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*माननीय विधायक रामचंद्र सिंह जी ग्राम गाड़ी में शादी समारोह में किए शिरकत,चर्चित युवा मंडल अध्यक्ष कौशल यादव भी रहे शामिल,,* छिपादोहर (लातेहार):- मनिका विधानसभा के लोकप्रिय विधायक रामचंद्र सिंह बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत केड़ पंचायत निवासी जटू भुईयां के पुत्री के शादी समारोह में शामिल हुए। मौके पर नसीम अंसारी, शमशुल अंसारी, दिलावर अंसारी, ग्राम प्रधान कुलदीप सिंह,रामनंदन सिंह, अशोक सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
Manoj dutt dev
*माननीय विधायक रामचंद्र सिंह जी ग्राम गाड़ी में शादी समारोह में किए शिरकत,चर्चित युवा मंडल अध्यक्ष कौशल यादव भी रहे शामिल,,* छिपादोहर (लातेहार):- मनिका विधानसभा के लोकप्रिय विधायक रामचंद्र सिंह बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत केड़ पंचायत निवासी जटू भुईयां के पुत्री के शादी समारोह में शामिल हुए। मौके पर नसीम अंसारी, शमशुल अंसारी, दिलावर अंसारी, ग्राम प्रधान कुलदीप सिंह,रामनंदन सिंह, अशोक सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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- लातेहार जिला अंतर्गत प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नेतरहाट की घाटी पिछले 10 दिनों से भीषण आग की चपेट में है। जंगल में लगी आग लगातार फैलती जा रही है और अब इसका असर आसपास के गांवों के साथ-साथ मुख्य बाजार क्षेत्र तक भी पहुंच गया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नेतरहाट के मुख्य बाजार से अब आग की लपटें साफ देखी जा रही हैं। बाजार से महज करीब 150 मीटर की दूरी पर ही जंगल धधक रहा है, जिससे दुकानदारों और स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। हवा का एक हल्का झोंका भी जंगल में लगी आग के धुएं और चिंगारी रिहायशी इलाकों तक पहुंचा सकती है।ग्रामीणों का आरोप है कि आग लगने के 10 दिन बाद भी वन विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस राहत कार्य शुरू नहीं किया गया है। आग धीरे-धीरे रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रही है, जिससे जान-माल के बड़े नुकसान की आशंका बढ़ती जा रही है। आग की चपेट में आकर जंगलों को भारी नुकसान हुआ है और मवेशियों के चारे का संकट भी गहरा गया है। वहीं धुएं और चिंगारियों के कारण गांवों और बाजार क्षेत्र में लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। भीषण गर्मी और सूखे पत्तों के कारण आग तेजी से फैल रही है, जिससे इसे काबू में लाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसके बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी पहल नहीं दिख रही है।ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल फायर ब्रिगेड और वन विभाग की टीम भेजकर आग पर काबू पाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह आग बड़े हादसे का कारण बन सकती है।2
- लातेहार: नवपदस्थापित उपायुक्त संदीप कुमार ने सोमवार को पत्रकारों से मुलाकात में कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना उनकी पहली प्राथमिकता है। आइये हम जानते जानते हैं कि उन्होंने किया कहा ।1
- महुआडांड़ प्रखंड के कुरो मोड़ के समीप सोमवार शाम लगभग 4:30 बजे अर्टिगा कार और टेंपू (ऑटो) के बीच हुई टक्कर में चार लोग घायल हो गए। घायलों में टेंपू चालक सहित सभी सवार शामिल हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार, डालटनगंज की अर्टिगा गाड़ी बताई जा रही है अर्टिगा गाड़ी ने टेंपू को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि टेंपू बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार लोग घायल हो गए।घायलों की पहचान मोहन लोहारा (50 वर्ष, परहा टोली), संजना गिद्ध (18 वर्ष), प्रतिमा कुजूर और टेंपू चालक अनिल घासी के रूप में की गई है। स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को तुरंत उपचार के लिए भेजा गया।घटना के बाद अर्टिगा में सवार सभी लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं, लेकिन वे मौके से फरार हो गए।सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है तथा फरार वाहन और उसके सवारों की तलाश की जा रही है।4
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- ग्रामीण बोले आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर होने की वजह से आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहता है1
- (लातेहार): गारू प्रखंड क्षेत्र से विस्थापित आदिवासी एवं आदिम जनजाति स्वजनों की समस्याएं एक बार फिर सामने आई हैं। गारू के कुजरूम गांव से पलामू जिले के पोलपोल गांव में बसाए गए कई स्वजम अब पुनर्वास स्थल छोड़कर अपने मूल गांव लौटने को मजबूर हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास स्थल पर न तो बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं और न ही खेती-बारी के लिए पर्याप्त जमीन दी गई, जिससे उनका जीवन संकट में पड़ गया है। वापस लौटे ग्रामीणों में शामिल सुरेंद्र उरांव ने आरोप लगाया कि विस्थापन के बाद भी उन्हें पोलपोल गांव में खेती योग्य जमीन नहीं मिली। उन्होंने बताया कि वन विभाग के अधिकारियों द्वारा आश्वासन जरूर दिया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कुछ स्वजन को जमीन आवंटित होने की बात कही गई, परंतु अब तक उन्हें उसका वैध कागजात नहीं दिया गया है। कागजात के अभाव में ग्रामीण खुद को असुरक्षित और अस्थायी महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिना स्थायी व्यवस्था के जबरन पुनर्वास उनके साथ अन्याय है। रोजगार, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है, जिससे उनका जीवन और भी कठिन हो गया है। यही कारण है कि कई स्वजन अब अपने पुराने गांव कुजरूम लौट रहे हैं। इधर, अपनी मांगों को लेकर विस्थापित ग्रामीणों ने राजभवन रांची के समक्ष धरना शुरू कर दिया है। इस धरने में वन विभाग से हटाए गए श्रमिक मजदूर भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन मजदूरों को डीएफओ कुमार आशीष द्वारा कार्य से हटाया गया था, जिससे उनमें भी भारी नाराजगी है।धरना पर बैठे ग्रामीणों और श्रमिकों की प्रमुख मांग है कि हटाए गए मजदूरों को पुनः बहाल किया जाए तथा विस्थापित आदिवासी परिवारों को अविलंब जमीन का आवंटन कर उसका विधिवत कागजात उपलब्ध कराया जाए। यह मामला अब प्रशासन और सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।1