नर्मदापुरम में मिलावटी मावा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 650 किलो मावा जप्त पुराने बस स्टैंड पर बस की डिक्की से 13 बोरियों में मिला मावा, बिना बिल के भोपाल से लाया गया था माल जांच के लिए नमूने भेजे गए नर्मदापुरम, 25 अगस्त 2026 त्योहारों के मद्देनजर नर्मदापुरम जिले में दूध एवं दुग्ध उत्पादों में मिलावट रोकने के लिए जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत मंगलवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 650 किलोग्राम मावा जप्त किया है। यह मावा नर्मदापुरम के पुराने बस स्टैंड पर एक यात्री बस की डिक्की से बरामद हुआ। व्यापारी के पास मावा से संबंधित कोई बिल या वैध दस्तावेज नहीं मिला। प्रशासन के अनुसार नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा के निर्देश पर जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री देवेन्द्र सिंह के निर्देशन में जिला प्रशासन एवं खाद्य सुरक्षा प्रशासन की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर पुराने बस स्टैंड पर कार्रवाई की। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने पुराने बस स्टैंड, नर्मदापुरम पर कटियार बस क्रमांक MP04 PA 3120 को रोककर उसकी जांच की। जांच के दौरान बस की डिक्की में 13 बोरियां मिलीं, जिनमें बड़ी मात्रा में मावा भरा हुआ था। मौके पर अतिरिक्त तहसीलदार डॉक्टर सुरेखा यादव एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री कमलेश एस दियावार ने मावे को बस से उतरवाकर उसका निरीक्षण किया। तौल और जांच के बाद कुल 650 किलोग्राम मावा पाया गया। पूछताछ के दौरान सामने आया कि यह मावा फूल सिंह यादव का है। व्यापारी ने बताया कि मावा भोपाल से मंगवाया गया था, लेकिन उसके पास मावे की खरीद से संबंधित बिल उपलब्ध नहीं था। बिल नहीं होने और मावे की गुणवत्ता को लेकर संदेह उत्पन्न होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई की। खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा मावे के नमूने जांच के लिए लिए गए हैं। इसके बाद संपूर्ण 650 किलोग्राम मावा जब्त कर कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखवाया गया, ताकि जांच पूरी होने तक उसकी गुणवत्ता एवं स्थिति सुरक्षित रहे। प्रशासन द्वारा संबंधित व्यापारी को नोटिस जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। साथ ही मावा भोपाल से भेजने वाले व्यक्ति अथवा फर्म के संबंध में भी जानकारी जुटाकर विवेचना की जा रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने नर्मदापुरम शहर में भी खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की। चक्कर रोड स्थित ब्रजवासी स्वीट्स की जांच के दौरान मावा और मीठा मावा के दो नमूने जांच के लिए लिए गए। इन नमूनों को भी नियमानुसार प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा जा रहा है। मिलावट के खिलाफ अभियान केवल नर्मदापुरम शहर तक सीमित नहीं रहा। सिवनी मालवा में अनुविभागीय अधिकारी श्री विजय राय के निर्देशन में राजस्व एवं खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने विभिन्न मिठाई निर्माण केंद्रों और दुकानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान साईं स्वीट्स, बानापुरा तथा ओम राजस्थान मिष्ठान भंडार, बानापुरा सहित अन्य प्रतिष्ठानों से खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए। ओम राजस्थान मिष्ठान भंडार से मिल्क केक और बर्फी के नमूने लिए गए। वहीं राजस्थान मिष्ठान भंडार, गीता टॉकीज के पास स्थित कारखाने से मिल्क केक, पाइनएप्पल बर्फी, चॉकलेट बर्फी और अंजीर बर्फी के नमूने लिए गए। इसके अलावा रितेश ट्रेडर्स से पैक्ड घी का नमूना भी जांच के लिए लिया गया। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री जितेंद्र सिंह राणा एवं नायब तहसीलदार श्रीमती कीर्ति प्रधान की टीम द्वारा की गई। खाद्य सुरक्षा विभाग की एक अन्य टीम ने पिपरिया में भी खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की। खाद्य सुरक्षा अधिकारी बीएस धाकड़ द्वारा सपना स्वीट से मावा और गुलकंद बर्फी के दो नमूने लिए गए। इसके अलावा बीकानेर स्वीट से मावा, रसगुल्ला और मोतीचूर लड्डू के कुल पांच नमूने जांच के लिए लिए गए। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से लिए गए सभी खाद्य पदार्थों के नमूने नियमानुसार राज्य खाद्य प्रयोगशाला, भोपाल भेजे जा रहे हैं। प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के आधार पर संबंधित दुकानदारों, निर्माताओं अथवा आपूर्तिकर्ताओं के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आगामी त्योहारों को देखते हुए जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। खास तौर पर दूध, मावा, मिठाई, दुग्ध उत्पाद और घी में मिलावट रोकने के लिए सघन जांच अभियान लगातार जारी रहेगा। प्रशासन की इस कार्रवाई से खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाले कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध दस्तावेज खाद्य सामग्री का परिवहन करने तथा मिलावटी या अमानक खाद्य पदार्थों का निर्माण एवं विक्रय करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। NDPM NEWS twenty four नर्मदापुरम की खास रिपोर्ट
नर्मदापुरम में मिलावटी मावा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 650 किलो मावा जप्त पुराने बस स्टैंड पर बस की डिक्की से 13 बोरियों में मिला मावा, बिना बिल के भोपाल से लाया गया था माल जांच के लिए नमूने भेजे गए नर्मदापुरम, 25 अगस्त 2026 त्योहारों के मद्देनजर नर्मदापुरम जिले में दूध एवं दुग्ध उत्पादों में मिलावट रोकने के लिए जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत मंगलवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 650 किलोग्राम मावा जप्त किया है। यह मावा नर्मदापुरम के पुराने बस स्टैंड पर एक यात्री बस की डिक्की से बरामद हुआ। व्यापारी के पास मावा से संबंधित कोई बिल या वैध दस्तावेज नहीं मिला। प्रशासन के अनुसार नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा के निर्देश पर जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री देवेन्द्र सिंह के निर्देशन में जिला प्रशासन एवं खाद्य सुरक्षा प्रशासन की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर पुराने बस स्टैंड पर कार्रवाई की। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने पुराने बस स्टैंड, नर्मदापुरम पर कटियार बस क्रमांक MP04 PA 3120 को रोककर उसकी जांच की। जांच के दौरान बस की डिक्की में 13 बोरियां मिलीं, जिनमें बड़ी मात्रा में मावा भरा हुआ था। मौके पर अतिरिक्त तहसीलदार डॉक्टर सुरेखा यादव एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री कमलेश एस दियावार ने मावे को बस से उतरवाकर उसका निरीक्षण किया। तौल और जांच के बाद कुल 650 किलोग्राम मावा पाया गया। पूछताछ के दौरान सामने आया कि यह मावा फूल सिंह यादव का है। व्यापारी ने बताया कि मावा भोपाल से मंगवाया गया था, लेकिन उसके पास मावे की खरीद से संबंधित बिल उपलब्ध नहीं था। बिल नहीं होने और मावे की गुणवत्ता को लेकर संदेह उत्पन्न होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई की। खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा मावे के नमूने जांच के लिए लिए गए हैं। इसके बाद संपूर्ण 650 किलोग्राम मावा जब्त कर कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखवाया गया, ताकि जांच पूरी होने तक उसकी गुणवत्ता एवं स्थिति सुरक्षित रहे। प्रशासन द्वारा संबंधित व्यापारी को नोटिस जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। साथ ही मावा भोपाल से भेजने वाले व्यक्ति अथवा फर्म के संबंध में भी जानकारी जुटाकर विवेचना की जा रही
है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने नर्मदापुरम शहर में भी खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की। चक्कर रोड स्थित ब्रजवासी स्वीट्स की जांच के दौरान मावा और मीठा मावा के दो नमूने जांच के लिए लिए गए। इन नमूनों को भी नियमानुसार प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा जा रहा है। मिलावट के खिलाफ अभियान केवल नर्मदापुरम शहर तक सीमित नहीं रहा। सिवनी मालवा में अनुविभागीय अधिकारी श्री विजय राय के निर्देशन में राजस्व एवं खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने विभिन्न मिठाई निर्माण केंद्रों और दुकानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान साईं स्वीट्स, बानापुरा तथा ओम राजस्थान मिष्ठान भंडार, बानापुरा सहित अन्य प्रतिष्ठानों से खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए। ओम राजस्थान मिष्ठान भंडार से मिल्क केक और बर्फी के नमूने लिए गए। वहीं राजस्थान मिष्ठान भंडार, गीता टॉकीज के पास स्थित कारखाने से मिल्क केक, पाइनएप्पल बर्फी, चॉकलेट बर्फी और अंजीर बर्फी के नमूने लिए गए। इसके अलावा रितेश ट्रेडर्स से पैक्ड घी का नमूना भी जांच के लिए लिया गया। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री जितेंद्र सिंह राणा एवं नायब तहसीलदार श्रीमती कीर्ति प्रधान की टीम द्वारा की गई। खाद्य सुरक्षा विभाग की एक अन्य टीम ने पिपरिया में भी खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की। खाद्य सुरक्षा अधिकारी बीएस धाकड़ द्वारा सपना स्वीट से मावा और गुलकंद बर्फी के दो नमूने लिए गए। इसके अलावा बीकानेर स्वीट से मावा, रसगुल्ला और मोतीचूर लड्डू के कुल पांच नमूने जांच के लिए लिए गए। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से लिए गए सभी खाद्य पदार्थों के नमूने नियमानुसार राज्य खाद्य प्रयोगशाला, भोपाल भेजे जा रहे हैं। प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के आधार पर संबंधित दुकानदारों, निर्माताओं अथवा आपूर्तिकर्ताओं के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आगामी त्योहारों को देखते हुए जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। खास तौर पर दूध, मावा, मिठाई, दुग्ध उत्पाद और घी में मिलावट रोकने के लिए सघन जांच अभियान लगातार जारी रहेगा। प्रशासन की इस कार्रवाई से खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाले कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध दस्तावेज खाद्य सामग्री का परिवहन करने तथा मिलावटी या अमानक खाद्य पदार्थों का निर्माण एवं विक्रय करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। NDPM NEWS twenty four नर्मदापुरम की खास रिपोर्ट
- नर्मदापुरम में त्योहारों के मद्देनजर खाद्य पदार्थों की सघन जांच, 126 नमूने लिए नर्मदापुरम त्योहारों के मद्देनजर दूध एवं दुग्ध उत्पादों में मिलावट की रोकथाम के लिए खाद्य सुरक्षा प्रशासन द्वारा जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा के निर्देश पर बीते एक माह में दुकानों, एजेंसियों, बसों एवं अन्य परिवहन साधनों का सघन एवं औचक निरीक्षण किया गया। अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों बीएस धाकड़, जितेंद्र सिंह राणा एवं कमलेश एस दियावार ने संदेह के आधार पर घी, मिठाई, सोनपापड़ी, रसगुल्ला, बेसन, सोयाबीन तेल और नमकीन सहित विभिन्न खाद्य पदार्थों के 126 नमूने लिए। सभी नमूनों को परीक्षण के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई प्रस्तावित की जा रही है। निरीक्षण के दौरान जनहित में बड़ी मात्रा में संदिग्ध खाद्य पदार्थ जब्त किए गए। कार्रवाई में 1,426 किलोग्राम घी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 7 लाख 30 हजार रुपये, तथा 42 किलोग्राम पनीर, जिसकी कीमत करीब 12 हजार रुपये, जब्त किया गया। वहीं कटियार बस से 650 किलोग्राम खोया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 2 लाख रुपये है, भी जब्त किया गया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी कमलेश एस दियावार ने बताया कि विभाग को प्राप्त जांच रिपोर्ट में नंद कृष्णा घी, संगाथ घी एवं ब्रजवासी घी के नमूने जांच में असुरक्षित एवं मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए गए हैं। संबंधित विक्रेताओं एवं निर्माताओं को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। इन उत्पादों के संबंध में नियमानुसार प्रतिबंधात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जा रही है। खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने कहा है कि त्योहारों को देखते हुए खाद्य पदार्थों की जांच का अभियान लगातार जारी रहेगा। विशेष रूप से दूध, दुग्ध उत्पाद एवं घी की नियमित जांच की जाएगी। मिलावट पाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। NDPM NEWS twenty four नर्मदापुरम खास रिपोर्ट1
- गाड़ी विभाग में लगी है तो हिसाब भी विभाग का होगा! प्राइवेट बोलेरो पर ‘मध्य प्रदेश शासन’, रात में ड्राइवर के हाथों दौड़ती गाड़ी ने खोली जल संसाधन विभाग की वाहन व्यवस्था की पोल! रितिक जैन पत्रकार बाड़ी, रायसेन। जल संसाधन विभाग बाड़ी की वाहन व्यवस्था को लेकर अब सवाल और भी गंभीर हो गए हैं। मामला बोलेरो वाहन क्रमांक MP 04 TB 2393 का है। वाहन निजी स्वामित्व का है, लेकिन वह सरकारी अनुबंध के तहत जल संसाधन/सिंचाई विभाग में लगाया गया है। वाहन पर बड़े अक्षरों में “मध्य प्रदेश शासन” लिखा हुआ है और 27 अगस्त की शाम करीब 7:30 बजे बाड़ी बस स्टैंड के आसपास इसे ड्राइवर द्वारा चलाते हुए देखा गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उस समय एसडीओ वाहन में मौजूद नहीं थीं। यानी सरकारी अनुबंध पर विभाग में लगा निजी वाहन अधिकारी की गैरमौजूदगी में ड्राइवर के हाथों सड़कों पर दौड़ रहा था। अब सवाल केवल इतना नहीं कि गाड़ी कहां गई। सवाल यह है कि सरकारी अनुबंध पर लगी निजी गाड़ी का उपयोग किस आदेश, किस काम और किस रिकॉर्ड के आधार पर किया जा रहा है? --- सरकारी अनुबंध है तो नियम और रिकॉर्ड भी होंगे यह बात स्पष्ट है कि निजी वाहन को सरकारी विभाग में अनुबंध के आधार पर लगाया जा सकता है। लेकिन जैसे ही कोई निजी वाहन सरकारी अनुबंध का हिस्सा बनता है, उसके उपयोग, चालक, ड्यूटी, भुगतान और निर्धारित शासकीय कार्य से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो जाते हैं। ऐसे में MP 04 TB 2393 को लेकर विभाग को यह बताना होगा कि वाहन किस आदेश के तहत लगाया गया है, उसकी अनुबंध अवधि क्या है और वाहन के उपयोग की निर्धारित शर्तें क्या हैं। यदि विभाग वाहन का किराया सरकारी मद से चुका रहा है, तो फिर सरकारी पैसे से चलने वाली गाड़ी के हर किलोमीटर का हिसाब भी विभागीय रिकॉर्ड में होना चाहिए। --- रात साढ़े सात बजे बस स्टैंड पर गाड़ी—अधिकारी कहां थीं? 27 अगस्त की शाम करीब 7:30 बजे बाड़ी बस स्टैंड के आसपास वाहन की मौजूदगी ने मामले को नया मोड़ दे दिया। वाहन में एसडीओ मौजूद नहीं थीं। स्टीयरिंग ड्राइवर के हाथ में थी। अब सीधा सवाल है—अगर वाहन एसडीओ के उपयोग के लिए विभाग में अनुबंधित है, तो अधिकारी की गैरमौजूदगी में ड्राइवर वाहन लेकर किस काम से निकला था? क्या वह विभागीय ड्यूटी पर था? अगर हां, तो उस ड्यूटी का आदेश कहां है? क्या लॉगबुक में उस समय की यात्रा दर्ज है? कहां से कहां तक वाहन गया? किस अधिकारी के निर्देश पर गया? और उस यात्रा का शासकीय उद्देश्य क्या था? --- ड्राइवर का जवाब बना सबसे बड़ा सवाल जब वाहन के ड्राइवर से इस संबंध में सवाल किया गया तो उसका जवाब था— “वो तो हट गई है, ये भी निकालना है।” यहीं से मामले में सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है। अगर ड्राइवर का इशारा विभागीय अटैचमेंट या वाहन की स्थिति की ओर था, तो आखिर “हट गई” का मतलब क्या है? क्या वाहन विभागीय अनुबंध से हट चुका है? अगर नहीं हटा है तो ऐसी बात क्यों कही गई? और अगर हट चुका है तो फिर सरकारी अनुबंध के तहत लगी गाड़ी की स्थिति क्या है? सबसे बड़ा सवाल— अगर गाड़ी हट गई तो ‘मध्य प्रदेश शासन’ क्यों नहीं हटा? --- सरकारी पहचान लगी है तो जवाबदेही भी तय होगी वाहन निजी है, लेकिन उस पर “मध्य प्रदेश शासन” लिखा हुआ है। सरकारी अनुबंध के तहत वाहन का उपयोग हो रहा है तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वाहन पर यह पहचान किस प्रावधान/अनुमति के तहत प्रदर्शित की जा रही है और अनुबंध समाप्त होने की स्थिति में इसे हटाने की जिम्मेदारी किसकी है। क्योंकि सड़क पर चलने वाला ऐसा वाहन आम नागरिक को सरकारी वाहन जैसा दिखाई देता है। इसलिए यह सिर्फ लिखावट का मामला नहीं है। यह सरकारी पहचान, विभागीय नियंत्रण और वाहन के अधिकृत उपयोग का सवाल है। --- अवैध गतिविधियों की आशंका पर भी जांच क्यों जरूरी? इस मामले में अभी किसी अवैध गतिविधि का प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए किसी व्यक्ति या वाहन पर अवैध काम का सीधा आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन सवाल यह जरूर है कि सरकारी पहचान वाले अनुबंधित वाहन का उपयोग निर्धारित शासकीय कार्यों से बाहर तो नहीं हो रहा? यदि वाहन रात में अधिकारी की गैरमौजूदगी में घूम रहा है, तो विभागीय रिकॉर्ड से यह जांचना जरूरी है कि वह किस काम पर था। क्योंकि यदि वाहन सरकारी अनुबंध पर है और उसके किराये का भुगतान सरकारी धन से होता है, तो उसके उपयोग का उद्देश्य भी शासकीय कार्य से संबंधित और रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए। --- ईई के जवाब से भी नहीं थमा मामला जब इस मामले को लेकर जल संसाधन विभाग बाड़ी के कार्यपालन यंत्री (ईई) से बातचीत कर जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कहा कि वे कार्यालय से जानकारी लेकर बताएंगे। अब यही जवाब कई सवाल छोड़ गया है। अगर वाहन विभाग के अनुबंध में है तो उसकी जानकारी विभागीय रिकॉर्ड में होनी चाहिए। अनुबंध है तो उसकी प्रति सामने आए। ड्यूटी है तो आदेश सामने आए। यात्रा है तो लॉगबुक सामने आए। भुगतान है तो बिल सामने आए। मामला जितना सीधा है, जवाब भी उतना ही सीधा होना चाहिए। --- सरकारी खजाने से भुगतान, तो हर किलोमीटर का हिसाब अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल सरकारी भुगतान का है। यदि MP 04 TB 2393 को जल संसाधन विभाग में अनुबंध के तहत लगाया गया है और उसके बदले सरकारी खजाने से प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है, तो विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि— वाहन का मासिक किराया कितना है? भुगतान किस मद से होता है? भुगतान किस अवधि से किया जा रहा है? वाहन की ड्यूटी किस अधिकारी के लिए निर्धारित है? प्रतिदिन कितने किलोमीटर चलने की अनुमति है? ईंधन का खर्च किसके जिम्मे है? लॉगबुक कौन प्रमाणित करता है? महीने के बिल का सत्यापन कौन करता है? वाहन के उपयोग की निगरानी कौन करता है? इन सवालों के जवाब आने के बाद ही पता चलेगा कि वाहन व्यवस्था वास्तव में कितनी पारदर्शी है। --- अब जांच सिर्फ गाड़ी की नहीं, पूरे रिकॉर्ड की होनी चाहिए मामले में केवल सड़क पर वाहन देखने से निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं होगा। वास्तविक जांच के लिए विभागीय दस्तावेज खंगालने होंगे। जांच के दायरे में होना चाहिए— 1. अनुबंध MP 04 TB 2393 किस निविदा/अनुबंध के तहत विभाग में लगा है? 2. अनुबंध अवधि वाहन की अनुबंध अवधि कब शुरू हुई और कब समाप्त होगी? 3. अधिकृत उपयोग वाहन किस अधिकारी अथवा कार्यालय के उपयोग के लिए निर्धारित है? 4. लॉगबुक 27 अगस्त की पूरी लॉगबुक और वाहन मूवमेंट रिकॉर्ड की जांच हो। 5. ड्राइवर ड्राइवर की नियुक्ति, अधिकृत ड्यूटी और उसे वाहन चलाने के निर्देश की जानकारी सामने आए। 6. भुगतान अब तक वाहन मालिक को सरकारी खजाने से कितना भुगतान किया गया? 7. वाहन की पहचान निजी वाहन पर “मध्य प्रदेश शासन” लिखने की अनुमति किस आधार पर है? 8. रात की ड्यूटी 27 अगस्त को शाम 7:30 बजे वाहन किस शासकीय कार्य पर था? 9. अधिकारी की मौजूदगी उस समय अधिकारी वाहन में क्यों मौजूद नहीं थीं और ड्राइवर किस निर्देश पर वाहन चला रहा था? 10. अनुबंध की शर्तें क्या वाहन का उपयोग केवल निर्धारित शासकीय कार्य के लिए किया जा सकता है और क्या उसके बाहर उपयोग की कोई अनुमति है? --- आरटीओ और विभागीय अधिकारियों के लिए भी सवाल मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग के स्तर पर भी वाहन के दस्तावेज और उसकी श्रेणी की स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। वहीं जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को यह देखना चाहिए कि अनुबंधित वाहन वास्तव में निर्धारित शर्तों के अनुसार ही संचालित हो रहा है या नहीं। अगर सब कुछ नियमों के तहत है तो विभाग के पास जवाब देने के लिए पर्याप्त दस्तावेज होने चाहिए। लेकिन यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर निकलता है तो फिर जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। --- “सरकारी” लिख देने से कोई वाहन सरकारी नहीं हो जाता—लेकिन सवाल जरूर पैदा होते हैं यहां एक महत्वपूर्ण बात भी साफ होना जरूरी है। किसी निजी वाहन का सरकारी विभाग के साथ अनुबंधित होना उसे स्वामित्व की दृष्टि से सरकारी वाहन नहीं बना देता। इसलिए “प्राइवेट नंबर” और “सरकारी अनुबंध” दोनों एक साथ होना संभव है। लेकिन जब उसी वाहन पर “मध्य प्रदेश शासन” लिखा हो, तब उसकी अनुमति और उपयोग की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है। यही इस खबर का मूल सवाल है। --- अब जवाबदेही तय करने का समय मामला किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने का नहीं है। मामला है सरकारी अनुबंध पर चल रहे वाहन के उपयोग और सरकारी पहचान की पारदर्शिता का। वीडियो में वाहन दिखाई देता है। समय करीब 7:30 बजे शाम का है। वाहन ड्राइवर चला रहा है। एसडीओ वाहन में मौजूद नहीं थीं। ड्राइवर से पूछताछ हुई। उसका जवाब सामने आया— “वो तो हट गई है, ये भी निकालना है।” और विभाग के ईई ने कार्यालय से जानकारी लेकर जवाब देने की बात कही। अब इससे आगे की कहानी दस्तावेज बताएंगे। --- सबसे बड़ा सवाल फिर वही— “अगर गाड़ी विभाग से हट गई है तो ‘मध्य प्रदेश शासन’ क्यों नहीं हटा?” और अगर गाड़ी अभी भी सरकारी अनुबंध पर विभाग में लगी है तो— “27 अगस्त की शाम 7:30 बजे एसडीओ की गैरमौजूदगी में ड्राइवर उसे किस शासकीय काम से चला रहा था?” अब नजर जल संसाधन विभाग के आधिकारिक जवाब, अनुबंध की शर्तों, वाहन की लॉगबुक और भुगतान रिकॉर्ड पर है। क्योंकि सरकारी अनुबंध पर लगी प्राइवेट बोलेरो हो सकती है, लेकिन सरकारी पैसे और सरकारी पहचान से जुड़े वाहन का हिसाब भी उतना ही साफ होना चाहिए। बाड़ी में उठे ये सवाल अब केवल एक बोलेरो तक सीमित नहीं हैं—ये सवाल जल संसाधन विभाग की पूरी वाहन व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी पर हैं।3
- रक्षाबंधन पर अनोखी पहल, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ ‘बाघ रक्षा सूत्र अभियान’ रक्षाबंधन पर अनोखी पहल, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ ‘बाघ रक्षा सूत्र अभियान’ रक्षाबंधन के अवसर पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व द्वारा ‘बाघ रक्षा सूत्र अभियान’ शुरू किया गया है। 27 से 29 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान में बाघों और वन्यजीवों के संरक्षण का संकल्प दिलाया जा रहा है।आज गुरुवार को पहले दिनदोपहर बाद 12 बजे पीएम श्री हायर सेकेंडरी स्कूल कामती के 450, बागड़ा के 275 छात्र-छात्राओं सहित ग्राम सारंगपुर में 50 गाइड, जिप्सी चालकों और पर्यटकों को बाघ रक्षा सूत्र बांधकर बाघों की सुरक्षा का संकल्प दिलाया गया।अभियान के तहत तीन दिनों में करीब 11 हजार ग्रामीणों, विद्यार्थियों और आमजन को जागरूक करने का लक्ष्य रखा गया है।1
- पितृ स्मृति को सेवा से जोड़ा,, जरूरतमंदों को भी कराए गए स्वादिष्ट भोजन- सोहागपुर (नर्मदापुरम) "मारूपुरा निवासी की अनुकरणीय पहल" रामप्रसाद वार्ड (मारूपुरा) निवासी श्री शैलेंद्र कपरिया जी ने मानवता की मिसाल पेश की है। आज उन्होंने अपने पूज्य पिताजी, वन विभाग में रेंजर के पद पर सेवाएं दे चुके स्वर्गीय श्री ओमप्रकाश जी कपरिया की गंगाजली पूजन एवं 13वीं के अवसर पर अपने निजी कार्यक्रम के साथ-साथ सामाजिक दायित्व का भी निर्वहन किया। इस अवसर पर उन्होंने राम रहीम रोटी बैंक, सोहागपुर में माँ नर्मदा के परिक्रमावासियों, बेघर, बेसहारा एवं जरूरतमंद लोगों के लिए प्रेमपूर्वक स्वादिष्ट भोजन भिजवाकर सच्चे अर्थों में पुण्य लाभ अर्जित किया। यह कार्य इस बात का प्रतीक है कि हमारे बुजुर्गों की सच्ची श्रद्धांजलि भूखे को भोजन कराने से बढ़कर कुछ नहीं। स्व. ओमप्रकाश जी कपरिया को भावभीनी श्रद्धांजलि एवं शैलेंद्र जी के इस पुनीत सेवा कार्य को हृदय से साधुवाद।🙏1
- कोलार की धड़कन न्यूज कांग्रेस कार्यकर्ताओं का महंगाई के खिलाफ सामूहिक विरोध प्रदर्शन कोलार ब्लॉक कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा *कांग्रेस कार्यकर्ताओं का महंगाई के खिलाफ कोलार मे मंदाकिनी चौराहे पर कोलार ब्लॉक कांग्रेस का अनूठा प्रदर्शन* *मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर आज जिला कांग्रेस कमेटी भोपाल शहर के कोलार ब्लॉक कांग्रेस कमेटी द्वारा कोलार मे मंदाकिनी चौराहे पर बढ़ती महंगाई के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी भोपाल शहर अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना और कोलार ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राहुल सिंह राठौर के नेतृत्व में जोरदार एवं अनूठा प्रदर्शन किया गया. महंगाई के विरोध के कोलार ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के इस प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने चूल्हा जलाया,कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने गैस सिलेंडर को माला पहनाई और बाइक पर चादर ओढ़ाकर फूल डाले एवं आमजनता को राखी और चीनी बाँटकर सखी सैंया तो बहुत ही कमाल है महंगाई डायन खाए जात का गायन किया.. कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने शक़्कर बांटकर आमजनता को बताया कि चीनी के दाम ₹70 प्रति किलो से अधिक हो गए हैं, पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस की बढ़ती कीमतों ने रक्षाबंधन पर आम परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है.प्रदर्शन मे दौरान मुख्य रूप से जिला कांग्रेस भोपाल शहर अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, कोलार ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राहुल सिंह राठौड़,जिला कांग्रेस संगठन महामंत्री श्री अभिषेक शर्मा जी,वरिष्ठ नेता श्री सुखलाल ठाकुर जी,प्रदेश कांग्रेस सचिव राजकुमार सिंह,नयापुरा उप ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष श्री अमित मीणा जी, महिला कांग्रेस प्रदेश महासचिव सुश्री महक राणा जी, जिला कांग्रेस महामंत्री योगेश सराठे,नितिन राजोरिया, गायत्री प्रसाद शर्मा, रत्ना ताई, चम्पालाल मीना,बबलू खान,मुबीना बीउषा कटारिया,गुड्डू मनोहर,सुजीत पांडा, प्रवीण वर्मा, सोनू जैन, रमेश कटारिया,सुनील पाटिल, दीपक चार्वे, अनिल दुबे, विजय वर्मा, रिंकू यादव, राजवीर सिंह राजपूत सहित मंडलम अध्यक्षगण, कांग्रेस पदाधिकारी,बड़ी संख्या मे महिलाए एवं कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।* *कोलार ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल सिंह राठौड़ ने कहा कि आम जनता की आवाज को मजबूती से उठाना कांग्रेस की जिम्मेदारी है, आज आज राखी के त्योहार पर भी आम जनता बुरी तरह महंगाई से परेशान है और घर-घर में यह नारा गूंज रहा है कि सखी सैंया तो बहुत ही कमाते हैं महंगाई डायन खाए जात है इसलिए महंगाई के खिलाफ यह संघर्ष जनहित में निरंतर जारी रहेगा* न्यूज कोलार की धड़कन4
- इटारसी में लापरवाही चरम पर! गुरुनानक दालमील रोड पर कचरे का ढेर और गिरा हुआ बोर्ड खोल रहा सिस्टम की पोल 🚨 📝 Description (डिस्क्रिप्शन): इटारसी अपडेट की कड़क और तीखी खबरें! एक तरफ गुरुनानक दालमील रोड पर सफाई कर्मचारी सड़क तो साफ करते हैं लेकिन कचरा उठाना भूल जाते हैं, जिससे आवारा मवेशी गंदगी फैला रहे हैं। जनता और नगरपालिका से अपील है कि व्यवस्था सुधारे। वहीं दूसरी तरफ, महीने भर से तेज आंधी में गिरा हुआ दिशा सूचक बोर्ड आज भी ज़मीन पर लावारिस हालत में पड़ा है, जिसपर जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान तक नहीं जा रहा। नगरपालिका और संबंधित विभाग आखिर कब जागेगा? देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट। #️⃣ Hashtags (हैशटैग्स): #ItarsiUpdate #ItarsiNews #NagarpalikaItarsi #MadhyaPradeshNews #Itarsi #PublicIssues #LocalNews #CleaningDrive #Governance #ItarsiUpdates इटारसी में लापरवाही चरम पर! गुरुनानक दालमील रोड पर कचरे का ढेर और गिरा हुआ बोर्ड खोल रहा सिस्टम की पोल 🚨 📝 Description (डिस्क्रिप्शन): इटारसी अपडेट की कड़क और तीखी खबरें! एक तरफ गुरुनानक दालमील रोड पर सफाई कर्मचारी सड़क तो साफ करते हैं लेकिन कचरा उठाना भूल जाते हैं, जिससे आवारा मवेशी गंदगी फैला रहे हैं। जनता और नगरपालिका से अपील है कि व्यवस्था सुधारे। वहीं दूसरी तरफ, महीने भर से तेज आंधी में गिरा हुआ दिशा सूचक बोर्ड आज भी ज़मीन पर लावारिस हालत में पड़ा है, जिसपर जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान तक नहीं जा रहा। नगरपालिका और संबंधित विभाग आखिर कब जागेगा? देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट। #️⃣ Hashtags (हैशटैग्स): #ItarsiUpdate #ItarsiNews #NagarpalikaItarsi #MadhyaPradeshNews #Itarsi #PublicIssues #LocalNews #CleaningDrive #Governance #ItarsiUpdates1
- एमपी के इटारसी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ संदिग्ध फूड पॉइजनिंग के बाद एक ही परिवार की तीन मासूम बहनों की मौत हो गई। यह परिवार मूल रूप से रायपुर (छत्तीसगढ़) का रहने वाला है। इंदौर में दो बच्चियों की मौत के बाद परिजन उनके शव लेकर रायपुर जा रहे थे। तभी रास्ते में तीसरी बेटी आशिष्का की भी हालत अचानक बिगड़ गई। उसे तुरंत इटारसी के सरकारी अस्पताल लाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। एक साथ तीन मासूमों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। #Itarsi #Raipur #Indore #MPNews #BreakingNews #Tragedy #FoodPoisoning #MadhyaPradesh एमपी के इटारसी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ संदिग्ध फूड पॉइजनिंग के बाद एक ही परिवार की तीन मासूम बहनों की मौत हो गई। यह परिवार मूल रूप से रायपुर (छत्तीसगढ़) का रहने वाला है। इंदौर में दो बच्चियों की मौत के बाद परिजन उनके शव लेकर रायपुर जा रहे थे। तभी रास्ते में तीसरी बेटी आशिष्का की भी हालत अचानक बिगड़ गई। उसे तुरंत इटारसी के सरकारी अस्पताल लाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। एक साथ तीन मासूमों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। #Itarsi #Raipur #Indore #MPNews #BreakingNews #Tragedy #FoodPoisoning #MadhyaPradesh1
- भोपाल में पकड़ाया बच्चा चोर लगी पिटाई, मस्जिद रोड के शाहीन अपार्टमेंट के पास हंगामा भोपाल के तलैया थाना क्षेत्र स्थित मस्जिद रोड, शाहीन अपार्टमेंट के पास रहवासियों ने बच्चा चोरी के शक में एक युवक को पकड़कर उसकी पिटाई कर दी। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने युवक को तलैया थाना पुलिस के हवाले कर दिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। #BhopalNews #TalaiyaPolice #CrimeUpdate #BhopalCrime #ViralVideo MobViolence MPNews #getnoticed #growth #reachmore #fyp #explorepage1