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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का पालाचलमा गांव, जो अब नक्सलमुक्त हो चुका है, आजादी के बाद से ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीण आज भी बिजली, पानी, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं। इसी बदहाली के बीच, राज्य महिला आयोग की सदस्य दीपिका शोरी 170 किलोमीटर दूर पहाड़ियों में बसे इस गांव में ग्रामीणों का दर्द बांटने पहुंचीं, जहां ढोल-नगाड़ों से उनका स्वागत किया गया। माता मुतेलम्मा मंदिर में पूजा के बाद दीपिका शोरी ने जमीन पर बैठकर पुजारी से लेकर आम ग्रामीणों तक से बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि अब उनमें डर नहीं है और वे खुलकर अपनी बात रख पा रहे हैं, जिसे वे सबसे बड़ा बदलाव मानते हैं। हालांकि, उन्हें आज भी राशन के लिए 9 किलोमीटर दूर किस्टाराम जाना पड़ता है। 2009 में नक्सलियों ने यहां की आश्रमशाला को बम से उड़ा दिया था, जिसके कारण 100 से अधिक बच्चे आज भी दूसरे गांवों में पढ़ने को मजबूर हैं। गांव में न बिजली है, न पीने का साफ पानी और न ही बीमारी में इलाज की कोई सुविधा। ग्रामीणों का कहना है कि नक्सलवाद तो चला गया, पर बदहाली आज भी कायम है। पंचायत सचिव ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 398 परिवारों का सर्वे पूरा हो चुका है और जल्द ही मकानों की स्वीकृति मिलेगी। दीपिका शोरी ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी हर शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी और अब पालाचलमा में विकास का सूरज उगेगा। उन्होंने कहा कि गांव में आज भी नक्सल आतंक के निशान मौजूद हैं, लेकिन अब यह इलाका विश्वास और विकास की नई राह पर चलेगा। पालाचलमा अब बंदूक नहीं, कलम; खौफ नहीं, स्कूल; और अंधेरा नहीं, बिजली मांग रहा है। मुख्य सवाल यही है कि नक्सलियों से मिली आजादी के बाद, विकास की आजादी कब मिलेगी।

1 hr ago
user_अंचल की खबरें(Rintoo Bhadouriy
अंचल की खबरें(Rintoo Bhadouriy
Voice of people सुकमा, सुकमा, छत्तीसगढ़•
1 hr ago

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का पालाचलमा गांव, जो अब नक्सलमुक्त हो चुका है, आजादी के बाद से ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीण आज भी बिजली, पानी, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं। इसी बदहाली के बीच, राज्य महिला आयोग की सदस्य दीपिका शोरी 170 किलोमीटर दूर पहाड़ियों में बसे इस गांव में ग्रामीणों का दर्द बांटने पहुंचीं, जहां ढोल-नगाड़ों से उनका स्वागत किया गया। माता मुतेलम्मा मंदिर में पूजा के बाद दीपिका शोरी ने जमीन पर बैठकर पुजारी से लेकर आम ग्रामीणों तक से बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि अब उनमें डर नहीं है और वे खुलकर अपनी बात रख पा रहे हैं, जिसे वे सबसे बड़ा बदलाव मानते हैं। हालांकि, उन्हें आज भी राशन के लिए 9 किलोमीटर दूर किस्टाराम जाना पड़ता है। 2009 में नक्सलियों ने यहां की आश्रमशाला को बम से उड़ा दिया था, जिसके कारण 100 से अधिक बच्चे आज भी दूसरे गांवों में पढ़ने को मजबूर हैं। गांव में न बिजली है, न पीने का साफ पानी और न ही बीमारी में इलाज की कोई सुविधा। ग्रामीणों का कहना है कि नक्सलवाद तो चला गया, पर बदहाली आज भी कायम है। पंचायत सचिव ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 398 परिवारों का सर्वे पूरा हो चुका है और जल्द ही मकानों की स्वीकृति मिलेगी। दीपिका शोरी ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी हर शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी और अब पालाचलमा में विकास का सूरज उगेगा। उन्होंने कहा कि गांव में आज भी नक्सल आतंक के निशान मौजूद हैं, लेकिन अब यह इलाका विश्वास और विकास की नई राह पर चलेगा। पालाचलमा अब बंदूक नहीं, कलम; खौफ नहीं, स्कूल; और अंधेरा नहीं, बिजली मांग रहा है। मुख्य सवाल यही है कि नक्सलियों से मिली आजादी के बाद, विकास की आजादी कब मिलेगी।

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  • सुकमा में धान संग्रहण केंद्र पर खुले में रखे करोड़ों रुपए मूल्य के धान के खराब होने का मामला अब राजनीतिक रंग ले रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबरों के बाद, जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरीश कवासी लखमा के निर्देश पर कांग्रेस नेताओं की एक टीम ने मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के बाद, कांग्रेस ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं की टीम, जिसमें जिला कांग्रेस कमेटी, नगर कांग्रेस कमेटी, नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष, विधायक प्रतिनिधि और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल थे, ने जिला मुख्यालय सुकमा के पास स्थित धान संग्रहण केंद्र का दौरा किया और वहां रखे धान का जायजा लिया। कांग्रेस का दावा है कि मौके पर उन्हें बड़ी मात्रा में धान खुले आसमान के नीचे मिला, जो बारिश और नमी के कारण खराब होना शुरू हो गया था, जिससे सोशल मीडिया पर चल रही खबरें सही पाई गईं। नेताओं ने धान की इस खराब स्थिति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह किसानों की कड़ी मेहनत और शासन की करोड़ों रुपए की संपत्ति का उचित भंडारण व्यवस्था के अभाव में नुकसान है। पार्टी ने जिला प्रशासन पर पर्याप्त गोदाम और सुरक्षा व्यवस्था न होने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि समय पर धान का उठाव और सुरक्षित भंडारण न होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने इस मामले की गहन जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों की किसी भी अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि जल्द ही आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो वे किसानों के हित में आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल, कांग्रेस द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों के बाद, इस मामले में प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। अब देखना होगा कि धान की बर्बादी के इस मामले में जांच और जिम्मेदारी तय करने को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है।
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    सुकमा में धान संग्रहण केंद्र पर खुले में रखे करोड़ों रुपए मूल्य के धान के खराब होने का मामला अब राजनीतिक रंग ले रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबरों के बाद, जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरीश कवासी लखमा के निर्देश पर कांग्रेस नेताओं की एक टीम ने मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के बाद, कांग्रेस ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।

कांग्रेस नेताओं की टीम, जिसमें जिला कांग्रेस कमेटी, नगर कांग्रेस कमेटी, नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष, विधायक प्रतिनिधि और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल थे, ने जिला मुख्यालय सुकमा के पास स्थित धान संग्रहण केंद्र का दौरा किया और वहां रखे धान का जायजा लिया। कांग्रेस का दावा है कि मौके पर उन्हें बड़ी मात्रा में धान खुले आसमान के नीचे मिला, जो बारिश और नमी के कारण खराब होना शुरू हो गया था, जिससे सोशल मीडिया पर चल रही खबरें सही पाई गईं। नेताओं ने धान की इस खराब स्थिति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह किसानों की कड़ी मेहनत और शासन की करोड़ों रुपए की संपत्ति का उचित भंडारण व्यवस्था के अभाव में नुकसान है।

पार्टी ने जिला प्रशासन पर पर्याप्त गोदाम और सुरक्षा व्यवस्था न होने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि समय पर धान का उठाव और सुरक्षित भंडारण न होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने इस मामले की गहन जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों की किसी भी अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि जल्द ही आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो वे किसानों के हित में आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

फिलहाल, कांग्रेस द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों के बाद, इस मामले में प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। अब देखना होगा कि धान की बर्बादी के इस मामले में जांच और जिम्मेदारी तय करने को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है।
    user_Rijent giri
    Rijent giri
    सुकमा, सुकमा, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का पालाचलमा गांव, जो अब नक्सलमुक्त हो चुका है, आजादी के बाद से ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीण आज भी बिजली, पानी, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं। इसी बदहाली के बीच, राज्य महिला आयोग की सदस्य दीपिका शोरी 170 किलोमीटर दूर पहाड़ियों में बसे इस गांव में ग्रामीणों का दर्द बांटने पहुंचीं, जहां ढोल-नगाड़ों से उनका स्वागत किया गया। माता मुतेलम्मा मंदिर में पूजा के बाद दीपिका शोरी ने जमीन पर बैठकर पुजारी से लेकर आम ग्रामीणों तक से बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि अब उनमें डर नहीं है और वे खुलकर अपनी बात रख पा रहे हैं, जिसे वे सबसे बड़ा बदलाव मानते हैं। हालांकि, उन्हें आज भी राशन के लिए 9 किलोमीटर दूर किस्टाराम जाना पड़ता है। 2009 में नक्सलियों ने यहां की आश्रमशाला को बम से उड़ा दिया था, जिसके कारण 100 से अधिक बच्चे आज भी दूसरे गांवों में पढ़ने को मजबूर हैं। गांव में न बिजली है, न पीने का साफ पानी और न ही बीमारी में इलाज की कोई सुविधा। ग्रामीणों का कहना है कि नक्सलवाद तो चला गया, पर बदहाली आज भी कायम है। पंचायत सचिव ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 398 परिवारों का सर्वे पूरा हो चुका है और जल्द ही मकानों की स्वीकृति मिलेगी। दीपिका शोरी ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी हर शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी और अब पालाचलमा में विकास का सूरज उगेगा। उन्होंने कहा कि गांव में आज भी नक्सल आतंक के निशान मौजूद हैं, लेकिन अब यह इलाका विश्वास और विकास की नई राह पर चलेगा। पालाचलमा अब बंदूक नहीं, कलम; खौफ नहीं, स्कूल; और अंधेरा नहीं, बिजली मांग रहा है। मुख्य सवाल यही है कि नक्सलियों से मिली आजादी के बाद, विकास की आजादी कब मिलेगी।
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    छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का पालाचलमा गांव, जो अब नक्सलमुक्त हो चुका है, आजादी के बाद से ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीण आज भी बिजली, पानी, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं। इसी बदहाली के बीच, राज्य महिला आयोग की सदस्य दीपिका शोरी 170 किलोमीटर दूर पहाड़ियों में बसे इस गांव में ग्रामीणों का दर्द बांटने पहुंचीं, जहां ढोल-नगाड़ों से उनका स्वागत किया गया।

माता मुतेलम्मा मंदिर में पूजा के बाद दीपिका शोरी ने जमीन पर बैठकर पुजारी से लेकर आम ग्रामीणों तक से बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि अब उनमें डर नहीं है और वे खुलकर अपनी बात रख पा रहे हैं, जिसे वे सबसे बड़ा बदलाव मानते हैं। हालांकि, उन्हें आज भी राशन के लिए 9 किलोमीटर दूर किस्टाराम जाना पड़ता है। 2009 में नक्सलियों ने यहां की आश्रमशाला को बम से उड़ा दिया था, जिसके कारण 100 से अधिक बच्चे आज भी दूसरे गांवों में पढ़ने को मजबूर हैं। गांव में न बिजली है, न पीने का साफ पानी और न ही बीमारी में इलाज की कोई सुविधा। ग्रामीणों का कहना है कि नक्सलवाद तो चला गया, पर बदहाली आज भी कायम है।

पंचायत सचिव ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 398 परिवारों का सर्वे पूरा हो चुका है और जल्द ही मकानों की स्वीकृति मिलेगी। दीपिका शोरी ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी हर शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी और अब पालाचलमा में विकास का सूरज उगेगा। उन्होंने कहा कि गांव में आज भी नक्सल आतंक के निशान मौजूद हैं, लेकिन अब यह इलाका विश्वास और विकास की नई राह पर चलेगा। पालाचलमा अब बंदूक नहीं, कलम; खौफ नहीं, स्कूल; और अंधेरा नहीं, बिजली मांग रहा है। मुख्य सवाल यही है कि नक्सलियों से मिली आजादी के बाद, विकास की आजादी कब मिलेगी।
    user_अंचल की खबरें(Rintoo Bhadouriy
    अंचल की खबरें(Rintoo Bhadouriy
    Voice of people सुकमा, सुकमा, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • सुकमा जिला अब नक्सल मुक्त होकर नवविकास की राह पर अग्रसर है। इसी क्रम में, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े नक्सली कमांडर हिड़मा के गांव पूवर्ती पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बन गई हैं, जो एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। कभी नक्सल प्रभाव का गढ़ रहे सुदूर अंचलों में अब विकास, विश्वास और जनभागीदारी की नई इबारत लिखी जा रही है, जहाँ ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं मिल रही हैं। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने एक दिवसीय प्रवास पर सुकमा जिले के जगरगुंडा, चिंतलनार, पूवर्ती और सिलगेर का दौरा किया। ये वे इलाके थे जहाँ कभी नक्सलियों का राज चलता था और उनकी मर्जी के बिना कोई नहीं जा सकता था। श्रीमती राजवाड़े सड़क मार्ग से जगरगुंडा पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनकर उभरीं, जिसने वर्षों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में विकास और शासन की संवेदनशील उपस्थिति को दर्शाया। अपने दौरे के दौरान, मंत्री ने पूवर्ती और सिलगेर स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने अन्नप्राशन और गोदभराई कार्यक्रमों में शामिल होकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। बच्चों के साथ आत्मीयता से समय बिताने के अलावा, उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से संवाद किया और विभिन्न शासकीय योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। इसी प्रवास के तहत, मंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत जगरगुंडा में कृतिका महिला संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) भवन का भी लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से उनकी आजीविका और आर्थिक गतिविधियों पर चर्चा की, संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए, और 'सेवा एक्सप्रेस' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। श्रीमती राजवाड़े ने इस बात पर बल दिया कि जो क्षेत्र कभी असुरक्षा और हिंसा के कारण जाने जाते थे, वे आज महिला सशक्तिकरण, स्वावलंबन, शिक्षा, पोषण और सामाजिक विकास के केंद्र बन रहे हैं, जहाँ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। ग्रामीण महिलाओं ने इस क्षण को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह पहली बार है जब कोई महिला मंत्री सड़क मार्ग से सीधे उनके गांव आकर उनकी समस्याएँ सुनने और संवाद करने आई हैं, जिससे शासन के प्रति उनका विश्वास और गहरा हुआ है। मंत्री ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर के अंतिम छोर तक विकास की रोशनी पहुंचाने के राज्य सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय जनसमर्थन और सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों के प्रयासों से सुकमा में शांति, स्थायित्व और समृद्धि का नया वातावरण बना है, जिसकी सशक्त पहचान बच्चों की मुस्कान, महिलाओं का बढ़ता आत्मविश्वास और विकास की नई संभावनाएँ हैं।
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    सुकमा जिला अब नक्सल मुक्त होकर नवविकास की राह पर अग्रसर है। इसी क्रम में, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े नक्सली कमांडर हिड़मा के गांव पूवर्ती पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बन गई हैं, जो एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। कभी नक्सल प्रभाव का गढ़ रहे सुदूर अंचलों में अब विकास, विश्वास और जनभागीदारी की नई इबारत लिखी जा रही है, जहाँ ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं मिल रही हैं।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने एक दिवसीय प्रवास पर सुकमा जिले के जगरगुंडा, चिंतलनार, पूवर्ती और सिलगेर का दौरा किया। ये वे इलाके थे जहाँ कभी नक्सलियों का राज चलता था और उनकी मर्जी के बिना कोई नहीं जा सकता था। श्रीमती राजवाड़े सड़क मार्ग से जगरगुंडा पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनकर उभरीं, जिसने वर्षों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में विकास और शासन की संवेदनशील उपस्थिति को दर्शाया।

अपने दौरे के दौरान, मंत्री ने पूवर्ती और सिलगेर स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने अन्नप्राशन और गोदभराई कार्यक्रमों में शामिल होकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। बच्चों के साथ आत्मीयता से समय बिताने के अलावा, उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से संवाद किया और विभिन्न शासकीय योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। इसी प्रवास के तहत, मंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत जगरगुंडा में कृतिका महिला संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) भवन का भी लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से उनकी आजीविका और आर्थिक गतिविधियों पर चर्चा की, संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए, और 'सेवा एक्सप्रेस' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

श्रीमती राजवाड़े ने इस बात पर बल दिया कि जो क्षेत्र कभी असुरक्षा और हिंसा के कारण जाने जाते थे, वे आज महिला सशक्तिकरण, स्वावलंबन, शिक्षा, पोषण और सामाजिक विकास के केंद्र बन रहे हैं, जहाँ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। ग्रामीण महिलाओं ने इस क्षण को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह पहली बार है जब कोई महिला मंत्री सड़क मार्ग से सीधे उनके गांव आकर उनकी समस्याएँ सुनने और संवाद करने आई हैं, जिससे शासन के प्रति उनका विश्वास और गहरा हुआ है। मंत्री ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर के अंतिम छोर तक विकास की रोशनी पहुंचाने के राज्य सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय जनसमर्थन और सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों के प्रयासों से सुकमा में शांति, स्थायित्व और समृद्धि का नया वातावरण बना है, जिसकी सशक्त पहचान बच्चों की मुस्कान, महिलाओं का बढ़ता आत्मविश्वास और विकास की नई संभावनाएँ हैं।
    user_Dharmendra singh
    Dharmendra singh
    सुकमा, सुकमा, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • NMDC पर किरंदुल में भेदभाव और “सामंतशाही” का आरोप लगा है, जहाँ स्थानीय लोगों और बच्चों को एक स्वीमिंग पूल में प्रवेश से वंचित रखा जा रहा है। यह पूल किरंदुल की ज़मीन पर बना है और स्थानीय श्रम से भरा बताया गया है, फिर भी इसके दरवाज़े स्थानीय बच्चों के लिए बंद हैं, जबकि NMDC के दफ़्तर में बैठे अधिकारियों के बच्चे इसका उपयोग कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने निरीक्षण के दौरान पाया कि पूल के पास न तो कोई लाइफ़गार्ड है, न इसे चलाने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ हैं और न ही कोई आधिकारिक अनुमति है। आरोप लगाया गया कि स्थानीय निवासी, जो खदानें खोदते हैं, शहर में दुकान चलाते हैं और कर देते हैं, उन्हें केवल दर्शक बनकर रहने को मजबूर किया जा रहा है। इस स्थिति को केवल “सुविधा” नहीं, बल्कि “सामंतशाही” का नया रूप बताया गया है, जिसकी वर्दी बदल गई है। इस मुद्दे पर किरंदुल अकेला नहीं खड़ा हुआ। नगर पालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी के साथ बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ के प्रतिनिधि भी एकजुट होकर खड़े थे। पत्रकार किशोर रामटेके और रवि सरकार ने भी इस मामले को उजागर किया, ताकि NMDC का यह “भेदभाव” फाइलों में न दबकर अख़बार की सुर्ख़ी बने। जब व्यापारी सड़क पर आए, जनप्रतिनिधि गेट पर आए और पत्रकार कैमरा लेकर पहुँचे, तो NMDC के अधिकारियों ने “समय माँगकर” इस स्थिति से पल्ला झाड़ लिया। NMDC प्रशासन से सवाल पूछा गया है कि जिस ज़मीन का मुआवज़ा आदिवासी समुदाय आज भी माँग रहा है, उसी ज़मीन पर बने पूल में उनके बच्चे क्यों नहीं तैर सकते। यह मामला “तीसरी आंख” द्वारा उठाया गया है, जो प्रश्न पूछने, प्रमाण माँगने और “पक्ष नहीं — सच चुनने” का आह्वान करता है।
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    NMDC पर किरंदुल में भेदभाव और “सामंतशाही” का आरोप लगा है, जहाँ स्थानीय लोगों और बच्चों को एक स्वीमिंग पूल में प्रवेश से वंचित रखा जा रहा है। यह पूल किरंदुल की ज़मीन पर बना है और स्थानीय श्रम से भरा बताया गया है, फिर भी इसके दरवाज़े स्थानीय बच्चों के लिए बंद हैं, जबकि NMDC के दफ़्तर में बैठे अधिकारियों के बच्चे इसका उपयोग कर रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों ने निरीक्षण के दौरान पाया कि पूल के पास न तो कोई लाइफ़गार्ड है, न इसे चलाने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ हैं और न ही कोई आधिकारिक अनुमति है। आरोप लगाया गया कि स्थानीय निवासी, जो खदानें खोदते हैं, शहर में दुकान चलाते हैं और कर देते हैं, उन्हें केवल दर्शक बनकर रहने को मजबूर किया जा रहा है। इस स्थिति को केवल “सुविधा” नहीं, बल्कि “सामंतशाही” का नया रूप बताया गया है, जिसकी वर्दी बदल गई है।

इस मुद्दे पर किरंदुल अकेला नहीं खड़ा हुआ। नगर पालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी के साथ बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ के प्रतिनिधि भी एकजुट होकर खड़े थे। पत्रकार किशोर रामटेके और रवि सरकार ने भी इस मामले को उजागर किया, ताकि NMDC का यह “भेदभाव” फाइलों में न दबकर अख़बार की सुर्ख़ी बने। जब व्यापारी सड़क पर आए, जनप्रतिनिधि गेट पर आए और पत्रकार कैमरा लेकर पहुँचे, तो NMDC के अधिकारियों ने “समय माँगकर” इस स्थिति से पल्ला झाड़ लिया।

NMDC प्रशासन से सवाल पूछा गया है कि जिस ज़मीन का मुआवज़ा आदिवासी समुदाय आज भी माँग रहा है, उसी ज़मीन पर बने पूल में उनके बच्चे क्यों नहीं तैर सकते। यह मामला “तीसरी आंख” द्वारा उठाया गया है, जो प्रश्न पूछने, प्रमाण माँगने और “पक्ष नहीं — सच चुनने” का आह्वान करता है।
    user_तीसरी आंख 👁️
    तीसरी आंख 👁️
    Voice of people बस्तर, बस्तर, छत्तीसगढ़•
    6 hrs ago
  • किरंदुल के वार्ड क्रमांक 01 में स्थित रुद्र मंदिर इन दिनों श्रद्धा, आस्था और भक्ति के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। प्रतिदिन प्रातःकाल से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान रुद्रदेव महाकाल के दर्शन, जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और आरती के लिए मंदिर परिसर पहुँच रहे हैं। 'हर-हर महादेव, जय बाबा भोलेनाथ और जय रुद्रदेव महाकाल' के जयघोष से यहाँ का पूरा वातावरण भक्तिमय और शिवमय हो उठता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ आसपास के गांवों और दूर-दराज़ के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्त भगवान शिव के दरबार में अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुँच रहे हैं। कोई अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, रोजगार और जीवन में सफलता की कामना कर रहा है, तो कोई केवल भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव करने के लिए आता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के चरणों में उन्हें आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और नई आशा का अनुभव होता है। उनकी यह अटूट मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य सुनते हैं और भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करते हैं, यही विश्वास हज़ारों कदमों को प्रतिदिन मंदिर की ओर खींच रहा है। मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, दीप प्रज्वलन और भक्तों द्वारा किए जाने वाले भजन-कीर्तन से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालु अनुशासित ढंग से भगवान शिव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जिनके चेहरों पर भक्ति, विश्वास और संतोष की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। रुद्र मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनता जा रहा है। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से उन्हें मानसिक शांति, आत्मबल और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। इसी कारण दिन-प्रतिदिन मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में अपनी विशेष पहचान बना रहा है। यह बढ़ती उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है, जहाँ हर दिन भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जहाँ हर श्रद्धालु अपने आराध्य के चरणों में शीश नवाकर सुख, शांति और मंगलमय जीवन की कामना करता है।
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    किरंदुल के वार्ड क्रमांक 01 में स्थित रुद्र मंदिर इन दिनों श्रद्धा, आस्था और भक्ति के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। प्रतिदिन प्रातःकाल से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान रुद्रदेव महाकाल के दर्शन, जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और आरती के लिए मंदिर परिसर पहुँच रहे हैं। 'हर-हर महादेव, जय बाबा भोलेनाथ और जय रुद्रदेव महाकाल' के जयघोष से यहाँ का पूरा वातावरण भक्तिमय और शिवमय हो उठता है।

स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ आसपास के गांवों और दूर-दराज़ के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्त भगवान शिव के दरबार में अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुँच रहे हैं। कोई अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, रोजगार और जीवन में सफलता की कामना कर रहा है, तो कोई केवल भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव करने के लिए आता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के चरणों में उन्हें आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और नई आशा का अनुभव होता है। उनकी यह अटूट मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य सुनते हैं और भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करते हैं, यही विश्वास हज़ारों कदमों को प्रतिदिन मंदिर की ओर खींच रहा है।

मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, दीप प्रज्वलन और भक्तों द्वारा किए जाने वाले भजन-कीर्तन से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालु अनुशासित ढंग से भगवान शिव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जिनके चेहरों पर भक्ति, विश्वास और संतोष की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। रुद्र मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनता जा रहा है। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से उन्हें मानसिक शांति, आत्मबल और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। इसी कारण दिन-प्रतिदिन मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में अपनी विशेष पहचान बना रहा है। यह बढ़ती उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है, जहाँ हर दिन भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जहाँ हर श्रद्धालु अपने आराध्य के चरणों में शीश नवाकर सुख, शांति और मंगलमय जीवन की कामना करता है।
    user_Ravi sarkar
    Ravi sarkar
    बस्तर, बस्तर, छत्तीसगढ़•
    21 hrs ago
  • जगदलपुर के असना रोड नेशनल 30 पर एक घंटे से भी अधिक समय तक झमाझम बारिश हुई, जिससे भीषण गर्मी से लोगों को कुछ राहत मिली है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि उन्हें इस बारिश का लंबे समय से इंतज़ार था। इस वर्षा से न केवल गर्मी से राहत मिली है, बल्कि खेती-किसानी के कामों में भी कुछ मदद मिलने की उम्मीद है।
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    जगदलपुर के असना रोड नेशनल 30 पर एक घंटे से भी अधिक समय तक झमाझम बारिश हुई, जिससे भीषण गर्मी से लोगों को कुछ राहत मिली है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि उन्हें इस बारिश का लंबे समय से इंतज़ार था। इस वर्षा से न केवल गर्मी से राहत मिली है, बल्कि खेती-किसानी के कामों में भी कुछ मदद मिलने की उम्मीद है।
    user_Gandhi Nag
    Gandhi Nag
    जगदलपुर, बस्तर, छत्तीसगढ़•
    22 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा भारी बारिश के बीच एक ऐसे स्थान पर पहुंचे, जहां कभी नक्सलियों की जनचौपाल और गोलियों की गूंज सुनाई देती थी।
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    छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा भारी बारिश के बीच एक ऐसे स्थान पर पहुंचे, जहां कभी नक्सलियों की जनचौपाल और गोलियों की गूंज सुनाई देती थी।
    user_Bodhan नाग
    Bodhan नाग
    Chhotedongar, Narayanpur•
    2 hrs ago
  • कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा पर स्थित रावघाट लौह अयस्क परियोजना एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है, जहाँ बिना अनुमति बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय ने इस पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। कंपाउंड, सड़क निर्माण और डंपिंग यार्ड विकसित करने के नाम पर बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों को काट दिया गया है, जिससे क्षेत्र के पर्यावरण और वन संपदा को भारी नुकसान पहुँचा है। यह स्थिति क्षेत्र में ‘विकास या विनाश’ का सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह पूरा क्षेत्र संरक्षित वन श्रेणी में आता है, जहाँ वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी नियमित रूप से निगरानी के लिए तैनात रहते हैं। इसके बावजूद, लगभग तीन महीनों के भीतर इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई और निर्माण कार्य बिना किसी रोक-टोक के चलते रहे। मौके पर वन विभाग की न तो कोई सक्रिय मौजूदगी दिखी और न ही समय रहते कोई कार्रवाई की गई, जिससे विभागीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि जानकारी के अभाव में या जानबूझकर कार्रवाई में देरी की गई। इस मामले में पूर्व वन मंडल अधिकारी भानुप्रतापपुर ऋषभ जैन ने पुष्टि की है कि रावघाट परियोजना क्षेत्र में सड़क निर्माण और अन्य कार्यों के लिए वन विभाग से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति के सड़क निर्माण और पेड़ों की कटाई की गई है। इस पर भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत एक प्रकरण दर्ज किया गया है और नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है, जिसके बाद आगे आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, यह पूरा मामला वन विभाग की कार्यप्रणाली, उसकी निगरानी व्यवस्था और परियोजना क्षेत्र में नियमों के पालन को लेकर एक गंभीर बहस का विषय बन गया है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि नियमों की अनदेखी किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, लेकिन तब तक रावघाट क्षेत्र में हुई पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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    कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा पर स्थित रावघाट लौह अयस्क परियोजना एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है, जहाँ बिना अनुमति बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय ने इस पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। कंपाउंड, सड़क निर्माण और डंपिंग यार्ड विकसित करने के नाम पर बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों को काट दिया गया है, जिससे क्षेत्र के पर्यावरण और वन संपदा को भारी नुकसान पहुँचा है। यह स्थिति क्षेत्र में ‘विकास या विनाश’ का सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि यह पूरा क्षेत्र संरक्षित वन श्रेणी में आता है, जहाँ वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी नियमित रूप से निगरानी के लिए तैनात रहते हैं। इसके बावजूद, लगभग तीन महीनों के भीतर इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई और निर्माण कार्य बिना किसी रोक-टोक के चलते रहे। मौके पर वन विभाग की न तो कोई सक्रिय मौजूदगी दिखी और न ही समय रहते कोई कार्रवाई की गई, जिससे विभागीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि जानकारी के अभाव में या जानबूझकर कार्रवाई में देरी की गई।

इस मामले में पूर्व वन मंडल अधिकारी भानुप्रतापपुर ऋषभ जैन ने पुष्टि की है कि रावघाट परियोजना क्षेत्र में सड़क निर्माण और अन्य कार्यों के लिए वन विभाग से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति के सड़क निर्माण और पेड़ों की कटाई की गई है। इस पर भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत एक प्रकरण दर्ज किया गया है और नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है, जिसके बाद आगे आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

फिलहाल, यह पूरा मामला वन विभाग की कार्यप्रणाली, उसकी निगरानी व्यवस्था और परियोजना क्षेत्र में नियमों के पालन को लेकर एक गंभीर बहस का विषय बन गया है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि नियमों की अनदेखी किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, लेकिन तब तक रावघाट क्षेत्र में हुई पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
    user_Rijent giri
    Rijent giri
    सुकमा, सुकमा, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
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