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शिकायत निवारण समिति की बैठक से पहले मिडिया को सम्बोधित करते अध्यक्ष कुलदीप पठानिया

6 hrs ago
user_Surender Thakur
Surender Thakur
Social Media Manager पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
6 hrs ago

शिकायत निवारण समिति की बैठक से पहले मिडिया को सम्बोधित करते अध्यक्ष कुलदीप पठानिया

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  • Post by Surender Thakur
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    Post by Surender Thakur
    user_Surender Thakur
    Surender Thakur
    Social Media Manager पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    6 hrs ago
  • चंबा जिले की पांगी घाटी में इन दिनों प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। सर्दियों की लंबी बर्फबारी के बाद जैसे ही धूप ने अपनी गर्माहट बढ़ाई, घास के सूखे मैदानों के बीच छोटे-छोटे पीले फूलों ने सिर उठाना शुरू कर दिया। ये नन्हें लेकिन आकर्षक फूल Crocus (क्रोकस) प्रजाति के माने जा रहे हैं, पंगवाली में इन्हे कुम्भ का फूल कहते हैं। जिन्हें पहाड़ी क्षेत्रों में वसंत ऋतु का अग्रदूत कहा जाता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष फरवरी के अंत से अप्रैल तक, जब बर्फ पिघलती है, तब ये फूल स्वाभाविक रूप से उग आते हैं। लगभग 5 से 10 सेंटीमीटर ऊँचे ये पौधे जमीन के बिलकुल पास खिलते हैं। पतली, घास जैसी पत्तियों और कटोरीनुमा छह पंखुड़ियों वाले इन फूलों का चमकीला पीला रंग दूर से ही ध्यान आकर्षित करता है। सूखी भूरी घास के बीच इनका खिलना मानो प्रकृति का रंगोत्सव प्रतीत होता है। वन विभाग से जुड़े जानकार बताते हैं कि क्रोकस की लगभग 80 से अधिक प्रजातियाँ विश्वभर में पाई जाती हैं, जिनमें से कई हिमालयी क्षेत्रों में भी मिलती हैं। यह पौधा कंद (Corm) से उगता है और सर्दियों में जमीन के भीतर सुप्त अवस्था में रहता है। जैसे ही तापमान अनुकूल होता है, सबसे पहले इसके फूल प्रकट होते हैं और बाद में पत्तियाँ विकसित होती हैं। यही कारण है कि इसे ‘स्प्रिंग ब्लूमर’ यानी वसंत में सबसे पहले खिलने वाला पौधा माना जाता है। क्रोकस का आर्थिक और औषधीय महत्व भी है। विश्व प्रसिद्ध केसर Crocus sativus नामक प्रजाति से प्राप्त होता है, जिसे दुनिया का सबसे महंगा मसाला माना जाता है। हालांकि पांगी घाटी में प्राकृतिक रूप से उगने वाले पीले जंगली क्रोकस आमतौर पर केसर उत्पादन वाली प्रजाति नहीं होते, फिर भी इनका पारिस्थितिक महत्व कम नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, वसंत की शुरुआत में जब अन्य वनस्पतियाँ विकसित नहीं हो पातीं, तब ये फूल मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीटों के लिए अमृत का प्रमुख स्रोत बनते हैं। इससे स्थानीय जैव विविधता को सहारा मिलता है और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। घास के मैदानों में इनकी उपस्थिति मिट्टी संरक्षण में भी सहायक मानी जाती है। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय संगठनों ने लोगों से अपील की है कि इन जंगली फूलों को अनावश्यक रूप से न तोड़ा जाए और प्राकृतिक आवास को नुकसान न पहुँचाया जाए। पर्यटन के बढ़ते प्रभाव के बीच यह आवश्यक है कि घाटी की जैव विविधता को संरक्षित रखा जाए। पांगी की वादियों में खिले ये पीले क्रोकस न केवल क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को चार चांद लगा रहे हैं, बल्कि यह संदेश भी दे रहे हैं कि कठोर सर्दी के बाद जीवन फिर से मुस्कुरा उठा है। प्रकृति का यह चक्र हमें धैर्य, पुनर्जन्म और नवजीवन की प्रेरणा देता है।
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    चंबा जिले की पांगी घाटी में इन दिनों प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। सर्दियों की लंबी बर्फबारी के बाद जैसे ही धूप ने अपनी गर्माहट बढ़ाई, घास के सूखे मैदानों के बीच छोटे-छोटे पीले फूलों ने सिर उठाना शुरू कर दिया। ये नन्हें लेकिन आकर्षक फूल Crocus (क्रोकस) प्रजाति के माने जा रहे हैं, पंगवाली में इन्हे कुम्भ का फूल कहते हैं। जिन्हें पहाड़ी क्षेत्रों में वसंत ऋतु का अग्रदूत कहा जाता है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष फरवरी के अंत से अप्रैल तक, जब बर्फ पिघलती है, तब ये फूल स्वाभाविक रूप से उग आते हैं। लगभग 5 से 10 सेंटीमीटर ऊँचे ये पौधे जमीन के बिलकुल पास खिलते हैं। पतली, घास जैसी पत्तियों और कटोरीनुमा छह पंखुड़ियों वाले इन फूलों का चमकीला पीला रंग दूर से ही ध्यान आकर्षित करता है। सूखी भूरी घास के बीच इनका खिलना मानो प्रकृति का रंगोत्सव प्रतीत होता है।
वन विभाग से जुड़े जानकार बताते हैं कि क्रोकस की लगभग 80 से अधिक प्रजातियाँ विश्वभर में पाई जाती हैं, जिनमें से कई हिमालयी क्षेत्रों में भी मिलती हैं। यह पौधा कंद (Corm) से उगता है और सर्दियों में जमीन के भीतर सुप्त अवस्था में रहता है। जैसे ही तापमान अनुकूल होता है, सबसे पहले इसके फूल प्रकट होते हैं और बाद में पत्तियाँ विकसित होती हैं। यही कारण है कि इसे ‘स्प्रिंग ब्लूमर’ यानी वसंत में सबसे पहले खिलने वाला पौधा माना जाता है।
क्रोकस का आर्थिक और औषधीय महत्व भी है। विश्व प्रसिद्ध केसर Crocus sativus नामक प्रजाति से प्राप्त होता है, जिसे दुनिया का सबसे महंगा मसाला माना जाता है। हालांकि पांगी घाटी में प्राकृतिक रूप से उगने वाले पीले जंगली क्रोकस आमतौर पर केसर उत्पादन वाली प्रजाति नहीं होते, फिर भी इनका पारिस्थितिक महत्व कम नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वसंत की शुरुआत में जब अन्य वनस्पतियाँ विकसित नहीं हो पातीं, तब ये फूल मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीटों के लिए अमृत का प्रमुख स्रोत बनते हैं। इससे स्थानीय जैव विविधता को सहारा मिलता है और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। घास के मैदानों में इनकी उपस्थिति मिट्टी संरक्षण में भी सहायक मानी जाती है।
पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय संगठनों ने लोगों से अपील की है कि इन जंगली फूलों को अनावश्यक रूप से न तोड़ा जाए और प्राकृतिक आवास को नुकसान न पहुँचाया जाए। पर्यटन के बढ़ते प्रभाव के बीच यह आवश्यक है कि घाटी की जैव विविधता को संरक्षित रखा जाए।
पांगी की वादियों में खिले ये पीले क्रोकस न केवल क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को चार चांद लगा रहे हैं, बल्कि यह संदेश भी दे रहे हैं कि कठोर सर्दी के बाद जीवन फिर से मुस्कुरा उठा है। प्रकृति का यह चक्र हमें धैर्य, पुनर्जन्म और नवजीवन की प्रेरणा देता है।
    user_PANGI NEWS TODAY
    PANGI NEWS TODAY
    Book Shop पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    11 hrs ago
  • चंबा: नागरिक अस्पताल किहार में डॉक्टरों की कमी पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, चक्का जाम की चेतावनी। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश नागरिक अस्पताल किहार में डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी को लेकर आज स्थानीय लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। क्षेत्र के ग्रामीण अस्पताल परिसर में एकत्र हुए और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर और स्टाफ तैनात नहीं हैं, जिसके चलते मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। कई बार गंभीर मरीजों को मजबूरन दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की भारी परेशानी उठानी पड़ती है। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द अस्पताल में नियमित डॉक्टरों और आवश्यक पैरा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे आने वाले दिनों में चक्का जाम और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान रिटायर्ड SSB एसआई सत्य प्रसाद राजौरी, हारून बट्ट, मुल्ख राज, राजू, पविंद्र, बुरहान माही, अशरफ सोनी सहित अन्य ग्रामीण भी मौजूद रहे और सभी ने एकजुट होकर अस्पताल व्यवस्था में सुधार की मांग । बाइट स्थानीय निवासी।
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    चंबा: नागरिक अस्पताल किहार में डॉक्टरों की कमी पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, चक्का जाम की चेतावनी।
मोहम्मद आशिक
चंबा हिमाचल प्रदेश 
नागरिक अस्पताल किहार में डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी को लेकर आज स्थानीय लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। क्षेत्र के ग्रामीण अस्पताल परिसर में एकत्र हुए और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता जताई।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर और स्टाफ तैनात नहीं हैं, जिसके चलते मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। कई बार गंभीर मरीजों को मजबूरन दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द अस्पताल में नियमित डॉक्टरों और आवश्यक पैरा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे आने वाले दिनों में चक्का जाम और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
इस दौरान रिटायर्ड SSB एसआई सत्य प्रसाद राजौरी, हारून बट्ट, मुल्ख राज, राजू, पविंद्र, बुरहान माही, अशरफ सोनी सहित अन्य ग्रामीण भी मौजूद रहे और सभी ने एकजुट होकर अस्पताल व्यवस्था में सुधार की मांग ।
बाइट स्थानीय निवासी।
    user_Mohd Ashiq
    Mohd Ashiq
    Journalist Chamba, Himachal Pradesh•
    9 hrs ago
  • आयुष विभाग द्वारा जिला चंबा स्थित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पंचकर्म एवं पैरासर्जिकल सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जिला चंबा के विभिन्न उपमंडलों से आए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पंचकर्म एवं पैरासर्जिकल चिकित्सा पद्धतियों से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रतिभागियों को उपचार विधियों की बारीकियों से अवगत कराते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला आयुष अधिकारी डॉ. दिलीप शर्मा रहे, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुलविंदर संधू द्वारा किया गया। प्रशिक्षण सत्रों के दौरान डॉ. दीपिका ठाकुर (एम.एस. प्रसूति एवं स्त्री रोग), डॉ. कुलविंदर संधू (एम.डी. बाल रोग) एवं डॉ. कृतिका ठाकुर (एम.डी. पंचकर्म) ने वीडियो माध्यम से व्याख्यान प्रस्तुत कर प्रतिभागियों को विषय की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर वक्ताओं ने पंचकर्म चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह उपचार पद्धति शरीर की शुद्धि, रोगों की रोकथाम तथा समग्र स्वास्थ्य संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। साथ ही पैरासर्जिकल उपचार विधियों जैसे अग्निकर्म एवं शलाका कर्म की सैद्धांतिक जानकारी भी प्रदान की गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्रीमती नीलम कुमारी, श्रीमती बीना देवी, श्री रविंद्र कुमार, सुभाष कुमार, जगदीश चंद, रतन चंद, फकीरचंद, प्रकाश चंद, सुरेश चंद एवं बीना देवी सहित अन्य प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विषय से संबंधित प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। बाइट डॉ संधू आयुष विभाग चंबा।
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    आयुष विभाग द्वारा जिला चंबा स्थित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पंचकर्म एवं पैरासर्जिकल सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जिला चंबा के विभिन्न उपमंडलों से आए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पंचकर्म एवं पैरासर्जिकल चिकित्सा पद्धतियों से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रतिभागियों को उपचार विधियों की बारीकियों से अवगत कराते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला आयुष अधिकारी डॉ. दिलीप शर्मा रहे, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुलविंदर संधू द्वारा किया गया। प्रशिक्षण सत्रों के दौरान डॉ. दीपिका ठाकुर (एम.एस. प्रसूति एवं स्त्री रोग), डॉ. कुलविंदर संधू (एम.डी. बाल रोग) एवं डॉ. कृतिका ठाकुर (एम.डी. पंचकर्म) ने वीडियो माध्यम से व्याख्यान प्रस्तुत कर प्रतिभागियों को विषय की विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर वक्ताओं ने पंचकर्म चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह उपचार पद्धति शरीर की शुद्धि, रोगों की रोकथाम तथा समग्र स्वास्थ्य संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। साथ ही पैरासर्जिकल उपचार विधियों जैसे अग्निकर्म एवं शलाका कर्म की सैद्धांतिक जानकारी भी प्रदान की गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्रीमती नीलम कुमारी, श्रीमती बीना देवी, श्री रविंद्र कुमार, सुभाष कुमार, जगदीश चंद, रतन चंद, फकीरचंद, प्रकाश चंद, सुरेश चंद एवं बीना देवी सहित अन्य प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विषय से संबंधित प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
बाइट डॉ संधू आयुष विभाग चंबा।
    user_Ajay Himachal News
    Ajay Himachal News
    चौराह, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    10 hrs ago
  • अब कंप्यूटर क्लासेज भी शुरू
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    अब कंप्यूटर क्लासेज भी शुरू
    user_Champions Academy
    Champions Academy
    Academy Nagrota Bagwan, Kangra•
    21 hrs ago
  • एनएच-503 पर देहरा के 132 केवी सब स्टेशन के पास गुरुवार को तेज रफ्तार बाइक टूरिस्ट बस से टकरा गई। हादसे में बाइक सवार निवासी मुही युवक की मौके पर मौत हो गई, जबकि पीछे बैठी युवती गंभीर घायल हुई। बस सोलन से मंदिर दर्शन कर लौट रही थी। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेजकर मामला दर्ज किया और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर
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    एनएच-503 पर देहरा के 132 केवी सब स्टेशन के पास गुरुवार को तेज रफ्तार बाइक टूरिस्ट बस से टकरा गई। हादसे में बाइक सवार निवासी मुही युवक की मौके पर मौत हो गई, जबकि पीछे बैठी युवती गंभीर घायल हुई। बस सोलन से मंदिर दर्शन कर लौट रही थी। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेजकर मामला दर्ज किया और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर
    user_ASHISH JOURNALIST
    ASHISH JOURNALIST
    its A Digital news website and web tv Kangra, Himachal Pradesh•
    5 hrs ago
  • Post by Shivinder singh Bhadwal
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    Post by Shivinder singh Bhadwal
    user_Shivinder singh Bhadwal
    Shivinder singh Bhadwal
    Farmer कठुआ, कठुआ, जम्मू और कश्मीर•
    7 hrs ago
  • स्टैंड, तत्त्वनी और कसकड़ा—तीन संभावित स्थलों का किया गया तकनीकी मूल्यांकन
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    स्टैंड, तत्त्वनी और कसकड़ा—तीन संभावित स्थलों का किया गया तकनीकी मूल्यांकन
    user_Surender Thakur
    Surender Thakur
    Social Media Manager पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    19 hrs ago
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