बरगी डैम का 'खूनी' मंजर: मौत की गोद में भी माँ ने नहीं छोड़ा ममता का आँचल #Apkiawajdigital 15 घंटे बाद पानी से निकला वह दृश्य, जिसने पत्थर दिल इंसान को भी रुला दिया; मौत हारी, ममता जीत गई जबलपुर (मध्य प्रदेश)। तारीख: 30 अप्रैल 2026, दिन: गुरुवार। समय जब शाम के धुंधलके में बदल रहा था, बरगी डैम की शांत लहरों के नीचे एक ऐसी करुण गाथा लिखी जा रही थी, जिसे सुनकर आज पूरी इंसानियत सिसक रही है। वो खौफनाक 15 घंटे और अंतिम संघर्ष जब नाव बरगी डैम की अथाह गहराइयों में समा रही होगी, उस वक्त चारों ओर चीख-पुकार और मौत का सन्नाटा पसरा होगा। लेकिन उस विनाशकारी शोर के बीच एक माँ का दिल सिर्फ अपने बच्चे के लिए धड़क रहा था। शुक्रवार की सुबह जब 15 घंटों के रेस्क्यू के बाद नाव को बाहर निकाला गया, तो जो मंजर दिखा उसने एनडीआरएफ के जवानों तक के हाथ कपा दिए। लहरें जिस्म डुबो सकीं, रिश्ता नहीं नाव के भीतर माँ ने अपने बच्चे को इस तरह सीने से चिपका रखा था, जैसे वह मौत को चुनौती दे रही हो कि 'मेरे रहते तुम इसे छू भी नहीं सकते'। पानी के दबाव और मौत के डर पर ममता भारी पड़ गई। माँ का आँचल बच्चे के लिए आखिरी साँस तक सुरक्षा कवच बना रहा। बरगी डैम की गहराई भी उस माँ की बाहों की पकड़ को ढीली नहीं कर सकी। त्याग की पराकाष्ठा वह चाहती तो शायद खुद को बचाने के लिए हाथ-पैर मार सकती थी, लेकिन उसने अपने बच्चे के साथ डूबना मंजूर किया, उसे अकेला छोड़ना नहीं। यह सिर्फ एक हादसा नहीं है, यह इस बात का प्रमाण है कि ईश्वर हर जगह नहीं हो सकता, इसीलिए उसने 'माँ' बनाई है।
बरगी डैम का 'खूनी' मंजर: मौत की गोद में भी माँ ने नहीं छोड़ा ममता का आँचल #Apkiawajdigital 15 घंटे बाद पानी से निकला वह दृश्य, जिसने पत्थर दिल इंसान को भी रुला दिया; मौत हारी, ममता जीत गई जबलपुर (मध्य प्रदेश)। तारीख: 30 अप्रैल 2026, दिन: गुरुवार। समय जब शाम के धुंधलके में बदल रहा था, बरगी डैम की शांत लहरों के नीचे एक ऐसी करुण गाथा लिखी जा रही थी, जिसे सुनकर
आज पूरी इंसानियत सिसक रही है। वो खौफनाक 15 घंटे और अंतिम संघर्ष जब नाव बरगी डैम की अथाह गहराइयों में समा रही होगी, उस वक्त चारों ओर चीख-पुकार और मौत का सन्नाटा पसरा होगा। लेकिन उस विनाशकारी शोर के बीच एक माँ का दिल सिर्फ अपने बच्चे के लिए धड़क रहा था। शुक्रवार की सुबह जब 15 घंटों के रेस्क्यू के बाद नाव को बाहर निकाला गया, तो जो मंजर दिखा
उसने एनडीआरएफ के जवानों तक के हाथ कपा दिए। लहरें जिस्म डुबो सकीं, रिश्ता नहीं नाव के भीतर माँ ने अपने बच्चे को इस तरह सीने से चिपका रखा था, जैसे वह मौत को चुनौती दे रही हो कि 'मेरे रहते तुम इसे छू भी नहीं सकते'। पानी के दबाव और मौत के डर पर ममता भारी पड़ गई। माँ का आँचल बच्चे के लिए आखिरी साँस तक सुरक्षा कवच बना रहा।
बरगी डैम की गहराई भी उस माँ की बाहों की पकड़ को ढीली नहीं कर सकी। त्याग की पराकाष्ठा वह चाहती तो शायद खुद को बचाने के लिए हाथ-पैर मार सकती थी, लेकिन उसने अपने बच्चे के साथ डूबना मंजूर किया, उसे अकेला छोड़ना नहीं। यह सिर्फ एक हादसा नहीं है, यह इस बात का प्रमाण है कि ईश्वर हर जगह नहीं हो सकता, इसीलिए उसने 'माँ' बनाई है।
- #Apkiawajdigital 15 घंटे बाद पानी से निकला वह दृश्य, जिसने पत्थर दिल इंसान को भी रुला दिया; मौत हारी, ममता जीत गई जबलपुर (मध्य प्रदेश)। तारीख: 30 अप्रैल 2026, दिन: गुरुवार। समय जब शाम के धुंधलके में बदल रहा था, बरगी डैम की शांत लहरों के नीचे एक ऐसी करुण गाथा लिखी जा रही थी, जिसे सुनकर आज पूरी इंसानियत सिसक रही है। वो खौफनाक 15 घंटे और अंतिम संघर्ष जब नाव बरगी डैम की अथाह गहराइयों में समा रही होगी, उस वक्त चारों ओर चीख-पुकार और मौत का सन्नाटा पसरा होगा। लेकिन उस विनाशकारी शोर के बीच एक माँ का दिल सिर्फ अपने बच्चे के लिए धड़क रहा था। शुक्रवार की सुबह जब 15 घंटों के रेस्क्यू के बाद नाव को बाहर निकाला गया, तो जो मंजर दिखा उसने एनडीआरएफ के जवानों तक के हाथ कपा दिए। लहरें जिस्म डुबो सकीं, रिश्ता नहीं नाव के भीतर माँ ने अपने बच्चे को इस तरह सीने से चिपका रखा था, जैसे वह मौत को चुनौती दे रही हो कि 'मेरे रहते तुम इसे छू भी नहीं सकते'। पानी के दबाव और मौत के डर पर ममता भारी पड़ गई। माँ का आँचल बच्चे के लिए आखिरी साँस तक सुरक्षा कवच बना रहा। बरगी डैम की गहराई भी उस माँ की बाहों की पकड़ को ढीली नहीं कर सकी। त्याग की पराकाष्ठा वह चाहती तो शायद खुद को बचाने के लिए हाथ-पैर मार सकती थी, लेकिन उसने अपने बच्चे के साथ डूबना मंजूर किया, उसे अकेला छोड़ना नहीं। यह सिर्फ एक हादसा नहीं है, यह इस बात का प्रमाण है कि ईश्वर हर जगह नहीं हो सकता, इसीलिए उसने 'माँ' बनाई है।4
- *शिक्षा के मंदिर में बच्चों से कराई जा रही मजदूरी* रिपोर्ट-अल्तमश हुसैन-7054881233 बाँदा। शिक्षा के मंदिर में बच्चों का भविष्य सवारने से पहले ही जिम्मेदारो ने कलम किताबो वाले हाथों में मजदूरी करने का काम सौंप दिया है।दरअस्ल सोशल मीडिया पर इस समय जनपद के अछरौड़ गांव में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय कम्पोजिट का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।विद्यालय में पढ़ने वाले मासूम छात्रा रियांशी कक्षा 5) व छात्र रियांश (कक्षा 2) के हाथों में फावड़ा और तसला पकड़ाकर बालू ढोने का कार्य कराया जा रहा है। वायरल वीडियो को देख बच्चों के पिता महेंद्र लोहिया ने प्रशासन से कठोर कार्यवाही करने की गुहार लगाई है। पिता का कहना है कि सरकार ने बाल श्रम को अपराध घोषित किया है लेकिन शिक्षा के मंदिर में गुरुओं के द्वारा बच्चों को मजदूर बनाया जा रहा है। शिक्षक अपनी जेब भरने और मजदूरी का पैसा बचाने के चक्कर में बच्चों से पत्थर और बालू उठवा रहे हैं। बच्चों का वीडियो देख मेरा सीना छलनी हो गया है।वायरल वीडियो 30 अप्रैल का बताया जा रहा है।2
- जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विमल कुमार सिंह ने विवेक सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।1
- Post by Amit Singh1
- बबेरू कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत परास गांव के रहने वाले बल्लू राजपूत पुत्र राम मनोहर उम्र करीब 75 वर्ष, यह गुरुवार की देर शाम खेतों से अपने घर जा रहा था। तभी रास्ते में निकली 11000 हाई टेंशन विद्युत लाइन की चपेट पर आकर गंभीर रूप से झुलस गया। जैसे ही परिजनों को जानकारी हुई तो मौके पर पहुंचे और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बबेरू में रात्रि करीब 9:00 लेकर पहुंचे। जहां पर डॉक्टर द्वारा देखते ही परीक्षण करने के बाद मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर सुनकर परिवार में कोहराम मच गया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची बबेरू कोतवाली पुलिस के द्वारा शव को कब्जे में लेकर पंचनामा की कार्यवाही की गई है। जानकारी के मुताबिक मृतक के एक पुत्र व तीन पुत्री थी, इस घटना को देखते हुए मृतक की पत्नी बिटोला देवी पुत्र चंद्र भवन सहित पूरे परिवार जनों का रो-रोकर बुरा हाल है।1
- Post by Vivek Kumar1
- Post by राधेश्याम गुप्ता जय मां दुर्गे2
- *डीएम आसेरी की गर्मी में राहत वाली पहल* रिपोर्ट-अल्तमश हुसैन-7054881233 बाँदा। जनपद बांदा में बढ़ती गर्मी को दृष्टिगत रखते हुए आमजन को राहत देने के लिए जिलाधिकारी अमित आसेरी द्वारा एक अनूठी पहल की गई है। कचहरी चौराहे पुल के नीचे निशुल्क एवं शीतल पेयजल की छबीली व्यवस्था जिला प्रशासन एवं गुरुद्वारा कमेटी तथा नगर पालिका के सहयोग से की गई है। निशुल्क शीतल पेयजल एवं छबीली व्यवस्था का शुभारंभ जिला अधिकारी अमित आसेरी ने स्वयं आज किया तथा लोगों को शरबत एवं चने का वितरण अपने हाथों से किया।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बढ़ते तापमान में वृद्धि से बचाव हेतु लोगों से अपील की जाती है कि ग्राम पंचायत/नगर पंचायत में भी इस तरह की व्यवस्था करने में लोग सहयोग करें। जिला प्रशासन उनका पूर्ण रूप से सहयोग करेगा।उन्होंने स्वयं सेवी संस्थाओं से भी इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने का अनुरोध किया है। जिसमें जिला प्रशासन उनका पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा और हीट वेव से लोगों का बचाव हो सके। उन्होंने कहा कि जनहित में इस प्रकार के कार्यक्रम महत्वपूर्ण होंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य है कि दोपहर में आम लोगों को निशुल्क पेयजल उपलब्ध हो सके। तपती धूप से उनका बचाव हो सके। गर्मी के मौसम में इस तरह की सुविधा लोगों के लिए काफी राहत वाली एवं सहज होगी।2