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Apke Nagar Ki App…
बाजारों में हर समय रहता है वाहनों का जाम हों रहें हैं दुकानदार ओर ग्राहकों को परेशानी नागौर शहर में कोई पार्किंग व्यवस्था नहीं होने से शहर के मुख्य बाजार सदर बाजार,तिगरी बाजार, त्रिपोलिया, गांधी चौक, पंसारी बाजार, मोहन मार्केट में वाहनों एवं ग्राहकों को आने जाने से रास्ता जाम रहता है जिससे पैदल एवं अन्य वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है यातायात पुलिस के द्वारा मैंने चौराहे पर खड़े होकर वाहन चालकों के चालान काटकर अपनी फॉमलेटी पुरी करने में रहते हैं जबकि जहां पर समस्या है वहां पर यातायात पुलिस के द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जाता है
प्रदीप कुमार डागा
बाजारों में हर समय रहता है वाहनों का जाम हों रहें हैं दुकानदार ओर ग्राहकों को परेशानी नागौर शहर में कोई पार्किंग व्यवस्था नहीं होने से शहर के मुख्य बाजार सदर बाजार,तिगरी बाजार, त्रिपोलिया, गांधी चौक, पंसारी बाजार, मोहन मार्केट में वाहनों एवं ग्राहकों को आने जाने से रास्ता जाम रहता है जिससे पैदल एवं अन्य वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है यातायात पुलिस के द्वारा मैंने चौराहे पर खड़े होकर वाहन चालकों के चालान काटकर अपनी फॉमलेटी पुरी करने में रहते हैं जबकि जहां पर समस्या है वहां पर यातायात पुलिस के द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जाता है
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- राजस्थान पुलिस का एक और वीडियो चूरू के रतनगढ़ में पुलिस कर्मी की अभद्रता और सामने आई।1
- पीपाड़ सिटी। आमजन की सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए रविवार को पीपाड़ शहर पुलिस द्वारा विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। थानाधिकारी खेताराम सियोल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने शहर के मुख्य चौराहे पर राहगीरों और वाहन चालकों को राजकोप सिटीजन एप्लिकेशन के बारे में विस्तार से जानकारी दी और जागरूकता पैम्फलेट वितरित किए। थानाधिकारी खेताराम सियोल ने लोगों को बताया कि बदलती तकनीक के साथ पुलिस भी हाईटेक हो रही है। राजकोप सिटीजन ऐप आम नागरिकों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। इस ऐप के माध्यम से नागरिक घर बैठे कई महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं, जैसे आपातकालीन स्थिति में तुरंत पुलिस की मदद प्राप्त करना,बिना थाने आए ऑनलाइन अपनी रिपोर्ट दर्ज कराना,किरायेदार या घरेलू नौकर का पुलिस वेरिफिकेशन करवाना, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी सीधे पुलिस तक पहुँचाना।अभियान के दौरान पुलिस कर्मियों ने मुख्य चौराहे पर आने-जाने वाले लोगों को रोककर उन्हें मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करने का तरीका बताया। सियोल ने बताया कि इस ऐप का उद्देश्य पुलिस और जनता के बीच की दूरी को कम करना और अपराध नियंत्रण में पारदर्शिता लाना है। इस दौरान पुलिस जाब्ता के साथ एएसआई पुखराज व दिनेश ने लोगों से अपील की गई कि वे खुद भी जागरूक बनें और दूसरों को भी इस डिजिटल सेवा के प्रति प्रेरित करें।1
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- यह शब्द मूल रूप से 1970 की फिल्म के एक गाने से लोकप्रिय हुआ था, लेकिन समय के साथ इसका इस्तेमाल एक अलग और गंभीर संदर्भ में होने लगा। पुलिसिया बोलचाल में इसे हिरासत के दौरान की जाने वाली कथित अमानवीय मारपीट की पद्धति के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो पूरी तरह अवैध है। भारत में किसी भी आरोपी को कानूनन यातना देना अपराध है। संविधान हर नागरिक को जीवन और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है। पुलिस का काम जांच करना और आरोपी को अदालत में पेश करना है, सजा देना नहीं। अगर किसी व्यक्ति के साथ हिरासत में मारपीट होती है तो: जब उसे अदालत में पेश किया जाए, तो वह या उसका वकील मजिस्ट्रेट को साफ-साफ बताए कि पुलिस ने मारपीट की है। तुरंत मेडिकल जांच की मांग की जाए ताकि चोट के निशान दर्ज हों। अगर निचली अदालत में सुनवाई न हो, तो संबंधित हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। या राज्य मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत की जा सकती है। कानून से ऊपर कोई नहीं है। न्याय का रास्ता अदालत से होकर जाता है, न कि मारपीट या जबरदस्ती से। लोगों को अपने अधिकारों की जानकारी होना ही सबसे बड़ी ताकत है।1
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- नागौर,,नागौर की लोक संस्कृति मार्च-अप्रेल में पूरी तरह से जीवंत हो उठती है। होली के साथ ही नगरवासियों में परंपरागत उत्सवों को मनाने का उत्साह जाग उठता है। यह सिलसिला रामनवमी और हनुमान जयंती तक चलता है। नागौर की संस्कृति में सामूहिकता का विशेष महत्व है। और यहां उत्सव पूरे शहर में धूमधाम से मनाए जाते हैं। संस्कृति एकता और सामूहिकता का आदर्श प्रस्तुत करती है। यहां के लोग मिलजुलकर त्यौहारों को मनाते हैं, और यही सांस्कृतिक सौहार्द शहर की पहचान है। त्यौहारों में समाज के सभी वर्गों का योगदान होता है। खास बात यह है कि यहां परम्पराओं का पालन करते हुए विभिन्न धर्मों के लोग एक दूसरे को त्यौहारों की शुभकामनाएं देते हैं। नागौर की यह सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है। यहां की मिठाइयों का स्वाद देशभर में प्रसिद्ध है। वहीं त्यौहारों के समय गेर नृत्य का आयोजन भी लोक संस्कृति का अहम हिस्सा है। होली से लेकर गणगौर तक यह नृत्य हर जगह आयोजित किया जाता है। गेर नृत्य में ढोल-नगाड़े की थाप और गीतों पर नृत्य करते हैं। यह नृत्य सांस्कृतिक धरोहर के रूप में युवा पीढ़ी द्वारा भी आगे बढ़ाया जा रहा है। गेर नृत्य में समुदाय की सहभागिता शहर के विभिन्न स्थानों बाठडियों का चौक बंशीवाला मंदिर, नया दरवाजा, माली समाज भवन, मानासर, ताऊसर आदि इलाकों में डांडिया गेर का आयोजन होता है। आयोजनों में प्रवासी भी शामिल होने के लिए उत्सुक रहते हैं। गेर नृत्य में नर्तक अपने हाथों में लकड़ी की छड़ी रखते हैं और पारंपरिक वेशभूषा पहनकर नृत्य करते हैं। गेर नृत्य में रचनात्मकता को बढ़ाने के लिए अलग-अलग स्वांग भी धारण करते हैं। गेर नृत्य में बांसुरी, ढोलक, नगाड़ा और ढोल जैसे वाद्ययंत्रों का उपयोग होता है। वाद्ययंत्रों की थाप पर नृत्य उत्सव की रंगत को और भी बढ़ा देता है। अपने में खास है नागौर की परम्पराएं त्यौहारों का सामूहिक उत्सव: नागौर में हर त्यौहार सामूहिक रूप से मनाना एक परंपरा होली से गणगौर तक गेर नृत्य का आयोजन: गेर नृत्य का आयोजन पूरे शहर में गेर नृत्य की परंपरा: ढोल-नगाड़े की थाप और गीतों पर करते हैं नृत्य प्रवासी भी होते हैं शामिल: नागौर के त्यौहारों में प्रवासी भी उत्साह से लेते हैं भाग गेर में विविध स्वांग: लोग विभिन्न स्वांग धारण कर करते हैं नृत्य वाद्ययंत्रों का समावेश: बांसुरी, ढोलक, नगाड़ा, ढोल आदि वाद्ययंत्रों का उपयोग सांस्कृतिक विविधता का मेल: विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ मनाते हैं त्यौहार यहां की संस्कृति की विशिष्ट पहचान -नागौर की लोक संस्कृति की अलग ही पहचान है। यहां बारह महीने के सभी त्याहौर परम्परागत रूप से मनाए जाते हैं। मंदिर में गाये जाने वाले भजन भी तीज- त्यौहार दिन व मौसम आधारित होते हैं। इससे भजनों का महत्व काफी बढ़ जाता है। होली पर किए जाने वाले डांडिया गेर की विशेष पहचान है। इस परम्परागत लोक नृत्य में शामिल होने के लिए प्रवासी भी इंतजार करते हैं। कई समाजों की गेर प्रसिद्ध है। गेर में 36 मीटर का बाघा पहनते है। बाठडिया का चौक, लोढों का चौक व बंशीवाला मंदिर में गेर का विशेष आयोजन होते है।2