जलडेगा में ईद-उल-फितर हर्षोल्लास के साथ मनाई गई, भाईचारे का दिया संदेश जलडेगा:-प्रखंड के कोनमेरला एवं ओड़गा क्षेत्र में पवित्र रमजान माह के समापन के बाद ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह, उल्लास और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। सुबह से ही दोनों क्षेत्रों की मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।कोनमेरला स्थित मस्जिद में हाफिज कामरान ने ईद की नमाज अदा कराई। इस दौरान नमाजियों ने अल्लाह की इबादत करते हुए देश में अमन, शांति और तरक्की की दुआ मांगी। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा।वहीं ओड़गा मस्जिद में मौलाना इलियास मियां ने नमाज अदा कराई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। लोग नए कपड़े पहनकर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के घर पहुंचे तथा सेवइयां और विभिन्न प्रकार के पकवानों का आनंद लिया। त्योहार के अवसर पर घर-घर में स्वादिष्ट व्यंजन बनाए गए और लोगों ने एक-दूसरे के साथ मिठाइयां बांटकर खुशियां साझा कीं। ओड़गा पुलिस प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरा त्योहार शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।इस मौके पर ओड़गा ओपी प्रभारी सजल धान, एएसआई प्रमोद कुमार सहित सदर साबिर मियां, शमसुद्दीन खान, अरशद अंसारी, इस्लाम मियां, शाहजहां खान, रहीम खान, आशिक खान एवं बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग उपस्थित रहे।
जलडेगा में ईद-उल-फितर हर्षोल्लास के साथ मनाई गई, भाईचारे का दिया संदेश जलडेगा:-प्रखंड के कोनमेरला एवं ओड़गा क्षेत्र में पवित्र रमजान माह के समापन के बाद ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह, उल्लास और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। सुबह से ही दोनों क्षेत्रों की मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।कोनमेरला स्थित मस्जिद में हाफिज कामरान ने ईद की नमाज अदा कराई। इस दौरान नमाजियों ने अल्लाह की इबादत करते हुए देश में अमन, शांति और तरक्की की दुआ मांगी। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा।वहीं ओड़गा मस्जिद में मौलाना इलियास मियां ने नमाज अदा कराई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। लोग नए कपड़े पहनकर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के घर पहुंचे तथा सेवइयां और विभिन्न प्रकार के पकवानों का आनंद लिया। त्योहार के अवसर पर घर-घर में स्वादिष्ट व्यंजन बनाए गए और लोगों ने एक-दूसरे के साथ मिठाइयां बांटकर खुशियां साझा कीं। ओड़गा पुलिस प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरा त्योहार शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।इस मौके पर ओड़गा ओपी प्रभारी सजल धान, एएसआई प्रमोद कुमार सहित सदर साबिर मियां, शमसुद्दीन खान, अरशद अंसारी, इस्लाम मियां, शाहजहां खान, रहीम खान, आशिक खान एवं बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग उपस्थित रहे।
- जलडेगा:-प्रखंड के कोनमेरला एवं ओड़गा क्षेत्र में पवित्र रमजान माह के समापन के बाद ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह, उल्लास और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। सुबह से ही दोनों क्षेत्रों की मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।कोनमेरला स्थित मस्जिद में हाफिज कामरान ने ईद की नमाज अदा कराई। इस दौरान नमाजियों ने अल्लाह की इबादत करते हुए देश में अमन, शांति और तरक्की की दुआ मांगी। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा।वहीं ओड़गा मस्जिद में मौलाना इलियास मियां ने नमाज अदा कराई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। लोग नए कपड़े पहनकर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के घर पहुंचे तथा सेवइयां और विभिन्न प्रकार के पकवानों का आनंद लिया। त्योहार के अवसर पर घर-घर में स्वादिष्ट व्यंजन बनाए गए और लोगों ने एक-दूसरे के साथ मिठाइयां बांटकर खुशियां साझा कीं। ओड़गा पुलिस प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरा त्योहार शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।इस मौके पर ओड़गा ओपी प्रभारी सजल धान, एएसआई प्रमोद कुमार सहित सदर साबिर मियां, शमसुद्दीन खान, अरशद अंसारी, इस्लाम मियां, शाहजहां खान, रहीम खान, आशिक खान एवं बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग उपस्थित रहे।1
- इस रैली में कई समुदाय के लोग शामिल हुए थे और साथ ही साथ अपना प्रदर्शन दिखाया इस रैली में शामिल होकर सभी लोगों में एक नई ऊर्जा प्राप्त किया1
- बसिया (गुमला): प्रखंड के कलिगा में चैती दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। भक्ति और उत्साह के इस समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। *कोयल नदी से भरा गया पवित्र जल* कलश यात्रा की शुरुआत कलिगा स्थित रामनवमी अखाड़ा पूजा पंडाल से हुई। गाजे-बाजे के साथ निकली इस यात्रा में लगभग 501 कन्याएं और महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सिर पर कलश लिए शामिल हुईं। श्रद्धालुओं का जत्था सबसे पहले कोयल नदी के तट पर पहुँचा। वहाँ उपस्थित पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई, जिसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने अपने कलशों में पवित्र जल भरा। नदी तट से जल लेकर श्रद्धालु पुनः पूजा पंडाल पहुँचे, जहाँ मंत्रों के बीच कलशों की विधिवत स्थापना की गई। *भंडारे का आयोजन और क्षेत्र में उत्साह* कलश स्थापना के पश्चात पूजा समिति द्वारा श्रद्धालुओं के बीच भंडारे (प्रसाद) का वितरण किया गया। पूरी यात्रा के दौरान 'जय माता दी' और माता रानी के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। भक्तों के उत्साह ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में पूजा कमेटी के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। मौके पर मुख्य रूप से: पुरुषोत्तम राम, सुनील साहू, घनश्याम महतो परमानंद राम, प्रवीण सिंह, रितेश शाही रघुनंदन महतो, शरद पासवान सहित पूजा समिति के अन्य गणमान्य सदस्य और ग्रामीण उपस्थित थे।2
- हमारे यहां हर तरह के टैटू बने एवं मिटाए जाते हैं एवं फेस के दाग धब्बे उच्च तकनीक लेजर मशीन द्वारा हटाए जाते हैं1
- गुमला की पांच बेटियों ने समाज में प्रचलित परंपरा को तोड़कर एक नई मिसाल कायम की है। आमतौर पर अंतिम संस्कार की रस्मों को पुरुषों का अधिकार माना जाता है, लेकिन कौशल्या देवी की बेटियों ने यह साबित किया कि संस्कार निभाने के लिए जेंडर नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और जिम्मेदारी की आवश्यकता होती है। 76 वर्षीय कौशल्या देवी का निधन 23 मार्च को हुआ। उनके कोई पुत्र नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी पांचों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर समाज के प्रतिष्ठित पदों तक पहुँचाया। मां के निधन के बाद बेटियों ने तय किया कि वे स्वयं अंतिम संस्कार करेंगी. इसके बाद बड़ी बेटी नीलिमा नीलिमा ओहदार, विद्या ओहदार, ज्योति ओहदार, अर्चना ओहदार और कल्पना ओहदार ने मां के शव को कंधा दिया। वहीं बड़ी बेटी नीलिमा ओहदार ने मुखाग्नि दी। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग भी मौजूद रहे।1
- Post by राहुल कुमार3
- उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ संपन्न हुआ चैती छठ, डुमरी में गूंजा आस्था और भक्ति का स्वर लोक आस्था का पावन पर्व चैती छठ चार दिनों तक चले विधि-विधान और कठिन व्रत के बाद बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ संपन्न हो गया। जानकारी देते हुए बुधवार की सुबह लगभग दस बजे बताया गया कि डुमरी के बासा नदी घाट पर व्रतियों ने भगवान सूर्य की आराधना कर अपने व्रत का विधिवत समापन किया। छठ महापर्व के चौथे दिन तड़के सुबह से ही व्रती घाटों पर जुटने लगे। व्रतियों ने नदी के जल में खड़े होकर उदयीमान सूर्य को अर्घ्य दिया और छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि, संतानों की उन्नति तथा निरोग जीवन की कामना की। इस दौरान घाटों पर छठ गीत, मंत्रोच्चार और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। चैती छठ, कार्तिक महीने में मनाए जाने वाले छठ पर्व की तरह ही महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन यह चैत्र मास में मनाया जाता है। इसे विशेष रूप से मनोकामना पूर्ति और परिवार के सुख-शांति के लिए किया जाता है। इस व्रत में शुद्धता और नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है, जहां व्रती चार दिनों तक निर्जला उपवास रखकर भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना करते हैं। इस पर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से होती है, इसके बाद ‘खरना’ के दिन व्रती प्रसाद ग्रहण कर निर्जला व्रत शुरू करते हैं। तीसरे दिन डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन उगते सूर्य को उषा अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है। छठ पूजा में भगवान सूर्य के साथ उनकी शक्तियों उषा (प्रातःकालीन पहली किरण) और प्रत्यूषा (सायंकालीन अंतिम किरण) की भी पूजा की जाती है। मान्यता है कि सूर्य ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन के स्रोत हैं, इसलिए उनकी उपासना से सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। चैती छठ महापर्व प्रकृति के प्रति श्रद्धा और अनुशासन का अद्भुत उदाहरण है। नदी, तालाब और जल स्रोतों के किनारे स्वच्छता के साथ पूजा-अर्चना कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जाता है। चार दिनों तक चले इस कठिन और पवित्र व्रत के समापन पर व्रतियों ने छठी मैया से अगले वर्ष पुनः इस पर्व को मनाने की कामना की। पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।1
- सिमडेगा:- जिला सिमडेगा में आस्था और पवित्रता का महापर्व चैती छठ पूरे श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के तीसरे दिन को उपायुक्त श्रीमती कंचन सिंह ने केलाघाघ सूर्य मंदिर स्थित सांझी घाट पर अन्य व्रतियों के साथ अस्ताचलगामी सूर्य नारायण को प्रथम अर्घ्य अर्पित किया।अर्घ्यदान के दौरान घाट पर भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला। व्रतियों ने जलाशय में खड़े होकर भगवान सूर्य से परिवार और समाज की सुख-शांति व समृद्धि की कामना की। सूर्य मंदिर के पुरोहित कल्याण मिश्र ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से अर्घ्यदान संपन्न कराया।इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने छठ पर्व की महिमा का भी वर्णन किया। मान्यता है कि अस्ताचलगामी और उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने से शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा मिलती है। जल के माध्यम से गुजरती सूर्य किरणें शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती हैं। इससे नेत्रज्योति, पाचनशक्ति, निर्णय क्षमता और समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है।केलाघाघ सरोवर तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को भव्य बना दिया। प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे व्रतियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।1