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अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई है। इस पूरे मामले की जानकारी एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने दी है।
रिपोर्टर राकेश तंवर
अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई है। इस पूरे मामले की जानकारी एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने दी है।
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- रूपबास उपखंड के गांव सज्जनवास स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल सतीश तिवारी के सेवानिवृत्त होने पर लोगों ने उनका भव्य स्वागत और सम्मान किया। विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के बाद, बैंड-बाजों के साथ एक सम्मान यात्रा निकाली गई। यह यात्रा विद्यालय से शुरू होकर रूपबास कस्बा होते हुए प्रिंसिपल तिवारी के घर तक गई, जिसमें कस्बे के एसबीआई बैंक के सामने स्थित हनुमान मंदिर से बाजार होते हुए उनके आवास तक का मार्ग शामिल था। सेवानिवृत्त प्रिंसिपल का सज्जनवास गांव के लोगों, विद्यालय परिवार और रूपबास कस्बे के निवासियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर रूपबास सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक एवं अधिकारीगण भी उपस्थित रहे। प्रिंसिपल तिवारी ने इस भव्य स्वागत के लिए सभी का हृदय से आभार जताया।1
- आज मारवाड़ जंक्शन मुख्यालय पर मारवाड़ विधानसभा क्षेत्र की जन समस्याओं, बढ़ती महंगाई और अयोध्या में श्री राम मंदिर घोटाले के मुद्दे पर कांग्रेस का गुस्सा फूट पड़ा। पूर्व विधायक खुशवीर सिंह और मारवाड़ कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण तंवर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक आक्रोशित रैली निकाली। उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल के नाम उपखंड अधिकारी महावीर सिंह जोधा को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में मुख्य रूप से गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने, महंगाई में हुई मूल्य वृद्धि को कम करने, भीषण गर्मी के दौरान पेयजल आपूर्ति को नियमित करने और अघोषित बिजली कटौती पर रोक लगाने की मांग की गई। इसके साथ ही, ज्ञापन में श्री राम मंदिर अयोध्या में हुए घोटाले की निष्पक्ष जांच कराने और इसमें शामिल दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की भी मांग की गई। इस प्रदर्शन में मारवाड़ विधानसभा क्षेत्र के अनेक गांवों से आए सैकड़ों कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता काली पट्टी बांधकर उपखंड कार्यालय पहुंचे थे। पूर्व विधायक खुशवीर सिंह ने इस अवसर पर एक बयान भी दिया।1
- थांवला के नजदीकी ग्राम टेहला में एक खेत में बने तिरपाल वाले पानी के होद में गिरने से एक 35 वर्षीय युवक की दुखद मृत्यु हो गई। मृतक बाबूलाल, जो गाँव टेहला में अपने साले सांवर राम के साथ खेती का काम करता था, सोमवार को रोज की तरह खेत में था जब यह दर्दनाक हादसा हुआ। पुलिस को मृतक के भाई मुकेश पुत्र पूरण निवासी गाँव नदी, जिला अजमेर ने बताया कि बाबूलाल होद की पाल पर पाइप हटाने-जोड़ने का काम कर रहा था। इसी दौरान उसके साले सांवर राम ने कृषि कार्य के लिए विपरीत दिशा में खड़े ट्रेक्टर-ट्रॉली को स्टार्ट किया, जिससे अचानक क्लच छूट गया। क्लच छूटने से बाबूलाल को धक्का लगा और वह गहरे पानी के होद में जा गिरा। बाबूलाल को तैरना नहीं आता था, जिस कारण वह बाहर नहीं निकल पाया। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। कड़ी मशक्कत के बाद होद की पाल तोड़कर पानी खाली किया गया और बाबूलाल को बाहर निकालकर थांवला के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों ने बाबूलाल को मृत घोषित कर दिया। सूचना पर थांवला थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची, शव को कब्जे में लिया और चीरघर में रखवाया। मंगलवार सुबह परिजनों और पुलिस की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया। इस पूरे मामले को लेकर थांवला थाना के एएसआई रति राम विश्नोई और उनकी टीम द्वारा आगे की जांच जारी है।2
- राजस्थान में सरकारें जब 'प्रशासन गांवों के संग' जैसे बड़े-बड़े शिविर आयोजित करती हैं, तो ग्रामीणों में उम्मीद जगती है कि उनकी सालों पुरानी समस्याओं का समाधान होगा। हालाँकि, जब इन शिविरों में पेयजल जैसी बुनियादी ज़रूरत पर भी चर्चा नहीं होती, तो ग्रामीणों का व्यवस्था से भरोसा उठना स्वाभाविक है। मोरड़ा गांव में पिछले 20 साल यानी दो दशकों से पेयजल का संकट गहराया हुआ है, जहाँ पूरी एक पीढ़ी सिर्फ़ टैंकरों के भरोसे पानी पीकर बड़ी हुई है। मीडिया में आवाज़ उठाने, जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटने और 181 (राजस्थान संपर्क पोर्टल) पर शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है, जो सिस्टम की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। इस स्थिति के लिए जलदाय विभाग (PHED) की घोर लापरवाही, जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक इच्छाशक्ति में कमी और अधिकारियों की जवाबदेही तय न होना प्रमुख कारण हैं। करोड़ों रुपये का बजट कागज़ों में पास होने के बाद भी पानी ज़मीन पर नहीं पहुंचना स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली और मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े करता है। चुनाव में बड़े वादे कर जीतने के बाद जनता की बुनियादी समस्याओं को ठंडे बस्ते में डाल देना नेताओं की उदासीनता का प्रमाण है, जिसने मोरड़ा के ग्रामीणों को 20 साल से प्यासा रखा है। समस्या का समाधान न हो पाने के पीछे कागज़ी खानापूर्ति और भ्रष्टाचार भी एक बड़ी वजह है, जहाँ योजनाओं का पैसा पाइपलाइनों या बोरिंग के नाम पर निकाल लिया जाता है, लेकिन तकनीकी खामी या सही प्लानिंग न होने से पानी घरों तक नहीं पहुंचता। टोडाभीम और करौली के कई इलाकों में भूजल स्तर या तो बहुत नीचे चला गया है या पानी फ्लोराइड युक्त होने के कारण पीने योग्य नहीं है। ऐसी स्थिति में, जब तक गांव को चंबल परियोजना जैसी किसी बड़ी बाहरी नदी या बांध परियोजना से नहीं जोड़ा जाता, स्थानीय स्तर पर बोरिंग कराने से भी हल नहीं निकलता, जिसके लिए बड़े प्रशासनिक प्रयासों की आवश्यकता है, जो अब तक नहीं किए गए। चूंकि शिविरों और सामान्य शिकायतों से कोई असर नहीं हो रहा है, ग्रामीणों को अब सामूहिक आरटीआई के ज़रिए जलदाय विभाग से पिछले 10-20 सालों के बजट और खर्च का हिसाब पूछना चाहिए। साथ ही, स्थानीय अधिकारियों से ऊपर उठकर सीधे जयपुर में जलदाय मंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और जलदाय विभाग के मुख्य सचिव को 181 की पुरानी शिकायतों के टोकन नंबर के साथ एक विस्तृत, हस्ताक्षरित ज्ञापन भेजा जाना चाहिए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री, जलदाय मंत्री और करौली कलेक्टर को टैग कर गांव की खाली मटकियों और टैंकरों की तस्वीरें/वीडियो साझा करके एक अभियान चलाना चाहिए। आगामी चुनावों में 'पानी नहीं तो वोट नहीं' का संकल्प लेना भी लोकतंत्र में जनता का सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है। मोरड़ा के ग्रामीण किसी गलती के लिए नहीं, बल्कि एक लापरवाह सिस्टम और राजनीतिक उपेक्षा के शिकार हुए हैं। यह हक की लड़ाई लंबी हो सकती है, लेकिन एकजुटता और सही रणनीति से इस 20 साल पुराने संकट को खत्म किया जा सकता है।1
- डीग पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ (IPS) के निर्देश पर मंगलवार को बहज चौकी उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर विशेष वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान सघन नाकाबंदी कर वाहनों की जांच की गई, जिसमें कोतवाली थाना प्रभारी रामनरेश मीणा और उप निरीक्षक अमर सिंह गुर्जर सहित अन्य पुलिस जाब्ता मौजूद रहा। कोतवाली थाना प्रभारी रामनरेश मीणा ने बताया कि इस अभियान के तहत काली फिल्म, फैंसी नंबर प्लेट, मॉडिफाइड वाहन, अवैध हूटर, फ्लैशर, लाल-नीली बत्ती, बिना नंबर, बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट और बिना वैध दस्तावेज चलने वाले वाहनों सहित यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यह अभियान अपराध नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले के सभी सर्किल व थाना क्षेत्रों में लगातार जारी रहेगा।3
- जनपद मथुरा के थाना छाता क्षेत्र के नौगांव से रिश्तों को शर्मसार करने और लालच में अपनों का ही हक मारने का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ सगे चाचा और ताऊ ने मिलकर अपनी तीन अनाथ भतीजियों कुमारी संध्या और चांदनी का हक छीन लिया और उन्हें पाई-पाई के लिए मोहताज कर बेघर कर दिया। अनाथ बच्चियों की संपत्ति हड़पने के लिए उनके दादा के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार कराई गई है। मिली जानकारी के अनुसार, नौगांव निवासी वीरेंद्र की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी रजनी ने सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दूसरा विवाह कर लिया। वीरेंद्र और रजनी की तीन मासूम बच्चियां हैं, जो पिता की मौत और माँ के चले जाने के बाद पूरी तरह अनाथ और असहाय हो गईं। नियमों के अनुसार, पिता वीरेंद्र के हिस्से की संपत्ति पर उनकी इन तीन बेटियों का हक था, लेकिन बच्चियों के चाचा और ताऊ की नियत डोल गई। बताया जा रहा है कि बच्चियों के दादा (बाबा) की मृत्यु से पहले ही उनके पिता वीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए चाचा-ताऊ ने कथित तौर पर मौज़ नौगांव खसरा संख्या 683 की एक फर्जी वसीयत तैयार करवा ली, जिसमें वीरेंद्र के हिस्से को गायब कर पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब बच्चियों के पिता जीवित नहीं थे, तो दादा की संपत्ति में से पोतियों का हक मारना सीधे तौर पर जालसाजी और धोखाधड़ी है और बच्चियों को जानबूझकर बेघर और बेसहारा कर दिया गया है। इस धोखाधड़ी के बाद तीनों बच्चियां पूरी तरह से बेघर हो चुकी हैं, उनके पास न तो रहने के लिए छत बची है और न ही भरण-पोषण का कोई साधन। स्थानीय ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि सगे खून ने ही मासूमों के साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर जालसाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और बच्चियों को उनका हक दिलाने की गुहार लगाई है।1
- अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई है। इस पूरे मामले की जानकारी एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने दी है।1
- जनपद मथुरा के थाना छाता क्षेत्र के नौगांव में रिश्तों को शर्मसार करने वाला एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ सगे चाचा और ताऊ ने मिलकर अपनी ही तीन अनाथ भतीजियों, कुमारी संध्या और चांदनी, का हक छीन लिया है। इन कलयुगी चाचा-ताऊ पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर एक फर्जी वसीयत तैयार करवाकर इन मासूम बच्चियों को पाई-पाई के लिए मोहताज कर बेघर कर दिया। मिली जानकारी के अनुसार, नौगांव निवासी वीरेंद्र की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी रजनी ने सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दूसरा विवाह कर लिया। वीरेंद्र और रजनी की इन तीन मासूम बच्चियों पर पिता की मौत और माँ के चले जाने के बाद दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और वे पूरी तरह अनाथ व असहाय हो गईं। नियम और नैतिकता के आधार पर पिता वीरेंद्र के हिस्से की संपत्ति पर उनकी इन तीन बेटियों का हक था। हालाँकि, बच्चियों के दादा (बाबा) की मृत्यु से पहले ही उनके पिता वीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए, चाचा-ताऊ की नीयत डोल गई और उन्होंने मौज नौगांव खसरा संख्या 683 की संपत्ति के लिए दादा के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार करवा ली। इस वसीयत में वीरेंद्र के हिस्से को गायब कर पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि "जब बच्चियों के पिता जीवित ही नहीं थे, तो दादा की संपत्ति में से पोतियों का हक मारना सीधे तौर पर जालसाजी और धोखाधड़ी है" और बच्चियों को जानबूझकर बेघर व बेसहारा किया गया है। इस धोखाधड़ी के कारण तीनों बच्चियां पूरी तरह से बेघर हो चुकी हैं; उनके पास न तो रहने के लिए छत है और न ही भरण-पोषण का कोई साधन। इस घिनौने कृत्य को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भी गहरा आक्रोश है कि सगे खून ने ही इन मासूमों के साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मामले की गहन जांच कर जालसाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और बच्चियों को उनका हक दिलाने की गुहार लगाई है।1
- डीग में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से मेरा मैदान में धरना दे रही आशा सहयोगियों ने सोमवार को आंदोलन तेज करते हुए पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। यह कदम उन्होंने अपनी लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए उठाया, जिसमें मुख्य रूप से वेतन वृद्धि और पेंशन व्यवस्था में आर्थिक सहायता शामिल है। इस घटना की सूचना मिलते ही उपखंड अधिकारी अमित कुमार मीणा और शहर कोतवाली प्रभारी रमेश मीणा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारी आशा सहयोगियों से बातचीत कर उन्हें पानी की टंकी से नीचे उतारने के लिए समझाने का प्रयास कर रहे हैं।1