पुलिस की मारपीटाई के खिलाफ आवाज उठाए, पूरी न्यूज पढ़े, यह शब्द मूल रूप से 1970 की फिल्म के एक गाने से लोकप्रिय हुआ था, लेकिन समय के साथ इसका इस्तेमाल एक अलग और गंभीर संदर्भ में होने लगा। पुलिसिया बोलचाल में इसे हिरासत के दौरान की जाने वाली कथित अमानवीय मारपीट की पद्धति के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो पूरी तरह अवैध है। भारत में किसी भी आरोपी को कानूनन यातना देना अपराध है। संविधान हर नागरिक को जीवन और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है। पुलिस का काम जांच करना और आरोपी को अदालत में पेश करना है, सजा देना नहीं। अगर किसी व्यक्ति के साथ हिरासत में मारपीट होती है तो: जब उसे अदालत में पेश किया जाए, तो वह या उसका वकील मजिस्ट्रेट को साफ-साफ बताए कि पुलिस ने मारपीट की है। तुरंत मेडिकल जांच की मांग की जाए ताकि चोट के निशान दर्ज हों। अगर निचली अदालत में सुनवाई न हो, तो संबंधित हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। या राज्य मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत की जा सकती है। कानून से ऊपर कोई नहीं है। न्याय का रास्ता अदालत से होकर जाता है, न कि मारपीट या जबरदस्ती से। लोगों को अपने अधिकारों की जानकारी होना ही सबसे बड़ी ताकत है।
पुलिस की मारपीटाई के खिलाफ आवाज उठाए, पूरी न्यूज पढ़े, यह शब्द मूल रूप से 1970 की फिल्म के एक गाने से लोकप्रिय हुआ था, लेकिन समय के साथ इसका इस्तेमाल एक अलग और गंभीर संदर्भ में होने लगा। पुलिसिया बोलचाल में इसे हिरासत के दौरान की जाने वाली कथित अमानवीय मारपीट की पद्धति के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो पूरी तरह अवैध है। भारत में किसी भी आरोपी को कानूनन यातना देना अपराध है। संविधान हर नागरिक को जीवन और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है। पुलिस का काम जांच करना और आरोपी को अदालत में पेश करना है, सजा देना नहीं। अगर किसी व्यक्ति के साथ हिरासत में मारपीट होती है तो: जब उसे अदालत में पेश किया जाए, तो वह या उसका वकील मजिस्ट्रेट को साफ-साफ बताए कि पुलिस ने मारपीट की है। तुरंत मेडिकल जांच की मांग की जाए ताकि चोट के निशान दर्ज हों। अगर निचली अदालत में सुनवाई न हो, तो संबंधित हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। या राज्य मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत की जा सकती है। कानून से ऊपर कोई नहीं है। न्याय का रास्ता अदालत से होकर जाता है, न कि मारपीट या जबरदस्ती से। लोगों को अपने अधिकारों की जानकारी होना ही सबसे बड़ी ताकत है।
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- यह शब्द मूल रूप से 1970 की फिल्म के एक गाने से लोकप्रिय हुआ था, लेकिन समय के साथ इसका इस्तेमाल एक अलग और गंभीर संदर्भ में होने लगा। पुलिसिया बोलचाल में इसे हिरासत के दौरान की जाने वाली कथित अमानवीय मारपीट की पद्धति के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो पूरी तरह अवैध है। भारत में किसी भी आरोपी को कानूनन यातना देना अपराध है। संविधान हर नागरिक को जीवन और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है। पुलिस का काम जांच करना और आरोपी को अदालत में पेश करना है, सजा देना नहीं। अगर किसी व्यक्ति के साथ हिरासत में मारपीट होती है तो: जब उसे अदालत में पेश किया जाए, तो वह या उसका वकील मजिस्ट्रेट को साफ-साफ बताए कि पुलिस ने मारपीट की है। तुरंत मेडिकल जांच की मांग की जाए ताकि चोट के निशान दर्ज हों। अगर निचली अदालत में सुनवाई न हो, तो संबंधित हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। या राज्य मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत की जा सकती है। कानून से ऊपर कोई नहीं है। न्याय का रास्ता अदालत से होकर जाता है, न कि मारपीट या जबरदस्ती से। लोगों को अपने अधिकारों की जानकारी होना ही सबसे बड़ी ताकत है।1
- Post by SSSO NEWS1
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- बीकानेर, 1 मार्च॥भारत सरकार की फिट इंडिया मूवमेंट के अंतर्गत रविवार को बीकानेर में ‘संडे ऑन साइकिल’ कार्यक्रम का 15वां संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला साइक्लिंग संघ के सचिव सुरेंद्र कूकणा द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया। साइकिल रैली का आयोजन प्रातः 7:00 बजे जूनागढ़ किला से प्रारंभ होकर महाराजा गंगासिंह महाविद्यालय तक आयोजित किया गया। होली के त्यौहार के अवसर पर प्रतिभागियों ने रंगों के साथ उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों की सहभागिता रही। श्री कूकना ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, नियमित व्यायाम करने तथा साइक्लिंग के प्रति जागरूक करना रहा।इस अवसर पर मुन्नीराम गोदारा, अंतर्राष्ट्रीय साइक्लिस्ट दयालाराम, जेठाराम गाट, दिलीप कसवां, पेमाराम मेहरिया, पेरा साइक्लिस्ट प्रवीण सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। अतिथियों ने प्रतिभागियों को फिट रहने, साइक्लिंग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ साइकिल रैली में भाग लेते हुए “फिटनेस की डोज़, आधा घंटा रोज़” का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान वार्म-अप एवं स्ट्रेचिंग गतिविधियों के माध्यम से फिटनेस के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के समापन पर सुरेंद्र कूकणा ने बताया कि बीकानेर में प्रत्येक रविवार को ‘संडे ऑन साइकिल’ का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, साइक्लिंग को बढ़ावा देने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।3
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- नागौर शहर में कोई पार्किंग व्यवस्था नहीं होने से शहर के मुख्य बाजार सदर बाजार,तिगरी बाजार, त्रिपोलिया, गांधी चौक, पंसारी बाजार, मोहन मार्केट में वाहनों एवं ग्राहकों को आने जाने से रास्ता जाम रहता है जिससे पैदल एवं अन्य वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है यातायात पुलिस के द्वारा मैंने चौराहे पर खड़े होकर वाहन चालकों के चालान काटकर अपनी फॉमलेटी पुरी करने में रहते हैं जबकि जहां पर समस्या है वहां पर यातायात पुलिस के द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जाता है2
- राजस्थान के रतनगढ़ में ट्रक चालक से कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद डीटीओ से जुड़े अधिकारी सुरेश बिश्नोई को निलंबित कर दिया गया है। परिवहन विभाग ने कार्रवाई करते हुए उनका मुख्यालय जयपुर तय किया है। मामले की जांच जारी है। #sujangarh #ratangarh #rajasthan #viral #bikaner1