बाराबंकी में टीकाराम बाबा का आधुनिक कहानी,देखे रवि सिंह के साथ , हमें सब्सक्राइब कर ले ताकि हमारी हर खबरें आप तक पहुंचे हैदरगढ़ की आस्था का केंद्र 'टीकाराम बाबा', चमत्कारों से भरी है यहां की कहानी हैदरगढ़, बाराबंकी: अवध क्षेत्र में हैदरगढ़ तहसील सिर्फ अपनी तहसील के लिए नहीं, बल्कि यहां स्थित 'टीकाराम बाबा' के पावन धाम के लिए भी जानी जाती है। मान्यता है कि बाबा के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। हर मंगलवार को यहां भक्तों का मेला लगता है। स्थानीय बुजुर्गों और मान्यताओं के अनुसार, टीकाराम बाबा लगभग 200 साल पहले हैदरगढ़ क्षेत्र में आए एक सिद्ध संत थे। कहा जाता है कि बाबा को गौ-सेवा और मानव-सेवा से बेहद लगाव था। उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, बीमारों और दुखियों की सेवा में लगा दिया। लोक कथाओं में वर्णन है कि बाबा के पास दिव्य शक्तियां थीं। वो बिना दवा के ही गंभीर रोगियों को ठीक कर देते थे। उनकी कुटिया के पास जो नीम का पेड़ था, उसकी पत्तियों को प्रसाद स्वरूप खाने से लोगों के कष्ट दूर हो जाते थे। समाधि स्थल बना आस्था का केंद्र कहा जाता है कि बाबा ने यहीं जीवित समाधि ली थी। आज उसी स्थान पर भव्य मंदिर बना है। मंदिर परिसर में वो प्राचीन नीम का पेड़ आज भी मौजूद है। मान्यता है कि इस पेड़ की पत्ती और बाबा की समाधि की मिट्टी को माथे से लगाने पर भूत-प्रेत बाधा, बीमारी और कोर्ट-कचहरी के मामले खत्म हो जाते हैं। 1. मनोकामना पूरी: लोग बताते हैं कि सच्चे मन से मन्नत मांगने पर बाबा जरूर सुनते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त यहां झाड़ू, घंटा और प्रसाद चढ़ाते हैं। 2. निसंतान को संतान: कई निसंतान दंपत्ति यहां माथा टेकने के बाद संतान सुख पा चुके हैं। 3. बीमारी से छुटकारा: मंगलवार को यहां 'पैड़ी' चढ़ाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे बड़ी से बड़ी बीमारी ठीक हो जाती है। हर साल लगता है भव्य मेला होली के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को यहां विशाल मेला लगता है। दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु बाबा का दर्शन करने आते हैं। उस दिन पूरी रात भजन-कीर्तन और भंडारा चलता है।
बाराबंकी में टीकाराम बाबा का आधुनिक कहानी,देखे रवि सिंह के साथ , हमें सब्सक्राइब कर ले ताकि हमारी हर खबरें आप तक पहुंचे हैदरगढ़ की आस्था का केंद्र 'टीकाराम बाबा', चमत्कारों से भरी है यहां की कहानी हैदरगढ़, बाराबंकी: अवध क्षेत्र में हैदरगढ़ तहसील सिर्फ अपनी तहसील के लिए नहीं, बल्कि यहां स्थित 'टीकाराम बाबा' के पावन धाम के लिए भी जानी जाती है। मान्यता है कि बाबा के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। हर मंगलवार को यहां भक्तों का मेला लगता है। स्थानीय बुजुर्गों और मान्यताओं के अनुसार, टीकाराम बाबा लगभग 200 साल पहले हैदरगढ़ क्षेत्र में आए एक सिद्ध संत थे। कहा जाता है कि बाबा को गौ-सेवा और मानव-सेवा से बेहद लगाव था। उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, बीमारों और दुखियों की सेवा में लगा दिया। लोक कथाओं में वर्णन है कि बाबा के पास दिव्य शक्तियां थीं। वो बिना दवा के ही गंभीर रोगियों को ठीक कर देते थे। उनकी कुटिया के पास जो नीम का पेड़ था, उसकी पत्तियों को प्रसाद स्वरूप खाने से लोगों के कष्ट दूर हो जाते थे। समाधि स्थल बना आस्था का केंद्र कहा जाता है कि बाबा ने यहीं जीवित समाधि ली थी। आज उसी स्थान पर भव्य मंदिर बना है। मंदिर परिसर में वो प्राचीन नीम का पेड़ आज भी मौजूद है। मान्यता है कि इस पेड़ की पत्ती और बाबा की समाधि की मिट्टी को माथे से लगाने पर भूत-प्रेत बाधा, बीमारी और कोर्ट-कचहरी के मामले खत्म हो जाते हैं। 1. मनोकामना पूरी: लोग बताते हैं कि सच्चे मन से मन्नत मांगने पर बाबा जरूर सुनते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त यहां झाड़ू, घंटा और प्रसाद चढ़ाते हैं। 2. निसंतान को संतान: कई निसंतान दंपत्ति यहां माथा टेकने के बाद संतान सुख पा चुके हैं। 3. बीमारी से छुटकारा: मंगलवार को यहां 'पैड़ी' चढ़ाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे बड़ी से बड़ी बीमारी ठीक हो जाती है। हर साल लगता है भव्य मेला होली के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को यहां विशाल मेला लगता है। दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु बाबा का दर्शन करने आते हैं। उस दिन पूरी रात भजन-कीर्तन और भंडारा चलता है।
- रवि सिंहहैदरगढ़, बाराबंकी, उत्तर प्रदेशहमे लाइक और सब्सक्राइब करे3 hrs ago
- हैदरगढ़ की आस्था का केंद्र 'टीकाराम बाबा', चमत्कारों से भरी है यहां की कहानी हैदरगढ़, बाराबंकी: अवध क्षेत्र में हैदरगढ़ तहसील सिर्फ अपनी तहसील के लिए नहीं, बल्कि यहां स्थित 'टीकाराम बाबा' के पावन धाम के लिए भी जानी जाती है। मान्यता है कि बाबा के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। हर मंगलवार को यहां भक्तों का मेला लगता है। स्थानीय बुजुर्गों और मान्यताओं के अनुसार, टीकाराम बाबा लगभग 200 साल पहले हैदरगढ़ क्षेत्र में आए एक सिद्ध संत थे। कहा जाता है कि बाबा को गौ-सेवा और मानव-सेवा से बेहद लगाव था। उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, बीमारों और दुखियों की सेवा में लगा दिया। लोक कथाओं में वर्णन है कि बाबा के पास दिव्य शक्तियां थीं। वो बिना दवा के ही गंभीर रोगियों को ठीक कर देते थे। उनकी कुटिया के पास जो नीम का पेड़ था, उसकी पत्तियों को प्रसाद स्वरूप खाने से लोगों के कष्ट दूर हो जाते थे। समाधि स्थल बना आस्था का केंद्र कहा जाता है कि बाबा ने यहीं जीवित समाधि ली थी। आज उसी स्थान पर भव्य मंदिर बना है। मंदिर परिसर में वो प्राचीन नीम का पेड़ आज भी मौजूद है। मान्यता है कि इस पेड़ की पत्ती और बाबा की समाधि की मिट्टी को माथे से लगाने पर भूत-प्रेत बाधा, बीमारी और कोर्ट-कचहरी के मामले खत्म हो जाते हैं। 1. मनोकामना पूरी: लोग बताते हैं कि सच्चे मन से मन्नत मांगने पर बाबा जरूर सुनते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त यहां झाड़ू, घंटा और प्रसाद चढ़ाते हैं। 2. निसंतान को संतान: कई निसंतान दंपत्ति यहां माथा टेकने के बाद संतान सुख पा चुके हैं। 3. बीमारी से छुटकारा: मंगलवार को यहां 'पैड़ी' चढ़ाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे बड़ी से बड़ी बीमारी ठीक हो जाती है। हर साल लगता है भव्य मेला होली के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को यहां विशाल मेला लगता है। दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु बाबा का दर्शन करने आते हैं। उस दिन पूरी रात भजन-कीर्तन और भंडारा चलता है।1
- थाना जयपुर जिला जिला किथुरी1
- बाराबंकी में ड्रग माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस और प्रशासन ने कुख्यात तस्कर मिस्बाहुर्रहमान उर्फ अज्जन की करीब 6 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क कर दी है। यह कार्रवाई एनडीपीएस एक्ट-1985 की धारा 68F(2) के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकारी, नई दिल्ली के आदेश पर की गई। जानकारी के मुताबिक 09 जनवरी 2026 से जिला कारागार बाराबंकी में बंद अज्जन लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी में सक्रिय रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह थाना जैदपुर का हिस्ट्रीशीटर (नं. 56B) है और बीते करीब 25 वर्षों से ड्रग नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। प्रशासन ने नवाबगंज नगर परिषद क्षेत्र में स्थित गाटा संख्या 198 (मिन), क्षेत्रफल 558.70 वर्गमीटर में बने आवासीय मकान को कुर्क किया है, जो उसकी पत्नी नगमी खातून के नाम दर्ज बताया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान मौके पर पुलिस और प्रशासनिक टीम की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया पूरी कराई गई। जानकारी के मुताबिक अज्जन के खिलाफ बाराबंकी और लखनऊ में दो दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। उसे एडीजी लखनऊ जोन द्वारा इंटर-डिस्ट्रिक्ट गैंग (IR-09) में भी सूचीबद्ध किया गया है, जबकि जिला स्तर पर उसे ड्रग माफिया घोषित करते हुए गैंग नंबर 32 का सरगना बताया गया है। इसके अलावा उसके खिलाफ एनडीपीएस और गैंगस्टर एक्ट के कई मामले दर्ज हैं और पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के तहत एक वर्ष की निरुद्धि का आदेश भी जारी किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि अपराध से अर्जित संपत्ति पर इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। एसपी बाराबंकी अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में शामिल अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।फिलहाल। इस कार्रवाई के बाद जिले में ड्रग माफिया के खिलाफ कड़ा संदेश गया है और पुलिस-प्रशासन की सख्ती साफ तौर पर नजर आ रही है।4
- Post by Mueed Abdul1
- बाराबंकी में पुलिस की सर्विलांस सेल और थाना स्तर की संयुक्त टीमों ने एक बड़ी कार्रवाई में 73 गुम हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन फोनों की कुल अनुमानित कीमत लगभग 15 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय के निर्देश पर गुम हुए मोबाइल फोन से संबंधित शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया था। इस अभियान के तहत टीमों ने CEIR पोर्टल (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर) का उपयोग कर तकनीकी विश्लेषण और ट्रैकिंग के माध्यम से इन मोबाइलों को बरामद किया।1
- बाराबंकी। सर्विलांस सेल व थाना स्तर की संयुक्त टीमों द्वारा सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से गुम हुए करीब 15 लाख रुपये कीमत के 73 मोबाइल फोन बरामद किये जाने के सम्बन्ध में अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी श्री विकास चन्द्र त्रिपाठी की बाइट।1
- बाराबंकी मसौली विकासखंड के जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में रविवार सुबह एक तेज रफ्तार डंपर ने बाइक सवार मां-बेटे को कुचल दिया। इस हादसे में मां की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।प्रत्यक्षदर्शियों ने करीब 9 बजे बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि महिला सड़क पर गिर गई और डंपर उसके ऊपर से गुजर गया। हादसे के बाद सड़क पर खून फैल गया। महिला का सिर कुचल गया था।मसौली निवासी बृजमोहन अपनी 45 वर्षीय मां के साथ बहन के घर जा रहा था। अंबरपुर के पास पीछे से आ रहे डंपर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में बृजमोहन की मां की जान चली गई।हादसे के बाद डंपर चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया।स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में अवैध खनन का खेल खुलेआम चल रहा है। ओवरलोड डंपर अक्सर तेज रफ्तार से सड़कों पर दौड़ते हैं, जिससे ऐसे हादसे होते रहते हैं। प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया है।सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और घायल बृजमोहन का इलाज जारी है। पुलिस ने डंपर को जब्त कर लिया है, लेकिन फरार चालक अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है।इस हादसे से परिवार में शोक का माहौल है।1
- त्रिवेदीगंज, बाराबंकी:मोधुक पुरवा से मझ्झूपुर जाने वाले संपर्क मार्ग पर लगा किलोमीटर का पत्थर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। लोक निर्माण विभाग की लापरवाही से यह मील का पत्थर उल्टा लगा दिया गया है, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी हो रही है। दूर-दराज से आने वाले लोग गुमराह हो रहे हैं और हादसे की आशंका बनी हुई है। *क्या है मामला?* मोधुक पुरवा से मझ्झूपुर मार्ग पर आर एस विभाग के द्वारा कुछ महीने पहले ही किलोमीटर के पत्थर लगाए गए थे। लेकिन ठेकेदार की लापरवाही से एक पत्थर को उल्टा ही गाड़ दिया गया। अब हालत ये है कि पत्थर पर गांवों के नाम और दूरी तो लिखी है, लेकिन उसपर गलत लिखा है जहां मो धुक पुरवा लिखा होना चाहिए था वहां कान्हूपुर लिखा हुआ है। *रात में और ज्यादा दिक्कत* स्थानीय निवासी रामकुमार ने बताया कि दिन में तो फिर भी अंदाजा लग जाता है, लेकिन रात में बाहर से आने वाले ड्राइवर इस उल्टे पत्थर को देखकर कन्फ्यूज हो जाते हैं। कई बार गाड़ियां गलत साइड मुड़ जाती हैं। *कौन है जिम्मेदार?* ग्रामीणों का कहना है कि कई बार JE और ठेकेदार से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सवाल ये है कि जब पत्थर लगा रहे थे तो विभाग के कर्मचारी चेक क्यों नहीं करते? क्या सरकारी पैसा ऐसे ही बर्बाद होगा? *ग्रामीणों की मांग* गांव वालों ने ग्रामीण अभियंत्रण के XEN से मांग की है कि तुरंत इस उल्टे पत्थर को सीधा कराया जाए और लापरवाह ठेकेदार से रिकवरी की जाए। साथ ही पूरे मार्ग पर लगे बाकी पत्थरों की भी जांच हो। फिलहाल ये 'उल्टा पत्थर' सरकारी सिस्टम की उल्टी कार्यशैली का प्रतीक बना हुआ है।1