नाले के बीच निर्माण पर उठे सवाल, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी नाले के बीच निर्माण पर उठे सवाल, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी गमामठवाड़ा में जल निकासी क्षेत्र में निर्माण का मामला, कार्रवाई और अनुमति को लेकर उठे सवाल सागवाड़ा शहर के गमामठवाड़ा क्षेत्र में जल निकासी के लिए उपयोग किए जाने वाले नाले के बीच निर्माण कार्य सामने आने के बाद नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान से बारिश के पानी की निकासी होती है, वहां निर्माण कार्य शुरू होने के बावजूद नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण नाले अथवा जल निकासी क्षेत्र में हो रहा है तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद निर्माण रुकवाने के लिए मौके पर पहुंचकर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। वहीं, यदि निर्माण के लिए नगर पालिका से कोई वैधानिक अनुमति जारी की गई है तो उसकी प्रक्रिया और आधार भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि नाले के प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र में निर्माण होने से बारिश के दौरान पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है, जिससे आसपास के क्षेत्र में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। हालांकि, अधिकारियों की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और नगर पालिका प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में अब लोगों की मांग है कि नगर पालिका मौके का निरीक्षण कर निर्माण की वैधता और अनुमति संबंधी दस्तावेजों की जांच करे तथा यह स्पष्ट करे कि यदि निर्माण नियमों के विपरीत है तो उसे रोकने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे।
नाले के बीच निर्माण पर उठे सवाल, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी नाले के बीच निर्माण पर उठे सवाल, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी गमामठवाड़ा में जल निकासी क्षेत्र में निर्माण का मामला, कार्रवाई और अनुमति को लेकर उठे सवाल सागवाड़ा शहर के गमामठवाड़ा क्षेत्र में जल निकासी के लिए उपयोग किए जाने वाले नाले के बीच निर्माण कार्य सामने आने के बाद नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान से बारिश के पानी की निकासी होती है, वहां निर्माण कार्य शुरू होने के बावजूद नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण नाले अथवा जल निकासी क्षेत्र में हो रहा है तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद निर्माण रुकवाने के लिए मौके पर पहुंचकर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। वहीं, यदि निर्माण के लिए नगर पालिका से कोई वैधानिक अनुमति जारी की गई है तो उसकी प्रक्रिया और आधार भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि नाले के प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र में निर्माण होने से बारिश के दौरान पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है, जिससे आसपास के क्षेत्र में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। हालांकि, अधिकारियों की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और नगर पालिका प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में अब लोगों की मांग है कि नगर पालिका मौके का निरीक्षण कर निर्माण की वैधता और अनुमति संबंधी दस्तावेजों की जांच करे तथा यह स्पष्ट करे कि यदि निर्माण नियमों के विपरीत है तो उसे रोकने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे।
- नाले के बीच निर्माण पर उठे सवाल, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी नाले के बीच निर्माण पर उठे सवाल, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी गमामठवाड़ा में जल निकासी क्षेत्र में निर्माण का मामला, कार्रवाई और अनुमति को लेकर उठे सवाल सागवाड़ा शहर के गमामठवाड़ा क्षेत्र में जल निकासी के लिए उपयोग किए जाने वाले नाले के बीच निर्माण कार्य सामने आने के बाद नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान से बारिश के पानी की निकासी होती है, वहां निर्माण कार्य शुरू होने के बावजूद नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण नाले अथवा जल निकासी क्षेत्र में हो रहा है तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद निर्माण रुकवाने के लिए मौके पर पहुंचकर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। वहीं, यदि निर्माण के लिए नगर पालिका से कोई वैधानिक अनुमति जारी की गई है तो उसकी प्रक्रिया और आधार भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि नाले के प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र में निर्माण होने से बारिश के दौरान पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है, जिससे आसपास के क्षेत्र में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। हालांकि, अधिकारियों की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और नगर पालिका प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में अब लोगों की मांग है कि नगर पालिका मौके का निरीक्षण कर निर्माण की वैधता और अनुमति संबंधी दस्तावेजों की जांच करे तथा यह स्पष्ट करे कि यदि निर्माण नियमों के विपरीत है तो उसे रोकने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे।1
- विप्र फाउंडेशन जॉन की बड़ी बैठक जिसमें उपस्थित बांसवाड़ा डूंगरपुर प्रतापगढ़ के सभी वे विप बंदु विप्रो फाउंडेशन की बड़ी बैठक आज आतरी पंचायत में संपन्न हुई कार्यक्रम में सभी विप्र बंधुओ ने अपने विचार रखें2
- सेवा की 33 साल पुरानी परंपरा को सलाम, जय अंबे मित्र मंडल ने पदयात्रा के सहयोगियों और नवनिर्वाचित पार्षदों का किया सम्मान संवाददाता – संतोष व्यास डूंगरपुर। जय अंबे पदयात्रा मित्र मंडल की 33वीं अंबाजी पदयात्रा एवं डूंगरपुर में आयोजित तीन दिवसीय यात्री विश्राम कार्यक्रम के सफल आयोजन के बाद मंडल की ओर से धनैश्वर मंदिर परिसर, मानक चौक में कार्यकर्ता एवं पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सेवा कार्यों की समीक्षा के साथ नवनिर्वाचित पार्षदों का अभिनंदन किया गया। पार्षदों का माल्यार्पण कर उपरणा ओढ़ाकर सम्मान किया गया। मंडल संस्थापक पदमेश गांधी ने वर्ष 1993 से 2026 तक मंडल की ओर से किए गए सेवा कार्यों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के तीन दिवसीय आयोजन में नया प्रयोग करते हुए महाआरती के बाद भजन संध्या का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि पदयात्रियों की सेवा और उनके लिए विश्राम की व्यवस्था मंडल की वर्षों पुरानी परंपरा है, जिसे कार्यकर्ताओं के सहयोग से लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। मंडल अध्यक्ष प्रदीप श्रीमाल ने आयोजन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया। उन्होंने महादेव टिंबर एंड प्लाईवुड एवं पद्मावती इलेक्ट्रिकल के सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद दिया। उपाध्यक्ष गजेंद्र श्रीमाल ने आयोजन की सफलता के लिए कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। मंडल सचिव रजनीश चौबिसा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए मंडल की ओर से किए जा रहे सेवा कार्यों का आय-व्यय विवरण प्रस्तुत किया। इस दौरान नवनिर्वाचित पार्षद वर्षा चोबिसा, शैलेश मेहता, हिमांशु भावसार, भूपेंद्र पालीवाल, लक्ष्मी सेवक, हंसा दर्जी और भाजपा नगर अध्यक्ष नयन सुथार का सम्मान किया गया। साथ ही पहली पदयात्री कमला देवी दर्जी का भी अभिनंदन किया गया। बैठक में पूर्व पार्षद सूर्यसिंह राठौड़, भंवरलाल सुथार, मोहनसिंह बारोड़, आलोक शाह, गिरीश जोशी एवं गेबी लाल कलाल ने मंडल के सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पदयात्रियों के लिए तीन दिवसीय विश्राम स्थल पर की जाने वाली सेवा सामाजिक समरसता और श्रद्धा का उदाहरण है। उन्होंने इस सेवा परंपरा को आने वाले वर्षों में भी इसी उत्साह के साथ जारी रखने का आह्वान किया। इस अवसर पर जया कंसारा, ममता भट्ट, कीर्ति जोशी, प्रकाश लबाना, ओमप्रकाश चोबिसा, किरणेश्वर चोबिसा, संजय पांचाल, छगन ननोमा, मुकेश भट्ट, राजेश चौहान, अजीत कंसारा, भानु शाह, रमेश शर्मा, यशवंत शर्मा सहित बड़ी संख्या में मंडल पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।4
- भरत पंड्या संवाददाता डुंगरपुर 9829264909 कर्तव्य की राह में शहीद फायरकर्मी प्रीतेश को नम आंखों से अंतिम विदाई, प्रशासन की गैरमौजूदगी पर ग्रामीणों में रोष भरत पंड्या संवाददाता डुंगरपुर 9829264909 कर्तव्य की राह में शहीद फायरकर्मी प्रीतेश को नम आंखों से अंतिम विदाई, प्रशासन की गैरमौजूदगी पर ग्रामीणों में रोष डूंगरपुर। जोधपुर के बासनी स्थित केमिकल फैक्ट्री में आग बुझाने के दौरान ब्लास्ट में गंभीर रूप से झुलसे डूंगरपुर के फायरकर्मी प्रीतेश परमार का उनके पैतृक गांव लांबाभाटड़ा (चुंडावाड़ा) में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम विदाई में जोधपुर और उदयपुर संभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारियों सहित प्रदेशभर से पहुंचे लगभग 25 फायर अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें सैल्यूट कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उदयपुर अग्निशमन टीम की ओर से पीड़ित परिवार को 2,00,000 रुपये की आर्थिक सहायता राशि सौंपी गई। प्रशासन की अनुपस्थिति पर फूटा गुस्सा अंतिम संस्कार के दौरान डूंगरपुर जिला प्रशासन का कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं रहने पर ग्रामीणों ने गहरा रोष जताया। ग्रामीणों ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित कई मंत्रियों ने जयपुर अस्पताल जाकर घायलों का हाल जाना था, लेकिन डूंगरपुर सीमा में प्रवेश से लेकर अंतिम संस्कार तक स्थानीय प्रशासन का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। हादसे में घायल 14 अग्निशमन कर्मियों में से यह पहली मौत थी, ऐसे में प्रशासन की अनदेखी दुखद है। उल्लेखनीय है कि प्रीतेश के पिता धुलेश्वर परमार भी नगर परिषद डूंगरपुर में लीडिंग फायरमैन हैं। पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए प्रीतेश ने भी जनता की सुरक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।2
- कर्तव्य की राह मे शहीद फायरकर्मी प्रीतेश को नम आंखो से अंतिम विदाई, प्रशासन की गैरमौजूदगी पर ग्रामीणो मे रोष। डूंगरपुर संवाददाता तेजसिंह राठौड 9929285157 कर्तव्य की राह में शहीद फायरकर्मी प्रीतेश को नम आंखों से अंतिम विदाई, प्रशासन की गैरमौजूदगी पर ग्रामीणों में रोष। डूंगरपुर। जोधपुर के बासनी स्थित केमिकल फैक्ट्री में आग बुझाने के दौरान हुए ब्लास्ट में गंभीर रूप से झुलसे डूंगरपुर के फायरकर्मी प्रीतेश परमार का रविवार को उनके पैतृक गांव लांबाभाटड़ा, चुंडावाड़ा में अंतिम संस्कार किया गया। प्रीतेश करीब 90 प्रतिशत झुलस गए थे और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी। अंतिम संस्कार में प्रदेशभर से पहुंचे अग्निशमन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अंतिम संस्कार में जोधपुर के मुख्य अग्निशमन अधिकारी जलज घसिया, उदयपुर संभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी सहित प्रदेश के करीब 25 अग्निशमन अधिकारी और बड़ी संख्या में अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रीतेश को सैल्यूट प्रदान कर सम्मान दिया। अग्निशमन विभाग की ओर से कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले साथी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। परिजनों को दी दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता : उदयपुर संभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी के नेतृत्व में अग्निशमन विभाग की ओर से प्रीतेश परमार के परिजनों को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई। इस दौरान विभाग के अधिकारियों ने परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया। प्रशासन की गैरमौजूदगी पर ग्रामीणों में नाराजगी: अंतिम संस्कार में डूंगरपुर जिला प्रशासन के किसी अधिकारी के मौजूद नहीं होने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने कहा कि प्रीतेश ने आमजन की सुरक्षा और अपनी ड्यूटी का निर्वहन करते हुए जान गंवाई है। ऐसे में उनकी अंतिम विदाई के दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी होनी चाहिए थी। ग्रामीणों ने कहा कि जोधपुर हादसे और जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उद्योग मंत्री झाबरमल खर्रा, केंद्रीय मंत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारी घायलों की स्थिति जानने पहुंचे थे। लेकिन डूंगरपुर जिले की सीमा में प्रवेश करने के बाद से अंतिम संस्कार तक प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने कहा कि यह और भी गंभीर बात है क्योंकि हादसे में घायल 14 अग्निशमनकर्मियों में से यह पहली मौत थी और मृतक डूंगरपुर जिले का रहने वाला था। पिता भी फायर ब्रिगेड में दे रहे सेवाएं : प्रीतेश परमार के पिता धुलेश्वर परमार नगर परिषद डूंगरपुर की फायर ब्रिगेड टीम में लीडिंग फायरमैन के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। पिता की तरह बेटे ने भी अग्निशमन सेवा को अपना कर्तव्य बनाया और दूसरों की जान-माल की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। प्रीतेश के निधन से परिवार के साथ पूरे गांव में शोक का माहौल है।3
- जोधपुर अग्निकांड में शहीद प्रीतेश को नम आंखों से अंतिम विदाई डूंगरपुर के बिछीवाड़ा के लंबाभाटेडा निवासी फायर फाइटर प्रीतेश परमार की जोधपुर अग्निकांड में मौत के बाद गांव में मातम पसरा है। शनिवार को प्रीतेश का पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अंतिम यात्रा में आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। फायर विभाग के अधिकारी और पुलिसकर्मी भी अंतिम विदाई में शामिल हुए। विधि-विधान से प्रीतेश का अंतिम संस्कार किया गया। प्रीतेश के पिता धूलेश्वर परमार डूंगरपुर फायर ब्रिगेड में सरकारी सेवा में हैं। प्रीतेश अपने परिवार का इकलौता बेटा था, उसकी दो बहनें हैं। पूरा गांव गमगीन है।1
- प्रभु तारा छै हजार की गूंज के बीच निकली आदिनाथ की पालकी पर्यूषण महापर्व की धून थमी *प्रभु तारा नाम छै हजार की गूंज के बीच निकली आदिनाथ की पालकी*। *आसपुर में पर्यूषण महापर्व की धुन थमी* *सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से रथोत्सव संहित क्षेत्र के समस्त जैन बाहुल्य गांवों मे चल रहे दस लक्षण पर्युषण महापर्व का समापन किया। बिसा नरसिंहपुरा दिगम्बर समाज की ओर से शांतिनाथ* - *दिगम्बर जैन मंदिर एवं नागदा समाज की ओर से आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर से निकली रथयात्रा के दौरान गणेश चौक, तहसील चौराया, पुराना बस स्टैंड एवं* *होली चौक में युवक युवतियों नें भक्ति गीतों की धुन पर सुंदर डांडिया रास प्रस्तुत कर महोत्सव के आनंद को* *बहुगुणित किया। रथोत्सव का नजारा देखने आस पास के गांवों से लोग उमड़े। रात्रि में रथ भंडारण की रस्म अदायगी के साथ तीर्थकर भगवंत एवं* *जिनवाणी मां की मंगल आराधना कर विश्व शांति एवं लोक मंगल की कामना की। चंपालाल भूखिया, सेठ शांतिलाल सिंघवी, अध्यक्ष भगवती लाल भूखिया, धनपाल नेतावत, शंकरलाल कुंडलिया, सेठ लक्ष्मीचंद किकावत, व्यापार संघ अध्यक्ष सुशील जैन, नरेंद्र जैन, कारुलाल रायकीया, प्रकाश नागदा एवं पुलक मंच के अनिल चंदावत आदि उपस्थित रहे*।1
- कर्तव्य की राह में शहीद फायरकर्मी प्रीतेश को नम आंखों से अंतिम विदाई, प्रशासन की गैरमौजूदगी पर ग्रामीणों में रोष संवाददाता – संतोष व्यास डूंगरपुर। राजस्थान के जोधपुर के बासनी स्थित केमिकल फैक्ट्री में आग बुझाने के दौरान हुए ब्लास्ट में गंभीर रूप से झुलसे डूंगरपुर के फायरकर्मी प्रीतेश परमार का रविवार को उनके पैतृक गांव लांबाभाटड़ा, चुंडावाड़ा में अंतिम संस्कार किया गया। प्रीतेश करीब 90 प्रतिशत झुलस गए थे और उपचार के दौरान शनिवार को उनकी मौत हो गई थी। अंतिम संस्कार में प्रदेशभर से पहुंचे अग्निशमन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अंतिम संस्कार में जोधपुर के मुख्य अग्निशमन अधिकारी जलज घसिया, उदयपुर संभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी सहित प्रदेश के करीब 25 अग्निशमन अधिकारी और बड़ी संख्या में अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रीतेश को सैल्यूट प्रदान कर सम्मान दिया। अग्निशमन विभाग की ओर से कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले साथी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। - परिजनों को दी दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता उदयपुर संभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी के नेतृत्व में अग्निशमन विभाग उदयपुर की टीम की ओर से प्रीतेश परमार के परिजनों को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई। इस दौरान विभाग के अधिकारियों ने परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया। - प्रशासन की गैरमौजूदगी पर ग्रामीणों में नाराजगी अंतिम संस्कार में डूंगरपुर जिला प्रशासन के किसी अधिकारी के मौजूद नहीं होने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने कहा कि प्रीतेश ने आमजन की सुरक्षा और अपनी ड्यूटी का निर्वहन करते हुए जान गंवाई है। ऐसे में उनकी अंतिम विदाई के दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी होनी चाहिए थी। ग्रामीणों ने कहा कि जोधपुर हादसे और जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उद्योग मंत्री झाबरमल खर्रा, केंद्रीय मंत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारी घायलों की स्थिति जानने पहुंचे थे। लेकिन डूंगरपुर जिले की सीमा में प्रवेश करने के बाद से अंतिम संस्कार तक प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने कहा कि यह और भी गंभीर बात है क्योंकि हादसे में घायल 14 अग्निशमनकर्मियों में से यह पहली मौत थी और मृतक डूंगरपुर जिले का रहने वाला था। - पिता भी फायर ब्रिगेड में दे रहे सेवाएं प्रीतेश परमार के पिता धुलेश्वर परमार नगर परिषद डूंगरपुर की फायर ब्रिगेड टीम में लीडिंग फायरमैन के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। पिता की तरह बेटे ने भी अग्निशमन सेवा को अपना कर्तव्य बनाया और दूसरों की जान-माल की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। प्रीतेश के निधन से परिवार के साथ पूरे गांव में शोक का माहौल है।4