एक ज़मीनी विवाद के मामले में, 112 नंबर पर सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची, लेकिन बिना किसी जाँच-पड़ताल के ही वापस लौट गई। पुलिस कर्मियों ने कहा कि वे कुछ नहीं कर सकते और यह मामला तहसीलदार कोर्ट देखेगा, क्योंकि उन्हें मौके पर "कुछ दिख ही नहीं रहा है"। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों से ज़मीन के कागज़ात माँगना भी ज़रूरी नहीं समझा और ना ही कोई सवाल-जवाब किए। वे केवल आए, बैठे, पानी पिया और बिना कोई जवाब दिए चले गए, जबकि उनके सामने ही काम चल रहा था। उन पर आरोप है कि उन्होंने मामले की गंभीरता को समझा ही नहीं। पुलिस के इस रवैये पर सवाल उठाते हुए लोगों ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मी अपने "कमीशन पर पड़े" हैं और केवल "वर्दी का रुबाब" दिखाते हैं। इस घटना को लेकर चेतावनी दी गई है कि न केवल पुलिस, बल्कि गलत तरीके से काम करने वाले किसी भी सरकारी कर्मचारी को सावधान हो जाना चाहिए।
एक ज़मीनी विवाद के मामले में, 112 नंबर पर सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची, लेकिन बिना किसी जाँच-पड़ताल के ही वापस लौट गई। पुलिस कर्मियों ने कहा कि वे कुछ नहीं कर सकते और यह मामला तहसीलदार कोर्ट देखेगा, क्योंकि उन्हें मौके पर "कुछ दिख ही नहीं रहा है"। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों से ज़मीन के कागज़ात माँगना भी ज़रूरी नहीं समझा और ना ही कोई सवाल-जवाब किए। वे केवल आए, बैठे, पानी पिया
और बिना कोई जवाब दिए चले गए, जबकि उनके सामने ही काम चल रहा था। उन पर आरोप है कि उन्होंने मामले की गंभीरता को समझा ही नहीं। पुलिस के इस रवैये पर सवाल उठाते हुए लोगों ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मी अपने "कमीशन पर पड़े" हैं और केवल "वर्दी का रुबाब" दिखाते हैं। इस घटना को लेकर चेतावनी दी गई है कि न केवल पुलिस, बल्कि गलत तरीके से काम करने वाले किसी भी सरकारी कर्मचारी को सावधान हो जाना चाहिए।
- एक ज़मीनी विवाद के मामले में, 112 नंबर पर सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची, लेकिन बिना किसी जाँच-पड़ताल के ही वापस लौट गई। पुलिस कर्मियों ने कहा कि वे कुछ नहीं कर सकते और यह मामला तहसीलदार कोर्ट देखेगा, क्योंकि उन्हें मौके पर "कुछ दिख ही नहीं रहा है"। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों से ज़मीन के कागज़ात माँगना भी ज़रूरी नहीं समझा और ना ही कोई सवाल-जवाब किए। वे केवल आए, बैठे, पानी पिया और बिना कोई जवाब दिए चले गए, जबकि उनके सामने ही काम चल रहा था। उन पर आरोप है कि उन्होंने मामले की गंभीरता को समझा ही नहीं। पुलिस के इस रवैये पर सवाल उठाते हुए लोगों ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मी अपने "कमीशन पर पड़े" हैं और केवल "वर्दी का रुबाब" दिखाते हैं। इस घटना को लेकर चेतावनी दी गई है कि न केवल पुलिस, बल्कि गलत तरीके से काम करने वाले किसी भी सरकारी कर्मचारी को सावधान हो जाना चाहिए।2
- बिलासपुर में हाथ में बियर, कार में स्टंट… सड़क पर खुलेआम कानून की उड़ाई धज्जियां। 🚗🍺 रफ्तार और दिखावे की ये लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकती है। ट्रैफिक नियम सिर्फ चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि हर किसी की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। प्रशासन से ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद है ताकि सड़क पर आम लोगों की जान जोखिम में न पड़े। ⚠️1
- रायसेन में एक नाले का निर्माण कार्य 18 दिन बीत जाने के बाद भी अधूरा पड़ा है। इस लापरवाही के कारण स्थानीय लोगों की परेशानियां काफी बढ़ गई हैं, जिससे ठेकेदार की लापरवाही स्पष्ट रूप से उजागर हुई है।1
- शहडोल में यह बताया गया है कि मध्य प्रदेश कुटीर और ग्रामोद्योगों के माध्यम से सशक्त बन रहा है। यह प्रयास 'सशक्त भारत, आत्मनिर्भर भारत' के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान दे रहा है।1
- यूट्यूबर मनीष पटेल को ब्राह्मण बेटियों के प्रति अपशब्द भाषा का प्रयोग करना भारी पड़ गया है। इस मामले में रीवा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मनीष पटेल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।1
- सिंगरौली जिले के माड़ा रेंज के जंगलों में लगातार भीषण आग लगने से वन संपदा और वन्यजीवों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन इस गंभीर समस्या के प्रति जिम्मेदार अधिकारी अब तक बेखबर बने हुए हैं। लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते इस दिशा में उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र में बड़े पर्यावरणीय नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।1