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- हमारे यहां हर तरह के टैटू बने एवं मिटाए जाते हैं एवं फेस के दाग धब्बे उच्च तकनीक लेजर मशीन द्वारा हटाए जाते हैं1
- गुमला की पांच बेटियों ने समाज में प्रचलित परंपरा को तोड़कर एक नई मिसाल कायम की है। आमतौर पर अंतिम संस्कार की रस्मों को पुरुषों का अधिकार माना जाता है, लेकिन कौशल्या देवी की बेटियों ने यह साबित किया कि संस्कार निभाने के लिए जेंडर नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और जिम्मेदारी की आवश्यकता होती है। 76 वर्षीय कौशल्या देवी का निधन 23 मार्च को हुआ। उनके कोई पुत्र नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी पांचों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर समाज के प्रतिष्ठित पदों तक पहुँचाया। मां के निधन के बाद बेटियों ने तय किया कि वे स्वयं अंतिम संस्कार करेंगी. इसके बाद बड़ी बेटी नीलिमा नीलिमा ओहदार, विद्या ओहदार, ज्योति ओहदार, अर्चना ओहदार और कल्पना ओहदार ने मां के शव को कंधा दिया। वहीं बड़ी बेटी नीलिमा ओहदार ने मुखाग्नि दी। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग भी मौजूद रहे।1
- सिसई (गुमला)। प्रखंड क्षेत्र के सकरौली गांव में श्री संकट मोचन हनुमान मंंदिर का विधिवत् प्राण प्रतिष्ठा किया गया। इस उपलक्ष्य में 851 कलश के साथ भव्य रूप से कलश यात्रा निकाला गया। जिसमें हिन्दू जागरण के प्रदेश परावर्तन प्रमुख संजय वर्मा, विहिप बजरंग दल सिसई के प्रखंड अध्यक्ष पंकज साहु, संरक्षक मुकेश श्रीवास्तव डेविड, रोहित शर्मा, दामोदर सिंह, तेजमोहन साहु, मुकेश ताम्रकर,आशीष यादव, आनंद साहु सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। वहीं जिला परिषद सदस्य सिसई उतरी विजयलक्ष्मी कुमारी, उर्वशी देवी सहित हज़ारों की संख्या में श्रधालु महिला पुरुष व बच्चों ने इस कलश यात्रा में भाग लिया। सभी भक्तगण जय श्री राम, जय जय श्री राम, जय हनुमान के जयघोष लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे पुरा क्षेत्र जय श्री राम के जयघोष से गुंजायमान रहा। सकरौली परास नदी के तट पर पुरोहित द्वारा विधिवत् मंत्रोचारण के साथ जलभरनी का रस्म पुरा किया गया। तत्पश्चात् मंंदिर आकर जल से भरे कलश को पांच परिक्रमा कर स्थापित किया गया। एवं विधिवत् पूजा अर्चना कर श्री संकट मोचन हनुमान जी का प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराया गया। एवं सभी भक्तों के बीच गुड़ चना, शरबत तथा महाप्रसाद का वितरण किया गया। कीर्तन मंडली द्वारा संध्या 5 बजे से 12 घंटे का अखंड हरि कीर्तन प्रारंभ किया जा चुका है। कलश यात्रा को सफल बनाने में श्री संकट मोचन हनुमान मंंदिर समिति के अध्यक्ष जगरनाथ साहु, उपाध्यक्ष अमर साहु, संदीप साहु, विकास साहु, सचिव बजरंग साहु, सह सचिव कलिंद्र साहु, कोषाध्यक्ष कृष्णा कुमार साहु, संरक्षक प्रयाग साहु , महिपाल साहु, सहित सभी कार्यकर्ताओं का भरपूर योगदान रहा।4
- Post by राहुल कुमार3
- बसिया (गुमला): प्रखंड के कलिगा में चैती दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। भक्ति और उत्साह के इस समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। *कोयल नदी से भरा गया पवित्र जल* कलश यात्रा की शुरुआत कलिगा स्थित रामनवमी अखाड़ा पूजा पंडाल से हुई। गाजे-बाजे के साथ निकली इस यात्रा में लगभग 501 कन्याएं और महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सिर पर कलश लिए शामिल हुईं। श्रद्धालुओं का जत्था सबसे पहले कोयल नदी के तट पर पहुँचा। वहाँ उपस्थित पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई, जिसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने अपने कलशों में पवित्र जल भरा। नदी तट से जल लेकर श्रद्धालु पुनः पूजा पंडाल पहुँचे, जहाँ मंत्रों के बीच कलशों की विधिवत स्थापना की गई। *भंडारे का आयोजन और क्षेत्र में उत्साह* कलश स्थापना के पश्चात पूजा समिति द्वारा श्रद्धालुओं के बीच भंडारे (प्रसाद) का वितरण किया गया। पूरी यात्रा के दौरान 'जय माता दी' और माता रानी के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। भक्तों के उत्साह ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में पूजा कमेटी के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। मौके पर मुख्य रूप से: पुरुषोत्तम राम, सुनील साहू, घनश्याम महतो परमानंद राम, प्रवीण सिंह, रितेश शाही रघुनंदन महतो, शरद पासवान सहित पूजा समिति के अन्य गणमान्य सदस्य और ग्रामीण उपस्थित थे।2
- उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ संपन्न हुआ चैती छठ, डुमरी में गूंजा आस्था और भक्ति का स्वर लोक आस्था का पावन पर्व चैती छठ चार दिनों तक चले विधि-विधान और कठिन व्रत के बाद बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ संपन्न हो गया। जानकारी देते हुए बुधवार की सुबह लगभग दस बजे बताया गया कि डुमरी के बासा नदी घाट पर व्रतियों ने भगवान सूर्य की आराधना कर अपने व्रत का विधिवत समापन किया। छठ महापर्व के चौथे दिन तड़के सुबह से ही व्रती घाटों पर जुटने लगे। व्रतियों ने नदी के जल में खड़े होकर उदयीमान सूर्य को अर्घ्य दिया और छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि, संतानों की उन्नति तथा निरोग जीवन की कामना की। इस दौरान घाटों पर छठ गीत, मंत्रोच्चार और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। चैती छठ, कार्तिक महीने में मनाए जाने वाले छठ पर्व की तरह ही महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन यह चैत्र मास में मनाया जाता है। इसे विशेष रूप से मनोकामना पूर्ति और परिवार के सुख-शांति के लिए किया जाता है। इस व्रत में शुद्धता और नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है, जहां व्रती चार दिनों तक निर्जला उपवास रखकर भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना करते हैं। इस पर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से होती है, इसके बाद ‘खरना’ के दिन व्रती प्रसाद ग्रहण कर निर्जला व्रत शुरू करते हैं। तीसरे दिन डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन उगते सूर्य को उषा अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है। छठ पूजा में भगवान सूर्य के साथ उनकी शक्तियों उषा (प्रातःकालीन पहली किरण) और प्रत्यूषा (सायंकालीन अंतिम किरण) की भी पूजा की जाती है। मान्यता है कि सूर्य ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन के स्रोत हैं, इसलिए उनकी उपासना से सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। चैती छठ महापर्व प्रकृति के प्रति श्रद्धा और अनुशासन का अद्भुत उदाहरण है। नदी, तालाब और जल स्रोतों के किनारे स्वच्छता के साथ पूजा-अर्चना कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जाता है। चार दिनों तक चले इस कठिन और पवित्र व्रत के समापन पर व्रतियों ने छठी मैया से अगले वर्ष पुनः इस पर्व को मनाने की कामना की। पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।1
- चैनपुर – रामनवमी के पावन अवसर पर पहले मंगलवार को चैनपुर मुख्यालय पूरी तरह भक्ति के रंग में रंग गया। रामनवमी पूजा केंद्रीय समिति के तत्वावधान में भव्य मंगलवारी शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 70 गांवों से हजारों की संख्या में राम भक्त शामिल हुए। “जय श्री राम” के गगनभेदी नारों से पूरा शहर गुंजायमान हो उठा और माहौल भक्तिमय बन गया।1
- *अंतिम मंगलवारी पर उमड़ा जनसैलाब भव्य शोभायात्रा में दिखा अस्त्र-शस्त्र का कौशल और भक्ति का संगम* चैनपुर : चैनपुर प्रखंड मुख्यालय में अंतिम मंगलवारी के अवसर पर रामभक्तों का उत्साह चरम पर रहा। केंद्रीय रामनवमी पूजा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य मंगलवारी शोभायात्रा में आस्था, परंपरा और शौर्य का अनूठा संगम देखने को मिला। लगभग 85 गांवों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के उद्घोष से पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया।दिन की शुरुआत स्थानीय दुर्गा मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई, जहाँ सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। दोपहर बाद भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो दुर्गा मंदिर से शुरू होकर पीपल चौक, बैंक रोड, थाना चौक, ब्लॉक चौक, चर्च रोड, अल्बर्ट एक्का चौक और बस स्टैंड होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुँचकर संपन्न हुई। डीजे और ताशे की धुन पर रामभक्त पूरी तरह भक्ति में सराबोर नजर आए।शोभायात्रा के दौरान युवाओं और अखाड़ा समितियों ने हैरतअंगेज अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन किया। तलवारबाजी और लाठी खेल के कौशल ने दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। कासीर एवं मनोरमा सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र-छात्राओं द्वारा मनमोहक झाँकियाँ प्रस्तुत की गईं, जिनकी सभी ने सराहना की।शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चैनपुर पुलिस पूरी तरह मुस्तैद दिखी। थाना परिसर के पास थाना प्रभारी अरविंद कुमार एवं जवानों द्वारा श्रद्धालुओं के बीच चना, गुड़ और शरबत का वितरण किया गया, जिससे राहगीरों और भक्तों को काफी राहत मिली।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा हमें भगवान श्रीराम के पदचिह्नों पर चलना चाहिए। समाज को एकजुट और संगठित रहकर एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनना ही सच्ची मानवता है।मुख्य संरक्षक यमुना प्रसाद केशरी ने कहा कि यह परंपरा हमारे पूर्वजों के समय से चली आ रही है, जो आज इतना भव्य रूप ले चुकी है। कार्यक्रम के दौरान समिति द्वारा अतिथियों और अखाड़ा संचालकों को अंग वस्त्र और तलवार भेंट कर सम्मानित किया गया।इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि इंस्पेक्टर जितेंद्र राम, बीडीओ यादव बैठा, थाना प्रभारी अरविंद कुमार, मुखिया शोभा देवी, दरोगा राजेंद्र मंडल, मुख्य संरक्षक यमुना प्रसाद केशरी, संरक्षक राम गुलाम सिंह, रघुनंदन प्रसाद, केंद्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, ग्राम पुरोहित विश्वनाथ पाठक, पुजारी संजय पाठक सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक और पुलिस बल के जवान तैनात थे।4