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Vice President C.P. Radhakrishnan departed for New Delhi /// Vice President C.P. Radhakrishnan departed for New Delhi after attending the 21st convocation ceremony at the University of Kashmir in Srinagar. During his visit, he addressed students and faculty, marking the successful culmination of the academic event before concluding his maiden trip to the Valley.

6 hrs ago
user_Riyaz Gulistan
Riyaz Gulistan
News Anchor श्रीनगर सेंट्रल, श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर•
6 hrs ago

Vice President C.P. Radhakrishnan departed for New Delhi /// Vice President C.P. Radhakrishnan departed for New Delhi after attending the 21st convocation ceremony at the University of Kashmir in Srinagar. During his visit, he addressed students and faculty, marking the successful culmination of the academic event before concluding his maiden trip to the Valley.

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  • Vice President C.P. Radhakrishnan departed for New Delhi after attending the 21st convocation ceremony at the University of Kashmir in Srinagar. During his visit, he addressed students and faculty, marking the successful culmination of the academic event before concluding his maiden trip to the Valley.
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    Vice President C.P. Radhakrishnan departed for New Delhi after attending the 21st convocation ceremony at the University of Kashmir in Srinagar. During his visit, he addressed students and faculty, marking the successful culmination of the academic event before concluding his maiden trip to the Valley.
    user_Riyaz Gulistan
    Riyaz Gulistan
    News Anchor श्रीनगर सेंट्रल, श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर•
    6 hrs ago
  • Post by Sajad Ahmed
    1
    Post by Sajad Ahmed
    user_Sajad Ahmed
    Sajad Ahmed
    अनंतनाग, अनंतनाग, जम्मू और कश्मीर•
    9 hrs ago
  • Post by Till The End News
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    Post by Till The End News
    user_Till The End News
    Till The End News
    Local News Reporter मजालता, उधमपुर, जम्मू और कश्मीर•
    7 hrs ago
  • Post by Surender Thakur
    1
    Post by Surender Thakur
    user_Surender Thakur
    Surender Thakur
    Social Media Manager पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    6 hrs ago
  • Post by Shivinder singh Bhadwal
    1
    Post by Shivinder singh Bhadwal
    user_Shivinder singh Bhadwal
    Shivinder singh Bhadwal
    Farmer कठुआ, कठुआ, जम्मू और कश्मीर•
    7 hrs ago
  • चंबा जिले की पांगी घाटी में इन दिनों प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। सर्दियों की लंबी बर्फबारी के बाद जैसे ही धूप ने अपनी गर्माहट बढ़ाई, घास के सूखे मैदानों के बीच छोटे-छोटे पीले फूलों ने सिर उठाना शुरू कर दिया। ये नन्हें लेकिन आकर्षक फूल Crocus (क्रोकस) प्रजाति के माने जा रहे हैं, पंगवाली में इन्हे कुम्भ का फूल कहते हैं। जिन्हें पहाड़ी क्षेत्रों में वसंत ऋतु का अग्रदूत कहा जाता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष फरवरी के अंत से अप्रैल तक, जब बर्फ पिघलती है, तब ये फूल स्वाभाविक रूप से उग आते हैं। लगभग 5 से 10 सेंटीमीटर ऊँचे ये पौधे जमीन के बिलकुल पास खिलते हैं। पतली, घास जैसी पत्तियों और कटोरीनुमा छह पंखुड़ियों वाले इन फूलों का चमकीला पीला रंग दूर से ही ध्यान आकर्षित करता है। सूखी भूरी घास के बीच इनका खिलना मानो प्रकृति का रंगोत्सव प्रतीत होता है। वन विभाग से जुड़े जानकार बताते हैं कि क्रोकस की लगभग 80 से अधिक प्रजातियाँ विश्वभर में पाई जाती हैं, जिनमें से कई हिमालयी क्षेत्रों में भी मिलती हैं। यह पौधा कंद (Corm) से उगता है और सर्दियों में जमीन के भीतर सुप्त अवस्था में रहता है। जैसे ही तापमान अनुकूल होता है, सबसे पहले इसके फूल प्रकट होते हैं और बाद में पत्तियाँ विकसित होती हैं। यही कारण है कि इसे ‘स्प्रिंग ब्लूमर’ यानी वसंत में सबसे पहले खिलने वाला पौधा माना जाता है। क्रोकस का आर्थिक और औषधीय महत्व भी है। विश्व प्रसिद्ध केसर Crocus sativus नामक प्रजाति से प्राप्त होता है, जिसे दुनिया का सबसे महंगा मसाला माना जाता है। हालांकि पांगी घाटी में प्राकृतिक रूप से उगने वाले पीले जंगली क्रोकस आमतौर पर केसर उत्पादन वाली प्रजाति नहीं होते, फिर भी इनका पारिस्थितिक महत्व कम नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, वसंत की शुरुआत में जब अन्य वनस्पतियाँ विकसित नहीं हो पातीं, तब ये फूल मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीटों के लिए अमृत का प्रमुख स्रोत बनते हैं। इससे स्थानीय जैव विविधता को सहारा मिलता है और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। घास के मैदानों में इनकी उपस्थिति मिट्टी संरक्षण में भी सहायक मानी जाती है। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय संगठनों ने लोगों से अपील की है कि इन जंगली फूलों को अनावश्यक रूप से न तोड़ा जाए और प्राकृतिक आवास को नुकसान न पहुँचाया जाए। पर्यटन के बढ़ते प्रभाव के बीच यह आवश्यक है कि घाटी की जैव विविधता को संरक्षित रखा जाए। पांगी की वादियों में खिले ये पीले क्रोकस न केवल क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को चार चांद लगा रहे हैं, बल्कि यह संदेश भी दे रहे हैं कि कठोर सर्दी के बाद जीवन फिर से मुस्कुरा उठा है। प्रकृति का यह चक्र हमें धैर्य, पुनर्जन्म और नवजीवन की प्रेरणा देता है।
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    चंबा जिले की पांगी घाटी में इन दिनों प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। सर्दियों की लंबी बर्फबारी के बाद जैसे ही धूप ने अपनी गर्माहट बढ़ाई, घास के सूखे मैदानों के बीच छोटे-छोटे पीले फूलों ने सिर उठाना शुरू कर दिया। ये नन्हें लेकिन आकर्षक फूल Crocus (क्रोकस) प्रजाति के माने जा रहे हैं, पंगवाली में इन्हे कुम्भ का फूल कहते हैं। जिन्हें पहाड़ी क्षेत्रों में वसंत ऋतु का अग्रदूत कहा जाता है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष फरवरी के अंत से अप्रैल तक, जब बर्फ पिघलती है, तब ये फूल स्वाभाविक रूप से उग आते हैं। लगभग 5 से 10 सेंटीमीटर ऊँचे ये पौधे जमीन के बिलकुल पास खिलते हैं। पतली, घास जैसी पत्तियों और कटोरीनुमा छह पंखुड़ियों वाले इन फूलों का चमकीला पीला रंग दूर से ही ध्यान आकर्षित करता है। सूखी भूरी घास के बीच इनका खिलना मानो प्रकृति का रंगोत्सव प्रतीत होता है।
वन विभाग से जुड़े जानकार बताते हैं कि क्रोकस की लगभग 80 से अधिक प्रजातियाँ विश्वभर में पाई जाती हैं, जिनमें से कई हिमालयी क्षेत्रों में भी मिलती हैं। यह पौधा कंद (Corm) से उगता है और सर्दियों में जमीन के भीतर सुप्त अवस्था में रहता है। जैसे ही तापमान अनुकूल होता है, सबसे पहले इसके फूल प्रकट होते हैं और बाद में पत्तियाँ विकसित होती हैं। यही कारण है कि इसे ‘स्प्रिंग ब्लूमर’ यानी वसंत में सबसे पहले खिलने वाला पौधा माना जाता है।
क्रोकस का आर्थिक और औषधीय महत्व भी है। विश्व प्रसिद्ध केसर Crocus sativus नामक प्रजाति से प्राप्त होता है, जिसे दुनिया का सबसे महंगा मसाला माना जाता है। हालांकि पांगी घाटी में प्राकृतिक रूप से उगने वाले पीले जंगली क्रोकस आमतौर पर केसर उत्पादन वाली प्रजाति नहीं होते, फिर भी इनका पारिस्थितिक महत्व कम नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वसंत की शुरुआत में जब अन्य वनस्पतियाँ विकसित नहीं हो पातीं, तब ये फूल मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीटों के लिए अमृत का प्रमुख स्रोत बनते हैं। इससे स्थानीय जैव विविधता को सहारा मिलता है और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। घास के मैदानों में इनकी उपस्थिति मिट्टी संरक्षण में भी सहायक मानी जाती है।
पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय संगठनों ने लोगों से अपील की है कि इन जंगली फूलों को अनावश्यक रूप से न तोड़ा जाए और प्राकृतिक आवास को नुकसान न पहुँचाया जाए। पर्यटन के बढ़ते प्रभाव के बीच यह आवश्यक है कि घाटी की जैव विविधता को संरक्षित रखा जाए।
पांगी की वादियों में खिले ये पीले क्रोकस न केवल क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को चार चांद लगा रहे हैं, बल्कि यह संदेश भी दे रहे हैं कि कठोर सर्दी के बाद जीवन फिर से मुस्कुरा उठा है। प्रकृति का यह चक्र हमें धैर्य, पुनर्जन्म और नवजीवन की प्रेरणा देता है।
    user_PANGI NEWS TODAY
    PANGI NEWS TODAY
    Book Shop पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    11 hrs ago
  • चंबा: नागरिक अस्पताल किहार में डॉक्टरों की कमी पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, चक्का जाम की चेतावनी। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश नागरिक अस्पताल किहार में डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी को लेकर आज स्थानीय लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। क्षेत्र के ग्रामीण अस्पताल परिसर में एकत्र हुए और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर और स्टाफ तैनात नहीं हैं, जिसके चलते मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। कई बार गंभीर मरीजों को मजबूरन दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की भारी परेशानी उठानी पड़ती है। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द अस्पताल में नियमित डॉक्टरों और आवश्यक पैरा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे आने वाले दिनों में चक्का जाम और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान रिटायर्ड SSB एसआई सत्य प्रसाद राजौरी, हारून बट्ट, मुल्ख राज, राजू, पविंद्र, बुरहान माही, अशरफ सोनी सहित अन्य ग्रामीण भी मौजूद रहे और सभी ने एकजुट होकर अस्पताल व्यवस्था में सुधार की मांग । बाइट स्थानीय निवासी।
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    चंबा: नागरिक अस्पताल किहार में डॉक्टरों की कमी पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, चक्का जाम की चेतावनी।
मोहम्मद आशिक
चंबा हिमाचल प्रदेश 
नागरिक अस्पताल किहार में डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी को लेकर आज स्थानीय लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। क्षेत्र के ग्रामीण अस्पताल परिसर में एकत्र हुए और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता जताई।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर और स्टाफ तैनात नहीं हैं, जिसके चलते मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। कई बार गंभीर मरीजों को मजबूरन दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द अस्पताल में नियमित डॉक्टरों और आवश्यक पैरा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे आने वाले दिनों में चक्का जाम और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
इस दौरान रिटायर्ड SSB एसआई सत्य प्रसाद राजौरी, हारून बट्ट, मुल्ख राज, राजू, पविंद्र, बुरहान माही, अशरफ सोनी सहित अन्य ग्रामीण भी मौजूद रहे और सभी ने एकजुट होकर अस्पताल व्यवस्था में सुधार की मांग ।
बाइट स्थानीय निवासी।
    user_Mohd Ashiq
    Mohd Ashiq
    Journalist Chamba, Himachal Pradesh•
    9 hrs ago
  • Post by Till The End News
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    Post by Till The End News
    user_Till The End News
    Till The End News
    Local News Reporter मजालता, उधमपुर, जम्मू और कश्मीर•
    7 hrs ago
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