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मध्य प्रदेश शासन और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर, छिंदवाड़ा जिले में 24 जून 2026, बुधवार शाम 4 बजे 15 दिवसीय साइबर सुरक्षा अभियान "सेफ क्लिक 2.0" का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन उपपुलिस महानिरीक्षक राकेश सिंह, पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक द्वारा किया गया। यह अभियान 8 जुलाई 2026 तक जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रूप से चलाया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को इंटरनेट, स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल सेवाओं के सुरक्षित उपयोग के तरीके सिखाना है। इसके तहत नागरिकों को ओटीपी फ्रॉड, सिम स्वैपिंग, फिशिंग, डिजिटल/होम अरेस्ट स्कैम, फर्जी जॉब व लोन फ्रॉड, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, पहचान की चोरी और अन्य साइबर अपराधों से बचाव के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी।
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मध्य प्रदेश शासन और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर, छिंदवाड़ा जिले में 24 जून 2026, बुधवार शाम 4 बजे 15 दिवसीय साइबर सुरक्षा अभियान "सेफ क्लिक 2.0" का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन उपपुलिस महानिरीक्षक राकेश सिंह, पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक द्वारा किया गया। यह अभियान 8 जुलाई 2026 तक जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रूप से चलाया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को इंटरनेट, स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल सेवाओं के सुरक्षित उपयोग के तरीके सिखाना है। इसके तहत नागरिकों को ओटीपी फ्रॉड, सिम स्वैपिंग, फिशिंग, डिजिटल/होम अरेस्ट स्कैम, फर्जी जॉब व लोन फ्रॉड, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, पहचान की चोरी और अन्य साइबर अपराधों से बचाव के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी।
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- मध्य प्रदेश के बिछुआ क्षेत्र की आदिवासी जनपद पंचायत की किशनपुर पंचायत में मानवता को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। गांव के सार्वजनिक कुएं में किसी अज्ञात व्यक्ति ने सल्फास डाल दिया, जिससे पूरे गांव को मौत बांटने की साजिश रची गई। ग्रामीणों ने जब नल से फेन वाला और बदबूदार पानी देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। कुएं पर पहुंचने पर पता चला कि जाली पर सल्फास पाउडर चिपका था, साइड में बिखरा था और कुएं के अंदर सल्फास के खाली पैकेट के साथ मरी हुई मछलियां और कीड़े-मकोड़े तैर रहे थे। ग्रामीणों का दावा है कि यह जहरीला पानी पूरे गांव में बंट चुका है और कई लोगों ने उसे पी भी लिया है, जिसके चलते वे बीमार हो गए हैं। बीमार ग्रामीणों को बिछुआ स्वास्थ्य केंद्र लाया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। इस घटना से ग्रामीणों में भारी गुस्सा है और उनका सीधा आरोप पंचायत पर है कि उसकी घोर लापरवाही के कारण यह कांड हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक कुएं के चारों ओर बाउंड्रीवाल तक नहीं बनी थी, जिससे कोई भी अज्ञात व्यक्ति आसानी से कुएं तक पहुंचकर गांव की जान से खिलवाड़ कर सका। ग्रामीणों का सवाल है कि यह लापरवाही है या कोई गहरी साजिश? उनकी नाराजगी इस बात पर भी है कि पंचायत कुंभकर्णी नींद में सो रही थी और जब मौत कुएं तक पहुंच गई, तब जाकर उसकी नींद टूटी है। फिलहाल, पानी की सप्लाई आनन-फानन में बंद कर दी गई है और पानी के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि दोषी की तुरंत गिरफ्तारी हो, पंचायत के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और गांव को तत्काल सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया है और उनका पक्ष मिलने पर आगे प्रकाशित किया जाएगा।1
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- आज दोपहर से तामिया बिजोरी क्षेत्र में तेज हवा और धुंध के साथ बहुत जोरदार बारिश हुई। मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में भी बारिश के रुकने की कोई संभावना नहीं है।1
- बंडोल थाना में 'सेफ क्लिक 2.0' नामक एक नई पहल शुरू की गई है। इस कार्यक्रम के माध्यम से, पुलिस ने साइबर ठगी जैसे अपराधों पर प्रभावी ढंग से लगाम कसने और उन पर कड़ी कार्रवाई करने के उद्देश्य से मैदान में कदम रखा है।1
- सिवनी मुख्यालय स्थित उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य मनोज कुमार गौतम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्हें कथित तौर पर स्कूल में एडमिशन लेने आए छात्रों के साथ अपशब्दों का प्रयोग करते देखा जा रहा है। वीडियो के अनुसार, कुछ पूर्व छात्र और अन्य छात्र स्कूल में दाखिला लेने पहुँचे थे। जब उन्हें एडमिशन नहीं मिला और उन्होंने इसकी लिखित वजह माँगी, तब प्राचार्य अपना आपा खो बैठे और छात्रों से अशोभनीय भाषा में बात की। वीडियो वायरल होने के बाद, प्राचार्य मनोज कुमार गौतम ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि लिखित माँग करने वाला छात्र एक पूर्व छात्र था, जिसने कुछ अन्य छात्रों के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से उनसे बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि वे थोड़े क्रोधित अवश्य हुए और उन्होंने कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जो उन्हें नहीं करने चाहिए थे, जिसका कारण उन्होंने काम का अत्यधिक दबाव बताया। वहीं, इस वीडियो को वायरल करने वाले छात्र दीपक डेहरिया ने आरोप लगाया है कि वे एनसीसी के छात्र थे और एडमिशन न होने पर स्कूल गए थे। दीपक का कहना है कि स्कूल प्रबंधन ने उन्हें स्कूल से बाहर निकलने, परिसर में दोबारा न घुसने देने की धमकी दी और उनके साथ अपशब्दों का प्रयोग भी किया।1
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