करौटा जगदंबा मंदिर: आस्था का केंद्र, जहाँ पूरी होती है हर मनोकामना। पटना /बख्तियारपुर : चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र की शुरुआत घट स्थापना यानी कलश स्थापना से होती है और भक्त नौ दिनों तक व्रत, दुर्गा पाठ, आरती तथा अखंड ज्योत के साथ मां की उपासना करते हैं। नवरात्र के अवसर पर बख्तियारपुर से सटे करौटा में स्थित मां जगदंबा मंदिर करौटा में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ रही है। राजधानी पटना से करीब 40 किलोमीटर पूर्व स्थित इस मंदिर की महत्ता काफी प्रसिद्ध है। खासकर मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष पूजा का महत्व माना जाता है, जिसके कारण हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता की पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्र के दौरान भक्तों की संख्या और भी बढ़ जाती है। स्थानीय मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से मां से मनोकामना मांगते हैं, उनकी इच्छा माता जरूर पूरी करती हैं। खासकर संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्ति यहां मन्नत मांगने आते हैं। कई भक्तों का कहना है कि उनकी मनोकामना पूरी होने के बाद वे हर वर्ष माता के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। इसी कारण बिहार के विभिन्न जिलों से लोग यहां पहुंचकर माता का आशीर्वाद लेते हैं। नवरात्र के पहले दिन मंदिर में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की गई और सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार देखी गई। कई श्रद्धालु दुर्गा पाठ और हवन भी करा रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष नवरात्र में माता की सवारी पालकी मानी जा रही है, जिसे शुभ माना जाता है, जबकि विदाई हाथी पर होगी। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर काफी प्राचीन है। पहले यहां चारों ओर खेत हुआ करते थे और पीपल के पेड़ के पास काले पत्थर की माता की मूर्ति स्थापित थी, जिसकी ग्रामीण कुल देवी के रूप में पूजा करते थे। समय के साथ मंदिर का विस्तार हुआ और परिसर में भगवान विष्णु-लक्ष्मी, भगवान शिव तथा हनुमान जी के मंदिर भी बनाए गए हैं। यहां श्रद्धालुओं के सहयोग से एक धर्मशाला का निर्माण भी कराया गया है, जहां विवाह और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। मंदिर के सेवक अरविंद कुमार उर्फ मास्टर साहब के अनुसार यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है और इसकी स्थापना के समय के बारे में स्पष्ट जानकारी किसी को नहीं है। उन्होंने बताया कि स्थानीय मान्यता के अनुसार यह स्थान आंशिक शक्तिपीठ के रूप में भी जाना जाता है। नवरात्र के दौरान खासकर सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचकर माता की पूजा-अर्चना और हवन करते हैं। दूर से दिखने वाला मंदिर का ऊंचा गुंबद भी इस स्थान की पहचान बन चुका है और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
करौटा जगदंबा मंदिर: आस्था का केंद्र, जहाँ पूरी होती है हर मनोकामना। पटना /बख्तियारपुर : चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र की शुरुआत घट स्थापना यानी कलश स्थापना से होती है और भक्त नौ दिनों तक व्रत, दुर्गा पाठ, आरती तथा अखंड ज्योत के साथ मां की उपासना करते हैं। नवरात्र के अवसर पर बख्तियारपुर से सटे करौटा में स्थित मां जगदंबा मंदिर करौटा में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ रही है। राजधानी पटना से करीब 40 किलोमीटर पूर्व स्थित इस मंदिर की महत्ता काफी प्रसिद्ध है। खासकर मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष पूजा का महत्व माना जाता है, जिसके कारण हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता की पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्र के दौरान भक्तों की संख्या और भी बढ़ जाती है। स्थानीय मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से मां से मनोकामना मांगते हैं, उनकी इच्छा माता जरूर पूरी करती हैं। खासकर संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्ति यहां मन्नत मांगने आते हैं। कई भक्तों का कहना है कि उनकी मनोकामना पूरी होने के बाद वे हर वर्ष माता के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। इसी कारण बिहार के विभिन्न जिलों से लोग यहां पहुंचकर माता का आशीर्वाद लेते हैं। नवरात्र के पहले दिन मंदिर में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की गई और सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार देखी गई। कई श्रद्धालु दुर्गा पाठ और हवन भी करा रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष नवरात्र में माता की सवारी पालकी मानी जा रही है, जिसे शुभ माना जाता है, जबकि विदाई हाथी पर होगी। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर काफी प्राचीन है। पहले यहां चारों ओर खेत हुआ करते थे और पीपल के पेड़ के पास काले पत्थर की माता की मूर्ति स्थापित थी, जिसकी ग्रामीण कुल देवी के रूप में पूजा करते थे। समय के साथ मंदिर का विस्तार हुआ और परिसर में भगवान विष्णु-लक्ष्मी, भगवान शिव तथा हनुमान जी के मंदिर भी बनाए गए हैं। यहां श्रद्धालुओं के सहयोग से एक धर्मशाला का निर्माण भी कराया गया है, जहां विवाह और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। मंदिर के सेवक अरविंद कुमार उर्फ मास्टर साहब के अनुसार यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है और इसकी स्थापना के समय के बारे में स्पष्ट जानकारी किसी को नहीं है। उन्होंने बताया कि स्थानीय मान्यता के अनुसार यह स्थान आंशिक शक्तिपीठ के रूप में भी जाना जाता है। नवरात्र के दौरान खासकर सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचकर माता की पूजा-अर्चना और हवन करते हैं। दूर से दिखने वाला मंदिर का ऊंचा गुंबद भी इस स्थान की पहचान बन चुका है और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
- पटना /बख्तियारपुर : चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र की शुरुआत घट स्थापना यानी कलश स्थापना से होती है और भक्त नौ दिनों तक व्रत, दुर्गा पाठ, आरती तथा अखंड ज्योत के साथ मां की उपासना करते हैं। नवरात्र के अवसर पर बख्तियारपुर से सटे करौटा में स्थित मां जगदंबा मंदिर करौटा में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ रही है। राजधानी पटना से करीब 40 किलोमीटर पूर्व स्थित इस मंदिर की महत्ता काफी प्रसिद्ध है। खासकर मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष पूजा का महत्व माना जाता है, जिसके कारण हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता की पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्र के दौरान भक्तों की संख्या और भी बढ़ जाती है। स्थानीय मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से मां से मनोकामना मांगते हैं, उनकी इच्छा माता जरूर पूरी करती हैं। खासकर संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्ति यहां मन्नत मांगने आते हैं। कई भक्तों का कहना है कि उनकी मनोकामना पूरी होने के बाद वे हर वर्ष माता के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। इसी कारण बिहार के विभिन्न जिलों से लोग यहां पहुंचकर माता का आशीर्वाद लेते हैं। नवरात्र के पहले दिन मंदिर में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की गई और सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार देखी गई। कई श्रद्धालु दुर्गा पाठ और हवन भी करा रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष नवरात्र में माता की सवारी पालकी मानी जा रही है, जिसे शुभ माना जाता है, जबकि विदाई हाथी पर होगी। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर काफी प्राचीन है। पहले यहां चारों ओर खेत हुआ करते थे और पीपल के पेड़ के पास काले पत्थर की माता की मूर्ति स्थापित थी, जिसकी ग्रामीण कुल देवी के रूप में पूजा करते थे। समय के साथ मंदिर का विस्तार हुआ और परिसर में भगवान विष्णु-लक्ष्मी, भगवान शिव तथा हनुमान जी के मंदिर भी बनाए गए हैं। यहां श्रद्धालुओं के सहयोग से एक धर्मशाला का निर्माण भी कराया गया है, जहां विवाह और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। मंदिर के सेवक अरविंद कुमार उर्फ मास्टर साहब के अनुसार यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है और इसकी स्थापना के समय के बारे में स्पष्ट जानकारी किसी को नहीं है। उन्होंने बताया कि स्थानीय मान्यता के अनुसार यह स्थान आंशिक शक्तिपीठ के रूप में भी जाना जाता है। नवरात्र के दौरान खासकर सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचकर माता की पूजा-अर्चना और हवन करते हैं। दूर से दिखने वाला मंदिर का ऊंचा गुंबद भी इस स्थान की पहचान बन चुका है और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।1
- Post by JMBNEWS1
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- Post by VN News Bihar1
- जो सच्चे दिल से द्वार मईया के जाता है 🌺♥️1
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