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Dharmendra Soni
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- बांसवाड़ा के साईं मंदिर के पीछे स्थित मदारेश्वर क्षेत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण के बीच श्री हरिकृष्ण गौ सेवा संस्थान का भव्य शुभारंभ हुआ। इस गरिमामयी समारोह में क्षेत्र के अनेक संतों, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और गौभक्तों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन मुख्य रूप से गौ सेवा, गौ संरक्षण और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से किया गया था। समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान संत सभा के प्रदेश अध्यक्ष औघड़ पीर योगी ईश्वर नाथ जी महाराज रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि गौ माता की सेवा सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जिससे समाज में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कार्यक्रम के दौरान योगी बालक नाथ जी, किसनगिरि महाराज, बंशीगिरी महाराज, शंकर लाल डिंडोर, वकील डिंडोर और तूफान डिंडोर सहित कई संत-महंत उपस्थित रहे, जिन्होंने गौ माता का पूजन कर क्षेत्र की खुशहाली के लिए मंगलकामनाएं कीं। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में निराश्रित और बीमार गौवंश की सेवा और संरक्षण की आवश्यकता बहुत अधिक बढ़ गई है। गौशाला के संस्थापक अनिल डिंडोर ने समस्त व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालते हुए बताया कि इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य केवल गौशाला का संचालन करना नहीं, बल्कि समाज में गौ सेवा के प्रति जागरूकता फैलाना है। अंत में संतों व अतिथियों के सम्मान और प्रसाद वितरण के साथ इस भक्तिमय कार्यक्रम का समापन हुआ।4
- बांसवाड़ा में इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) की एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में संगठन के विस्तार की दिशा में आगे बढ़ते हुए नई जिला कार्यकारिणी का गठन किया गया और पांच विधानसभा प्रभारियों की नियुक्ति की गई। बैठक के दौरान संगठन के जिलाध्यक्ष किशन सैन का भव्य स्वागत किया गया। इस बैठक में पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई को तेज करने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने बदलते समय में पत्रकारों के संगठित रहने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता को सशक्त बनाया जा सके। इसके साथ ही, लोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता की भूमिका, IFWJ की प्रमुख मांगों और सदस्यता अभियान को लेकर भी बैठक में चर्चा की गई।3
- राजस्थान के डूंगरपुर जिले के चौरासी विधायक अनिल कटारा ने वन मित्र भर्ती को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विधायक ने इस भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा करने और आवेदन के लिए निर्धारित समयावधि को आगे बढ़ाने की पुरजोर मांग की है। इस मामले को लेकर विधायक अनिल कटारा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने भर्ती प्रक्रिया के लिए महज चंद घंटों की समयावधि दिए जाने पर सवाल खड़े किए हैं और इस समय सीमा को तुरंत बढ़ाने की मांग की है।1
- रतलाम जिले के जड़वासाकला गांव में प्राचीन धरोहर को जीवित रखने के लिए जन सहयोग से सराहनीय कार्य किया जा रहा है। तहसील व जिला रतलाम के अंतर्गत आने वाले इस गांव में पूरे ग्रामीणों ने एकजुट होकर जन सहयोग से प्राचीन धरोहर बावड़ी की सफाई का काम किया है। आज के समय में इस पुरानी ऐतिहासिक धरोहर को जीवित रखने के इस सामूहिक प्रयास की सराहना करते हुए सभी ग्राम वासियों को बहुत-बहुत बधाई दी गई है।1
- मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के भावरा में शादी के अवसर पर आदिवासी समाज की अनूठी और पारंपरिक प्रथा देखने को मिल रही है। इस मांगलिक उत्सव के दौरान लोग अपनी संस्कृति और विरासत का सम्मान करते हुए पूरे गर्व के साथ "जय जोहार, जय आदिवासी" का उद्घोष कर रहे हैं।1
- डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा उपखंड में करोड़ों रुपये खर्च कर बने सबसे बड़े रोडवेज बस स्टेशन पर बदहाल परिवहन व्यवस्था के कारण आमजन को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सोमवार को राजस्थान लोक सेवा आयोग की सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान रोडवेज की पोल खुल गई, जब सुबह-सुबह बड़ी संख्या में परीक्षार्थी डूंगरपुर जाने के लिए बस स्टेशन पर बसों का इंतजार करते रहे। अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि पीठ-डूंगरपुर सुबह 6 बजे और चिखली-डूंगरपुर सुबह 7 बजे वाली बसें समय पर आएंगी, लेकिन निर्धारित समय पर पहली बस ही नहीं पहुंची। परीक्षा का समय नजदीक आते देख मजबूरी में कई छात्र-छात्राओं, विशेषकर बेटियों को निजी वाहनों की छत पर बैठकर डूंगरपुर के लिए रवाना होना पड़ा, जिसने यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा देने जा रहे अभ्यर्थी राज सिंह और भावना लबाना ने बताया कि परीक्षा सुबह 9 बजे शुरू होनी थी और 8:30 बजे तक केंद्र पहुंचना अनिवार्य था, ऐसे में देरी होने पर उनका पूरा साल खराब हो सकता था। अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया कि रोडवेज की इस लापरवाही का खामियाजा आखिर छात्रों को क्यों भुगतना पड़ रहा है। काफी देर बाद जो रोडवेज बस स्टेशन पर पहुंची, उसकी हालत भी दयनीय थी और उसे धक्का देकर व तकनीकी प्रयासों से चालू करना पड़ा। सीमलवाड़ा, चौरासी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि वे रोजाना नौकरी, शिक्षा, चिकित्सा और व्यापार के लिए डूंगरपुर तथा उदयपुर यात्रा करते हैं, लेकिन बसों की बेहद कम संख्या के कारण उन्हें महंगे निजी परिवहन का सहारा लेना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने चौरासी क्षेत्र की इस गंभीर समस्या के लिए जिम्मेदार लोगों और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। क्षेत्रवासियों ने राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम प्रशासन से बसों की संख्या बढ़ाने, समय पर संचालन सुनिश्चित करने और जर्जर बसों के स्थान पर सुरक्षित बसें उपलब्ध कराने की मांग की है।1
- राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में कुशलगढ़ उप खंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र के अंतर्गत बड़ी सरवा से मध्यप्रदेश की सीमा तक जाने वाली सड़क अत्यंत खस्ताहाल हो चुकी है। इस डामरीकरण रोड़ के अभाव के चलते स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। मौके पर सड़क की स्थिति ऐसी है कि वहां सड़क कम और गड्ढे ज्यादा नजर आते हैं, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण गोपालसिंह, हरिसिंह और आनंद जोशी सहित अन्य लोगों ने सरकार और प्रशासन पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस भरोसे के साथ उन्होंने जनप्रतिनिधियों को चुनकर सत्ता के सिंहासन पर बैठाया था, उन्होंने चुनाव जीतने के बाद अपने वादे पूरे नहीं किए। क्षेत्र में भले ही डबल इंजन की सरकार है, लेकिन बड़ी सरवा की इस खस्ताहाल सड़क की सुध न तो सरकार, न प्रशासन, न ही विपक्ष और न ही सार्वजनिक निर्माण विभाग ले रहा है। पिछले दो सालों से ग्रामीण इस सड़क के डामरीकरण और सुधार के लिए मुख्यमंत्री संपर्क पोर्टल, ग्रामीण सेवा शिविरों और जनप्रतिनिधियों को लगातार पत्र लिखकर मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गोपालसिंह के अनुसार, बड़ी सरवा से मध्यप्रदेश की सीमा तक मात्र 4 किलोमीटर की दूरी पर डामरीकरण हो जाने से आवागमन पूरी तरह सुचारू हो सकता है। यह सड़क मध्यप्रदेश के भामल खवासा और बामनिया पेटलवाद के समीप पड़ती है, जिस पर रोजाना झाबुआ, राजगढ़, इंदौर तथा गुजरात की ओर जाने वाले दर्जनों बड़े और दोपहिया वाहन गुजरते हैं। सड़क पर इतने गहरे गड्ढे हैं कि यहाँ वाहन चलाना खतरे से खाली नहीं है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सड़क का निर्माण नहीं कराया गया, तो वर्षा के मौसम में बची-कुची सड़क भी पूरी तरह नष्ट हो जाएगी और कोई भी गंभीर दुर्घटना घट सकती है। अब देखना यह है कि क्या वातानुकूलित कमरों में बैठे अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर ध्यान देंगे या नहीं।4
- इस वीडियो को 'टोपी कट' ऐप में काफी मेहनत के साथ बनाया गया है। क्रिएटर ने दर्शकों से पूछा है कि उन्हें यह वीडियो कैसा लगा और उनसे कमेंट करके अपनी राय साझा करने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही, यूट्यूब पर 'dk Mahesh vlogs' सर्च करके चैनल को सब्सक्राइब करने की अपील भी की गई है।1