चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील क्षेत्र के भैसोड़ा गांव में जिला पंचायत द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार और लापरवाही से ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि साहेमु के घर से नेहालु के घर तक नाली निर्माण का कार्य लगभग एक वर्ष से अधूरा पड़ा हुआ है, जिसके चलते खुली पड़ी नाली में गिरकर आए दिन बच्चे और बुजुर्ग घायल हो रहे हैं। ठेकेदार द्वारा केवल लोहे की छड़ें लगाकर काम रोक दिया गया है, न तो दीवार पूरी बनी है और न ही नाली ढकी गई है, जिससे खुले गड्ढे आवागमन में भारी दिक्कतें पैदा कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। इस अधूरे निर्माण के संबंध में ग्रामीणों ने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है। पिछले समाधान दिवस और हाल ही में आयोजित जिला स्तरीय सम्पूर्ण समाधान दिवस में भी जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर कार्य पूरा कराने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बदरुद्दीन, अखलाक, शहंशाह, रहीमुद्दीन, रहमत, मकसूद, जाहिर सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल शेष कार्य पूरा कराने और सुरक्षा की दृष्टि से नाली को ढकने की मांग की है, ताकि गांव में दुर्घटनाओं पर रोक लग सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नाली निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्राम प्रधान पति लाल मोहम्मद ने भी इस बात की पुष्टि की है कि लगभग एक साल से यह कार्य अधूरा है और अधूरे निर्माण के कारण ग्रामवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि अधिकारियों का ध्यान कई बार इस ओर खींचा जा चुका है।
चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील क्षेत्र के भैसोड़ा गांव में जिला पंचायत द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार और लापरवाही से ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि साहेमु के घर से नेहालु के घर तक नाली निर्माण का कार्य लगभग एक वर्ष से अधूरा पड़ा हुआ है, जिसके चलते खुली पड़ी नाली में गिरकर आए दिन बच्चे और बुजुर्ग घायल हो रहे हैं। ठेकेदार द्वारा केवल लोहे की छड़ें लगाकर काम रोक दिया गया है, न तो दीवार पूरी बनी है और न ही नाली ढकी गई है, जिससे खुले गड्ढे
आवागमन में भारी दिक्कतें पैदा कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। इस अधूरे निर्माण के संबंध में ग्रामीणों ने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है। पिछले समाधान दिवस और हाल ही में आयोजित जिला स्तरीय सम्पूर्ण समाधान दिवस में भी जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर कार्य पूरा कराने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बदरुद्दीन, अखलाक, शहंशाह, रहीमुद्दीन, रहमत, मकसूद, जाहिर सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से
तत्काल शेष कार्य पूरा कराने और सुरक्षा की दृष्टि से नाली को ढकने की मांग की है, ताकि गांव में दुर्घटनाओं पर रोक लग सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नाली निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्राम प्रधान पति लाल मोहम्मद ने भी इस बात की पुष्टि की है कि लगभग एक साल से यह कार्य अधूरा है और अधूरे निर्माण के कारण ग्रामवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि अधिकारियों का ध्यान कई बार इस ओर खींचा जा चुका है।
- चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील क्षेत्र के भैसोड़ा गांव में जिला पंचायत द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार और लापरवाही से ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि साहेमु के घर से नेहालु के घर तक नाली निर्माण का कार्य लगभग एक वर्ष से अधूरा पड़ा हुआ है, जिसके चलते खुली पड़ी नाली में गिरकर आए दिन बच्चे और बुजुर्ग घायल हो रहे हैं। ठेकेदार द्वारा केवल लोहे की छड़ें लगाकर काम रोक दिया गया है, न तो दीवार पूरी बनी है और न ही नाली ढकी गई है, जिससे खुले गड्ढे आवागमन में भारी दिक्कतें पैदा कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। इस अधूरे निर्माण के संबंध में ग्रामीणों ने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है। पिछले समाधान दिवस और हाल ही में आयोजित जिला स्तरीय सम्पूर्ण समाधान दिवस में भी जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर कार्य पूरा कराने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बदरुद्दीन, अखलाक, शहंशाह, रहीमुद्दीन, रहमत, मकसूद, जाहिर सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल शेष कार्य पूरा कराने और सुरक्षा की दृष्टि से नाली को ढकने की मांग की है, ताकि गांव में दुर्घटनाओं पर रोक लग सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नाली निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्राम प्रधान पति लाल मोहम्मद ने भी इस बात की पुष्टि की है कि लगभग एक साल से यह कार्य अधूरा है और अधूरे निर्माण के कारण ग्रामवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि अधिकारियों का ध्यान कई बार इस ओर खींचा जा चुका है।3
- चंदौली में जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में जनपद में संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई और स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी तथा सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। जिलाधिकारी ने शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया, जिसमें प्रत्येक गर्भवती महिला का समय पर पंजीकरण और सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया जाना शामिल है। उन्होंने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को शत-प्रतिशत लक्ष्य के साथ संचालित करने के भी निर्देश दिए, ताकि कोई भी बच्चा या गर्भवती महिला टीकाकरण से वंचित न रहे। जिलाधिकारी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) पर ओपीडी सेवाओं को बढ़ाने के लिए कहा, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही उपचार की सुविधा मिल सके और उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर अनावश्यक दबाव कम हो। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि स्वास्थ्य सेवाएँ मरीजों, विशेषकर गरीबों के लिए सुलभ और किफायती हों, और उन्हें समय पर जाँच व इलाज उपलब्ध कराया जाए। बैठक के दौरान, जिलाधिकारी ने ग्राम स्तर पर कार्य में शिथिलता बरतने वाली निष्क्रिय आशाओं के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उनकी सेवा समाप्त करने और उनके स्थान पर नई आशाओं की भर्ती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके। उन्होंने सभी डॉक्टरों को समय से अपने कार्यस्थल पर उपस्थित रहने और आपातकालीन डॉक्टरों को भी कार्यस्थल पर मौजूद रहने का आदेश दिया, ताकि स्वास्थ्य सेवाएँ बेहतर बनी रहें। साथ ही, आयुष्मान भारत, जननी सुरक्षा योजना और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसी सरकारी योजनाओं को ईमानदारी से धरातल पर उतारने के निर्देश भी दिए गए। इस बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आर जगत साई, मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड के बाद वाराणसी के कोचिंग सेंटरों में मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। यह देखा गया है कि प्रशासन आमतौर पर किसी घटना के बाद ही सक्रिय होता है। हालांकि, इस बार उम्मीद जताई जा रही है कि वाराणसी में बड़े सुधार और महत्वपूर्ण कार्रवाई की जाएगी, जिससे भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना यहाँ न हो सके।1
- भ्रष्टाचारियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई किए जाने की पुरजोर माँग की गई है। इस दौरान, भ्रष्टाचार की मूल जड़ के रूप में 'जेई' (जूनियर इंजीनियर) को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिससे यह साफ होता है कि यह माँग भ्रष्टाचार के एक विशिष्ट स्रोत पर केंद्रित है।1
- पुलिस की जाँच में सामने आया है कि एक बच्चे से कथित तौर पर जबरन नारे लगवाए गए थे। इन नारों का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर इस तरह फैलाया गया, जैसे ये मुहर्रम के जुलूस में लगाए गए हों। पुलिस का आरोप है कि इस मामले में इमरान और भुवनेश नामक दो व्यक्तियों ने बच्चे का इस्तेमाल कर यह वीडियो बनाया और उसे वायरल किया। पुलिस के अनुसार, इस पूरे कृत्य का मुख्य उद्देश्य सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ना और लोगों को भड़काना था। इस संबंध में त्वरित कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने दोनों आरोपियों इमरान और भुवनेश को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की जाँच जारी है।1
- बिहार के एक ऐसे गांव में एक ऐतिहासिक पल आया है, जहां आज तक कोई भी इंजीनियर नहीं बन पाया था। इस गांव से पहली बार किसी युवक ने आईआईटी में अपनी जगह बनाई है। इस उपलब्धि पर पूरे गांव में जश्न का माहौल है, खासकर गांव की महिलाओं ने इस नव-आईआईटीयन का गर्मजोशी से स्वागत किया। महिलाओं ने तिलक लगाकर, आरती उतारकर और मिठाई खिलाकर इस बेटे का सम्मान किया, साथ ही खुशी के गीत भी गाए।1
- सोनभद्र जिले के चोपन ब्लॉक के बर्दिया टोला कुस्हवा में पेयजल का गंभीर संकट गहरा गया है, जहाँ 'हर घर नल जल योजना' केवल एक शोपीस बनकर रह गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि महीनों से उनके नलों में पानी नहीं आ रहा है, जिसके कारण गाँव की महिलाओं और बच्चों को लगभग एक किलोमीटर दूर से पानी ढोकर लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए, ग्रामीणों ने संबंधित जिम्मेदारों से जल्द से जल्द समाधान करने की मांग की है।1
- लखनऊ अग्निकांड की घटना के बाद वाराणसी में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आकाश इंस्टीट्यूट कोचिंग सेंटर को सील कर दिया है। यह कार्रवाई वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए), पुलिस और अग्निशमन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से की गई। कोचिंग सेंटर के निरीक्षण के दौरान सुरक्षा संबंधी कई खामियां सामने आईं। विशेष रूप से, अग्नि सुरक्षा से जुड़े इंतजामों में कमी पाई गई, और आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) में भी आवश्यक व्यवस्थाओं का अभाव दिखा।1