बाराबंकी के थाना जहांगीराबाद क्षेत्र के ग्राम बनवा में एक कथित झोलाछाप डॉक्टर पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगा है। परिजनों का दावा है कि गलत दवाइयां और इंजेक्शन लगाए जाने के कारण मरीज की हालत बिगड़ गई और उसकी क्लीनिक पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान कबीरपुर निवासी लगभग 60 वर्षीय रामानंद रावत के रूप में हुई है। घटना के बाद, क्षेत्र में "बगिया वाले डॉक्टर" के नाम से जाना जाने वाला कथित डॉक्टर मौके से फरार हो गया। बुधवार को करीब 12 बजे मौत की खबर फैलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। उन्होंने क्लीनिक पर पहुँचकर जमकर हंगामा किया और आरोपी डॉक्टर के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त योग्यता और विशेषज्ञता वाले ऐसे कथित डॉक्टर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं, जिससे मरीजों के लिए बेतरतीब इलाज और मनमाने ढंग से लगाए गए इंजेक्शन जानलेवा साबित हो सकते हैं। सूचना मिलने पर पुलिस बल मौके पर पहुँचा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तैनात किया गया। पुलिस शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी कर रही थी, लेकिन आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए पहले आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग की। फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। पुलिस की आगे की कार्रवाई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल पाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि बिना मान्यता और पर्याप्त योग्यता के इलाज कर रहे ऐसे कथित डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएँ दोबारा न हों।
बाराबंकी के थाना जहांगीराबाद क्षेत्र के ग्राम बनवा में एक कथित झोलाछाप डॉक्टर पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगा है। परिजनों का दावा है कि गलत दवाइयां और इंजेक्शन लगाए जाने के कारण मरीज की हालत बिगड़ गई और उसकी क्लीनिक पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान कबीरपुर निवासी लगभग 60 वर्षीय रामानंद रावत के रूप में हुई है। घटना के बाद, क्षेत्र में "बगिया वाले डॉक्टर" के नाम से जाना जाने वाला कथित डॉक्टर मौके से फरार हो गया। बुधवार को करीब 12 बजे मौत की खबर फैलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। उन्होंने क्लीनिक पर पहुँचकर जमकर हंगामा किया और आरोपी डॉक्टर के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त योग्यता और विशेषज्ञता वाले ऐसे कथित डॉक्टर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं, जिससे मरीजों के लिए बेतरतीब इलाज और मनमाने ढंग से लगाए गए इंजेक्शन जानलेवा साबित हो सकते हैं। सूचना मिलने पर पुलिस बल मौके पर पहुँचा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तैनात किया गया। पुलिस शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी कर रही थी, लेकिन आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए पहले आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग की। फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। पुलिस की आगे की कार्रवाई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल पाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि बिना मान्यता और पर्याप्त योग्यता के इलाज कर रहे ऐसे कथित डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएँ दोबारा न हों।
- बाराबंकी में मोहर्रम की आठवीं तारीख का जुलूस निकाला गया। इस दौरान आलम भी निकाले गए, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में भीड़ उमड़ी।1
- बाराबंकी में एक विवाहिता ने अपने ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट और छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का आरोप है कि दहेज की मांग पूरी न होने पर उसे प्रताड़ित किया गया, मारपीट की गई तथा बंधक बनाकर रखा गया। वहीं, पीड़िता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। काशीराम कॉलोनी, देवा रोड निवासी सलमा की पुत्री निदा बानो का निकाह लगभग दो माह पूर्व ग्राम खुलवई निवासी वसीम से मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार हुआ था। निदा बानो का आरोप है कि विवाह के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष द्वारा एसी, मोटरसाइकिल और प्लॉट की मांग को लेकर उस पर दबाव बनाया जाने लगा। मांग पूरी न होने पर उसे मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि उसके जेठ द्वारा उस पर गलत नजर रखी जाती थी तथा कई बार अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ का प्रयास किया गया। विरोध करने पर उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। पीड़िता के अनुसार, पूर्व में भी इसी बात को लेकर विवाद और मारपीट हुई थी, जिसे दोनों पक्षों के बीच समझौते के बाद शांत करा दिया गया था। लेकिन हाल ही में जब उसने दोबारा विरोध किया तो उसके साथ फिर मारपीट की गई। निदा का आरोप है कि 22 जून से 23 जून की सुबह तक उसे घर में बंधक बनाकर रखा गया और परिवार के कई लोगों ने मिलकर उसके साथ मारपीट की, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। इस घटना के बाद उसका चिकित्सीय परीक्षण भी कराया गया है। पीड़िता का आरोप है कि उसने जो तहरीर पुलिस को दी थी, उसी के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय दूसरी तहरीर लिखवाने का दबाव बनाया जा रहा है। उसका कहना है कि मेडिकल परीक्षण होने के बावजूद अब तक आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। पीड़िता और उसके परिजनों ने आरोप लगाया है कि नगर कोतवाली पुलिस ससुराल पक्ष को बचाने का प्रयास कर रही है। वहीं, पीड़िता की माता सलमा ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए तथा उनकी पुत्री को न्याय दिलाया जाए। इस संबंध में नगर कोतवाली पुलिस का कहना है कि प्राप्त तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।4
- लखनऊ से एक खबर सामने आई है, जहाँ एक फायर सर्विस अधिकारी का बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस अधिकारी ने मुख्यमंत्री के नाम एक पत्र भी लिखा है। बताया जा रहा है कि इस वायरल बयान में पूरी बात बताई गई है।1
- बाराबंकी जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, विशेषकर सीटी स्कैन रिपोर्ट की अनुपलब्धता को लेकर। थाना सुबेहा क्षेत्र के निवासी इस्तखार अहमद को मारपीट के एक मामले में मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेजा गया था, लेकिन आवश्यक सीटी स्कैन रिपोर्ट न मिलने के कारण उन्हें लगभग 15 दिनों से बाराबंकी और लखनऊ के अस्पतालों के बीच लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पीड़ित का आरोप है कि वह इस दौरान दो बार ट्रॉमा सेंटर और एक बार लोहिया अस्पताल जा चुके हैं, फिर भी अब तक उनका सीटी स्कैन नहीं हो पाया और उन्हें हर जगह से वापस रेफर कर दिया गया। दरअसल, जिला अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन तो मौजूद है, लेकिन रिपोर्ट तैयार करने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण मरीजों को अक्सर लखनऊ के लोहिया अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर भेजा जा रहा है। समय पर मेडिकल रिपोर्ट न मिलने से जहां एक ओर मरीजों को अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक प्रक्रिया भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस गंभीर समस्या पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन गौतम ने बताया है कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है और इस पर संबंधित अधिकारियों से बात करके जल्द ही समाधान निकाला जाएगा। अब यह देखना होगा कि मरीजों को हो रही इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान प्रशासन द्वारा कब तक सुनिश्चित किया जा पाता है।1
- चंदौली से मिली खबर के अनुसार, लखनऊ कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड को लेकर समाजवादी पार्टी ने भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज सिंह काका ने इस हृदय विदारक घटना के लिए सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने प्रदेश की स्थिति को 'अंधेर नगरी चौपट राजा' जैसा बताते हुए अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। मनोज सिंह काका ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री आवास से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर इतनी बड़ी दुर्घटना घटी, जो सरकार की घोर लापरवाही को दर्शाती है। उन्होंने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पैसे लेकर आवासीय क्षेत्रों को व्यावसायिक बनाया जा रहा है। इसके साथ ही, उन्होंने हजरतगंज फायर स्टेशन के पास होने के बावजूद राहत कार्यों में हुई देरी पर भी सवाल उठाए। सपा प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि इस पूरे अग्निकांड की संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार की ही है।1
- संभल पुलिस ने एक सराहनीय कार्य करते हुए 6 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी संदीप को मात्र दो मिनट में ढूंढ निकाला। इस सफलता में खोजी कुत्ते 'मैरी' की अहम भूमिका रही, जिसने घटना स्थल पर मिले एक गमछे को सूंघकर करीब 200 मीटर दूर आरोपी संदीप के घर तक का रास्ता तय किया। पुलिस अधीक्षक कृष्ण बिश्नोई ने 'मैरी' को उसके इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ₹10,000 का इनाम देकर सम्मानित किया। इस उपलब्धि के लिए पुलिस टीम और खोजी कुत्ते 'मैरी' की चारों ओर जमकर तारीफ़ हो रही है।1
- लखनऊ स्थित आकाश कोचिंग सेंटर से 'जमीनी खबर' के एक पत्रकार द्वारा की गई ग्राउंड जीरो रिपोर्टिंग के दौरान कथित तौर पर कोचिंग माफिया ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। इस घटना के बाद, प्रशासन ने आकाश कोचिंग सेंटर को सीज कर दिया है। यह पूरा मामला अब जांच का विषय बन गया है कि सेंटर को सीज करने के पीछे क्या कारण रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह दर्शाया है कि सच्चे पत्रकारों को किस तरह दबाया जाता है। यह उन पत्रकारों को सलाम है जो ईमानदारी से अपना काम करते हैं, क्योंकि गोदी मीडिया कभी ऐसे संस्थानों तक नहीं पहुंचता जो सच्चाई उजागर करते हैं।1
- बाराबंकी के थाना जहांगीराबाद क्षेत्र के ग्राम बनवा में एक कथित झोलाछाप डॉक्टर पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगा है। परिजनों का दावा है कि गलत दवाइयां और इंजेक्शन लगाए जाने के कारण मरीज की हालत बिगड़ गई और उसकी क्लीनिक पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान कबीरपुर निवासी लगभग 60 वर्षीय रामानंद रावत के रूप में हुई है। घटना के बाद, क्षेत्र में "बगिया वाले डॉक्टर" के नाम से जाना जाने वाला कथित डॉक्टर मौके से फरार हो गया। बुधवार को करीब 12 बजे मौत की खबर फैलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। उन्होंने क्लीनिक पर पहुँचकर जमकर हंगामा किया और आरोपी डॉक्टर के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त योग्यता और विशेषज्ञता वाले ऐसे कथित डॉक्टर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं, जिससे मरीजों के लिए बेतरतीब इलाज और मनमाने ढंग से लगाए गए इंजेक्शन जानलेवा साबित हो सकते हैं। सूचना मिलने पर पुलिस बल मौके पर पहुँचा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तैनात किया गया। पुलिस शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी कर रही थी, लेकिन आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए पहले आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग की। फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। पुलिस की आगे की कार्रवाई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल पाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि बिना मान्यता और पर्याप्त योग्यता के इलाज कर रहे ऐसे कथित डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएँ दोबारा न हों।1