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गोंडी गायक चैन शाह धुर्वे जग्गू तबला मास्टर 9009773646
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- कवर्धा कांग्रेस के युवा नेता तुकाराम चंद्रवंशी ने मिडिया के सामने बात करते हुए कहा कि बोड़ला ब्लॉक आकांक्षीय ब्लॉक होने के बावजूद ग्राम पंचायत पंडरीपानी के आश्रित ग्राम सौरू में प्रधानमंत्री की जनमन योजना बैगा बहुल्य क्षेत्र आदिवासी क्षेत्रों में विकास के लिए अरबों और करोड़ों रुपए के आते हैं लेकिन धरातल पर ₹1 का काम भी दिखाई नहीं देता यहां के निवासरत लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।1
- होली से पहले किसानों को एकमुश्त मिलेगा धान का पैसा #cgnews #vishnudevsai #chhattisgarhnews #kisaan1
- UGC Regulation 2026 को लेकर देशभर में जारी बहस और विरोध के बीच आज छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में SC/ST/OBC महासंघ एकता मंच द्वारा आक्रोश रैली निकाली गई। रैली के बाद प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर मुंगेली के माध्यम से राष्ट्रपति, राज्यपाल और भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। बताया जा रहा है कि इस रेगुलेशन को लेकर विभिन्न वर्गों में मतभेद हैं और मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी प्रस्तावित है। इस वीडियो में देखें रैली, लोगों की प्रतिक्रिया और पूरा घटनाक्रम।1
- शहडोल ब्यौहारी से दुर्गेश कुमार गुप्ता1
- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बच्चे न होने के विवाद में पति ने पत्नी को मार डाला। आरोपी ने फावड़े से हमला कर पत्नी की हत्या कर दी और फरार हो गया। पुलिस द्वारा आरोपी को गिरफ्तार लिया गया है।जानकारी के मुताबिक, करीब 18 साल पहले गायत्री बस्ती में रहने वाले तुलसी यादवकी शादी रंजना यादव से हुई थी। लेकिन दंपती को अब तक संतान नहीं हुई थी। इसके अलावा पति पत्नी के कैरेक्टर पर भी शक करता था।जांच में सामने आया है कि संतान न होने और चरित्र पर संदेह को लेकर दंपती के बीच अक्सर विवाद होता था। घटना वाली शाम भी पति-पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। इसके बाद गुस्साए पति ने फावड़े से पत्नी के सिर पर चेहरे पर हमला दिया।दरअसल, तुलसी यादव पेशे से किसान है। पत्नी रंजना यादव और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ ढेलवाडीह गायत्री बस्ती में रहता है। शादी के 18 साल बाद भी दोनों की संतान नहीं थी। ऐसे में दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था।हाल ही में रंजना अपने मायके ढेलवाडीह मेला देखने गई थी। पति भी मेले में पहुंचा था। वहां से लौटने के बाद दंपती में पुरानी बातों को लेकर विवाद हो गया। पति ने फावड़े से पत्नी के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर वार किया।जिससे पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई और जमीन पर गिर पड़ी। इसके बाद पति मौके से फरार हो गया। इधर, चीख-पुकार सुनकर परिवार के अन्य सदस्य मौके पर पहुंचे तो रंजना खून से लथपथ पड़ी हुई थी। परिजन उसे फौरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए जहाँ उसकी मौत हो गयी.1
- Post by DEOKI PURI GOSVAMI1
- कबीरधाम जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र में आज भी ऐसे गांव मौजूद हैं, जहां विकास की रोशनी नहीं पहुंच सकी है। जिला मुख्यालय कवर्धा से करीब 70 किलोमीटर दूर बसे ग्रामी सौरू में रहने वाले बैगा आदिवासी परिवार आज भी पानी, बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। यह वही बैगा समुदाय है जिन्हें देश का विशेष संरक्षित जनजाति माना जाता है और जिन्हें राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र तक कहा जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत बेहद दर्दनाक है। यह तस्वीरें कबीरधाम जिले के सौरू गांव की हैं। यहां लगभग 35 बैगा परिवार, करीब 200 की आबादी के साथ निवास करते हैं। गांव में ना बिजली है, ना पक्की सड़क और ना ही पीने के लिए स्वच्छ पानी है लोगों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है। गांव में सोलर पैनल लगाए गए थे, अब वो भी बंद गांव में सोलर सिस्टम से एक हैंडपंप लगाया गया है, लेकिन वह भी कभी चलता है, कभी बंद हो जाता है। जब हैंडपंप काम नहीं करता तो ग्रामीणों को मजबूरन दो से ढाई किलोमीटर पैदल चलकर झीरीया से पानी लाना पड़ता है और उसी पानी को पीने के लिए उपयोग करते हैं। बिजली के नाम पर गांव में सोलर पैनल लगाए गए थे, लेकिन अब वे भी बंद पड़े हैं। रात होते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और सामान्य जीवन भी मुश्किल हो गया है। ना जनप्रतिनिधि ध्यान देते हैं, ना प्रशासनिक अधिकारी- गांव में स्कूल तो है, लेकिन बच्चों की शिक्षा की हालत भी चिंताजनक है। ग्रामीणों ने बताया कि गाँव के स्कूल से अक्सर शिक्षक गायब रहते हैं, कई बार स्कूल समय पर नहीं खुलता और कभी-कभी बंद भी रहता है। ऐसे में बैगा बच्चों का भविष्य अंधकार में जाता दिखाई दे रहा है। यह गांव ऐसा प्रतीत होता है मानो संसाधनों और विकास से पूरी तरह कट चुका हो। ग्रामीणों का आरोप है कि, ना जनप्रतिनिधि ध्यान देते हैं, ना प्रशासनिक अधिकारी निरीक्षण करने पहुंचते हैं।1
- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले मे भी चर्च के नाम पर भूमि क्रय को लेकर विरोध देखने को मिल रहा। जहाँ पोड़ी उपरोड़ा विकास खंड के ग्राम दम्हामुड़ा के ग्रामवासियों ने आरोप लगाया है कि गांव कि भूमि को वर्ष 2016 में विलिवर्स चर्च ऑफ इंडिया के नाम पर खरीदा गया, जिस पर गांव के लोगों को कड़ा ऐतराज है। और जमीन कि रजिस्ट्री व नामांतरण निरस्त करने कि मांग कि है। दरअसल ग्रामीणों का कहना है कि उक्त भूमि का उपयोग चर्च निर्माण और धर्मांतरण गतिविधियों के लिए किया जा सकता है, जिससे क्षेत्र की पारंपरिक आदिवासी संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और सदियों से चली आ रही परंपराएं प्रभावित हो सकती हैं। वैसे ही गांव में संचालित चंगाई सभाओं को लेकर भी ग्रामीणों ने कई बार आपत्ति जताई है अब चर्च निर्माण पर आदिवासी समाज की सभ्यता के लिए घातक रूप ले सकता है। इस पूरे मामले पर आदिवासी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र मरकाम ने कहा कि आदिवासी क्षेत्र में चर्च का निर्माण छत्तीसगढ़ की संस्कृति पर सीधा आघात है और पहले से ही प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। वही SDM ने जांच कर उचित कार्यवाही कि बात कही।1
- Post by Mukesh Kuma1