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चौथे दिन भी नहीं टूटा गतिरोध, वार्ता जारी लेकिन समाधान का इंतजार रामपुर बाघेलान। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर रामपुर बाघेलान तहसील में पटवारियों की अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल गुरुवार को चौथे दिन भी जारी रही। बड़ी संख्या में पटवारी धरना स्थल पर जुटे और अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई। इस दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष रावेन्द्र सिंह 'छोटू', तहसीलदार रमेश कोल, नायब तहसीलदार वीरेन्द्र सिंह एवं मंगलेश्वर सिंह ने धरना स्थल पहुंचकर पटवारियों से चर्चा की और नैतिक समर्थन व्यक्त किया। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि शासन से वार्ता जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। संघ ने स्पष्ट किया कि मांगों पर सकारात्मक फैसला होने तक प्रदेशभर में कलमबंद हड़ताल जारी रहेगी।
Piyush kumar
चौथे दिन भी नहीं टूटा गतिरोध, वार्ता जारी लेकिन समाधान का इंतजार रामपुर बाघेलान। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर रामपुर बाघेलान तहसील में पटवारियों की अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल गुरुवार को चौथे दिन भी जारी रही। बड़ी संख्या में पटवारी धरना स्थल पर जुटे और अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई। इस दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष रावेन्द्र सिंह 'छोटू', तहसीलदार रमेश कोल, नायब तहसीलदार वीरेन्द्र सिंह एवं मंगलेश्वर सिंह ने धरना स्थल पहुंचकर पटवारियों से चर्चा की और नैतिक समर्थन व्यक्त किया। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि शासन से वार्ता जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। संघ ने स्पष्ट किया कि मांगों पर सकारात्मक फैसला होने तक प्रदेशभर में कलमबंद हड़ताल जारी रहेगी।
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- चौथे दिन भी नहीं टूटा गतिरोध, वार्ता जारी लेकिन समाधान का इंतजार रामपुर बाघेलान। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर रामपुर बाघेलान तहसील में पटवारियों की अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल गुरुवार को चौथे दिन भी जारी रही। बड़ी संख्या में पटवारी धरना स्थल पर जुटे और अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई। इस दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष रावेन्द्र सिंह 'छोटू', तहसीलदार रमेश कोल, नायब तहसीलदार वीरेन्द्र सिंह एवं मंगलेश्वर सिंह ने धरना स्थल पहुंचकर पटवारियों से चर्चा की और नैतिक समर्थन व्यक्त किया। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि शासन से वार्ता जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। संघ ने स्पष्ट किया कि मांगों पर सकारात्मक फैसला होने तक प्रदेशभर में कलमबंद हड़ताल जारी रहेगी।1
- राजस्व अधिकारियों की तानाशाही 12 साल पुरानी सड़क पर गड़वा दिए लोहे के एंगल राजस्व अधिकारियों की तानाशाही 12 साल पुरानी सड़क पर गड़वा दिए लोहे के एंगल रीवा जिले के छिरेहटा निवासी किसान का आरोप— रास्ता रोक गाड़े एंगल, परिवार हुआ बंधक रीवा राजस्व विभाग की खुली मनमानी 15 जून के बाद बैन थी सीमांकन की प्रक्रिया, फिर किसकी शह पर आधी-अधूरी नाप के नाम पर रोक दिया किसान का रास्ता , रीवा जिले के गुढ़ विधनसभा के ग्राम पंचायत छीरेहटा थाना गोविन्द गढ़ में राजस्व विभाग की सीमांकन कार्यवाही के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पीड़ित किसान संजय मिश्रा पिता रामशरण मिश्रा ने राजस्व अमले पर नियम-कायदों को ताक पर रखकर एकतरफा कार्यवाही करने और 12 वर्षो से बने निजी रास्ते पर लोहे के एंगल गड़वाकर पूरे परिवार को घर में बंधक बना देने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्राम छीरेहटा निवासी संजय मिश्रा के अनुसार, पड़ोसी जितेन्द्र पांडे के आवेदन पर सीमांकन के लिए पटवारियों की टीम, दो आरआई बिगत सप्ताह भर पहले पहुचे थे। संजय मिश्रा ने बताया कि उनकी खसरा नंबर 512 (रकबा 1 एकड़ 38 डिसमिल) की जमीन पड़ोसी जितेंद्र पांडेय से सटी हुई है। क्षेत्र का भू-नक्शा त्रुटिपूर्ण है और मामला पहले से ही सिविल कोर्ट में विचाराधीन है। पीड़ित का आरोप है कि धारा 129 के तहत चारों तरफ की सीमाओं का नाप करने के बजाय, अमले ने एकतरफा कार्यवाही करते हुए उनके आने-जाने के मुख्य रास्ते पर लोहे के एंगल गड़वा दिए। उन्होंने सवाल उठाया कि मध्य प्रदेश शासन के निर्देशानुसार 15 जून के बाद बारिश के दौरान सीमांकन की कार्यवाही स्थगित रहती है, फिर भी इस तरह की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई। पीडिटी लगातार राजस्व विभाग के अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है मगर पीड़ित को कहीं से न्याय नहीं दिख रहा है पीड़ित लगातार रीवा जिला प्रशासन से मीडिया के माध्यम से मांग कर रहा है कि उसके घर के जाने वाले रास्ते में गड़े एंगल को हटवाया जाए उसका रास्ता चालू करवाया जाए क्योंकि बरसात का महीना शुरू है चारों तरफ खेतों में लबालब पानी भरा हुआ है आने जाने बाले रास्ते में बल पूर्वक एंगल गाड़ दिया गया है अक्सर देखा जाता है कि राजस्व विभाग के भ्रस्ट अधिकारियों के चलते राजस्व मामले विवादित रहते हैं या तो पेंडिंग छोड़ दिए जाते हैं ।1
- खबर मैहर/अमरपाटन /ग्राम धोबहट *2016 में सरपंच ने बनवाई सड़क आज तक धरातल में नहीं पहुंची एक ऐसा अनोखा मामला मैहर ज़िले के ग्राम धोबहट से सामने आया 181मे की गई सिकायत भी नाकाम खबर मैहर/अमरपाटन *2016 में सरपंच ने बनवाई सड़क आज तक धरातल में नहीं पहुंची एक ऐसा अनोखा मामला मैहर ज़िले के ग्राम धोबहट से सामने आया 181मे की गई सिकायत भी नाकाम ग्रामीणों ने सड़क निर्माण ना होंने से ग्रामीणों ने कीचड़ से सनी सड़क में धान की रोपाई कर ग्राम पंचायत और पंचायती राज्य में ग्रामीण विकास को लिया घेरें में* जनपद पंचायत अमरपाटन अन्तर्गत ग्राम पंचायत धोबहट का है मामला जहां पंचायत के भ्रष्टाचार की पोल तब खुली जब पंचायत दर्पण में जिस रोड के निर्माण का उल्लेख 2016 में किया गया वह रोड आज तक नहीं बनी ग्राम वासी कीचड़ में सन कर रोज मर्रा का जीवन गुजारने को मजबूर हैं सरपंच से ग्रामीण लगातार रोड निर्माण के लिए आवेदन देकर मांग कर रहे लेकिन पंचायत सरपंच सचिव का कोई जबाब नहीं ग्रामीणों ने सड़क समस्या को लेकर 181 में भी सिकायत की लेकिन समस्या जब की तस कोई समाधान नहीं आज नाराज ग्रामीणों ने कीचड से सनी सड़क में धान की रोपाई कर बिरोध प्रदर्शन कर प्रसासन का फिर से एक बार ध्यान आकर्षित किया साथ ही रोड निर्माण की मांग रखीं है4
- *गुढ़ की राजनीति निर्णायक मोड़ पर: 13 पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे की अटकलों से मचा सियासी हड़कंप* *नगर परिषद से लेकर विधानसभा तक हलचल, नाराजगी के बीच बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की चर्चाएं तेज* ब्यूरो चीफ रीवा अभिषेक पांडे गुढ़ (रीवा)। नगर परिषद गुढ़ की राजनीति इन दिनों एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां हर दिन बदलते घटनाक्रम नई चर्चाओं को जन्म दे रहे हैं। क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में इस समय सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि यदि मौजूदा हालात में कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकला, तो नगर परिषद के सभी 13 पार्षद सामूहिक रूप से अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन लगातार हो रही बैठकों, पार्षदों की बढ़ती नाराजगी और उनके तेवरों ने इस संभावना को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक नगर परिषद के भीतर लंबे समय से विभिन्न प्रशासनिक, विकास कार्यों और परिषद संचालन से जुड़े मुद्दों को लेकर असंतोष का माहौल बना हुआ है। पार्षदों का आरोप है कि जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और स्थानीय समस्याओं को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। यही वजह है कि अब सभी पार्षद एकजुट होकर सामूहिक इस्तीफे जैसे बड़े कदम पर विचार कर रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो पार्षदों के बीच इस विषय को लेकर कई दौर की चर्चाएं हो चुकी हैं। अधिकांश पार्षदों का मानना है कि यदि उनकी मांगों और समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो सामूहिक इस्तीफा ही लोकतांत्रिक विरोध का सबसे प्रभावी माध्यम होगा। हालांकि अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। यदि सभी 13 पार्षद वास्तव में सामूहिक इस्तीफा देते हैं, तो यह केवल नगर परिषद तक सीमित मामला नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर पूरे गुढ़ क्षेत्र की राजनीति और विधानसभा स्तर के राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। स्थानीय निकाय की कार्यप्रणाली प्रभावित होने के साथ-साथ नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी नगर परिषद के सभी निर्वाचित पार्षदों का एक साथ इस्तीफा देना बेहद असाधारण स्थिति होगी। इससे शासन-प्रशासन पर भी हालात की समीक्षा कर समाधान निकालने का दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि पूरे क्षेत्र में इस संभावित घटनाक्रम को लेकर उत्सुकता बनी हुई है और राजनीतिक दल भी परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं स्थानीय नागरिकों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा है। लोगों का कहना है कि यदि विवाद का समय रहते समाधान नहीं हुआ तो इसका असर नगर परिषद के विकास कार्यों पर पड़ सकता है। आमजन चाहते हैं कि संवाद और सकारात्मक पहल के माध्यम से विवाद का समाधान निकले, ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों। फिलहाल नगर परिषद गुढ़ में सियासी माहौल पूरी तरह गर्म है। पार्षदों की अगली रणनीति क्या होगी और शासन-प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। आने वाले कुछ दिन गुढ़ की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं और इन्हीं दिनों यह स्पष्ट होगा कि मामला बातचीत से सुलझेगा या फिर नगर परिषद में कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिलेगा। *नोट: 13 पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे की बात फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं, सूत्रों और संभावनाओं पर आधारित है। संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक पुष्टि होने तक इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।*1
- सतना पदोन्नति की मांग को लेकर पटवारियों की हड़ताल चौथे दिन सतना पदोन्नति की मांग को लेकर पटवारियों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी,बड़ी संख्या में पटवारी जुटे, पटवारियों ने सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप,कहा पटवारी जिस पद पर नियुक्त होता है सेवा निवृत्त भी उसी पद पर हो रहा , वेतन मान का भी नहीं मिल रहा फायदा,अन्य राज्यों की अपेक्षा मध्यप्रदेश में कम मिल रहा वेतन,1
- "जीतू पटवारी का बड़ा बयान: 'सिद्धार्थ कुशवाहा की धमक से आपा खो बैठे नरेंद्र सिंह तोमर',, सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा की पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने मंच से तारीफ की तथा सिद्धार्थ कुशवाहा की ताकत की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ की धमक के आगे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी अपना आपा खो बैठे और अनर्गल बोलने लगे। पटवारी के मुताबिक, उनके विरोध जताने और माफी की मांग के बाद तोमर को झुकना पड़ा।1