रास्ते के लिए भूख हड़ताल: सहरसा के भेलवा वार्ड में दर्जनों परिवार बंधक जैसे हालात में सहरसा नगर निगम क्षेत्र के भेलवा वार्ड नंबर 3 से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां रास्ते की मांग को लेकर दर्जनों परिवार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। बताया जा रहा है कि इस वार्ड में कई दशकों से रह रहे परिवार आज अपने ही घरों में बंधक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। पीड़ित परिवार पिछले तीन दिनों से अपने निजी आवास पर ही भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं और प्रशासन से रास्ता दिलाने की मांग कर रहे हैं। परिवारों का आरोप है कि पड़ोसी द्वारा रास्ता बंद कर दिया गया है, जिससे उनके आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है। स्थिति इतनी गंभीर है कि लोग घर से बाहर तक नहीं निकल पा रहे हैं। पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर जिलाधिकारी, अंचलाधिकारी, कमिश्नर, राजस्व मंत्री और यहां तक कि मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि पड़ोसी ने दबंगई दिखाते हुए रास्ते में मिट्टी डाल दी और दीवार तक खड़ी कर दी। वहीं, अंचलाधिकारी द्वारा निरीक्षण किए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। भूख हड़ताल पर बैठे परिवारों में सहदेव राम, बनारसी राम, दामोदर राम, कैलाश राम, अशोक राम, कपिल देव राम, भावेश राम, प्रवेश राम, पिंटू राम और परमानंद राम समेत कई लोग शामिल हैं, जो खुद को अपने ही घरों में कैद महसूस कर रहे हैं। दूसरी ओर, दूसरे पक्ष का कहना है कि अगर उन्हें आगे से जमीन दी जाती है, तभी वे रास्ता देने को तैयार होंगे। बताया जा रहा है कि यह मामला पुरानी रंजिश से भी जुड़ा हुआ है, जहां छोटी-छोटी कहासुनी ने अब बड़ा विवाद का रूप ले लिया है। फिलहाल, प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि जल्द से जल्द इस विवाद का समाधान कर पीड़ित परिवारों को राहत दिलाई जाए।
रास्ते के लिए भूख हड़ताल: सहरसा के भेलवा वार्ड में दर्जनों परिवार बंधक जैसे हालात में सहरसा नगर निगम क्षेत्र के भेलवा वार्ड नंबर 3 से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां रास्ते की मांग को लेकर दर्जनों परिवार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। बताया जा रहा है कि इस वार्ड में कई दशकों से रह रहे परिवार आज अपने ही घरों में बंधक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। पीड़ित परिवार पिछले तीन दिनों से अपने निजी आवास पर ही भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं और प्रशासन से रास्ता दिलाने की मांग कर रहे हैं। परिवारों का आरोप है कि पड़ोसी द्वारा रास्ता बंद कर दिया गया है, जिससे उनके आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है। स्थिति इतनी गंभीर है कि लोग घर से बाहर तक नहीं निकल पा रहे हैं। पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर जिलाधिकारी, अंचलाधिकारी, कमिश्नर, राजस्व मंत्री और यहां तक कि मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि पड़ोसी ने दबंगई दिखाते हुए रास्ते में मिट्टी डाल दी और दीवार तक खड़ी कर दी। वहीं, अंचलाधिकारी द्वारा निरीक्षण किए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। भूख हड़ताल पर बैठे परिवारों में सहदेव राम, बनारसी राम, दामोदर राम, कैलाश राम, अशोक राम, कपिल देव राम, भावेश राम, प्रवेश राम, पिंटू राम और परमानंद राम समेत कई लोग शामिल हैं, जो खुद को अपने ही घरों में कैद महसूस कर रहे हैं। दूसरी ओर, दूसरे पक्ष का कहना है कि अगर उन्हें आगे से जमीन दी जाती है, तभी वे रास्ता देने को तैयार होंगे। बताया जा रहा है कि यह मामला पुरानी रंजिश से भी जुड़ा हुआ है, जहां छोटी-छोटी कहासुनी ने अब बड़ा विवाद का रूप ले लिया है। फिलहाल, प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि जल्द से जल्द इस विवाद का समाधान कर पीड़ित परिवारों को राहत दिलाई जाए।
- सहरसा नगर निगम क्षेत्र के भेलवा वार्ड नंबर 3 से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां रास्ते की मांग को लेकर दर्जनों परिवार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। बताया जा रहा है कि इस वार्ड में कई दशकों से रह रहे परिवार आज अपने ही घरों में बंधक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। पीड़ित परिवार पिछले तीन दिनों से अपने निजी आवास पर ही भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं और प्रशासन से रास्ता दिलाने की मांग कर रहे हैं। परिवारों का आरोप है कि पड़ोसी द्वारा रास्ता बंद कर दिया गया है, जिससे उनके आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है। स्थिति इतनी गंभीर है कि लोग घर से बाहर तक नहीं निकल पा रहे हैं। पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर जिलाधिकारी, अंचलाधिकारी, कमिश्नर, राजस्व मंत्री और यहां तक कि मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि पड़ोसी ने दबंगई दिखाते हुए रास्ते में मिट्टी डाल दी और दीवार तक खड़ी कर दी। वहीं, अंचलाधिकारी द्वारा निरीक्षण किए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। भूख हड़ताल पर बैठे परिवारों में सहदेव राम, बनारसी राम, दामोदर राम, कैलाश राम, अशोक राम, कपिल देव राम, भावेश राम, प्रवेश राम, पिंटू राम और परमानंद राम समेत कई लोग शामिल हैं, जो खुद को अपने ही घरों में कैद महसूस कर रहे हैं। दूसरी ओर, दूसरे पक्ष का कहना है कि अगर उन्हें आगे से जमीन दी जाती है, तभी वे रास्ता देने को तैयार होंगे। बताया जा रहा है कि यह मामला पुरानी रंजिश से भी जुड़ा हुआ है, जहां छोटी-छोटी कहासुनी ने अब बड़ा विवाद का रूप ले लिया है। फिलहाल, प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि जल्द से जल्द इस विवाद का समाधान कर पीड़ित परिवारों को राहत दिलाई जाए।1
- Post by Sharvan Kumar1
- Post by मिथिलेश कुमार1
- सुपौल में चक्रवाती तूफान और आकाशीय बिजली का कहर, किसानों की फसल तबाह, घर उजड़े, सड़कों पर पेड़ गिरने से आवागमन ठप बुधवार की रात आए चक्रवाती तूफान और आकाशीय बिजली ने सुपौल नगर परिषद क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। इस आपदा से किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं, वहीं आम लोगों के घरों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। तेज हवा और बारिश के कारण कई जगहों पर भारी-भरकम पेड़ मुख्य सड़कों पर गिर गए, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। नगर परिषद के लगभग सभी वार्ड इस तूफान की चपेट में आए हैं। कई परिवारों के आशियाने उजड़ गए, जिससे लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं। वार्ड नंबर 17 में आकाशीय बिजली गिरने से एक मकान की छत की रेलिंग टूटकर दूसरे घर पर जा गिरी, जिससे उस मकान को काफी क्षति हुई। राहत की बात यह रही कि घटना के समय घर में कोई मौजूद नहीं था, जिससे जनहानि टल गई, हालांकि सामान का भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा वार्ड नंबर 22 और 23 में भी कई घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। प्रभावित परिवार अब सरकार और प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। स्थानीय पार्षद प्रतिनिधि विजय राम ने बताया कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है और उन्होंने जिला प्रशासन, नगर परिषद तथा अनुमंडल पदाधिकारी से जल्द से जल्द मुआवजा देने की मांग की है, ताकि प्रभावित लोग फिर से अपने जीवन को पटरी पर ला सकें। इधर, कोसी रोड पर सड़क के बीचों-बीच पेड़ गिर जाने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द रास्ता साफ कराने और राहत कार्य शुरू करने की मांग की है। फिलहाल, पूरे इलाके में लोग नुकसान का आकलन कर रहे हैं और प्रशासन से त्वरित सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं।4
- कोशी का कटाव और बाढ़ की त्रासदी झेलने वाले नवहट्टा प्रखंड के लोगों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। ग्राम पंचायत- हाटी के एराजी कठुआर गांव को अब कोशी की लहरों से डरने की जरूरत नहीं है।जिन्हें पूरा इलाका प्यार से "कोशी का कोहिनूर" कहता है, उन माननीय सांसद श्री दिनेश चंद्र यादव के अथक प्रयासों ने एक बार फिर रंग दिखाया है। जनता की पुकार को सुनते हुए, उन्होंने सरकार और विभाग के साथ निरंतर समन्वय किया, ताकि इस गांव को नक्शे से मिटने से बचाया जा सके।स्थानीय ग्रामीणों में इस कार्य को लेकर भारी उत्साह है। लोगों का कहना है कि सांसद महोदय के इस संवेदनशील निर्णय से न केवल उनके घर बचेंगे, बल्कि उनकी खेती और भविष्य भी सुरक्षित होगा।विकास की इस लहर और सुरक्षा के इस कवच के लिए पूरा हाटी पंचायत सांसद दिनेश चंद्र यादव जी का आभार प्रकट कर रहा है। कोशी के इस क्षेत्र में अब डर नहीं, बल्कि विकास की गूंज सुनाई देगी।1
- “आपकी एक छोटी सी खबर, किसी परिवार की बिखरी दुनिया को फिर से जोड़ सकती है…”95726688051
- मधेपुरा मुख्यालय से सटे साहुगढ़ में शनिवार को एक महत्वपूर्ण पुल धंस जाने से साहुगढ़, भेलवा, घैलाढ़ समेत दर्जनों गांवों का संपर्क मधेपुरा से टूट गया। बताया जाता है कि यह पुल करीब 60 वर्ष पुराना था और काफी दिनों से जर्जर स्थिति में था। घटना के संबंध में सहायक अभियंता पुनेश्वर यादव ने बताया कि पुल पर पूर्व से ही भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाई गई थी। इसके बावजूद शुक्रवार की रात एक भारी वाहन के गुजरने से पुल पूरी तरह ध्वस्त हो गया। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम संतोष कुमार एवं ट्रैफिक डीएसपी चेतनानंद झा मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन द्वारा आवागमन बहाल करने के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की कवायद शुरू कर दी गई है। इधर, अभियंत्रण विभाग के अनुसार पुल के समीप ही नए पुल का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जहां फिलहाल पिलर निर्माण का कार्य किया जा रहा है। विभाग का कहना है कि नए पुल के निर्माण पूर्ण होने के बाद क्षेत्र की समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा। पुल ध्वस्त होने के बाद पुलिस प्रशासन ने मौके पर बैरिकेडिंग कर यातायात को पूरी तरह रोक दिया है। साथ ही, अस्थायी डायवर्जन निर्माण का कार्य भी तेजी से कराया जा रहा है, ताकि लोगों को आवागमन में कठिनाई न हो। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पुल की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार विभाग को अवगत कराया गया था, लेकिन समय रहते मरम्मत नहीं होने के कारण यह घटना घटी। फिलहाल क्षेत्र में आवागमन बाधित है और लोग वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेने को विवश हैं।4
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