समस्याओं का समाधान होगा। हालाँकि, जब इन शिविरों में पेयजल जैसी बुनियादी ज़रूरत पर भी चर्चा नहीं होती, तो ग्रामीणों का व्यवस्था से भरोसा उठना स्वाभाविक है। मोरड़ा गांव में पिछले 20 साल यानी दो दशकों से पेयजल का संकट गहराया हुआ है, जहाँ पूरी एक पीढ़ी सिर्फ़ टैंकरों के भरोसे पानी पीकर बड़ी हुई है। मीडिया में आवाज़ उठाने, जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटने और 181 (राजस्थान संपर्क पोर्टल) पर शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है, जो सिस्टम की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। इस स्थिति के लिए जलदाय विभाग (PHED) की घोर लापरवाही, जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक इच्छाशक्ति में कमी और अधिकारियों की जवाबदेही तय न होना प्रमुख कारण हैं। करोड़ों रुपये का बजट कागज़ों में पास होने के बाद भी पानी ज़मीन पर नहीं पहुंचना स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली और मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े करता है। चुनाव में बड़े वादे कर जीतने के बाद जनता की बुनियादी समस्याओं को ठंडे बस्ते में डाल देना नेताओं की उदासीनता का प्रमाण है, जिसने मोरड़ा के ग्रामीणों को 20 साल से प्यासा रखा है। समस्या का समाधान न हो पाने के पीछे कागज़ी खानापूर्ति और भ्रष्टाचार भी एक बड़ी वजह है, जहाँ योजनाओं का पैसा पाइपलाइनों या बोरिंग के नाम पर निकाल लिया जाता है, लेकिन तकनीकी खामी या सही प्लानिंग न होने से पानी घरों तक नहीं पहुंचता। टोडाभीम और करौली के कई इलाकों में भूजल स्तर या तो बहुत नीचे चला गया है या पानी फ्लोराइड युक्त होने के कारण पीने योग्य नहीं है। ऐसी स्थिति में, जब तक गांव को चंबल परियोजना जैसी किसी बड़ी बाहरी नदी या बांध परियोजना से नहीं जोड़ा जाता, स्थानीय स्तर पर बोरिंग कराने से भी हल नहीं निकलता, जिसके लिए बड़े प्रशासनिक प्रयासों की आवश्यकता है, जो अब तक नहीं किए गए। चूंकि शिविरों और सामान्य शिकायतों से कोई असर नहीं हो रहा है, ग्रामीणों को अब सामूहिक आरटीआई के ज़रिए जलदाय विभाग से पिछले 10-20 सालों के बजट और खर्च का हिसाब पूछना चाहिए। साथ ही, स्थानीय अधिकारियों से ऊपर उठकर सीधे जयपुर में जलदाय मंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और जलदाय विभाग के मुख्य सचिव को 181 की पुरानी शिकायतों के टोकन नंबर के साथ एक विस्तृत, हस्ताक्षरित ज्ञापन भेजा जाना चाहिए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री, जलदाय मंत्री और करौली कलेक्टर को टैग कर गांव की खाली मटकियों और टैंकरों की तस्वीरें/वीडियो साझा करके एक अभियान चलाना चाहिए। आगामी चुनावों में 'पानी नहीं तो वोट नहीं' का संकल्प लेना भी लोकतंत्र में जनता का सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है। मोरड़ा के ग्रामीण किसी गलती के लिए नहीं, बल्कि एक लापरवाह सिस्टम और राजनीतिक उपेक्षा के शिकार हुए हैं। यह हक की लड़ाई लंबी हो सकती है, लेकिन एकजुटता और सही रणनीति से इस 20 साल पुराने संकट को खत्म किया जा सकता है।
- दौसा जिले की ग्राम पंचायत कुण्डल के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, खोहरा खुर्द में मंगलवार को शारीरिक शिक्षक सुरेश चंद शर्मा (उपाध्याय) के सेवानिवृत्त होने पर एक भावभीना विदाई एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यालय परिवार, ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिन्होंने शर्मा को उनके सेवाकाल के लिए सम्मानित किया। समारोह के दौरान, मंचासीन अतिथियों और सेवानिवृत्त शिक्षक सुरेश चंद शर्मा का पुष्पमाला पहनाकर तथा साफा बांधकर भव्य स्वागत-सत्कार किया गया। वक्ताओं ने अपने संबोधनों में सुरेश चंद शर्मा के योगदान की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने अपने सेवाकाल में विद्यार्थियों को खेलकूद, अनुशासन और संस्कारों की शिक्षा देकर विद्यालय व समाज में एक विशेष पहचान स्थापित की। उनके मार्गदर्शन में कई विद्यार्थियों ने खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। ग्रामीणों और विद्यालय स्टाफ ने विशेष रूप से उनकी समर्पण भावना, कर्तव्यनिष्ठा और सरल व्यक्तित्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा। इस अवसर पर उपस्थित कई वक्ताओं ने सुरेश चंद शर्मा के उज्ज्वल भविष्य, स्वस्थ जीवन और सुखद सेवानिवृत्ति के लिए शुभकामनाएँ व्यक्त कीं। कार्यक्रम का समापन स्मृति चिन्ह भेंट करने और सभी के प्रति आभार प्रदर्शन के साथ एक सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ। मौके पर भीखनारायण शर्मा, वार्ड पंच लाला राम जांगिड़, राजेन्द्र शर्मा, भवानी शंकर शर्मा, समस्त विद्यालय स्टाफ, एवं अन्य ग्रामीण लोग मौजूद रहे।4
- जगन गुर्जर के बेटे आसाराम गुर्जर ने न्याय की माँग को लेकर एक अपील की है। इस अपील से जुड़े घटनाक्रम में, उनके भाई अब अजमेर पहुँच गए हैं।1
- राजगढ़ में रविवार को आदिवासी मीणा समाज का प्रतिभा सम्मान समारोह और कार्यालय भवन का लोकार्पण केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर आदिवासी सेवा संस्थान के कार्यालय भवन और सभागार का भी लोकार्पण किया गया। संस्था के कोषाध्यक्ष लल्लू राम खुर्द ने बताया कि यह प्रतिभा सम्मान समारोह वर्ष 2024, 2025 और 2026 के लिए एक साथ आयोजित किया गया। महासचिव जयनारायण खरखडा ने जानकारी दी कि इस दौरान समाज की कुल 320 प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। समारोह में थानागाजी विधायक कांति प्रसाद मीणा, राजगढ़ लक्ष्मणगढ़ विधायक मांगेलाल मीणा, जिला प्रमुख बलबीर सिंह छिल्लर, डेयरी अध्यक्ष नितिन सांगवान और भाजपा विधायक प्रत्याशी बन्ना राम मीणा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि उनके द्वारा पूरे संसदीय क्षेत्र में बिना किसी भेदभाव के विकास कार्य कराए जा रहे हैं और वे विकास कार्य कराने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके द्वारा 36 कौन का विकास बिना भेदभाव के किया जा रहा है। इस अवसर पर बन्ना राम मीणा ने सांसद एवं केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र यादव की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे हमेशा क्षेत्र के विकास के लिए प्रयासरत हैं और उनके द्वारा अब तक कराया गया विकास बहुत ही ज्यादा है।3
- दौसा जिले के बसवा उपखंड क्षेत्र की चौबड़ीवाला ग्राम पंचायत के महावर मोहल्ले में पिछले एक माह से पेयजल का गंभीर संकट बना हुआ है। हैंडपंप खराब होने के कारण ग्रामीणों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो गया है। लोगों को दूर-दराज से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को हैंडपंप खराब होने की सूचना दी है। ग्राम विकास अधिकारी और जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता को भी इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। प्रशासन की इस निष्क्रियता से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द हैंडपंप की मरम्मत कर पेयजल व्यवस्था बहाल करने की मांग की है, ताकि क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।3
- लालसोट थाना पुलिस ने दयाल ढाबा हत्याकांड में फरार आरोपियों की मदद करने वाले एक शख्स को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान पिंटू सिंह (20) पुत्र जगमोहन गुर्जर निवासी मोरपा, थाना बाटोदा, जिला सवाई माधोपुर के रूप में हुई है। आरोपी ने हत्याकांड के मुख्य शूटरों को अपनी मोटरसाइकिल देकर घटनास्थल से भागने में सहयोग किया था। थानाधिकारी पवन कुमार जाट ने बताया कि मंडावरी क्षेत्र के खेड़ला खुर्द निवासी लेखराज मीणा ने 10 अप्रैल 2026 को इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, लेखराज का भाई धर्मेंद्र उर्फ योगेंद्र मीणा दयाल ढाबे पर खाना खाने गया था। खाना खाने के बाद जैसे ही वह ढाबे से बाहर निकला, स्विफ्ट कार में सवार चेतराम गुर्जर उर्फ राहुल खटाणा, जसराम गुर्जर, देशराज गुर्जर, झंडू मीणा और राज ने उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली छाती में लगने से धर्मेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।1
- अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई है। इस पूरे मामले की जानकारी एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने दी है।1
- राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में एक पुलिसकर्मी का हार्ट अटैक से निधन हो गया। पुलिसकर्मी के पार्थिव शरीर का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।1
- प्रहलाद खटाणा और जगन गुर्जर के बेटे ने समाज से न्याय दिलाने की मांग की है। इस संदर्भ में उन्होंने अपनी बात रखी और समाज से उचित कार्रवाई की अपील की।1
- जयपुर में पैरा मेडिकल की बैक परीक्षा पास कराने के एवज में 45 छात्रों से पैसे लेकर नकल करवाने की तैयारी चल रही थी। परीक्षा शुरू होने से पहले ही पुलिस ने छापा मारकर इस बड़े नकल रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया। इस कार्रवाई में कॉलेज संचालक रामकृष्ण मंडीवाल, उनके भतीजे देवकृष्ण, एचओडी कृष्ण कुमार और लेक्चरर शंकरलाल जाट सहित कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। नकल की साजिश पकड़ी जाने और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद संबंधित परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया। परीक्षा रद्द होने से आक्रोशित हुए अन्य छात्रों ने जमकर तोड़फोड़ की।1